भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनना चाहिए, शिकागो में बोले मनोज सिन्हा शिकागो में आयोजित वैश्विक एलुमनी मीट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि देश को केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बाजार बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि किफायती और समावेशी समाधानों का अग्रणी निर्माता बनना होगा। अमेरिका के शिकागो शहर में काशी के IIT-BHU के पूर्व छात्रों का एक बड़ा समागम देखने को मिला, जहां दुनिया भर में इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी धाक जमा चुके पूर्व छात्र एक मंच पर एकत्रित हुए। इस भव्य वैश्विक एलुमनी मीट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान भविष्य की डिजिटल तकनीकों, मशीन लर्निंग, रिसर्च और बदलते तकनीकी परिदृश्य को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया, जिसमें दुनियाभर से जुटे विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। शिकागो के मंच पर जुटा दिग्गजों का नेटवर्क कार्यक्रम में शामिल हुए मनोज सिन्हा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वह खुद इस संस्थान के 1979 बैच के सिविल इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं। वर्तमान में वह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके अलावा भी इस प्रतिष्ठित संस्थान से निकले अनगिनत छात्र आज अमेरिका समेत पूरी दुनिया में इंडस्ट्री, शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में ऊंचे पदों पर काबिज हैं। इस वैश्विक नेटवर्क में जय चौधरी, उज्ज नाथ, प्रदीप चिंतागुंटा और मुरली थिरुमले जैसे नाम भी शामिल हैं, जो दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुके हैं। प्रौद्योगिकी की असली कसौटी और उपयोगिता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोज सिन्हा ने तकनीक के वास्तविक उद्देश्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी एक पूरक और मानक दोनों है, लेकिन इसकी असली परीक्षा इस बात से होती है कि क्या वह किसी किसान का जीवन संवार सकती है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि क्या यह तकनीक किसी जरूरतमंद छात्र की मदद कर सकती है, किसी छोटे उद्यम को आगे बढ़ा सकती है, साधारण परिवार को सशक्त कर सकती है और आम आदमी तक सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को आसान बना सकती है? ज्ञान और निर्माण की आजीवन जिम्मेदारी मनोज सिन्हा ने सभागार में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थान के कई पूर्व छात्र दुनिया भर की बड़ी लेबोरेट्री, इंडस्ट्री और सार्वजनिक संस्थाओं में तकनीकी बदलावों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संस्थान की डिग्री हासिल कर लेना यह साबित नहीं करता कि हमने क्या सीखा है, बल्कि यह इस बात की आजीवन जिम्मेदारी तय करती है कि हम अपने अर्जित ज्ञान से समाज के लिए क्या नया निर्माण करने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए मानक उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत ने केवल बाहरी तकनीक को अपनाकर दुनिया को प्रभावित नहीं किया है, बल्कि हर क्षेत्र में नए मानक गढ़े हैं और दुनिया को एक नई राह दिखाई है। राष्ट्र के रूप में हमारी मूल मान्यता यही है कि ज्ञान का उपयोग हमेशा समाज के कल्याण और उत्थान के लिए होना चाहिए। एआई के क्षेत्र में भारत की नई भूमिका मनोज सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को अन्य देशों में विकसित किए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों का केवल एक बड़ा बाजार बनकर नहीं रहना चाहिए। देश को दुनिया भर के लिए विश्वसनीय, किफायती और समावेशी एआई समाधानों का अग्रणी निर्माता और डेवलपर बनना होगा। काशी की शिक्षा और वैश्विक अनुभव का अनूठा संगम मनोज सिन्हा की इस कार्यक्रम में उपस्थिति ने इस पूरे आयोजन के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। संस्थान के पूर्व छात्रों का दायरा केवल सिलिकॉन वैली या शिकागो तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रशासन, उच्च स्तरीय रिसर्च, बड़े उद्योगों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह ग्लोबल नेटवर्क इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे काशी की पारंपरिक शिक्षा और दुनिया का आधुनिक अनुभव एक साथ मिलकर भविष्य की इबारत लिख रहे हैं। वर्तमान दौर में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह वैश्विक शक्ति भारत के आगामी तकनीकी युग को किस प्रकार और कितनी तेजी से बदल सकती है। इसका आप पर असर शिकागो में दिए गए इस संबोधन के दूरगामी प्रभाव तकनीकी विकास, स्टार्टअप संस्कृति और रोजगार के अवसरों पर पड़ सकते हैं। • भारत में: देश के तकनीकी स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों को स्थानीय स्तर पर एआई समाधान विकसित करने के लिए अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। इससे घरेलू स्तर पर किफायती तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। • शिकागो में: वहां रह रहे प्रवासी भारतीय पेशेवरों और वैश्विक निवेशकों के बीच भारत के तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर चर्चाएं तेज होंगी। इससे उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह आयोजन दुनिया भर में फैले पूर्व छात्रों को जोड़ने और उभरती हुई तकनीकों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था। • वैश्विक नेटवर्किंग: विभिन्न देशों में काम कर रहे तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग के दिग्गजों को एक मंच पर लाकर अनुभवों का आदान-प्रदान करना इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था। • तकनीकी बदलाव: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल रिसर्च में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए देश की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता महसूस की गई। सवाल-जवाब 1. यह वैश्विक एलुमनी मीट कहाँ आयोजित की गई थी? यह वैश्विक एलुमनी मीट अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित की गई थी। 2. कार्यक्रम में मुख्य रूप से किस विषय पर चर्चा हुई? कार्यक्रम में भविष्य की तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल रिसर्च पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। 3. मनोज सिन्हा ने किस वर्ष और किस ट्रेड से पढ़ाई की थी? मनोज सिन्हा ने 1979 बैच में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। 4. कार्यक्रम में किन प्रमुख पूर्व छात्रों के नाम लिए गए? कार्यक्रम में जय चौधरी, उज्ज नाथ, प्रदीप चिंतागुंटा और मुरली थिरुमले जैसे प्रमुख पूर्व छात्रों का उल्लेख किया गया। 5. मनोज सिन्हा ने एआई के संबंध में क्या मुख्य बात कही? उन्होंने कहा कि भारत को अन्य देशों के एआई उत्पादों का केवल बाजार नहीं बल्कि अग्रणी निर्माता बनना चाहिए। https://trendkia.com/technology/bharata-ko-kevala-takanika-ka-upabhokta-nahin-balki-nirmata-banana-chahie-shikago-men-bole-manoj-sinha-29606 TrendKia — Har trend, sabse pehle.