# अजनबियों के लिए मोबाइल चलाने की मदद पड़ सकती है भारी, आवाज और चेहरे की क्लोनिंग से सतर्क रहने की चेतावनी

> सार्वजनिक स्थानों पर फोन चलाने में मदद मांगने के बहाने आवाज और चेहरे का बायोमेट्रिक डाटा चुराने के नए साइबर हथकंडे को लेकर सोशल मीडिया पर आगाह किया गया है।

**Type:** article · **Category:** तकनीक · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/technology/ajanabiyon-ke-lie-mobaila-chalane-ki-madada-para-sakati-hai-bhari-avaja-aura-chehare-ki-kloninga-se-satarka-rahane-ki-chetavani-40682 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर फ्रॉड, डीपफेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सुरक्षा, आधार बायोमेट्रिक, साइबर हेल्पलाइन 1930

सार्वजनिक ठिकानों पर किसी लाचार दिखने वाले व्यक्ति की सहायता करना सामान्य शिष्टाचार माना जाता है, मगर डिजिटल युग में यही भलमनसाहत बड़े आर्थिक संकट की वजह बन सकती है। इंटरनेट पर तेजी से फैल रही एक चेतावनी में लोगों को ऐसे ठगों से सतर्क रहने को कहा गया है जो तकनीक की अनभिज्ञता का बहाना बनाकर आम नागरिकों से उनका फोन ऑपरेट करने का आग्रह करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में मददगार बनने वाले इंसान की आवाज और चेहरे की बनावट को चुपके से रिकॉर्ड कर लेने की आशंका जताई जा रही है, जिसे आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI टूल्स की मदद से क्लोन किया जा सकता है।

## भीड़भाड़ वाले इलाकों में जालसाजी का नया तरीका
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार जालसाज अक्सर मेट्रो स्टेशन, शॉपिंग मॉल, व्यस्त बस स्टैंड और स्थानीय बाजारों जैसे स्थानों को अपना ठिकाना बनाते हैं। वहां वे राहगीरों के पास जाकर यह दावा करते हैं कि उन्हें स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना नहीं आता या वे किसी सरकारी योजना, पेंशन पोर्टल अथवा वित्तीय सब्सिडी से जुड़ी जरूरी जानकारी जांचना चाहते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उनकी बात पर भरोसा करके उनका हैंडसेट हाथ में लेता है, अपराधी अपना खेल शुरू कर देते हैं।

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यदि फोन का बैक या फ्रंट कैमरा पहले से सक्रिय रखा गया हो अथवा कोई गुप्त वीडियो कॉल बैकग्राउंड में चल रही हो, तो सहायता कर रहे व्यक्ति का चेहरा साफ तौर पर रिकॉर्ड हो जाता है। इसके अतिरिक्त, फोन समझाते वक्त होने वाले संवाद के जरिए उस व्यक्ति की आवाज का नमूना भी सुरक्षित कर लिया जाता है। साइबर जगत में इस एकत्रित डिजिटल सामग्री को उन्नत टूल्स में डालकर डीपफेक वीडियो और हूबहू नकल वाली आवाज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस संदर्भ में विवेक बजाज ने X पर लिखा कि इस तरह का घोटाला बेहद खतरनाक हो सकता है और लोग 30 मिनट के भीतर अपनी सारी वित्तीय क्षमताएं खो सकते हैं।

## आवाज और चेहरे की नकल से उत्पन्न होने वाले खतरे
मौजूदा दौर में डीपफेक तकनीक इतनी सक्षम हो चुकी है कि किसी भी व्यक्ति की छोटी सी ऑडियो क्लिप से उसकी आवाज का सटीक मॉडल तैयार किया जा सकता है। साइबर जालसाज इसी तकनीक का नाजायज फायदा उठाकर पीड़ित के परिजनों, दोस्तों या सहकर्मियों को फोन मिलाकर आपातकालीन स्थिति बताकर तत्काल धन ट्रांसफर करने का झांसा देते हैं। चूंकि फोन पर आवाज बिल्कुल असली लगती है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे पैसे भेज बैठते हैं।

