# क्या एजी सुल्झबर बचा पाएंगे पत्रकारिता को? एआई और सत्ता के खिलाफ जंग पर बड़ी बात

> द न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रकाशक ए.जी. सुल्झबर ने प्रेस की स्वतंत्रता पर मंडराते खतरों, एआई कंपनियों के साथ चल रहे कानूनी संघर्ष और मीडिया उद्योग के भविष्य पर खुलकर बात की।

**Type:** article · **Category:** तकनीक · **Published:** 2026-07-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/technology/can-the-new-york-times-save-journalism-from-ai-a-g-sulzberger-speaks-out-11413 · **Language:** Hindi
**Tags:** द न्यूयॉर्क टाइम्स, ए.जी. सुल्झबर, पत्रकारिता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेस की स्वतंत्रता, कॉपीराइट मुकदमा, मीडिया उद्योग

द न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रकाशक ए.जी. सुल्झबर ने हाल ही में मीडिया जगत के सामने खड़े कई अस्तित्वगत संकटों पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। लगभग एक दशक से इस पद पर कार्यरत सुल्झबर ने डिजिटल इनोवेशन की दिशा में संस्थान का सफल नेतृत्व किया है, लेकिन इन दिनों उन्हें प्रेस की आजादी की रक्षा के मोर्चे पर कड़ी लड़ाइयों का सामना करना पड़ रहा है। करीब तीन साल पहले, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट पर कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि इन कंपनियों ने बिना अनुमति के अखबार की पत्रकारिता का इस्तेमाल अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया। यह कानूनी लड़ाई अभी शुरुआती चरणों में ही है और डिस्कवरी अनुरोधों पर प्रक्रिया जारी है। हालांकि, यह संकट केवल एक मोर्चा नहीं है, क्योंकि एक तरफ ट्रंप प्रशासन की नीतियों के तहत प्रेस की स्वतंत्रता पर लगातार हमले हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ एआई कंपनियां ऑनलाइन जानकारी खोजने और उपभोग करने के तरीकों को पूरी तरह बदल रही हैं।

बिजनेस के लिहाज से द न्यूयॉर्क टाइम्स बेहद मजबूत स्थिति में है और इसके 1 करोड़ 30 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हो चुके हैं। इसके बावजूद, सुल्झबर का मानना है कि पूरी पत्रकारिता का पेशा कई गंभीर संकटों से जूझ रहा है। एक तरफ ऐसी सरकारें हैं जो पत्रकारों को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाहट करतीं, और दूसरी तरफ ऐसी एआई कंपनियां हैं जिनके उत्पाद उसी रिपोर्टिंग पर निर्भर हैं जिसे वे कमजोर कर रही हैं। इसके अलावा, ओपन वेब में हो रहे बदलावों के कारण कई मीडिया संस्थान भारी नुकसान उठा रहे हैं। सुल्झबर के साथ हुई इस विस्तृत चर्चा में द न्यूयॉर्क टाइम्स के इस मुकदमे, न्यूज़रूम के भीतर एआई के इस्तेमाल और मीडिया घरानों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की जरूरत जैसे मुद्दों पर गहराई से बात की गई है।

## प्रेस की स्वतंत्रता पर बढ़ता सरकारी दबाव

हाल ही में न्याय विभाग द्वारा द न्यूयॉर्क टाइम्स के कई पत्रकारों को समन जारी किए जाने का मामला खासा चर्चा में रहा। यह कार्रवाई कतर की ओर से ट्रंप प्रशासन को उपहार में दिए गए एयर फोर्स वन विमान पर की गई रिपोर्टिंग से जुड़ी थी। न्याय विभाग ने तीसरे पक्ष की फोन सेवा प्रदाताओं को भी समन भेजकर पत्रकारों और उनके परिजनों के बीच हुए टेक्स्ट मैसेज और कॉल रिकॉर्ड की मांग की। सुल्झबर ने इसे अमेरिकी इतिहास में वुडरो विल्सन के समय यानी एक सदी से भी ज्यादा समय में प्रेस पर किया गया सबसे बड़ा हमला करार दिया है। उन्होंने उन पत्रकारों की सराहना की जो भारी दबाव के बावजूद बिना किसी राजनीतिक बहकावे में आए अपना काम लगातार कर रहे हैं। इस मामले में विमान की सुरक्षा और उसकी क्षमता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, और जब राष्ट्रपति ने शुरुआती कमियों से इनकार किया, तो अखबार ने सच को उजागर किया जिसकी पुष्टि बाद में हुई।

## कानूनी अधिकारों की रक्षा और उद्योग का रुख

सुल्झबर ने अन्य मीडिया घरानों की उस प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई जो दबाव के आगे झुक जाते हैं और मामलों को आसानी से रफा-दफा कर देते हैं। उनका मानना है कि अधिकारों की रक्षा के लिए उनका इस्तेमाल करना जरूरी है, वरना वे हमेशा के लिए छिन जाएंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि मीडिया को हर समय टकराव की स्थिति में रहना चाहिए, बल्कि इसका अर्थ यह है कि शक्तिशाली लोगों के नाराज होने पर भी सच छापने का साहस होना चाहिए। उन्होंने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और एसोसिएटेड प्रेस जैसे संस्थानों के उन साहसिक कदमों की तारीफ की जब उन्होंने व्हाइट हाउस की अनुचित शर्तों के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। इसके विपरीत, कई अन्य संस्थानों में पत्रकारों पर आंतरिक दबाव देखा गया है, जहां संपादक परिणामों के डर से जोखिम भरी और बड़ी खबरें छापने से कतराते हैं और केवल बड़े संस्थानों के फॉलोअप पर निर्भर रहते हैं।

