एंड्रॉयड स्मार्टफोन झपटमारों के मंसूबे होंगे नाकाम, सुरक्षा मजबूत करने के लिए तुरंत बदलें तीन जरूरी विकल्प मोबाइल चोरी होने पर अपराधी सबसे पहले डिवाइस को बंद करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कुछ बुनियादी सुरक्षा विकल्प सक्रिय करके उनकी इस चाल को विफल किया जा सकता है। सार्वजनिक स्थानों, भीड़भाड़ वाले बाजारों अथवा यात्रा के दौरान मोबाइल चोरी होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। किसी भी व्यक्ति की जेब, पर्स अथवा मेज पर रखे फोन पर हाथ साफ करते ही चोर की सबसे पहली कोशिश डिवाइस को तत्काल स्विच ऑफ करने की होती है। अपराधी भलीभांति जानते हैं कि जब तक फोन ऑन रहेगा और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ा रहेगा, तब तक उसकी वास्तविक लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। इसी ट्रैकिंग से बचने के लिए वे फोन को तुरंत बंद कर देते हैं, जिससे पीड़ित के लिए अपने कीमती गैजेट को खोजना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यदि किसी डिवाइस में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी प्रबंध पहले से सक्रिय न हों, तो अपराधी बेखौफ होकर फोन के साथ छेड़छाड़ करते हैं। इसके विपरीत, सही समय पर की गई तकनीकी तैयारी चोरों के रास्ते में भारी रुकावटें खड़ी कर देती है। कुछ खास सुरक्षा विकल्पों को सक्रिय कर देने पर न केवल फोन को बंद करना लगभग असंभव हो जाता है, बल्कि डिवाइस पूरी तरह बेकार साबित होने के डर से कई बार अपराधी उसे फेंकने या छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। इन आवश्यक सुरक्षा विकल्पों को कॉन्फ़िगर करने में महज पांच से दस मिनट का समय लगता है, लेकिन यह आपके फोन की हिफाजत को कई गुना बढ़ा देता है। फाइंड माय डिवाइस को हमेशा सक्रिय रखें एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में गूगल अकाउंट के माध्यम से प्रदान की जाने वाली फाइंड माय डिवाइस सुविधा सुरक्षा की पहली और सबसे मजबूत ढाल है। इसे चालू करने के लिए फोन की मुख्य सेटिंग्स में जाकर गूगल अथवा सिक्योरिटी विकल्प में प्रवेश करना होता है, जहां फाइंड माय डिवाइस का टॉगल बटन मिलता है। एक बार यह सुविधा ऑन हो जाने के बाद, फोन खो जाने अथवा चोरी हो जाने की स्थिति में यूजर किसी भी दूसरे कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य स्मार्टफोन से अपने डिवाइस को इंटरनेट के जरिए ट्रैक कर सकते हैं। इस टूल की सहायता से यूजर दूर बैठे ही अपने फोन की लाइव जीपीएस लोकेशन मानचित्र पर देख सकते हैं। इसके अलावा रिमोटली फोन की स्क्रीन को एक नए पासवर्ड से तुरंत लॉक किया जा सकता है, जिससे चोर डिवाइस का कोई भी निजी डेटा नहीं देख पाता। यदि फोन आसपास ही कहीं गिरा हो तो तेज आवाज में सायरन अथवा रिंग बजाई जा सकती है, भले ही फोन साइलेंट मोड पर क्यों न हो। इतना ही नहीं, यदि फोन मिलने की संभावना बिल्कुल खत्म लगे तो इसी टूल से फोन का सारा डेटा हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है। जब चोर यह देखता है कि फोन लगातार ट्रैक हो रहा है और रिमोटली लॉक हो चुका है, तो वह पकड़े जाने के डर से फोन को वहीं छोड़ देने में ही अपनी भलाई समझता है। मजबूत स्क्रीन लॉक और पावर ऑफ प्रोटेक्शन अक्सर लोग सुविधा के चक्कर में स्क्रीन लॉक के लिए बेहद सामान्य स्वाइप या आसान पैटर्न का इस्तेमाल करते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी भूल है। स्क्रीन लॉक हमेशा कम से कम 