# डिजिटल सेंधमारी से यूरोपीय सुपरमार्केट्स के फ्रिज उबलने लगे, खाद्य सुरक्षा पर गहराया संकट

> यूरोप के सात देशों में साइबर हमलों के जरिए सुपरमार्केट्स के कूलिंग सिस्टम का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर खाने-पीने का सामान खराब होने की नौबत आ गई।

**Type:** article · **Category:** तकनीक · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/technology/dijitala-sendhamari-se-european-supermarkets-ke-phrija-ubalane-lage-khadya-suraksha-para-gaharaya-snkata-55484 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर हमला, सुपरमार्केट्स, ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी, रेफ्रिजरेशन सिस्टम, यूरोप, खाद्य सुरक्षा, हवाई अड्डे, हैकिंग

आधुनिक दौर में साइबर हमलों की प्रकृति बहुत तेजी से और खतरनाक दिशा में बदल चुकी है। एक समय था जब डिजिटल घुसपैठ केवल कंप्यूटर फाइलों, बैंक खातों अथवा सरकारी वेबसाइटों तक ही सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब यह तकनीक से संचालित होने वाली भौतिक दुनिया की रोजमर्रा की बुनियादी व्यवस्थाओं को सीधे निशाना बना रही है। सोमवार, 2 नवंबर को सामने आई एक गंभीर घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों और खुदरा कारोबारियों को सन्न कर दिया। यूरोप के सात देशों में स्थित सुपरमार्केट्स की रेफ्रिजरेशन प्रणाली में अज्ञात हमलावरों ने अचानक सेंध लगा दी। इस हमले के कारण कई दुकानों में रखे फ्रीजर का तापमान असामान्य रूप से बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। नतीजा यह हुआ कि किराना दुकानों और बड़े स्टोर्स को खराब होने की आशंका वाले हजारों खाद्य पदार्थों को फौरन अलमारियों से हटाना पड़ा, ताकि ग्राहकों की सेहत को कोई खतरा न पहुंचे।

## यूरोप के सात देशों में खुदरा श्रृंखलाओं पर गहराया संकट
इस बड़े साइबर हमले का असर बेल्जियम, एस्टोनिया, फिनलैंड, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड और स्वीडन के सुपरमार्केट्स पर व्यापक रूप से देखने को मिला। बेल्जियम में प्रसिद्ध खुदरा श्रृंखला कैरेफोर के लगभग 15 स्टोर इस तकनीकी व्यवधान से सीधे प्रभावित हुए। वहीं आयरलैंड में सुपरवैल्यू के 13 स्टोर्स के कूलिंग तंत्र में अचानक तकनीकी खामी दर्ज की गई। उत्तरी यूरोप के देश स्वीडन में आईसीए और कूप जैसी प्रमुख खुदरा कंपनियों ने भी आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि उनके कुछ स्टोरों में रेफ्रिजरेशन उपकरणों की कार्यप्रणाली में ऐसी ही अप्रत्याशित समस्या सामने आई थी। हैरत की बात यह है कि इन हमलों की जिम्मेदारी अब तक किसी भी हैकर समूह अथवा संगठन ने नहीं ली है। सुरक्षा और जांच एजेंसियां भी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि हालिया घटनाओं और पिछले महीने हुई ऐसी ही वारदातों के तार किसी एक संगठित गिरोह से जुड़े हैं या इसके पीछे अलग-अलग तत्व सक्रिय हैं।

## सेंट्रल डिजिटल सिस्टम की कमजोर कड़ी का फायदा
खुदरा क्षेत्र पर केंद्रित इस तरह के हमले की यह कोई पहली वारदात नहीं थी। इससे पहले 12 अक्टूबर को फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केट और खुदरा दुकानों की रेफ्रिजरेशन व्यवस्था को भी बिल्कुल इसी तरह के साइबर हमले का शिकार बनाया गया था। आधुनिक खुदरा कारोबार में बड़े स्टोर्स के भीतर चलने वाले सैकड़ों फ्रिज और डीप फ्रीजर किसी अलग स्विच से नहीं, बल्कि एक केंद्रीय डिजिटल सिस्टम से जुड़े होते हैं। इस नेटवर्क के जरिए तकनीकी कर्मचारी एक ही नियंत्रण कक्ष से सभी कूलिंग यूनिट्स के तापमान पर लगातार नजर रखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर दूर बैठकर भी कंप्यूटर की मदद से सेटिंग्स बदल सकते हैं। यदि इस केंद्रीय प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा दीवार कमजोर हो या उसमें सुरक्षा खामियां मौजूद हों, तो इंटरनेट के जरिए बाहरी हमलावर आसानी से अनधिकृत प्रवेश पा लेते हैं। अंदर घुसते ही वे दूर बैठे तापमान को अत्यधिक बढ़ा सकते हैं अथवा पूरी कूलिंग व्यवस्था को बंद कर सकते हैं। इसके चलते किसी भी स्टोर में रखे दूध, मांस, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के लिए हमलावरों को किसी दुकान के भीतर भौतिक रूप से मौजूद होने की रत्ती भर जरूरत नहीं पड़ती।

