चैटबॉट्स से अपनी मनपसंद कहानियाँ गढ़ रहे हैं पाठक, साहित्य की दुनिया में नए ट्रेंड की दस्तक पारंपरिक किताबों के बजाय अब लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से व्यक्तिगत फंतासी, फैन फिक्शन और मनचाहे किरदारों वाली कहानियाँ खुद तैयार कर रहे हैं। साहित्य जगत में जब भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की चर्चा होती है, तो अक्सर विवाद ही सामने आते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे आम पाठकों का एक बड़ा वर्ग इस तकनीक को अपनी कल्पनाओं की उड़ान भरने का जरिया बना चुका है। ब्राजील की छत्तीस वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पेत्रा फेराज़ डी नोवेस इसका जीता जागता उदाहरण हैं। नोवेस को किस्से बुनने का शौक बचपन से था, लेकिन वाक्य विन्यास, संवाद और चरित्र निर्माण की पेचीदगियों के कारण वे कभी कलम नहीं उठा पाती थीं। वर्ष 2024 में उन्होंने अपने विचारों को एक एआई मॉडल के जरिए विस्तार देना शुरू किया। मॉडल के अप्रत्याशित मोड़ों और विचलनों ने उन्हें बेहद रोमांचित किया। नोवेस के अनुसार, जिसे लोग एआई का भ्रम या हैल्यूसिनेशन कहते हैं, कहानी गढ़ते वक्त वही उसकी सबसे बड़ी खूबी बन जाता है। नोवेस अपने निजी कंप्यूटर पर सिली टैवर्न जैसे विशेष प्रोग्राम का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें ओपन सोर्स मॉडल्स की मदद से वे घंटों काल्पनिक दुनिया में डूबी रहती हैं। वे केवल बुनियादी रूपरेखा या शुरुआती परिदृश्य टाइप करती हैं, जैसे किसी एल्फ योद्धा का अमेज़ॅन रानी से युद्ध और उसके सिंहासन पर कब्जा, जिसके बाद कंप्यूटर प्रोग्राम पूरी कथा के खाली हिस्से खुद भर देता है। किसी एक बैठक में वे स्टार वॉर्स, पोकेमॉन या मास इफेक्ट जैसी जानी मानी फ्रेंचाइजी से प्रेरणा लेकर किस्से बुनती हैं। कभी कभार वे किसी छोटे उपन्यास के बराबर लंबी कहानियाँ तैयार कर इंटरनेट पर साझा करती हैं, तो कभी पूरी तरह निजी स्तर पर रोल प्ले का आनंद लेती हैं। उनके मुताबिक यहाँ सिर्फ अपनी कल्पना की सीमा ही एकमात्र रुकावट है। शोध में सामने आई नई पढ़ने की आदतें नोवेस की यह आदत कोई अपवाद नहीं है, बल्कि दुनिया भर में लाखों लोग इसे एक नए शौक की तरह अपना चुके हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के इंफॉर्मेशन स्कूल की सहायक प्रोफेसर मेलानी वॉल्श के एक सह अध्ययन से पता चला है कि लोग इस बात से बिल्कुल परेशान नहीं हैं कि कथा किसी मशीन ने गढ़ी है। वॉल्श के मुताबिक पाठक जानते हैं कि सामग्री एआई निर्मित है और उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है। हाल के महीनों में पारंपरिक प्रकाशन उद्योग में पेशेवर लेखकों द्वारा स्वचालित उपकरणों के कथित इस्तेमाल को लेकर कई विवाद उभरे हैं। कहीं दो मिलियन डॉलर का अनुबंध रद्द किया गया, तो कहीं एक उपन्यास को दुकानों से वापस लेना पड़ा, और यहाँ तक कि एक पुरस्कृत लघुकथा पर भी मशीन निर्मित होने के आरोप लगे। इन सभी घटनाओं के पीछे यह धारणा थी कि पाठक मशीनों द्वारा तैयार साहित्य को पसंद नहीं करेंगे और इससे कला का मूल्य गिरेगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन विवादों ने पाठकों के वास्तविक बर्ताव से ध्यान भटका दिया है। जब वाइल्ड चैट