{
  "type": "article",
  "title": "तमिलनाडु में बच्चों की सुरक्षा और नशे पर प्रहार, 30 नई विशेष अदालतों को मिली मंजूरी",
  "summary": "तमिलनाडु सरकार ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों और मादक पदार्थों से जुड़े मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए 26 नई पोक्सो और 4 नई एनडीपीएस विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश जारी किया है।",
  "content": "तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने तथा अदालतों में वर्षों से अटके मामलों का तेजी से निपटारा करने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक और न्यायिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने बच्चों के साथ होने वाले गंभीर अपराधों में पीड़ितों को बिना किसी विलंब के इंसाफ दिलाने और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए विशेष अदालतों के बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार करने का निर्णय लिया है। लंबित मुकदमों की विस्तृत समीक्षा के बाद राज्य भर में कुल 30 नई विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।\n\nपोक्सो मामलों की स्थिति की समीक्षा और नया फैसला\nराज्य भर में बाल उत्पीड़न और यौन अपराधों से जुड़े लंबित मुकदमों की वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मुकदमों के मौजूदा आंकड़ों, उनकी अदालती स्थिति और मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए आवश्यक अतिरिक्त न्यायिक व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लाने और सभी जिलों में विशेष पोक्सो पीठ सुनिश्चित करने के लिए नए न्यायालयों की तत्काल जरूरत है।\n\nसमीक्षा उपरांत मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए कि हर हाल में मुकदमों की सुनवाई गति पकड़े ताकि कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत दोषियों को समय पर सख्त सजा दिलाई जा सके। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को अदालतों के अंतहीन चक्करों से बचाना और बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य कृत्यों पर प्रभावी रोक लगाना है।\n\n46.59 करोड़ रुपये की लागत से 26 नए पोक्सो न्यायालय\nतमिलनाडु में ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पोक्सो) एक्ट, 2012’ के तहत पंजीकृत मुकदमों की सुनवाई के लिए इस समय 22 विशेष न्यायालय पहले से कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 4 अन्य विशेष न्यायालयों के संचालन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और वे जल्द ही शुरू होने वाले हैं। इसके बावजूद फाइलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार ने 46.59 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन के साथ 26 नए विशेष न्यायालयों की स्थापना का आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया है।\n\nइस नए प्रशासनिक आदेश के अंतर्गत 12 नए विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे, जबकि 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों का गठन किया जाएगा। इस विस्तार के साथ ही तमिलनाडु के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 विशेष न्यायालय केवल पोक्सो अधिनियम, 2012 से जुड़े मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई करेंगे। यह मजबूत न्यायिक ढांचा पीड़ितों के मानसिक तनाव को कम करने और मामलों को तार्किक परिणति तक तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा।\n\nनशा-मुक्त अभियान के तहत 4 नई एनडीपीएस अदालतें\nबच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार ने मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भी न्यायिक तंत्र को मजबूत किया है। राज्य में चल रहे “नशा-मुक्त तमिलनाडु” अभियान को सशक्त करने और नशीली दवाओं की तस्करी व अवैध उपभोग पर सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट’ (एनडीपीएस एक्ट) के मामलों का शीघ्र निस्तारण प्राथमिकता में रखा गया है।