6 अंकों के जटिल पिन या एक मजबूत अक्षरांकीय पासवर्ड के साथ सेट होना चाहिए। आधुनिक एंड्रॉयड स्मार्टफोन में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था होती है कि यदि फोन की स्क्रीन लॉक है, तो पावर बटन दबाकर फोन को स्विच ऑफ अथवा रीस्टार्ट करने पर भी डिवाइस पिन या पासवर्ड की मांग करता है। जब तक स्क्रीन लॉक का सही पिन दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक फोन बंद नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि चोरी करने के बाद भी अपराधी फोन को तुरंत स्विच ऑफ नहीं कर पाएगा। फोन लगातार चालू रहेगा, सिम कार्ड के जरिए मोबाइल डेटा अथवा वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्टेड रहेगा और बैकग्राउंड में फाइंड माय डिवाइस को अपनी लोकेशन भेजता रहेगा। यूजर को चाहिए कि वे त्वरित अनलॉक के लिए फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक जैसे बायोमेट्रिक विकल्पों का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन उसके साथ एक मजबूत 6 अंकों का बैकअप पिन अनिवार्य रूप से जोड़कर रखें। सिम कार्ड पर अनिवार्य पिन लॉक लगाएं अक्सर देखा गया है कि जब चोर फोन को सीधे तौर पर बंद नहीं कर पाते, तो वे सबसे पहले सिम ट्रे को बाहर निकालकर सिम कार्ड फेंक देते हैं या किसी दूसरे फोन में डालने की कोशिश करते हैं। इस खतरे से निपटने के लिए सिम कार्ड पर पिन लॉक लगाना सबसे कारगर उपाय है। इसके लिए फोन की सेटिंग्स में सिक्योरिटी अथवा सिम कार्ड लॉक सेक्शन में जाकर सिम लॉक की सुविधा को सक्रिय किया जा सकता है। सिम पिन लॉक सक्रिय हो जाने के बाद जब भी फोन को दोबारा रीस्टार्ट किया जाएगा अथवा उस सिम कार्ड को निकालकर किसी अन्य हैंडसेट में डाला जाएगा, तो वह बिना सही पिन दर्ज किए काम ही नहीं करेगा। कोई भी व्यक्ति उस सिम का उपयोग कॉलिंग, इंटरनेट या ओटीपी हासिल करने के लिए नहीं कर सकेगा। जब फोन लॉक हो और सिम कार्ड भी किसी काम का न रहे, तो ग्रे मार्केट में उस हैंडसेट की रीसेल वैल्यू खत्म हो जाती है। चोर को लगने लगता है कि यह हैंडसेट अब किसी भी कीमत पर बेचने लायक नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में अक्सर अपराधी उस फोन को लावारिस हालत में फेंक देते हैं, जिससे पुलिस या किसी भले व्यक्ति के जरिए फोन वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। चोरी होने पर तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम यदि दुर्भाग्यवश फोन चोरी हो जाए तो घबराने के बजाय त्वरित निर्णय लेना आवश्यक है। किसी भी परिचित के मोबाइल या नजदीकी कंप्यूटर पर तुरंत फाइंड माय डिवाइस वेब पोर्टल खोलें, अपने गूगल खाते में लॉगिन करें और फोन को फौरन लॉक करने का कमांड भेजें। स्क्रीन पर अपनी लाइव लोकेशन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और नजदीकी पुलिस थाने में जाकर तुरंत आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाएं। हालांकि तकनीक की दुनिया में कोई भी सुरक्षा उपाय शत-प्रतिशत गारंटी नहीं देता, लेकिन ये तीनों बुनियादी सेटिंग्स मिलकर चोरों के लिए इतनी जटिलताएं पैदा कर देती हैं कि वे डिवाइस का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाते। आपकी थोड़ी सी सतर्कता और दस मिनट की यह सेटिंग आपके कीमती हैंडसेट के साथ-साथ आपके बैंक खातों, निजी तस्वीरों और संवेदनशील डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है। इसका आप पर असर यह जानकारी हर उस व्यक्ति के लिए बेहद