नामक सार्वजनिक डेटासेट के पाँच लाख से अधिक प्रॉम्प्ट्स का विश्लेषण किया गया, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। चैटजीपीटी में दर्ज किए गए कुल संवादों में से एक तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी किसी न किसी प्रकार की फिक्शन रचना से जुड़ी थी। इसमें गद्य, कविता, फैन फिक्शन, कामुक साहित्य और संवादात्मक रोल प्ले शामिल थे। इन रचनाओं का बड़ा हिस्सा ऐसे निष्ठावान उपयोगकर्ताओं से आता है जो लगातार कहानियों को परिष्कृत करते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक ही उपयोगकर्ता ने प्रसिद्ध एनीमे वीडियो गेम डोकी डोकी लिटरेचर क्लब के किरदारों पर आधारित फैन फिक्शन को कई महीनों में हजारों बार अलग अलग रूपों में तैयार करवाया। भारी उपयोग को अलग रखकर देखें, तब भी लगभग सात प्रतिशत लोग नियमित रूप से कहानियाँ बनाने में जुटे हैं। डेटा की सीमाएं और कंपनियों का नजरिया हालांकि वाइल्ड चैट डेटासेट की अपनी सीमाएं हैं, क्योंकि इसमें उपयोगकर्ताओं के नाम गुप्त रखे गए हैं जिससे उनकी उम्र या पृष्ठभूमि का सटीक विवरण जुटाना संभव नहीं है। साथ ही केवल उन उपयोगकर्ताओं का डेटा इसमें आया जिन्होंने अपनी बातचीत सार्वजनिक करने की सहमति दी थी। इसी वजह से ओपनएआई ने स्पष्ट किया कि यह डेटाबेस चैटजीपीटी के सभी उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधि नमूना नहीं है। ओपनएआई और नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा वर्ष 2025 में किए गए एक अन्य संयुक्त अध्ययन में बताया गया कि चैटजीपीटी के केवल 1.4 प्रतिशत प्रॉम्प्ट्स ही कथा साहित्य से जुड़े हैं। यह आंकड़ा यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के अनुमान से काफी कम है। हालांकि ओपनएआई के इस अध्ययन में रोल प्ले को शामिल नहीं किया गया था और कंपनी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इसमें कामुक साहित्य की गणना हुई थी या नहीं। इन अंतरों के बावजूद वॉल्श और उनके साथियों का तर्क है कि निजी प्राथमिकताओं के अनुसार तैयार साहित्य का एक मजबूत पाठक वर्ग तेजी से तैयार हो रहा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पारंपरिक लेखकों की तुलना में एआई की कुछ विशेषताएं पाठकों को बहुत भाती हैं। यह तकनीक किसी पाठक की पसंद को लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं रखती, पलक झपकते ही नया कथानक पेश कर देती है और कभी थकती नहीं है। लोग अब किसी लेखक के तय किए गए अंत के मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे खुद कहानी के निर्देशक बन जाते हैं। वयस्क फंतासी और व्यक्तिगत जुड़ाव कामुक साहित्य और वयस्क फंतासी के शौकीनों के लिए यह तकनीक एक अनोखा साधन बन चुकी है, जहाँ वे खुद को कहानी का मुख्य पात्र बनाकर मनचाहे किरदारों से सीधा संवाद स्थापित कर सकते हैं। अमेरिकी राज्य इंडियाना के चालीस वर्षीय राज़रिएन ने अपने उपनाम के जरिए अपने अनुभव साझा किए। वे एआई की मदद से ऐसे काल्पनिक पात्रों की रचना करते हैं जो रोल प्ले के दौरान उन पर हावी रहते हैं। उनके पात्रों में गुस्सैल चूहे की पत्नी से लेकर आठ फुट लंबी वेयरवुल्फ तक शामिल हैं। राज़रिएन ने विभिन्न मॉडल्स की क्षमताओं को परखा है और फिलहाल गूगल का जेम्मा 