## भौतिक मशीनों और सेवाओं को पंगु बनाते हालिया साइबर हमले
यूरोप के खुदरा क्षेत्र में घटी इन घटनाओं को पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान वैश्विक स्तर पर हुए अन्य साइबर हमलों के परिप्रेक्ष्य में देखने पर एक बहुत बड़ा बदलाव साफ नजर आता है। साइबर हमलों का प्रभाव अब सिर्फ कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखने वाले एरर मैसेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वास्तविक दुनिया में चलने वाली सार्वजनिक सेवाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं और औद्योगिक मशीनों को सीधे ठप कर रहा है। इसका एक प्रमुख उदाहरण सितंबर 2023 में देखने को मिला था, जब अमेरिका की दिग्गज हॉस्पिटैलिटी कंपनी एमजीएम रिसॉर्ट्स पर भयानक हमला हुआ। हैकरों ने कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क में घुसपैठ कर होटल की कमरों की बुकिंग, डिजिटल चेक-इन, कमरों की इलेक्ट्रॉनिक चाबियों और पेमेंट प्रोसेसिंग जैसी सभी डिजिटल सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके चलते होटल कारोबार को कई दिनों तक भारी अव्यवस्था झेलनी पड़ी थी।

इसके कुछ ही महीनों बाद, फरवरी 2024 में अमेरिका की समूची स्वास्थ्य भुगतान व्यवस्था को एक भीषण झटका लगा। चेंज हेल्थकेयर नामक कंपनी पर हुए रैनसमवेयर हमले के कारण अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के भुगतान तथा दवाओं के वितरण की प्रक्रियाएं बुरी तरह लड़खड़ा गईं। यह कंपनी अमेरिकी स्वास्थ्य ढांचे में बीमा दावों और चिकित्सा भुगतानों के निपटान में रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। इसका सिस्टम बाधित होते ही कई अस्पतालों और दवाखानों को मरीजों के इलाज तथा बिलिंग के लिए वैकल्पिक कागजी अथवा मैनुअल तरीकों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

## विमानन और ऑटोमोबाइल क्षेत्र भी बने सॉफ्ट टारगेट
परिवहन और यात्रा उद्योग भी इन हमलों की जद से बच नहीं सके हैं। 22 जुलाई 2024 को क्रोएशिया के स्प्लिट एयरपोर्ट पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिसके चलते हवाई अड्डे के आईटी सिस्टम ठप हो गए और कर्मचारियों को यात्रियों की जांच व बोर्डिंग से जुड़े कई काम कागजी व मैनुअल तरीके से करने पड़े। इस रुकावट के कारण उड़ानों के समयबद्ध संचालन में भारी व्यवधान पैदा हुआ। ठीक एक महीने बाद, अगस्त 2024 में अमेरिका के सिएटल-टकोमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साइबर हमले के चलते पैसेंजर चेक-इन, सामान प्रबंधन और अन्य आवश्यक डिजिटल सेवाएं घंटों तक बाधित रहीं।

वर्ष 2025 में यह संकट और भी गंभीर व स्पष्ट होकर उभरा। 19 सितंबर 2025 को ब्रिटिश सरकार ने प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले के व्यापक प्रभावों का आकलन करने के लिए कंपनी प्रबंधन और ऑटोमोबाइल उद्योग के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय आपात बैठक की। इस हमले के कारण वाहनों के कारखानों में उत्पादन गतिविधियां सीधे तौर पर ठप पड़ गईं और इसका प्रतिकूल असर कंपनी के कलपुर्जे बनाने वाले छोटे-बड़े आपूर्तिकर्ताओं तक तेजी से फैल गया।

