30 साल पुराने सोलर पैनल भी बिजली बनाते हैं, बस क्षमता में आ जाती है गिरावट ज्यादातर सोलर पैनल 25 से 30 साल तक चलते हैं, लेकिन हर साल उनकी बिजली बनाने की क्षमता 0.3% से 0.8% तक घटती जाती है, जिससे लंबे समय बाद आउटपुट कम हो जाता है. भारत के ज्यादातर घरों और कारोबारों में अब सोलर पैनल एक भरोसेमंद निवेश माना जाने लगा है, क्योंकि बिजली की दरें लगातार ऊपर जा रही हैं और सरकारी योजनाएं भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही हैं. छतों से लेकर बड़े औद्योगिक परिसरों और सोलर पार्कों तक, हर जगह पैनल लगाने की रफ्तार बढ़ी है. लेकिन जो लोग सोलर सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं, उनके मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ये पैनल पूरी जिंदगी एक जैसी बिजली बनाते रहते हैं, इनकी उम्र आखिर कितनी होती है और वक्त के साथ इनकी क्षमता घटने की वजह क्या है. सोलर पैनल कितने साल तक चलते हैं मौजूदा दौर के ज्यादातर सोलर पैनल औसतन 25 से 30 साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसका सीधा मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि तीस साल पूरे होते ही पैनल पूरी तरह बंद हो जाएंगे. दरअसल अच्छी क्वालिटी के पैनल इस तय अवधि के बाद भी बिजली बनाना जारी रखते हैं, बस उनकी उत्पादन क्षमता शुरुआती दिनों जितनी नहीं रह जाती. कुछ मजबूत और बेहतर सामग्री से बने पैनल तो 35 से 40 साल तक भी काम करते देखे गए हैं, हालांकि इतने लंबे इस्तेमाल में उनकी दक्षता यानी एफिशिएंसी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है. हर साल कितनी कम होती है बिजली बनाने की क्षमता पैनल की उम्र बढ़ने के साथ उसमें डिग्रेडेशन नाम की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसके चलते हर गुजरते साल के साथ बिजली उत्पादन की क्षमता थोड़ी-थोड़ी घटती रहती है. मोनोक्रिस्टलाइन तकनीक वाले अच्छी गुणवत्ता के पैनलों में यह गिरावट आमतौर पर 0.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत सालाना के बीच रहती है, जबकि सामान्य क्वालिटी के पैनलों में यही गिरावट 0.5 प्रतिशत से 0.8 प्रतिशत प्रति वर्ष तक जा सकती है. एक उदाहरण से समझें असर मान लीजिए किसी घर में 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया गया है और उसमें हर साल 0.5 प्रतिशत की दर से गिरावट आ रही है. ऐसे में 25 साल पूरे होने तक उस सिस्टम की क्षमता घटकर करीब 87 से 88 प्रतिशत तक रह जाएगी. यानी सिस्टम शुरुआत के मुकाबले कम बिजली जरूर बनाएगा, लेकिन पूरी तरह बेकार नहीं होगा और उपयोगी बना रहेगा. पैनल की क्षमता आखिर कम क्यों होती है सोलर पैनल छत पर लगे रहकर लगातार तेज धूप, गर्मी, बारिश, धूल-मिट्टी और मौसम के उतार-चढ़ाव झेलते हैं, और यही रोजाना की मार धीरे-धीरे उनकी कार्यक्षमता पर असर डालती है. क्षमता घटने के पीछे कई वजहें एक साथ काम करती हैं. • लंबे समय तक तेज धूप और पराबैंगनी किरणों की मार • अत्यधिक गर्मी और तापमान में बार-बार होने वाला उतार-चढ़ाव • नमी और बारिश की वजह से पैनल की सामग्री का धीरे-धीरे कमजोर पड़ना • धूल, प्रदूषण और पक्षियों की गंदगी का सतह पर जमते रहना • समय के साथ बनने वाली माइक्रो-क्रैक यानी सूक्ष्म दरारें और सामान्य घिसावट • शुरुआत में ही निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल सिर्फ पैनल नहीं, इन्वर्टर और बैटरी की उम्र भी सीमित पूरे सोलर सिस्टम की परफॉर्मेंस सिर्फ पैनलों पर नहीं, बल्कि इन्वर्टर और बैटरी पर भी टिकी होती है, और इन दोनों की उम्र पैनल के मुकाबले काफी कम होती है. सोलर इन्वर्टर औसतन 10 से 15 साल तक चलता है. लिथियम-आयन बैटरी की उम्र भी लगभग 10 से 15 साल के आसपास होती है, जबकि लेड-एसिड बैटरी सिर्फ 5 से 7 साल तक ही ठीक से काम कर पाती है. इसका मतलब यह है कि पैनल भले ही 25-30 साल चल जाएं, लेकिन इस पूरी अवधि में इन्वर्टर और बैटरी को एक या उससे ज्यादा बार बदलना पड़ सकता है. सोलर पैनल की उम्र लंबी करने के आसान तरीके कुछ सामान्य सावधानियां बरतकर सोलर पैनल की उम्र और उनकी क्षमता को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है. • पैनलों की सतह की समय-समय पर सफाई करते रहें • पेड़ों या आसपास की ऊंची इमारतों की छाया पैनल पर न पड़ने दें • शुरुआत में ही अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित पैनल चुनें • वायरिंग और इन्वर्टर की समय-समय पर जांच कराते रहें • धूल और गंदगी जमा होते ही उसे तुरंत साफ कर दें इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से सोलर सिस्टम लंबे समय तक बेहतर बिजली उत्पादन जारी रख सकता है, जिससे निवेश की उपयोगिता भी बढ़ जाती है. इसका आप पर असर किसके लिए मायने रखता है: • जो लोग घर, दुकान या फैक्ट्री में सोलर सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं, उन्हें सिर्फ पैनल की कीमत नहीं बल्कि हर 10-15 साल में इन्वर्टर और हर 5-15 साल में बैटरी बदलने का खर्च भी अपने बजट में जोड़ना चाहिए, क्योंकि 25 साल बाद पैनल की क्षमता भी घटकर करीब 87-88% रह जाती है. सवाल-जवाब 1. सोलर पैनल की औसत लाइफ कितनी होती है? ज्यादातर मॉडर्न सोलर पैनल 25 से 30 साल तक चलते हैं, और अच्छी क्वालिटी वाले पैनल 35 से 40 साल तक भी काम कर सकते हैं. 2. क्या 30 साल बाद सोलर पैनल पूरी तरह बंद हो जाते हैं? नहीं, 30 साल बाद भी पैनल बिजली बनाते रहते हैं, बस उनकी क्षमता पहले से कम हो जाती है. 3. हर साल सोलर पैनल की क्षमता कितनी घटती है? अच्छी क्वालिटी के मोनोक्रिस्टलाइन पैनल में 0.3% से 0.5% और सामान्य क्वालिटी के पैनल में 0.5% से 0.8% सालाना गिरावट होती है. 4. क्षमता घटने की मुख्य वजहें क्या हैं? तेज धूप और यूवी किरणें, अत्यधिक गर्मी, तापमान में उतार-चढ़ाव, नमी-बारिश, धूल-प्रदूषण, माइक्रो-क्रैक और निम्न गुणवत्ता वाला कच्चा माल इसकी मुख्य वजहें हैं. 5. सोलर इन्वर्टर और बैटरी की उम्र कितनी होती है? सोलर इन्वर्टर 10 से 15 साल, लिथियम-आयन बैटरी 10 से 15 साल और लेड-एसिड बैटरी 5 से 7 साल तक चलती है. 6. सोलर पैनल की लाइफ कैसे बढ़ाई जा सकती है? समय-समय पर पैनलों की सफाई, छाया से बचाव, सर्टिफाइड पैनल का चुनाव और वायरिंग-इन्वर्टर की नियमित जांच से लाइफ बढ़ाई जा सकती है. 7. 5 किलोवाट के सिस्टम में 25 साल बाद क्षमता कितनी बचती है? अगर सालाना गिरावट 0.5% है, तो 25 साल बाद क्षमता घटकर करीब 87-88% रह जाती है. https://trendkia.com/technology/30-sala-purane-solara-painala-bhi-bijali-banate-hain-basa-kshamata-men-a-jati-hai-giravata-13209 TrendKia — Har trend, sabse pehle.