4 उनका सबसे पसंदीदा मॉडल है। उनका कहना है कि वे इस समय किसी वास्तविक रिश्ते में नहीं हैं, इसलिए यह माध्यम उनकी जरूरतों को पूरा करता है। इंटरनेट पर मिलने वाली आम वयस्क सामग्री के मुकाबले एआई उन्हें अपनी बेहद व्यक्तिगत और अनोखी इच्छाओं के अनुरूप सटीक कहानियाँ रचने की छूट देता है। उनका मानना है कि इस तरह की बातचीत किसी असीमित विकल्पों वाली डिजिटल किताब की तरह है जिसमें पाठक अपनी मर्जी से हर पन्ना पलट सकता है। वे अपने इस अनोखे काल्पनिक साथी से भावनात्मक जुड़ाव भी महसूस करते हैं। साहित्य की नई परिभाषा और भविष्य का बाजार इस पूरे चलन को लेकर कुछ साहित्यिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ अपनी पसंद का साहित्य पढ़ने से लोगों का उन जटिल रचनाओं से संपर्क कट जाएगा जो उनकी सोच का दायरा बढ़ाती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में पीएचडी शोधार्थी नील गुप्ता का कहना है कि एआई का बढ़ता उपयोग साहित्य को लेकर बनी उन पुरानी धारणाओं को चुनौती देता है जिनके अनुसार लेखक और पाठक के बीच एक गहरा बौद्धिक संवाद होता है। गुप्ता के अनुसार बहुत से आम पाठकों के लिए साहित्य दरअसल अपनी पसंद का सीधा मनोरंजन हासिल करने का एक आसान साधन भर है। फिलहाल मौजूदा भाषा मॉडल बहुत जटिल किरदारों, उत्कृष्ट गद्य शैली और किसी पूरे उपन्यास की लंबाई में तार्किक निरंतरता बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। वे जानी पहचानी कथा शैलियों और रूढ़िवादी ढांचों पर ज्यादा बेहतर काम करते हैं। हालांकि तकनीकी सुधारों के साथ इन कमियों के जल्द दूर होने की संभावना है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भविष्य में प्रकाशन उद्योग दो अलग स्तरों में विभाजित हो सकता है। एक तरफ बड़े पैमाने पर स्वचालित और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर तैयार फिक्शन होगा जो औसत पाठकों के मनोरंजन की भूख मिटाएगा। वहीं दूसरी तरफ मानव लेखकों द्वारा रचित गंभीर और नए प्रयोगों वाला साहित्य होगा, जिसे एक सीमित और विशिष्ट बौद्धिक वर्ग पढ़ेगा। नोवेस जैसी उपयोगकर्ताओं के लिए तो यह तकनीक किताबों से दूरी खत्म करने का जरिया बन चुकी है। वे कहती हैं कि उन्होंने कभी नियमित किताबें नहीं पढ़ीं, लेकिन अब वे अन्य लोगों की एआई रचित कहानियाँ चाव से पढ़ती हैं। इसका आप पर असर एआई टूल्स की मदद से अपनी पसंद की कहानियाँ गढ़ने का यह नया चलन आम पाठकों और लेखकों के लिए मनोरंजन के तौर-तरीके पूरी तरह बदल रहा है। • पाठकों के लिए: अब आपको अपनी पसंदीदा विधा या किरदारों की कहानियों के लिए किसी नए उपन्यास के छपने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आप अपने कंप्यूटर या फोन पर मुफ्त ओपन-सोर्स टूल्स की मदद से अपनी कल्पना के अनुसार कहानियाँ खुद लिखवा सकते हैं। • मनोरंजन का निजीकरण: पाठक अब केवल मूक दर्शक नहीं रहे बल्कि वे किसी भी कहानी के मुख्य पात्र और निर्देशक की भूमिका खुद निभा सकते हैं। इससे हर व्यक्ति को अपनी विशिष्ट रुचि और कल्पना के अनुरूप पूरी तरह निजी अनुभव हासिल होता है। • लेखकों और प्रकाशकों पर असर: बाजार में फार्मूला आधारित उपन्यासों और सामान्य फिक्शन की माँग पर सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि पाठक