चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ बनाया दुनिया का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर चीन ने तकनीक पर लगी अमेरिकी पाबंदियों के बीच 'लाइनशाइन' नामक सुपरकंप्यूटर विकसित कर TOP500 रैंकिंग में फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। चीन ने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रही तकनीकी वर्चस्व की जंग में एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका द्वारा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उपकरणों पर लगाए गए कड़े आयात प्रतिबंधों और टैरिफ के बावजूद, चीन ने दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बनाकर सबको चौंका दिया है। यह सफलता वैश्विक तकनीक के क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच सामने आई है। सुपरकंप्यूटिंग की दौड़ में चीन की वापसी साल 1993 से ही TOP500 सूची में हर छह महीने पर दुनिया के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों को स्थान दिया जाता है। इस रैंकिंग में सैद्धांतिक गति, वास्तविक प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता जैसे मानकों का आकलन किया जाता है। लंबे समय से अमेरिकी प्रणालियों का इस सूची में दबदबा रहा है, लेकिन करीब एक दशक के अंतराल के बाद चीन का 'लाइनशाइन' सिस्टम फिर से पहले पायदान पर पहुंच गया है। इसने कैलिफोर्निया के लिवरमोर स्थित 'एल कैपिटन' को पीछे छोड़ दिया है, जो 2024 से शीर्ष पर बना हुआ था। बेंचमार्क आंकड़ों के अनुसार, 'लाइनशाइन' की प्रोसेसिंग क्षमता 'एल कैपिटन' से 20 फीसदी से भी अधिक है। तकनीकी क्षमता और निर्माण यह विशाल सुपरकंप्यूटर करीब 42.2 मेगावाट बिजली की खपत करता है और 2,198 एक्सफ्लॉप्स का प्रदर्शन देने में सक्षम है। इसका मतलब है कि यह प्रति सेकंड 2 क्विंटलियन (2 के आगे 18 शून्य) से ज्यादा गणनाएं कर सकता है। 'लाइनशाइन' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसके बजाय, यह पूरी तरह से सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट्स (CPUs) पर आधारित है, जो सामान्य तौर पर स्मार्टफोन और लैपटॉप में मिलते हैं, लेकिन वैज्ञानिक कंप्यूटिंग में इनका उपयोग दुर्लभ है। पूरा ढांचा चीन में ही विकसित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से बना है। 'लाइनशाइन' का आर्किटेक्चर 'लिंगकुन' प्लेटफॉर्म पर टिका है, जिसमें लगभग 45,000 'LX2' प्रोसेसर लगे हैं। प्रत्येक प्रोसेसर में 304 कोर हैं और यह 1.55 GHz की क्लॉक स्पीड पर काम करता है। डेटा ट्रांसफर के लिए 'लिंगकी' नामक हाई-स्पीड नेटवर्क का उपयोग किया गया है, जबकि सिस्टम 'काइलिन ओएस' पर चलता है, जो चीन के सरकारी और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे में पहले से ही लोकप्रिय है। अमेरिकी पाबंदियों का प्रभाव चीन की यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि चीनी तकनीकी उद्योग अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद आगे बढ़ने में सक्षम है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और जो बाइडन के दौर में अमेरिका ने चीन की प्रगति को धीमा करने के लिए एडवांस्ड चिप्स, एआई आधारित उपकरणों और सॉफ्टवेयर पर सख्त निर्यात नियंत्रण लगाए थे। इसके जवाब में बीजिंग ने भी अपने सुरक्षा उपाय कड़े किए। मौजूदा ट्रंप प्रशासन के तहत ये प्रतिबंध और अधिक सख्त हो गए हैं। इन चुनौतियों के बीच चीन ने ऐसी नई तकनीकें विकसित करने में निवेश किया है, जो अत्याधुनिक अमेरिकी संसाधनों की अनुपलब्धता के बावजूद प्रतिस्पर्धी परिणाम दे सकें। यह सफलता दर्शाती है कि तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रयास चीन के लिए सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत कर सकते हैं। इसका आप पर असर भारत में: सुपरकंप्यूटिंग में चीन की आत्मनिर्भरता वैश्विक स्तर पर तकनीक के हस्तांतरण और चिप उपलब्धता के नए समीकरण बना सकती है। सामान्य रूप से: उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग में हुए इस विकास से एआई और वैज्ञानिक अनुसंधान की गति आने वाले समय में और तेज़ हो सकती है। सवाल-जवाब 1. चीन का नया सुपरकंप्यूटर कौन सा है? चीन के नए सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर का नाम लाइनशाइन (LineShine) है। 2. लाइनशाइन ने किसे पीछे छोड़ा है? इसने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एल कैपिटन (El Capitan) को पीछे छोड़ा है। 3. इस सुपरकंप्यूटर की क्या खासियत है? इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें GPU का उपयोग नहीं किया गया है और यह पूरी तरह से घरेलू चीनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर आधारित है। 4. यह सुपरकंप्यूटर कितनी गणनाएं कर सकता है? यह 2,198 एक्सफ्लॉप्स की गति के साथ प्रति सेकंड 2 क्विंटलियन से अधिक ऑपरेशन कर सकता है। https://trendkia.com/technology/china-ne-america-ko-pichhe-chhora-banaya-duniya-ka-sabase-teza-suparaknpyutara-3500 TrendKia — Har trend, sabse pehle.