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  "type": "article",
  "title": "डेटा सेंटरों के खिलाफ वैश्विक विरोध से अमेरिका को मिलने वाले जरूरी सबक",
  "summary": "जनरेटिव एआई के प्रसार के साथ डेटा सेंटरों की पानी और बिजली की खपत पर दुनिया भर में विरोध बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण सबक सामने आ रहे हैं।",
  "content": "प्रौद्योगिकी उद्योग द्वारा कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने की अंधी दौड़ और उसके जवाब में खड़े हो रहे सामाजिक प्रतिरोध पर लेखक पेरिस मार्क्स ने अपनी पुस्तक में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। अमेरिका में आगामी चुनावों के दौरान डेटा सेंटर एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं। लेकिन वैश्विक स्तर पर इस बुनियादी ढांचे के खिलाफ जनसंघर्ष का एक लंबा इतिहास रहा है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य कंप्यूटरों के विरोध से लेकर आयरलैंड और चिली में हाल के वर्षों में हुए जनआंदोलनों तक, स्थानीय समुदायों ने टेक कंपनियों के इस विस्तार पर सवाल उठाए हैं। एआई बबल के संभावित रूप से फूटने और इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है।\n\nपानी और बिजली की भारी खपत: ओरेगन से डबलिन तक\nडेटा सेंटरों की अनियंत्रित मांग का सिलसिला हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। नीदरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों ने वर्ष 2019 में ही नए डेटा सेंटरों के निर्माण पर अस्थायी रोक यानी मोरेटोरियम लागू कर दिया था। वर्ष 2022 तक आयरलैंड में बिजली ग्रिड पर डेटा सेंटरों के अत्यधिक दबाव को लेकर चिंताएं गहराने लगी थीं, जहां ये केंद्र राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा खपत करने लगे थे।\n\nइसी तरह का एक गंभीर मामला अमेरिका के ओरेगन स्थित द डालेस शहर में देखने को मिला। वहां गूगल ने अपनी पानी की खपत के आंकड़ों को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए नगर परिषद तक का सहारा लिया और लगभग एक साल तक इन जानकारियों को गुप्त रखा। जब स्थानीय समुदाय के संघर्ष के बाद वास्तविक आंकड़े सामने आए, तो पता चला कि गूगल अकेले उस पूरे शहर के कुल पानी का 29 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर रहा था। इसके बाद वर्ष 2022 के अंत में चैटजीपीटी के आने से जनरेटिव एआई का दौर शुरू हुआ, जिसने डेटा सेंटरों की मांग को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया।\n\nआयरलैंड का अनुभव: निजी बिजली संयंत्र और ग्रिड के सवाल\nआयरलैंड का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि जब सार्वजनिक ग्रिड की क्षमता समाप्त होती है तो टेक कंपनियां क्या रुख अपनाती हैं। डबलिन में वर्ष 2021 में वहां के बिजली ग्रिड ऑपरेटर ने नए डेटा सेंटरों के कनेक्शन पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि ग्रिड के पास अब अतिरिक्त क्षमता नहीं बची है। इसके जवाब में टेक कंपनियों ने डबलिन के बाहर आयरलैंड के अन्य हिस्सों में निर्माण शुरू कर दिया।\n\nइतना ही नहीं, कंपनियों ने सार्वजनिक ग्रिड पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक गैस नेटवर्क से जुड़कर जनरेटर चलाने शुरू कर दिए। आखिरकार, उन्होंने अपने डेटा सेंटरों को चलाने के लिए खुद के समर्पित निजी गैस पावर प्लांट का निर्माण शुरू कर दिया। आयरलैंड का बिजली ग्रिड पूरी तरह से सार्वजनिक है और केवल सरकारी उपयोगिता ही बिजली की लाइनें बिछा सकती है। लेकिन डेटा सेंटर कंपनियों ने लॉबिंग करके ऐसा कानून बनवा लिया जो निजी कंपनियों को अपनी निजी बिजली केबल बिछाने की अनुमति देता है। इससे सार्वजनिक प्रणालियों में समानता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।