\n\nराज्य में वर्तमान समय में 11 विशेष एनडीपीएस अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने 4 नई विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश जारी किया है। इनमें से कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और वेल्लोर जिलों में एक-एक नई विशेष अदालत खोली जाएगी, जबकि चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत स्थापित की जाएगी। इन अदालतों के शुरू होने से नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में साक्ष्य और गवाहियों की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस प्रशासनिक फैसले से बाल यौन अपराधों और मादक पदार्थों के मुकदमों में अदालती देरी खत्म होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।\n\n• तमिलनाडु में: राज्य के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 पोक्सो अदालतें सक्रिय होने से बाल उत्पीड़न के मुकदमों में गवाहियों और सुनवाई की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को सालों तक अदालतों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।\n• नशा मुक्ति और सुरक्षा: कांचीपुरम, तिरुवल्लुर, वेल्लोर और चेन्नई में 4 नई एनडीपीएस अदालतें बनने से मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ ट्रायल तेज होंगे। इससे युवाओं को नशे के जाल से बचाने और अपराध सिंडिकेट्स पर सख्त कानूनी नकेल कसने में मदद मिलेगी।\n• देश भर में न्याय प्रणाली: गंभीर अपराधों के लिए अलग विशेष अदालतों का यह विस्तार अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करता है। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ने से सामान्य अदालतों पर से मुकदमों का बोझ घटेगा।\n• आर्थिक संसाधन: राज्य सरकार द्वारा 46.59 करोड़ रुपये का सीधा आवंटन यह सुनिश्चित करता है कि नई अदालतों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और कानूनी सुविधाएं तेजी से तैयार की जाएंगी। इससे मामलों की पेंडेंसी में तत्काल कमी आएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह फैसला राज्य में पोक्सो और नशीली दवाओं से संबंधित मुकदमों की बढ़ती पेंडेंसी तथा पीड़ितों को न्याय में होने वाली देरी के समाधान के तौर पर लिया गया है।\n\n• लंबित मामलों की समीक्षा: राज्य भर में पोक्सो मामलों की स्थिति पर हुई आधिकारिक समीक्षा में यह सामने आया कि मौजूदा 22 अदालतें मुकदमों के भारी दबाव से जूझ रही हैं। इस वजह से सभी जिलों में समर्पित अदालतों का नेटवर्क तैयार करने का निर्णय हुआ।\n• जघन्य अपराधों पर सख्त रोक: बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में त्वरित सजा सुनिश्चित न होने से अपराधियों में कानून का डर कम होता है। सरकार ने ट्रायल तेज कर मिसाल कायम करने के उद्देश्य से अदालतों की संख्या बढ़ाई।\n• नशा-मुक्त राज्य की नीति: राज्य सरकार \"नशा-मुक्त तमिलनाडु\" अभियान चला रही है, लेकिन 11 विशेष अदालतों के कारण एनडीपीएस मामलों की फाइलें अटकी हुई थीं। तस्करी के नेटवर्क को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए 4 नए न्यायालयों की मंजूरी दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तमिलनाडु सरकार ने कितनी नई पोक्सो अदालतों को मंजूरी दी है?\nसरकार ने कुल 26 नई विशेष पोक्सो अदालतों (12 नई और 14 अतिरिक्त) की स्थापना का आदेश जारी किया है।\n\n2. नई पोक्सो अदालतों की स्थापना पर कितना खर्च आएगा?\nइन 26 नई विशेष पोक्सो अदालतों को स्थापित करने के लिए कुल 46.59 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है।\n\n3. राज्य में अब कुल कितनी पोक्सो अदालतें काम करेंगी?\nराज्य के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 विशेष पोक्सो अदालतें मामलों की सुनवाई करेंगी।\n\n4. तमिलनाडु में वर्तमान में कितनी पोक्सो अदालतें पहले से संचालित हैं?\nराज्य में 22 विशेष अदालतें पहले से कार्यरत हैं और 4 अन्य विशेष अदालतें जल्द शुरू होने वाली हैं।\n\n5. एनडीपीएस कानून के तहत कितनी नई अदालतें स्थापित की जा रही हैं?\nएनडीपीएस मामलों के निपटारे के लिए 4 नई विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं।\n\n6. नई एनडीपीएस अदालतें किन जिलों में स्थापित की जाएंगी?\nये अदालतें कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और वेल्लोर में एक-एक, तथा चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत के रूप में स्थापित होंगी।",
  "url": "https://trendkia.com/tamil-nadu/tamil-nadu-men-bachchon-ki-suraksha-aura-nashe-para-prahara-30-nai-vishesha-adalaton-ko-mili-mnjuri-54418",
  "category": "तमिलनाडु",