## खुदरा कारोबार और हवाई अड्डों पर दोहरा आघात
ब्रिटेन के खुदरा बाजार में भी वर्ष 2025 के दौरान साइबर अपराधियों ने अपनी पैठ बनाई। अप्रैल 2025 में ब्रिटेन की मशहूर खुदरा कंपनी मार्क्स एंड स्पेंसर ने अपने तंत्र पर साइबर अटैक होने की सार्वजनिक पुष्टि की थी। बाद में 13 मई 2025 को कंपनी ने स्वीकार किया कि इस डिजिटल हमले के दौरान कुछ ग्राहकों का निजी डेटा चोरी हो गया था। इस घटना के कारण मार्क्स एंड स्पेंसर की ऑनलाइन खरीदारी सेवाएं और सामान्य व्यावसायिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। हालांकि यह मामला सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेटर को गर्म करने वाले हमलों से स्वरूप में अलग था, लेकिन दोनों ही घटनाएं साबित करती हैं कि आधुनिक खुदरा तंत्र पर किया गया कोई भी डिजिटल वार सीधे आम उपभोक्ताओं और स्टोर के जमीनी कामकाज को नुकसान पहुंचाता है।

उसी वर्ष वैश्विक विमानन क्षेत्र को हिला देने वाला एक और बड़ा झटका 19 सितंबर 2025 को लगा। विमानन सॉफ्टवेयर प्रदाता कोलिन्स एयरोस्पेस के म्यूज सॉफ्टवेयर पर हुए साइबर हमले ने यूरोप के कई प्रमुख हवाई अड्डों की चेक-इन और बोर्डिंग प्रणाली को पंगु बना दिया। लंदन के हीथ्रो, बेल्जियम के ब्रुसेल्स और जर्मनी के बर्लिन सहित दर्जनों व्यस्त हवाई अड्डों पर हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और एयरलाइंस कर्मचारियों को लंबी कतारों के बीच सभी कागजी काम हाथ से पूरे करने पड़े।

## आईटी बनाम ओटी: सुरक्षा का बदलता दायरा
वर्ष 2026 में सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर पर सिलसिलेवार हुए ये हमले साइबर युद्ध के इस बदलते खतरे की सबसे नई और चिंताजनक कड़ी बन चुके हैं। 12 अक्टूबर को फ्रांस में सैकड़ों दुकानों की शीतलन व्यवस्था प्रभावित होने के बाद 2 नवंबर को यूरोप के सात देशों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति देखी गई। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि कई स्टोरों में लगे पुराने सॉफ्टवेयर और नियमित सुरक्षा अपडेट की कमी को हैकरों ने आसान रास्ते के रूप में इस्तेमाल किया।

साइबर अपराध की इस नई रणनीति को समझने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी यानी ओटी के बीच के मूलभूत अंतर को पहचानना आवश्यक है। आमतौर पर कंप्यूटर, डेटा सेंटर, इंटरनेट वेबसाइट्स और क्लाउड सर्वर पर होने वाले हमलों को आईटी सिस्टम पर हमला माना जाता है, जहां मुख्य लक्ष्य डेटा चुराना या फाइलें लॉक करना होता है। इसके उलट, कारखानों की मशीनों, भौतिक उपकरणों, तापमान नियंत्रकों और औद्योगिक प्रक्रियाओं को संचालित करने वाले डिजिटल तंत्र को ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) कहा जाता है। बिजली उत्पादन संयंत्र, शहरों की पेयजल आपूर्ति, विनिर्माण संयंत्र, हवाई अड्डों के कन्वेयर बेल्ट और सुपरमार्केट्स के रेफ्रिजरेशन सिस्टम इसी ओटी के दायरे में आते हैं। जब साइबर हमलावर ओटी नेटवर्क में सेंध लगाते हैं, तो उनका नुकसान डेटा की चोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भौतिक मशीनों का संचालन ठप हो जाता है अथवा वे गलत तरीके से काम करने लगती हैं, जिससे वास्तविक जीवन में तत्काल आर्थिक व मानवीय संकट खड़ा हो जाता है।

## इसका आप पर असर
सुपरमार्केट के कूलिंग सिस्टम और बुनियादी सेवाओं पर साइबर हमलों से आम उपभोक्ताओं के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजों की सुरक्षा और उपलब्धता पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।