चेहरे की क्लोनिंग के मामले में भी तकनीक तेजी से परिष्कृत हो रही है। उच्च गुणवत्ता वाले सिंथेटिक वीडियो बनाकर किसी व्यक्ति की आभासी उपस्थिति गढ़ी जा सकती है। हालांकि वित्तीय संस्थानों और डिजिटल पेमेंट गेटवे पर सुरक्षा की कई परतें मौजूद होती हैं, जिससे महज एक तस्वीर या आवाज के सहारे किसी बैंक खाते में सीधा सेंध लगाना हर जगह संभव नहीं होता, फिर भी पहचान सत्यापन तंत्र को चकमा देने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं।

## हैंडसेट छूने से फिंगरप्रिंट चोरी होने का भ्रम
इस पूरे मामले को लेकर कई तरह की अफवाहें भी सामने आई हैं, जिनमें यह दावा किया गया कि किसी अजनबी का फोन हाथ में पकड़ते ही स्क्रीन या बॉडी से फिंगरप्रिंट की चोरी हो जाती है। इस दावे का कोई पुख्ता या वैज्ञानिक आधार प्रमाणित नहीं हुआ है। सिर्फ किसी बाहरी उपकरण को छूने भर से बायोमेट्रिक डाटा कॉपी हो जाने का कोई तकनीकी साक्ष्य मौजूद नहीं है, इसलिए महज फोन छूने को लेकर अनावश्यक भय पालने की आवश्यकता नहीं है।

असली जोखिम तब पैदा होता है जब कोई अज्ञात व्यक्ति आपसे अपने फोन में कोई गोपनीय क्रेडेंशियल भरने, निजी जानकारी दर्ज करने या कैमरे की तरफ लगातार देखने का आग्रह करे। यदि कोई आपसे OTP, बैंकिंग पासवर्ड, UPI PIN अथवा कोई विशेष वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने को कहे, तो वहां तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे किसी अनजान डिवाइस के सामने अपनी आवाज रिकॉर्ड कराना या फेस स्कैन की अनुमति देना सीधे तौर पर खतरे को आमंत्रण देना है।

## डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय
साइबर जोखिमों से खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी आदतों में कुछ बुनियादी बदलाव लाना अनिवार्य है। यदि कोई अजनबी आपसे तकनीकी सहायता मांगे, तो खुद उसका फोन चलाने के बजाय उसे पास में तैनात सुरक्षा गार्ड, मेट्रो कर्मचारी, पुलिसकर्मी या अधिकृत हेल्पडेस्क के पास जाने का परामर्श दें।

यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में आपको किसी अन्य व्यक्ति के फोन पर कुछ देखना भी पड़े, तो भूलकर भी अपना कोई पासवर्ड, पिन या पहचान दस्तावेज वहां टाइप न करें। आधार कार्ड धारक UIDAI पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी बायोमेट्रिक सूचना को लॉक करने के विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। इसके तहत फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतली यानी आइरिस और चेहरे पर आधारित प्रमाणीकरण को अस्थाई तौर पर सुरक्षित किया जा सकता है।

नागरिकों को नियमित अंतराल पर अपनी आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री की भी समीक्षा करनी चाहिए ताकि किसी अनाधिकृत उपयोग का तुरंत पता चल सके। घर के बुजुर्गों और कम उम्र के बच्चों को भी इन चालाकियों से अवगत कराना बेहद जरूरी है। यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के चलते आर्थिक धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना देर किए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

## इसका आप पर असर
सार्वजनिक स्थानों पर किसी अजनबी के फोन पर मदद करते समय बरती गई असावधानी आपकी डिजिटल पहचान और बैंक खाते के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।