\n\nपर्यावरणीय खतरे और एआई बबल का जोखिम\nआयरलैंड की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने टेक कंपनियों को जीवाश्म ईंधन जलाने के लिए उत्सर्जन लाइसेंस जारी किए, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि इससे देश के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना बेहद कठिन हो जाएगा। यही कहानी अब अमेरिका में बड़े पैमाने पर दोहराई जा रही है, जहां कंपनियां एआई की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े निजी गैस पावर प्लांट स्थापित कर रही हैं।\n\nटेक उद्योग फिलहाल एक बड़े एआई बबल के दौर से गुजर रहा है। इन विशाल डेटा सेंटरों और गैस पावर प्लांटों के निर्माण के बीच टर्बाइन, चिप्स और अन्य तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति में भारी देरी हो रही है। अतीत में डॉट-कॉम बबल के समय भी डेटा सेंटर कंपनियां दिवालिया हुई थीं, जिन्हें बाद में इक्विनिक्स जैसी कंपनियों ने खरीद लिया था। लेकिन एआई डेटा सेंटरों के साथ समस्या यह है कि इनमें इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक चिप्स कुछ ही वर्षों में पुराने हो जाते हैं। अगर मांग में गिरावट आती है या बबल फूटता है, तो इन भारी भरकम ढांचों और गैस पावर प्लांटों का कोई उपयोगी इस्तेमाल नहीं रह जाएगा।\n\nन्यूजीलैंड का वैकल्पिक मॉडल और नियमन की आवश्यकता\nटेक उद्योग के इस शोषक मॉडल के विपरीत न्यूजीलैंड में एक अलग और सकारात्मक दिशा देखने को मिली है। वहां स्थानीय समुदाय के नेतृत्व में माओरी भाषा के लिए एक सटीक स्पीच रिकग्निशन मॉडल विकसित किया गया, जिसके डेटा को स्थानीय क्लाउड प्रदाताओं पर ही होस्ट किया गया। यह उदाहरण दिखाता है कि एआई और कंप्यूटिंग तकनीक का उपयोग स्थानीय संसाधनों और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी किया जा सकता है।\n\nसरकारों को केवल डेटा सेंटर निर्माण पर ही नहीं, बल्कि एआई उत्पादों पर भी कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता है। वर्ष 2023 के प्रारंभ में सैम ऑल्टमैन जैसे टेक दिग्गजों ने जनरेटिव एआई को लेकर जो वादे किए थे, उनमें से कई अब तक अधूरे हैं, जबकि इसके सामाजिक और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव खुलकर सामने आ रहे हैं। नीतियां बनाने वाले अधिकारियों को यह तय करना होगा कि सार्वजनिक संसाधनों की बलि देकर सिलिकॉन वैली के एआई प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना किस हद तक तर्कसंगत है।\n\nयूरोप, टेक्सास और फिनलैंड में बढ़ता जनआक्रोश\nयूरोपीय संघ में भी एआई की बढ़ती मांग और सदस्य देशों के जलवायु लक्ष्यों के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्राथमिकताएं, आर्थिक विकास की आकांक्षाएं और जलवायु प्रतिबद्धताएं आपस में टकरा रही हैं। अमेरिका के टेक्सास राज्य में डेटा सेंटरों के अत्यधिक निर्माण से वायु प्रदूषण कम करने के वर्षों के प्रयासों पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, औद्योगिक निर्माण सामग्री जैसे ग्रे पेंट की मांग में भी अचानक भारी उछाल आया है।\n\nफिनलैंड में गूगल को उस समय कड़े विरोध का सामना करना पड़ा जब उसने 1.3 करोड़ यूरो की डेटा सेंटर परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना ही 800 एकड़ से अधिक जंगल साफ कर दिए। गूगल को इस कदम के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी। यह घटना साबित करती है कि दुनिया भर में आम लोग और स्थानीय समुदाय अब टेक बुनियादी ढांचे के नाम पर अपने पर्यावरण और संसाधनों के नुकसान को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।