एस्टोनिया में 2.7 करोड़ डॉलर की बड़ी सरकारी चूक से पैदा हुआ क्रांतिकारी एआई 'फ़कअप फ़ाइंडर' एस्टोनिया के टैक्स कानून में एक भाषाई गलती के कारण सरकार को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ, जिसके बाद एआई की मदद से सरकारी मसौदों की जांच करने वाला एक अनोखा टूल तैयार किया गया है। एस्टोनिया की संसद में हुई एक साधारण सी भाषाई चूक ने देश के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन इस बड़ी गलती ने सरकारी कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के इस्तेमाल की एक नई राह खोल दी है। दिसंबर के महीने में एस्टोनिया की संसद, जिसे 'रियागीकोगु' कहा जाता है, ने देश के गैंबलिंग टैक्स एक्ट (जुआ कर अधिनियम) में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन पारित किए थे। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रिमोट और ऑनलाइन जुआ गतिविधियों पर लगने वाले कर की दरों को कम करना और उन्हें विनियमित करना था। हालांकि, कानून के मसौदे को तैयार करते समय एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली भाषाई चूक हो गई। नए कानून के अंतिम मसौदे की शब्दावली में उस विशिष्ट वर्ष के लिए केवल 'स्किल गेम्स' (कौशल आधारित खेलों) का उल्लेख किया गया, जबकि सामान्य जुआ खेलों या रिमोट गैंबलिंग को इसमें शामिल करना छोड़ दिया गया। एस्टोनिया का पूरा जुआ उद्योग लगभग 300 मिलियन यूरो (लगभग 343 मिलियन डॉलर) का है, और इसका ऑनलाइन जुआ बाजार पूरे यूरोपीय संघ (EU) में सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। इस एक छोटी सी कानूनी चूक का नतीजा यह हुआ कि ऑनलाइन कैसिनो पूरे एक साल के लिए टैक्स के दायरे से बाहर हो गए। इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण एस्टोनिया सरकार को उस वर्ष लगभग 24 मिलियन यूरो (लगभग 27.4 मिलियन डॉलर) के कर राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस भारी गलती का खुलासा और एआई का प्रवेश इस ऐतिहासिक भूल का पता सबसे पहले संसद या सरकारी अधिकारियों को नहीं, बल्कि एक निजी जुआ ऑपरेटर के कानूनी सलाहकार को चला। जब इस गंभीर चूक की जानकारी सार्वजनिक हुई, तो सरकार के भीतर हड़कंप मच गया। इस बड़े प्रशासनिक संकट के बीच, देश के डिजिटल परिवर्तन विभाग के पूर्व अवर सचिव लुकास इल्वेस ने एक दिलचस्प प्रयोग करने का फैसला किया। उन्होंने इस विवादित कानून के मसौदे को दो प्रमुख एआई मॉडलों, क्लॉड और जेमिनी में डाल दिया। लुकास इल्वेस ने बताया कि दोनों ही एआई प्रणालियों ने बिना किसी देरी के तुरंत कानून के मसौदे में मौजूद उस गंभीर विसंगति और भाषाई गलती को पकड़ लिया, जिसे इंसान देखने में चूक गए थे। इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि इंसानी आंखें जिन गलतियों को नजरअंदाज कर देती हैं, एआई उन्हें पलक झपकते ही पहचान सकता है। एपीएसएकालेइडजा यानी 'फ़कअप फ़ाइंडर' का जन्म इस अनुभव से प्रेरित होकर लुकास इल्वेस ने कुछ ही घंटों के भीतर एक अनोखा प्रोटोटाइप टूल विकसित कर दिया। उन्होंने इस टूल को 'एपीएसएकालेइडजा' (Apsakaleidja) नाम दिया, जिसका अंग्रेजी अनुवाद 'फ़कअप फ़ाइंडर' (गलतियां खोजने वाला) किया गया है। यह टूल सीधे एस्टोनिया की संसद की आधिकारिक वेबसाइट से प्रस्तावित विधेयकों और कानूनों के ड्राफ्ट को स्वचालित रूप से खींचता है। इसके बाद, यह एआई के जरिए उन मसौदों का बारीकी से विश्लेषण करता है और उनमें मौजूद कमियों, जैसे कि गलत संदर्भों, विरोधाभासी बयानों, गणितीय त्रुटियों और व्यावहारिक रूप से असंभव तारीखों को चिह्नित करता है। यह टूल मिली हुई कमियों को उनकी गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों - उच्च, मध्यम या कम जोखिम - में वर्गीकृत करता है। वर्तमान में संसद की वेबसाइट पर सूचीबद्ध 112 विधेयकों में से इस टूल ने 102 विधेयकों को 'उच्च जोखिम' की श्रेणी में रखा है। इस टूल के जरिए यह भी दिखाया गया कि कैसे मसौदे में विरोधाभासी बातें लिखी गई थीं। लुकास इल्वेस ने इस एआई टूल का सजीव प्रदर्शन देश के राष्ट्रीय टेलीविजन पर भी किया, जिसे देखकर शो के एंकर भी दंग रह गए। सरकारी नीतियों और एआई को लेकर नया दृष्टिकोण भले ही यह टैक्स चूक एस्टोनिया सरकार के लिए बेहद शर्मनाक थी, लेकिन इसने सरकारी तंत्र के भीतर एक बड़े बदलाव की नींव रख दी। एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्तन मिखाल ने इस घटनाक्रम पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि इस परिस्थिति ने यह साबित कर दिया है कि एआई सरकारी कामकाज में एक बेहद मददगार सहायक की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इस संकट के जवाब में तैयार किए गए 'वाइब-कोडेड' प्लेटफॉर्म के जरिए यह साफ हो गया है कि कैसे एआई आधारित एजेंटिक टूल्स नागरिक समाज और आम नागरिकों को सशक्त बना सकते हैं। इस घटना के बाद एस्टोनिया ने सरकारी स्तर पर एआई के इस्तेमाल को और तेज करने का फैसला किया है। इसी साल जनवरी में प्रधानमंत्री क्रिस्तन मिखाल ने सुझाव दिया था कि एस्टोनिया कानून का मसौदा तैयार करने के शुरुआती चरणों में ही 'फ़कअप फ़ाइंडर' जैसे एआई उपकरणों का उपयोग कर सकता है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी कर या कानूनी खामी को पहले ही रोका जा सके। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने 'ईस्ती.एआई' (Eesti.ai) नामक एक राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एस्टोनिया के नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को एआई के उपयोग में कुशल बनाना है, ताकि साल 2035 तक देश की उत्पादकता को दोगुना किया जा सके। इस महात्वाकांक्षी पहल के सलाहकार बोर्ड में राइड-हेलिंग कंपनी 'बोल्ट' के संस्थापक मारकुस विलिग और इस अनोखे टूल के निर्माता लुकास इल्वेस खुद शामिल हैं। एआई को कानूनी मान्यता और डिजिटल पहचान देने की तैयारी एस्टोनिया की एआई यात्रा केवल कानून की गलतियां पकड़ने तक सीमित नहीं है। अप्रैल के महीने में सरकार ने संसद को एक विशेष विधेयक भेजा, जो राज्य और स्थानीय सरकारों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने के लिए एआई सहित विभिन्न डिजिटल समाधानों का उपयोग करने का कानूनी अधिकार देता है। इस विधेयक पर संसद में गहन बहस चल रही है ताकि इसे अंतिम रूप देकर कानून का रूप दिया जा सके। इसके अलावा, जून में हुई 'ईस्ती.एआई' की एक बैठक में प्रधानमंत्री मिखाल ने घोषणा की कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो एस्टोनिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो एआई एजेंटों के लिए आधिकारिक 'डिजिटल पहचान' (डिजिटल आइडेंटिटी) का निर्माण करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के लिए यह एक बिल्कुल नया माहौल है, जो बेहद लचीलेपन और तकनीकी बदलावों के साथ तेजी से तालमेल बिठाने की क्षमता की मांग करता है। एस्टोनिया इस तरह के बदलावों को अपनाने के लिए दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है। इसकी मुख्य वजह यह है कि एस्टोनिया पहले से ही एक डिजिटल-प्रथम राष्ट्र रहा है, जहां वर्तमान में 99 प्रतिशत सरकारी सेवाएं पूरी तरह से ऑनलाइन उपलब्ध हैं। डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एस्टोनिया को दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल माना जाता है। पहले किए गए डिजिटल निवेशों की बदौलत ही आज यह देश एआई युग में अधिक गति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम हो पाया है। नैतिक चिंताएं और इंसानी नियंत्रण की बहस यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैफोर्डशायर में तकनीकी नैतिकता पर शोध करने वाली कैथरीन फ्लिक ने इस पूरे मामले पर एक बुनियादी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जुआ कर की यह त्रुटि यह सोचने पर मजबूर करती है कि कानून बनाने की प्रक्रिया के दौरान इंसान इस समीक्षा प्रक्रिया को ठीक से क्यों नहीं कर रहे हैं? कैथरीन का मानना है कि किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले किसी इंसान को बैठकर पूरे मसौदे को उसकी पृष्ठभूमि और संदर्भ के साथ ध्यान से पढ़ना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह कानून हर तरह से सही है। यही वजह है कि एस्टोनिया की संसद 'रियागीकोगु' में इस बात पर बहस हो रही है कि इस पूरी प्रक्रिया में इंसानी नियंत्रण यानी 'ह्यूमन इन द लूप' को कैसे बनाए रखा जाए। 'ईस्ती.एआई' की टीम लीडर कीर्के मार ने बताया कि संसद में पेश किया गया विधेयक जानबूझकर काफी व्यापक रखा गया है। एस्टोनिया की वर्तमान सोच यह है कि सरकारी फैसलों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहला नियम-आधारित निर्णय और दूसरा विवेकाधीन निर्णय। जिन मामलों में परिणाम पूरी तरह से जांचे जा सकने वाले तथ्यों पर निर्भर करते हैं - जैसे कि यदि आप तय पात्रता पूरी करते हैं तो आपको लाभ मिलेगा - वहां ऑटोमेशन या स्वचालन पूरी तरह से उपयुक्त है। नागरिक अधिकार और एआई की जवाबदेही कीर्के मार और लुकास इल्वेस का तर्क है कि यदि सरकार के पास पहले से ही किसी नागरिक की पात्रता से जुड़ा डेटा उपलब्ध है, तो उसे सरकारी लाभ पाने के लिए कोई फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए; उसे सीधे सूचित किया जाना चाहिए कि वह इस लाभ के लिए पात्र है। एस्टोनिया में टैक्स डिक्लेरेशन पहले से ही प्री-फिल्ड होते हैं, और भविष्य में एआई एजेंट इन कर घोषणाओं को पूरी तरह से तैयार करने और दाखिल करने का काम कर सकते हैं, जहां नागरिक को केवल पुष्टि करनी होगी या जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करना होगा। हालांकि, जिन मामलों में परिस्थितियां जटिल हों और जहां विभिन्न हितों को तौलने या किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता हो, वहां शुरुआत से ही इंसानी अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए। इस एआई संचालित प्रणाली में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। कीर्के मार और इल्वेस के अनुसार, यदि कोई नागरिक एआई के निर्णय से असहमत है या अपनी बात रखना चाहता है, तो वह किसी भी समय सुनवाई के अपने अधिकार का उपयोग कर सकता है। ऐसा करते ही स्वचालित प्रक्रिया तुरंत रुक जाएगी और एक मानव अधिकारी उस मामले को अपने हाथ में ले लेगा। इसके अलावा, हर स्वचालित प्रशासनिक निर्णय का एक पारदर्शी ऑडिट ट्रेल होना अनिवार्य होगा, जिससे यह पता चल सके कि किस डेटा का उपयोग किया गया, कौन सा नियम लागू किया गया, निर्णय कब लिया गया और नागरिक इसे कैसे चुनौती दे सकता है। एस्टोनिया के ई-रेजीडेंसी कार्यक्रम की प्रबंध निदेशक लीना वाहत्रास ने एआई जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि सबसे बड़ा जोखिम बिना किसी जवाबदेही के बड़े पैमाने पर काम करने वाली एआई प्रणालियों से है, जहां उनके कार्यों के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ई-रेजीडेंसी