छह महीने में गईं 1.28 लाख टेक नौकरियां, छंटनी की इस मार में भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिकार साल 2026 के सिर्फ पहले छह महीनों में AI की वजह से दुनिया भर में 1.28 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारी नौकरी गंवा चुके हैं, और इस लिस्ट में भारत अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने टेक्नोलॉजी की दुनिया की तस्वीर जिस रफ्तार से बदली है, उसका सबसे भारी असर अब लोगों की नौकरियों पर दिख रहा है। दुनिया भर की कंपनियां अपना काम तेज करने और खर्च घटाने के लिए AI को बड़े पैमाने पर अपना रही हैं, लेकिन यही तकनीक अब कर्मचारियों के लिए मुसीबत बन गई है। टेक सेक्टर की छंटनी पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जॉब मार्केट में हालात कितने बिगड़ चुके हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही इतनी नौकरियां चली गईं, जितनी पूरे 2025 में भी नहीं गई थीं। 1 जुलाई 2026 तक AI की वजह से नौकरी गंवाने वाले टेक कर्मचारियों की संख्या दुनिया भर में 1.28 लाख को पार कर चुकी थी। इसके मुकाबले पूरे 2025 में कुल 1.25 लाख आईटी प्रोफेशनल्स की छंटनी हुई थी। जिस तेजी से कंपनियां ऑटोमेशन और नए AI टूल्स को अपना रही हैं, उससे साफ है कि यह सिलसिला फिलहाल रुकने वाला नहीं है। भारत छंटनी में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिकार इस पूरे संकट में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है। जनवरी 2020 से जुलाई 2026 के बीच AI की वजह से हुई कुल टेक छंटनी में सबसे ज्यादा चोट अमेरिका को लगी है। निकाले गए कुल कर्मचारियों में से 71.33% अकेले अमेरिका से थे। भारत में नौकरी गंवाने वालों की हिस्सेदारी कुल आंकड़े का 7.16% रही, जो अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा है। भारत के बाद इस सूची में जर्मनी (3.43%) और ब्रिटेन (2.64%) जैसे देश आते हैं। एजुकेशन और फाइनेंस पर पड़ी सबसे भारी मार भारत में AI का असर हर क्षेत्र पर एक जैसा नहीं रहा। इस तकनीक ने कुछ खास सेक्टर के कर्मचारियों को दूसरों के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावित किया है। जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नौकरियां गईं, उनकी तस्वीर कुछ इस तरह है। • एजुकेशन सेक्टर (EdTech): सबसे बड़ा झटका इसी क्षेत्र को लगा है, जहां कुल छंटनी का 21.67% हिस्सा दर्ज किया गया। • फाइनेंस सेक्टर: बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में 14.73% नौकरियों पर असर पड़ा। • फूड इंडस्ट्री: फूड टेक और डिलीवरी से जुड़े क्षेत्रों में 12.26% की छंटनी देखी गई। • ट्रांसपोर्ट और कंज्यूमर बिजनेस: इन दोनों क्षेत्रों में भी करीब 11-11% कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हर साल गहराता जा रहा है यह संकट अगर बीते सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो AI के चलते नौकरियों पर मंडराता यह खतरा लगातार बड़ा होता जा रहा है। साल 2020 में करीब 81,000 कर्मचारियों की नौकरी गई थी, जो 2022 में बढ़कर 1.65 लाख तक पहुंच गई। इसके बाद 2023 में तो यह आंकड़ा 2.66 लाख के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर जा पहुंचा। साल 2024 और 2025 में थोड़ी राहत जरूर महसूस हुई, लेकिन 2026 के सिर्फ शुरुआती छह महीनों ने पिछले पूरे साल का रिकॉर्ड ही तोड़ दिया। इन आंकड़ों से साफ है कि जैसे-जैसे कंपनियां अपने कामकाज में AI को गहराई से उतार रही हैं, इंसानी नौकरियों पर दबाव और बढ़ता जा रहा है। इसका आप पर असर • टेक कर्मचारियों के लिए: एडटेक, फाइनेंस और फूड टेक जैसे सेक्टर में नौकरी सबसे ज्यादा असुरक्षित है, इसलिए AI और नई स्किल्स सीखना अब जरूरत बन गया है। • भारत में: दुनिया की कुल AI छंटनी का 7.16% हिस्सा भारत का है, यानी यहां के आईटी प्रोफेशनल्स पर खतरा बाकी कई देशों से ज्यादा है। सवाल-जवाब 1. 2026 के पहले छह महीनों में AI की वजह से कितनी टेक नौकरियां गईं? 1 जुलाई 2026 तक दुनिया भर में 1.28 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारी AI की वजह से नौकरी गंवा चुके थे। 2. छंटनी के मामले में भारत दुनिया में किस नंबर पर है? भारत दूसरे नंबर पर है, और कुल निकाले गए कर्मचारियों में उसकी हिस्सेदारी 7.16% है। 3. AI छंटनी से सबसे ज्यादा कौन सा देश प्रभावित हुआ? अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां से कुल निकाले गए कर्मचारियों में से 71.33% थे। 4. भारत में किस सेक्टर में सबसे ज्यादा नौकरियां गईं? एजुकेशन सेक्टर यानी एडटेक पर सबसे बड़ी मार पड़ी, जहां कुल छंटनी का 21.67% हिस्सा दर्ज हुआ। 5. क्या 2026 की छंटनी 2025 से ज्यादा है? हां, 2026 के सिर्फ छह महीनों में 1.28 लाख नौकरियां गईं, जबकि पूरे 2025 में 1.25 लाख छंटनी हुई थी। 6. अब तक का सबसे ऊंचा छंटनी का आंकड़ा किस साल रहा? साल 2023 में यह आंकड़ा 2.66 लाख के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था। https://trendkia.com/technology/chhaha-mahine-men-gain-1-28-lakha-teka-naukariyan-chhntani-ki-isa-mara-men-india-bana-duniya-ka-dusara-sabase-bara-shikara-4906 TrendKia — Har trend, sabse pehle.