  "publishedAt": "2026-11-01",
  "tags": [
    "तमिलनाडु",
    "पोक्सो अदालतें",
    "एनडीपीएस",
    "सी जोसेफ विजय",
    "विशेष न्यायालय",
    "न्यायिक सुधार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "इस प्रशासनिक फैसले से बाल यौन अपराधों और मादक पदार्थों के मुकदमों में अदालती देरी खत्म होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।\n\n• तमिलनाडु में: राज्य के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 पोक्सो अदालतें सक्रिय होने से बाल उत्पीड़न के मुकदमों में गवाहियों और सुनवाई की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को सालों तक अदालतों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।\n• नशा मुक्ति और सुरक्षा: कांचीपुरम, तिरुवल्लुर, वेल्लोर और चेन्नई में 4 नई एनडीपीएस अदालतें बनने से मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ ट्रायल तेज होंगे। इससे युवाओं को नशे के जाल से बचाने और अपराध सिंडिकेट्स पर सख्त कानूनी नकेल कसने में मदद मिलेगी।\n• देश भर में न्याय प्रणाली: गंभीर अपराधों के लिए अलग विशेष अदालतों का यह विस्तार अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करता है। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ने से सामान्य अदालतों पर से मुकदमों का बोझ घटेगा।\n• आर्थिक संसाधन: राज्य सरकार द्वारा 46.59 करोड़ रुपये का सीधा आवंटन यह सुनिश्चित करता है कि नई अदालतों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और कानूनी सुविधाएं तेजी से तैयार की जाएंगी। इससे मामलों की पेंडेंसी में तत्काल कमी आएगी।",
  "whyItHappened": "यह फैसला राज्य में पोक्सो और नशीली दवाओं से संबंधित मुकदमों की बढ़ती पेंडेंसी तथा पीड़ितों को न्याय में होने वाली देरी के समाधान के तौर पर लिया गया है।\n\n• लंबित मामलों की समीक्षा: राज्य भर में पोक्सो मामलों की स्थिति पर हुई आधिकारिक समीक्षा में यह सामने आया कि मौजूदा 22 अदालतें मुकदमों के भारी दबाव से जूझ रही हैं। इस वजह से सभी जिलों में समर्पित अदालतों का नेटवर्क तैयार करने का निर्णय हुआ।\n• जघन्य अपराधों पर सख्त रोक: बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में त्वरित सजा सुनिश्चित न होने से अपराधियों में कानून का डर कम होता है। सरकार ने ट्रायल तेज कर मिसाल कायम करने के उद्देश्य से अदालतों की संख्या बढ़ाई।\n• नशा-मुक्त राज्य की नीति: राज्य सरकार \"नशा-मुक्त तमिलनाडु\" अभियान चला रही है, लेकिन 11 विशेष अदालतों के कारण एनडीपीएस मामलों की फाइलें अटकी हुई थीं। तस्करी के नेटवर्क को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए 4 नए न्यायालयों की मंजूरी दी गई।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "तमिलनाडु सरकार ने कितनी नई पोक्सो अदालतों को मंजूरी दी है?",
      "answer": "सरकार ने कुल 26 नई विशेष पोक्सो अदालतों (12 नई और 14 अतिरिक्त) की स्थापना का आदेश जारी किया है।"
    },
    {
      "question": "नई पोक्सो अदालतों की स्थापना पर कितना खर्च आएगा?",
      "answer": "इन 26 नई विशेष पोक्सो अदालतों को स्थापित करने के लिए कुल 46.59 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है।"
    },
    {
      "question": "राज्य में अब कुल कितनी पोक्सो अदालतें काम करेंगी?",
      "answer": "राज्य के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 विशेष पोक्सो अदालतें मामलों की सुनवाई करेंगी।"
    },
    {
      "question": "तमिलनाडु में वर्तमान में कितनी पोक्सो अदालतें पहले से संचालित हैं?",
      "answer": "राज्य में 22 विशेष अदालतें पहले से कार्यरत हैं और 4 अन्य विशेष अदालतें जल्द शुरू होने वाली हैं।"
    },
    {
      "question": "एनडीपीएस कानून के तहत कितनी नई अदालतें स्थापित की जा रही हैं?",
      "answer": "एनडीपीएस मामलों के निपटारे के लिए 4 नई विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं।"
    },
    {
      "question": "नई एनडीपीएस अदालतें किन जिलों में स्थापित की जाएंगी?",
      "answer": "ये अदालतें कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और वेल्लोर में एक-एक, तथा चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत के रूप में स्थापित होंगी।"
    }
  ]
}