कार्यक्रम दुनिया भर के लोगों को एस्टोनियाई व्यापार सेवाओं का ऑनलाइन उपयोग करने के लिए डिजिटल पहचान प्रदान करता है। लीना ने स्पष्ट किया कि जब एआई एजेंट नागरिकों या कंपनियों की ओर से बैंकों, सरकारी रजिस्टरों और अन्य प्रणालियों के साथ बातचीत करेंगे, तो यह पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए कि वह एजेंट किसका है, वह किसके अधिकार के तहत काम कर रहा है और उसके कार्यों के लिए अंतिम रूप से कौन जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री क्रिस्तन मिखाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि एआई केवल एक सहायक है, कोई अंतिम सत्ता नहीं। लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और मतदाताओं की इच्छा का स्थान कोई तकनीक नहीं ले सकती। इसका आप पर असर वैश्विक और भारतीय नागरिकों के लिए: यह मामला दर्शाता है कि कैसे भविष्य में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और जटिल फॉर्म भरने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो सकती है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और तेजी से लोगों तक पहुंचेगा। प्रौद्योगिकी और नीति क्षेत्र में: सरकारी कानूनों और कर नीतियों में होने वाली लिपिकीय गलतियों को रोकने के लिए एआई का उपयोग प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाएगा और करदाताओं के पैसे की बर्बादी को रोकेगा। सवाल-जवाब 1. एस्टोनिया के गैंबलिंग टैक्स एक्ट में क्या गलती हुई थी? कानून के मसौदे की शब्दावली में उस विशिष्ट वर्ष के लिए केवल 'स्किल गेम्स' का उल्लेख किया गया था, जिससे सामान्य जुआ और रिमोट गैंबलिंग गलती से टैक्स के दायरे से बाहर हो गए। 2. इस कानूनन चूक के कारण सरकार को कितना नुकसान उठाना पड़ा? इस एक चूक की वजह से ऑनलाइन कैसिनो एक साल तक टैक्स के दायरे से बाहर रहे, जिससे एस्टोनिया सरकार को लगभग 24 मिलियन यूरो (2.74 करोड़ डॉलर) के राजस्व का नुकसान हुआ। 3. एपीएसएकालेइडजा या 'फ़कअप फ़ाइंडर' क्या है? यह लुकास इल्वेस द्वारा बनाया गया एक एआई प्रोटोटाइप टूल है, जो संसद की वेबसाइट से विधेयकों के मसौदे खींचकर उनमें विरोधाभास, गणितीय गलतियां और गलत संदर्भों को खोजता है। 4. क्या एस्टोनिया एआई को कोई आधिकारिक पहचान देने जा रहा है? हां, एस्टोनिया की योजना एआई एजेंटों के लिए आधिकारिक डिजिटल पहचान (डिजिटल आइडेंटिटी) बनाने वाला दुनिया का पहला देश बनने की है। 5. एआई के फैसलों के खिलाफ नागरिकों को क्या सुरक्षा मिलेगी? नागरिकों के पास 'सुनवाई का अधिकार' होगा, जिससे स्वचालित प्रक्रिया रुक जाएगी और मामला मानव अधिकारी को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा हर फैसले का एक पारदर्शी ऑडिट ट्रेल होगा। प्रेरणा और सबक नवाचार और सीख: - शिकायत करने के बजाय समाधान ढूंढें: लुकास इल्वेस ने सरकारी गलती पर केवल मूकदर्शक बने रहने के बजाय कुछ ही घंटों में एक काम करने वाला एआई प्रोटोटाइप टूल बनाकर समाधान पेश किया। - गलतियों को अवसर में बदलें: एस्टोनियाई सरकार ने करोड़ों डॉलर के नुकसान की शर्मिंदगी को दबाने के बजाय इसे अपने पूरे प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। - सीमाएं तय करना जरूरी है: तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, नैतिक सीमाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए 'ह्यूमन इन द लूप' (इंसानी नियंत्रण) का होना अनिवार्य है। https://trendkia.com/technology/estonia-men-2-7-karora-dolara-ki-bari-sarakari-chuka-se-paida-hua-krantikari-ai-fuckup-finder-6129 TrendKia — Har trend, sabse pehle.