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  "title": "तमिलनाडु में डीएमके विधायक पर 9 एकड़ जमीन हड़पने का केस, पीड़ित दिव्यांग ने मंत्री का काफिला रोक लगाई गुहार",
  "summary": "तमिलनाडु के तेनकासी में 9 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप में डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन और राजस्व अधिकारियों समेत छह लोगों पर आपराधिक केस दर्ज हुआ है। न्याय की मांग कर रहे दिव्यांग पीड़ित मुरुगैया ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोककर अपनी शिकायत दर्ज कराई।",
  "content": "तमिलनाडु के तेनकासी जिले में जमीन हड़पने का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कोयंबटूर जिले के अक्कामलाई क्षेत्र के रहने वाले दिव्यांग नागरिक मुरुगैया ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 9 एकड़ निजी जमीन को फर्जीवाड़े और मिलीभगत के जरिए डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन के नाम करवा दिया गया। इस मामले में पुलिस के आला अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद कडैयानल्लूर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित डीएमके विधायक समेत कुल छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित मुरुगैया ने पूरे मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी पुश्तैनी मिल्कियत वापस दिलाने की अपील की है।\n\nफर्जीवाड़े और मिलीभगत के आरोप में छह लोगों पर दर्ज हुआ केस\nपीड़ित मुरुगैया के मुताबिक, तेनकासी जिले के अंतर्गत शंकरनकोविल के पास स्थित थिरुमलापुरम में उनकी लगभग 9 एकड़ जमीन मौजूद है। उन्होंने तेनकासी जिला पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए विस्तार से बताया कि कडैयानल्लूर क्षेत्र के डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन ने नियमों को ताक पर रखकर वैध कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र के बिना ही इस बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। मुरुगैया की लिखित शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तेनकासी जिला क्राइम ब्रांच पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की। इस प्राथमिकी में कडैयानल्लूर के डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन, उनके भाई, एक डिप्टी तहसीलदार, संबंधित क्षेत्र के ग्राम प्रशासनिक अधिकारी और भूमि सर्वे विभाग के एक अधिकारी सहित कुल छह लोगों को नामजद किया गया है। क्राइम ब्रांच की टीम अब राजस्व रिकॉर्ड्स और पंजीकरण दस्तावेजों को खंगालते हुए पूरे मामले की जांच में जुटी है।\n\nकलेक्ट्रेट में दिव्यांग पीड़ित ने रोकी प्रभारी मंत्री की गाड़ी\nइस पूरे प्रकरण को लेकर मुरुगैया ने पहले जिला कलेक्टर कार्यालय में भी एक औपचारिक याचिका दाखिल की थी। बुधवार के दिन वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ उसी याचिका पर हुई प्रशासनिक प्रगति की जानकारी लेने और पूछताछ के सिलसिले में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इत्तेफाक से उसी समय तेनकासी जिले के प्रभारी मंत्री राजीव भी जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद थे, जिनके पास राज्य सरकार में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी भी है। कलेक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर जब मंत्री का काफिला पहुंचा, तो पीड़ित मुरुगैया और उनके परिजनों ने आगे आकर मंत्री की गाड़ी रोक ली। मुरुगैया ने मौके पर ही अपनी व्यथा सुनाते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के विधायक ने सत्ता और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उनकी 9 एकड़ जमीन हथिया ली है और बार-बार चक्कर काटने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।\n\nमंत्री ने मौके पर सहायक को तलब कर दिए जांच के आदेश\nपीड़ित दिव्यांग की फरियाद को गंभीरता से सुनते हुए प्रभारी मंत्री राजीव ने तुरंत अपनी गाड़ी से जिला कलेक्टर के निजी सहायक को तलब किया। मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारी को निर्देश दिया कि मुरुगैया की शिकायत की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तथा जांच के जो भी नतीजे सामने आएं, उनकी स्पष्ट जानकारी सीधे पीड़ित परिवार को दी जाए। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक तंत्र इस जमीन के दस्तावेज और कथित कब्जे की कड़ियों की तफ्तीश कर रहा है, और मामले में लगाए गए आरोपों की कानूनी पुष्टि होना बाकी है।