- **खाद्य सुरक्षा:** दुकानों में फ्रिज का तापमान अचानक बढ़ने से रखे हुए मांस, डेयरी उत्पाद और तैयार भोजन के खराब होने का गंभीर जोखिम रहता है। उपभोक्ताओं को ऐसे किसी भी उत्पाद को खरीदते समय उसकी ताजगी और स्टोर की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- **आपूर्ति श्रृंखला:** हजारों टन खाद्य सामग्री को नष्ट करने के चलते स्थानीय बाजारों में जरूरी वस्तुओं की अस्थाई कमी हो सकती है। स्टोर प्रबंधन को आपातकालीन स्टॉक मंगाने में अतिरिक्त समय और लागत लग सकती है।
- **डिजिटल निर्भरता:** खुदरा दुकानों, अस्पतालों और हवाई अड्डों पर ऑटोमेशन में रुकावट आने पर आम जनता को लंबी कतारों और सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ता है। लोगों को डिजिटल व्यवस्था ठप होने की स्थिति में नकदी अथवा कागजी विकल्पों के लिए भी तैयार रहना होगा।
- **खुदरा कीमतें:** भारी मात्रा में खराब हुए सामान के नुकसान और नए सुरक्षा उपायों की लागत अंततः उत्पाद की कीमतों पर असर डाल सकती है। खुदरा विक्रेता भविष्य में साइबर सुरक्षा खर्च की भरपाई के लिए मार्जिन बढ़ा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सुपरमार्केट्स में कूलिंग सिस्टम पर हुए ये हमले केंद्रीय प्रबंधन सॉफ्टवेयर में मौजूद तकनीकी कमजोरियों और इंटरनेट से जुड़ी ऑपरेशनल मशीनों की लचर सुरक्षा के कारण संभव हुए हैं। हालांकि इस समन्वित साजिश के पीछे मौजूद हमलावरों की सटीक पहचान अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** कई यूरोपीय खुदरा श्रृंखलाओं के रेफ्रिजरेशन सिस्टम एक केंद्रीय डिजिटल कंसोल से संचालित होते थे, जिसमें अनधिकृत घुसपैठ करके तापमान को 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा दिया गया। जांच में कुछ उपकरणों में पुराने सॉफ्टवेयर और नियमित सुरक्षा पैच की कमी को प्रमुख कमजोरी पाया गया है।
- **ओटी सुरक्षा में लापरवाही:** भौतिक मशीनों को नियंत्रित करने वाली ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी को इंटरनेट से जोड़ते समय मजबूत प्रमाणीकरण और नेटवर्क आइसोलेशन के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। इससे हमलावरों को बिना किसी स्टोर में जाए दूर से ही पूरे शीतलन ढांचे को नियंत्रित करने की छूट मिल गई।
- **बदलता हमलावर पैटर्न:** सितंबर 2023 के होटल हमलों, 2024 के हवाई अड्डा व्यवधानों और 2025 में विमानन सॉफ्टवेयर विफलताओं के बाद हैकर्स अब वास्तविक दुनिया के बुनियादी ढांचे को पंगु बनाने की रणनीति पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। जांच एजेंसियों की ओर से अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुपरमार्केट्स पर हुए इस नए साइबर हमले में वास्तव में क्या हुआ?
यूरोप के सात देशों में हैकरों ने सुपरमार्केट्स के रेफ्रिजरेशन सिस्टम को हैक कर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा दिया, जिससे दुकानों को खराब होने वाले खाद्य पदार्थ हटाने पड़े।

### 2. इस साइबर हमले से कौन-कौन से देश और स्टोर प्रभावित हुए?
बेल्जियम, एस्टोनिया, फिनलैंड, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड और स्वीडन प्रभावित हुए, जिनमें कैरेफोर, सुपरवैल्यू, आईसीए और कूप जैसी खुदरा श्रृंखलाएं शामिल हैं।

### 3. हैकरों ने बिना स्टोर में जाए फ्रीजर का तापमान कैसे बढ़ा दिया?
स्टोर्स के सभी फ्रिज एक केंद्रीय डिजिटल सिस्टम से जुड़े थे, जिसमें इंटरनेट के जरिए अनधिकृत प्रवेश कर हमलावरों ने दूर से ही तापमान की सेटिंग्स बदल दीं।

### 4. क्या इस हमले की जिम्मेदारी किसी हैकर समूह ने ली है?
नहीं, किसी भी समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है और सुरक्षा एजेंसियां भी अभी किसी गिरोह की पुष्टि नहीं कर पाई हैं।

### 5. आईटी और ओटी हमलों में क्या मुख्य अंतर होता है?
आईटी हमले कंप्यूटर और डेटा चोरी तक सीमित होते हैं, जबकि ओटी हमले मशीनों, तापमान नियंत्रकों और भौतिक प्रक्रियाओं को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं।

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