## एआई का पत्रकारिता पर प्रभाव और 'मूल पाप'

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मुद्दे पर बात करते हुए सुल्झबर ने इसे एक बेहतरीन रिपोर्टिंग टूल बताया, बशर्ते इसका इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए। उनका कहना है कि एआई का उपयोग लेख लिखने या संपादक की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर डेटा में पैटर्न और विसंगतियों को खोजने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखबार ने अपनी पहली पुलित्जर पुरस्कार विजेता रिपोर्टिंग में भी एआई-समर्थित टूल्स का इस्तेमाल किया था, जहां गाजा संघर्ष के दौरान बम के गड्ढों की जांच की गई थी। हालांकि, उन्होंने सिलिकॉन वैली की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एआई का 'मूल पाप' करार दिया। उनके अनुसार, एआई के विकास में चार मुख्य तत्व हैं—कोडर, कंप्यूट, बिजली और डेटा यानी किताबें, संगीत, फिल्में और पत्रकारिता। जबकि कोडर्स को एनबीए खिलाड़ियों की तरह भारी-भरकम वेतन मिल रहा है और कंपनियां अरबों का कर्ज ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिना किसी अनुमति और मुआवजे के क्रिएटर्स की सामग्री को चुरा लिया गया है।

## गूगल और सर्च इंजन का संकट

सुल्झबर ने गूगल द्वारा सर्च परिणामों में एआई ओवरव्यू जोड़े जाने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। पिछले डेढ़ साल में गूगल के इस बदलाव के कारण प्रकाशकों को मिलने वाला रेफरल ट्रैफिक भारी मात्रा में घट गया है। अब पाठकों को उत्तर सीधे एआई द्वारा मिल जाते हैं, जिससे उन्हें वेबसाइट पर क्लिक करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इस वजह से पारंपरिक मीडिया संस्थानों के बिजनेस मॉडल पर बहुत बुरा असर पड़ा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इन बड़ी एआई कंपनियों के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर करने में ढाई साल से अधिक का समय और 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। सुल्झबर ने सवाल उठाया कि क्या कोई छोटा स्थानीय अखबार इस तरह की दिग्गज टेक कंपनियों के खिलाफ मुकदमा लड़ने का खर्च उठा सकता है। यह लड़ाई केवल पैसे की नहीं, बल्कि आवश्यक पत्रकारिता के अस्तित्व को बचाए रखने की है।

## स्थानीय पत्रकारिता का पतन और भविष्य की उम्मीद

चर्चा के अंत में सुल्झबर ने स्थानीय पत्रकारिता में आई भारी गिरावट पर चिंता जताई। पिछले दो दशकों में अमेरिका में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आई है, जिसके कारण नागरिक समाज में भ्रष्टाचार, अविश्वास और अकेलापन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स के 1 करोड़ 30 लाख सब्सक्राइबर्स का जिक्र करते हुए कहा कि एक प्रमुख समाचार संगठन की पहुंच एक एनीमे स्ट्रीमिंग सेवा यानी क्रंचीरोल से भी कम है, जो यह दर्शाता है कि पूरे उद्योग को बड़ा होने की जरूरत है। तमाम चुनौतियों, कानूनी लड़ाइयों और सरकारी दबावों के बावजूद, जब वे रोज सुबह अखबार पढ़ते हैं, तो उन्हें याद आता है कि वे वास्तव में किस चीज के लिए लड़ रहे हैं और यही बात उन्हें इस पेशे में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह विवाद वैश्विक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, कॉपीराइट नियमों और एआई कंपनियों की जवाबदेही तय करने के तरीकों को प्रभावित करता है, जिससे भारतीय मीडिया और डिजिटल रचनाकारों के अधिकारों को भी बल मिलता है।

**पाठकों के लिए:** पाठकों को यह समझना होगा कि स्वतंत्र पत्रकारिता के बिना विश्वसनीय जानकारी मिलना मुश्किल हो जाएगा, और एआई के दौर में गुणवत्तापूर्ण खबरों के लिए डिजिटल स्रोतों की प्रामाणिकता परखनी जरूरी है।

## सवाल-जवाब

### 1. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने किन कंपनियों पर मुकदमा किया है?
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट पर अपनी पत्रकारिता का अवैध रूप से उपयोग करके एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के आरोप में मुकदमा दायर किया है।

### 2. द न्यूयॉर्क टाइम्स के कितने सब्सक्राइबर्स हैं?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के पास वर्तमान में 1 करोड़ 30 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।

### 3. न्याय विभाग ने द न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों को समन क्यों भेजा?
न्याय विभाग ने कतर द्वारा उपहार में दिए गए एयर फोर्स वन विमान पर की गई रिपोर्टिंग के सिलसिले में पत्रकारों को समन जारी किया।

### 4. ए.जी. सुल्झबर ने एआई कंपनियों के व्यवहार को क्या कहा है?
सुल्झबर ने एआई कंपनियों द्वारा बिना अनुमति और मुआवजे के रचनात्मक सामग्री का उपयोग करने को एआई का 'मूल पाप' कहा है।

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