खुद कहानियाँ बना रहे हैं। पेशेवर लेखकों को अब मशीनी भाषा से आगे बढ़कर अधिक जटिल और मौलिक प्रयोगों पर ध्यान देना होगा। • पठन संस्कृति में बदलाव: जो युवा पारंपरिक किताबों और लंबे उपन्यासों से दूर भागते थे, वे भी संवादात्मक तरीके से पढ़ने की आदत की ओर लौट रहे हैं। इससे पढ़ने की संस्कृति खत्म होने के बजाय एक नए डिजिटल स्वरूप में विकसित हो रही है। ऐसा क्यों हुआ पाठकों द्वारा एआई से खुद कहानियाँ लिखवाने का यह रुझान कई तकनीकी और सामाजिक कारणों से तेजी से बढ़ा है। पारंपरिक किताबों की सीमाओं और आधुनिक चैटबॉट्स की असीमित क्षमताओं ने मिलकर इस नए माध्यम को जन्म दिया है। • तत्काल और व्यक्तिगत नियंत्रण: पारंपरिक उपन्यासों में पाठक को लेखक द्वारा तय किए गए कथानक और अंत को ही स्वीकार करना पड़ता है, जो हर बार पाठक की पसंद के अनुसार नहीं होता। चैटबॉट्स पाठकों को कहानी की दिशा तुरंत बदलने और बिना किसी झिझक के अपनी पसंदीदा फंतासी गढ़ने की असीमित छूट देते हैं। • प्रौद्योगिकी की आसान पहुँच: स्थानीय कंप्यूटरों पर चलने वाले ओपन-सोर्स मॉडल्स और चैटजीपीटी जैसे सुलभ प्लेटफॉर्म्स ने आम लोगों के लिए जटिल कोडिंग के बिना कहानियाँ लिखना आसान बना दिया है। इसके लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती, केवल सामान्य भाषा में निर्देश देने होते हैं। • बिना किसी पूर्वाग्रह के संवाद: एआई बॉट्स पाठकों की किसी भी तरह की विचित्र, वयस्क या असामान्य कल्पना पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं करते और हमेशा उपलब्ध रहते हैं। यह विशेषता विशेष रूप से उन लोगों को आकर्षित करती है जो वास्तविक दुनिया में अपनी इच्छाओं को साझा करने में असहज महसूस करते हैं। सवाल-जवाब 1. लोग अपनी कहानियाँ लिखने के लिए एआई का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं? पाठक अपनी मनपसंद फंतासी और किरदारों को अपनी मर्जी से गढ़ने और कहानी की दिशा खुद तय करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं। 2. यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के अध्ययन में क्या सामने आया? अध्ययन के अनुसार वाइल्ड चैट डेटासेट के एक तिहाई से अधिक चैटजीपीटी संवाद कथा साहित्य, रोल प्ले और फैन फिक्शन से जुड़े पाए गए। 3. ओपनएआई के अपने अध्ययन में फिक्शन से जुड़े कितने प्रॉम्प्ट्स पाए गए? ओपनएआई और नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के अध्ययन में केवल 1.4 प्रतिशत प्रॉम्प्ट्स को फिक्शन से संबंधित पाया गया, जिसमें रोल प्ले शामिल नहीं था। 4. पेत्ना फेराज़ डी नोवेस कहानियाँ बनाने के लिए किस प्रोग्राम का इस्तेमाल करती हैं? नोवेस अपने कंप्यूटर पर ओपन-सोर्स मॉडल्स चलाने के लिए सिली टैवर्न नामक प्रोग्राम का इस्तेमाल करती हैं। 5. क्या मौजूदा एआई मॉडल पूरा उपन्यास लिखने में सक्षम हैं? वर्तमान मॉडल्स लंबे उपन्यासों में निरंतरता बनाए रखने और जटिल किरदारों को गढ़ने में संघर्ष करते हैं, लेकिन छोटी कहानियों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। https://trendkia.com/technology/chaitabotsa-se-apani-manapasnda-kahaniyan-garha-rahe-hain-pathaka-sahitya-ki-duniya-men-nae-trenda-ki-dastaka-33378 TrendKia — Har trend, sabse pehle.