उपयोगी है जो दैनिक जीवन में एंड्रॉयड स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है और अपने डेटा को सुरक्षित रखना चाहता है। • डिवाइस सुरक्षा पर असर: सेटिंग्स में बदलाव करने से चोरी हुए फोन को अपराधी तुरंत बंद नहीं कर सकेंगे। इससे फोन चालू रहने के कारण उसकी लाइव लोकेशन ट्रैक करना संभव हो जाता है। • वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव: सिम कार्ड पर पिन लॉक होने के कारण चोर आपके नंबर से आने वाले बैंक ओटीपी नहीं पढ़ पाएंगे। यह आपके बैंक खातों और ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स को अनधिकृत पहुंच से पूरी तरह सुरक्षित रखता है। • फोन की रिकवरी में मदद: फाइंड माय डिवाइस सक्रिय रहने पर किसी अन्य कंप्यूटर या फोन से डिवाइस को ट्रैक किया जा सकता है। इससे पुलिस के लिए फोन को बरामद करना और पीड़ित तक वापस पहुंचाना आसान हो जाता है। • डेटा प्राइवेसी की रक्षा: रिमोट वाइप और मजबूत स्क्रीन लॉक के कारण आपकी निजी तस्वीरें और संवेदनशील दस्तावेज गलत हाथों में नहीं जाते। यदि फोन वापस न भी मिले, तो भी दूर बैठकर सारा डेटा सुरक्षित रूप से मिटाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ स्मार्टफोन चोरी के बाद अपराधियों का पहला कदम फोन को नेटवर्क से काटना होता है ताकि डिवाइस की पहचान और लोकेशन छिपाई जा सके। • ट्रैकिंग ब्लॉक करने का प्रयास: फोन ऑन रहने पर जीपीएस और सेल्युलर टावर के जरिए उसकी स्थिति लगातार दर्ज होती रहती है। चोर इसी वास्तविक समय की निगरानी को नाकाम करने के लिए पावर बटन दबाकर फोन तुरंत बंद करते हैं। • डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स की कमजोरी: अधिकांश यूजर्स अपने फोन में सामान्य स्वाइप लॉक रखते हैं और सिम कार्ड को बिना किसी पिन के खुला छोड़ देते हैं। इस लापरवाही के चलते चोर आसानी से सिम बदलकर या फोन फॉर्मेट करके उसे बेच देते हैं। • रीसेल मार्केट की मांग: चालू और बिना लॉक वाले फोनों को सेकंड हैंड बाजारों में बेचना काफी आसान होता है। जब फोन को मजबूत लॉक और सिम पिन से सुरक्षित कर दिया जाता है, तो उसकी अवैध रीसेल वैल्यू शून्य हो जाती है। सवाल-जवाब 1. फोन चोरी होने के बाद चोर सबसे पहले क्या करने की कोशिश करता है? चोर सबसे पहले फोन को स्विच ऑफ करने का प्रयास करता है ताकि जीपीएस और इंटरनेट ट्रैकिंग बंद हो जाए। 2. फाइंड माय डिवाइस सुविधा को कैसे चालू किया जाता है? फोन की सेटिंग्स में जाकर गूगल अथवा सिक्योरिटी मेनू के भीतर फाइंड माय डिवाइस के विकल्प को ऑन किया जा सकता है। 3. मजबूत स्क्रीन लॉक चोरों को फोन बंद करने से कैसे रोकता है? कई एंड्रॉयड फोन में स्क्रीन लॉक होने पर पावर ऑफ करने के लिए भी सुरक्षा पिन या पासवर्ड की आवश्यकता होती है, जिससे चोर फोन बंद नहीं कर पाता। 4. सिम कार्ड पर पिन लॉक लगाने का क्या फायदा होता है? सिम पिन लॉक होने पर चोर सिम को किसी दूसरे फोन में डालकर उसका उपयोग कॉलिंग, इंटरनेट या ओटीपी हासिल करने के लिए नहीं कर सकता। 5. फोन चोरी होने पर यूजर को तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए? तुरंत किसी दूसरे डिवाइस पर फाइंड माय डिवाइस खोलकर फोन को रिमोटली लॉक करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। https://trendkia.com/technology/android-smartaphona-jhapatamaron-ke-mnsube-honge-nakama-suraksha-majabuta-karane-ke-lie-turnta-badalen-tina-jaruri-vikalpa-52455 TrendKia — Har trend, sabse pehle.