\n\nमंदिर संपत्तियों पर अवैध कब्जे को लेकर भी सरकार दे चुकी है चेतावनी\nतमिलनाडु में विवादित जमीनों और सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे का मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है। इससे पहले सितंबर के महीने में तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री एस. रमेश ने भी सार्वजनिक तौर पर सख्त हिदायत जारी की थी। उन्होंने कहा था कि मंदिर की संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमाने या उनके अनधिकृत ट्रांसफर में लिप्त लोगों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी दल या रसूख से जुड़ा हो, सरकारी या धार्मिक भूमि के गबन में बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आम श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक समुदाय से अपील की थी कि यदि उनके पास मंदिर संपत्तियों पर अवैध कब्जे से जुड़े पुख्ता दस्तावेजी सबूत हैं, तो वे सीधे विभाग से संपर्क कर सकते हैं। उस दौरान उन्होंने डीएमके के पिछले शासनकाल में दर्ज कराई गई मंदिर संपत्तियों के विवादों का भी हवाला दिया था।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना दिखाती है कि जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी होने पर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया कैसे काम करती है।\n\n• तमिलनाडु में: जमीन मालिकों को अपने राजस्व रिकॉर्ड और पट्टा दस्तावेजों की नियमित जांच करते रहना चाहिए ताकि अनधिकृत नामांतरण से बचा जा सके। किसी भी अवैध कब्जे या फर्जी रजिस्ट्री की स्थिति में जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जिला क्राइम ब्रांच में तत्काल लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।\n• भारत में: पुश्तैनी संपत्ति के मामलों में वैध कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र बनवाकर रखना अनिवार्य है ताकि कोई अन्य पक्ष संपत्ति पर दावा न कर सके। यदि स्थानीय प्रशासन से समय पर सुनवाई न मिले तो उच्च अधिकारियों या कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में औपचारिक याचिका दाखिल करना प्रभावी उपाय है।\n• पीड़ितों के लिए कानूनी विकल्प: जमीन हड़पने के मामलों में राजस्व अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने पर भ्रष्टाचार निरोधक और आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है। पीड़ित पक्ष जिला कलेक्टर या संभागीय राजस्व अधिकारी के समक्ष रजिस्ट्री निरस्तीकरण की अर्जी दे सकते हैं।\n• प्रशासनिक जवाबदेही: जनप्रतिनिधियों या अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप होने पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से लिखित पावती लेना जरूरी है। इससे मामले में विभागीय जांच और पुलिस कार्रवाई दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ाई जा सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला एक दिव्यांग नागरिक की पुश्तैनी जमीन के कथित अनधिकृत पंजीकरण और प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई में देरी के कारण उत्पन्न हुआ।\n\n• फर्जीवाड़े का आरोप: पीड़ित मुरुगैया का आरोप है कि थिरुमलापुरम स्थित उनकी 9 एकड़ जमीन को वैध कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र के अभाव में फर्जी दस्तावेजों के जरिए विधायक के नाम पंजीकृत करा दिया गया। इस प्रक्रिया में राजस्व और सर्वे विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत बताई गई है।\n• प्रशासनिक देरी से उपजा आक्रोश: पूर्व में जिला कलेक्टर कार्यालय में याचिका देने के बाद भी जब त्वरित राहत नहीं मिली, तो पीड़ित को जिले के प्रभारी मंत्री के कलेक्ट्रेट आगमन पर उनकी गाड़ी रोककर गुहार लगाने पर मजबूर होना पड़ा।\n• अधिकारियों और विधायक पर नामजद प्राथमिकी: जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत पहुंचने के बाद अपराध शाखा ने विधायक, उनके भाई तथा तीन राजस्व अधिकारियों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की, जिससे मामला सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तमिलनाडु के तेनकासी में किस विधायक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है?\nकडैयानल्लूर विधानसभा क्षेत्र से डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।\n\n2. पीड़ित मुरुगैया ने विधायक पर क्या आरोप लगाए हैं?\nपीड़ित मुरुगैया ने आरोप लगाया है कि उनकी 9 एकड़ जमीन को बिना वैध कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र के धोखाधड़ी से विधायक के नाम दर्ज करा दिया गया।\n\n3. इस मामले में कुल कितने लोगों को नामजद किया गया है?\nइस मामले में विधायक, उनके भाई, एक डिप्टी तहसीलदार, एक ग्राम प्रशासनिक अधिकारी और एक सर्वे अधिकारी समेत कुल छह लोगों पर केस दर्ज हुआ है।\n\n4. कलेक्ट्रेट परिसर में मुरुगैया ने किस मंत्री की गाड़ी रोकी थी?\nमुरुगैया ने तेनकासी जिले के प्रभारी मंत्री राजीव की गाड़ी रोकी थी, जिनके पास पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग का प्रभार है।\n\n5. शिकायत सुनने के बाद मंत्री राजीव ने क्या निर्देश दिए?\nमंत्री राजीव ने जिला कलेक्टर के सहायक को मामले की उचित जांच करने और जांच का परिणाम पीड़ित मुरुगैया को बताने का निर्देश दिया।",
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  "category": "तमिलनाडु",
  "publishedAt": "2026-10-14",
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