\n\nइसका आप पर असर\nडेटा सेंटर निर्माण का आम नागरिकों पर प्रभाव: एआई और टेक कंपनियों द्वारा तेजी से बनाए जा रहे डेटा सेंटर स्थानीय ऊर्जा और जल संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव डाल रहे हैं।\n\n• बिजली बिल और ग्रिड स्थिरता: डेटा सेंटरों द्वारा बड़े पैमाने पर बिजली की खपत किए जाने से आम नागरिकों के मासिक बिजली बिलों में बढ़ोतरी हो सकती है और गर्मियों के मौसम में ग्रिड फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।\n• पीने के पानी का संकट: सर्वरों को ठंडा रखने के लिए रोजाना लाखों गैलन पानी का इस्तेमाल होता है, जिससे स्थानीय जलस्तर गिर सकता है और सूखे की स्थिति बन सकती है।\n• पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर: निजी गैस पावर प्लांट चालू होने से वायु प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।\n• जलवायु लक्ष्यों को झटका: जीवाश्म ईंधन की बढ़ती खपत से कार्बन उत्सर्जन बढ़ेगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के राष्ट्रीय लक्ष्य पिछड़ सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजनरेटिव एआई के तेजी से प्रसार और टेक कंपनियों के बीच अधिक से अधिक कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने की अंधी होड़ के कारण डेटा सेंटरों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है।\n\n• एआई मॉडल की अत्यधिक ऊर्जा मांग: एआई मॉडल को ट्रेंड करने और चलाने के लिए पारंपरिक वेब सेवाओं की तुलना में भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है।\n• सार्वजनिक ग्रिड की सीमित क्षमता: राष्ट्रीय और स्थानीय बिजली ग्रिड के पास इस अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने की क्षमता नहीं है, जिससे टेक कंपनियां निजी गैस प्लांट लगा रही हैं।\n• कमजोर शुरुआती नियमन: सरकारों ने टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के लिए समय रहते कड़े नियम नहीं बनाए, जिससे कंपनियों को खुले तौर पर संसाधनों का दोहन करने का मौका मिला।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पेरिस मार्क्स की पुस्तक किस विषय पर केंद्रित है?\nयह पुस्तक टेक उद्योग की ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता की मांग और उसके खिलाफ दुनिया भर में हो रहे जनविरोध के इतिहास पर आधारित है।\n\n2. गूगल ने ओरेगन के द डालेस में कितना पानी इस्तेमाल किया था?\nसामुदायिक दबाव के बाद उजागर हुए आंकड़ों के अनुसार, गूगल उस शहर के कुल जल संसाधनों का 29 प्रतिशत इस्तेमाल कर रहा था।\n\n3. आयरलैंड के डबलिन में डेटा सेंटरों पर रोक क्यों लगाई गई थी?\nवर्ष 2021 में आयरलैंड के बिजली ग्रिड ऑपरेटर ने चेतावनी दी थी कि ग्रिड के पास नए डेटा सेंटरों को बिजली देने की पर्याप्त क्षमता नहीं बची है।\n\n4. फिनलैंड में गूगल पर क्या आरोप लगे हैं?\nगूगल ने 1.3 करोड़ यूरो की डेटा सेंटर परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना 800 एकड़ से अधिक जंगल साफ कर दिए थे।\n\n5. न्यूजीलैंड में माओरी भाषा के लिए कौन सा अलग मॉडल अपनाया गया?\nवहां समुदाय के नेतृत्व में स्थानीय क्लाउड प्रदाताओं का उपयोग करके माओरी भाषा के लिए एक सटीक स्पीच रिकग्निशन मॉडल तैयार किया गया।",
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  "category": "तकनीक",
  "publishedAt": "2026-10-25",
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    "कृत्रिम बुद्धिमत्ता",
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