- **भारत में:** देश भर के मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अपनी आवाज और चेहरे के गलत इस्तेमाल से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर अजनबियों के फोन चलाने से परहेज करना चाहिए। अपने परिजनों और मित्रों को भी इस नए साइबर फ्रॉड के तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
- **वित्तीय सुरक्षा पर:** क्लोन की गई आवाज का इस्तेमाल करके आपके सगे-संबंधियों से आपात स्थिति के नाम पर फर्जी तरीके से धन मांगा जा सकता है। किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय अनुरोध पर पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से किसी अन्य माध्यम से सीधे संपर्क करके पुष्टि करें।
- **बायोमेट्रिक सुरक्षा पर:** आधार कार्ड धारक अपनी बायोमेट्रिक जानकारी को आधिकारिक पोर्टल पर जाकर तुरंत लॉक कर सकते हैं। यह कदम आपकी अनुमति के बिना फिंगरप्रिंट, चेहरे या आइरिस प्रमाणीकरण के गलत इस्तेमाल को पूरी तरह रोक देता है।
- **धोखाधड़ी की स्थिति में:** यदि किसी भी प्रकार का ऑनलाइन फ्रॉड घटित हो जाता है तो तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। शुरुआती समय में की गई त्वरित शिकायत से ठगी गई धनराशि को संबंधित खातों में फ्रीज कराने में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह चेतावनी आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की बढ़ती उपलब्धता और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के स्वाभाविक मददगार व्यवहार का दुरुपयोग करने वाले साइबर अपराधियों के कारण सामने आई है। तकनीक की जटिलताओं को न समझने वाले आम नागरिक आसानी से ऐसे जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं।

- **सीधा कारण:** ठगों द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर किसी तकनीकी उलझन या सरकारी सेवा का हवाला देकर राहगीरों से उनका फोन संचालित करने का आग्रह किया जाता है। इसी दौरान स्क्रीन के पीछे सक्रिय कैमरा या वॉयस रिकॉर्डर के माध्यम से मददगार का चेहरा और आवाज का नमूना चुपके से चुरा लिया जाता है।
- **सक्षम बनाने वाली परिस्थितियां:** जनरेटिव AI और डीपफेक सॉफ्टवेयर अब बहुत कम समय के ऑडियो और साधारण वीडियो फुटेज से भी सटीक डिजिटल क्लोन तैयार करने में सक्षम हो चुके हैं। इस तकनीकी सुलभता ने अपराधियों के लिए नकली पहचान गढ़ना बेहद आसान और सस्ता बना दिया है।
- **आगामी कदम:** इस खतरे को देखते हुए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ नागरिकों को अपने बायोमेट्रिक्स लॉक रखने और किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय पोर्टल पर त्वरित रिपोर्ट दर्ज करने की सलाह दे रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या किसी अजनबी का फोन छूने से फिंगरप्रिंट चोरी हो सकता है?
नहीं, किसी अजनबी का फोन हाथ में लेने मात्र से फिंगरप्रिंट चोरी होने का कोई विश्वसनीय या तकनीकी प्रमाण नहीं मिला है।

### 2. फोन चलाने में मदद मांगकर ठग क्या हासिल करने की कोशिश करते हैं?
ठग गुप्त रूप से फोन का कैमरा या माइक्रोफोन चालू रखकर आपकी आवाज और चेहरे की रिकॉर्डिंग एकत्र करने का प्रयास करते हैं।

### 3. आवाज और चेहरे की क्लोनिंग से किस तरह का नुकसान हो सकता है?
जालसाज आपकी क्लोन की गई आवाज का इस्तेमाल कर आपके परिचितों से आपातकाल के नाम पर पैसे ऐंठ सकते हैं और पहचान सत्यापन में सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं।

### 4. सार्वजनिक स्थान पर कोई फोन चलाने में मदद मांगे तो क्या करना चाहिए?
खुद फोन हाथ में लेने के बजाय उस व्यक्ति को नजदीकी सुरक्षा कर्मी, मेट्रो स्टाफ या पुलिसकर्मी से सहायता लेने का सुझाव देना चाहिए।

### 5. आधार यूजर्स अपनी बायोमेट्रिक सुरक्षा कैसे बढ़ा सकते हैं?
आधार कार्ड धारक आधिकारिक पोर्टल या ऐप के जरिए अपनी बायोमेट्रिक जानकारी को लॉक कर सकते हैं ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके।

### 6. साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल कहां शिकायत दर्ज करानी चाहिए?
वित्तीय या डिजिटल ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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