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  "title": "हैदराबाद में बनेगा देश का पहला डेटा सेंटर सिटी: 1500 एकड़ में फैला होगा मेगा प्रोजेक्ट",
  "summary": "तेलंगाना सरकार हैदराबाद के पास एक विशाल डेटा सेंटर सिटी विकसित करने की तैयारी कर रही है, जिससे वैश्विक तकनीकी दिग्गजों को एक साथ लाया जा सके। यह परियोजना 1500 एकड़ में फैली होगी और इसमें बिजली व पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष मास्टर प्लान लागू किया जाएगा।",
  "content": "हैदराबाद अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया में एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के समीप भारत की पहली समर्पित 'डेटा सेंटर सिटी' स्थापित करने की दिशा में एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस विशाल प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य वैश्विक क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स, डेटा सेंटर संचालकों और दिग्गज टेक कंपनियों को एक ही स्थान पर एकत्रित करना है। इस पहल के साथ ही तेलंगाना का इरादा वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में खुद को एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।\n\nप्रोजेक्ट की रूपरेखा और जमीन का चयन\nसूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल मेगा प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने चेवेल्ला मंडल स्थित अलूर गांव में 1,500 एकड़ भूमि चिन्हित की है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस पूरी योजना को लेकर काफी सक्रियता दिखाई है और संबंधित अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं, बुनियादी ढांचे की जरूरतों और विकास के चरणों पर आधारित एक व्यापक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर इस पूरी प्रक्रिया को समयसीमा के भीतर पूरा करने पर है।\n\nहैदराबाद बना वैश्विक टेक कंपनियों का गढ़\nरणनीतिक और भौगोलिक स्थितियों के कारण हैदराबाद पहले से ही अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय निगमों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। वर्तमान में शहर में अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के अलावा CtrlS, CapitaLand, STT Global, NTT Data, Sify, और Tillman Global Holdings जैसी नामी डेटा सेंटर कंपनियां सक्रिय हैं। अगर मौजूदा क्षमता की बात की जाए, तो हैदराबाद में फिलहाल 150 से 200 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। इसके साथ ही, भविष्य की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लगभग 5 GW (गीगावाट) संयुक्त क्षमता वाली अनेक बड़ी परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।\n\nबिजली और जल संसाधनों का मास्टर प्लान\nडेटा सेंटरों के लिए भारी मात्रा में निर्बाध बिजली और पानी की आपूर्ति सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियां मानी जाती हैं। तेलंगाना सरकार ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की है। पानी की समस्या से निजात पाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल को अपनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत, हैदराबाद जल बोर्ड के 41 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) का उपयोग करके चंदनवेल्ली और भारत फ्यूचर सिटी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को रोजाना 530 मिलियन लीटर उपचारित वेस्टवाटर उपलब्ध कराया जाएगा। बिजली आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए भी सरकार 'ओपन एक्सेस पावर सप्लाई' नीति पर काम कर रही है, ताकि डेटा सेंटरों को किसी भी प्रकार की रुकावट न झेलनी पड़े।\n\nनिवेश का बड़ा केंद्र बनेंगे अलूर और चंदनवेल्ली\nहैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के करीब होना, आउटर रिंग रोड की शानदार कनेक्टिविटी और मजबूत बुनियादी ढांचा इन इलाकों को निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक बनाता है। अलूर, चंदनवेल्ली और फैब सिटी जैसे क्षेत्र जल्द ही ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब के रूप में पहचाने जाएंगे। जानकारों का मानना है कि इस डेटा सेंटर सिटी के बनने से न केवल विदेशी निवेश के अरबों डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: डिजिटल क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी, जिससे अधिक तकनीकी कंपनियां देश में निवेश के लिए आकर्षित होंगी।\n\nहैदराबाद में: स्थानीय युवाओं के लिए हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और शहर का रियल एस्टेट व औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हैदराबाद में बनने वाले डेटा सेंटर सिटी का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइस मेगा प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया भर के प्रमुख डेटा सेंटर ऑपरेटरों, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स और दिग्गज तकनीकी कंपनियों को एक ही जगह पर लाकर तेलंगाना को वैश्विक डिजिटल महाशक्ति बनाना है।\n\n2. यह डेटा सेंटर सिटी कितनी जमीन पर फैलेगी?\nयह विशाल डेटा सेंटर सिटी लगभग 1,500 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी, जिसे चेवेल्ला मंडल के अलूर गांव में चिन्हित किया गया है।\n\n3. पानी की भारी जरूरत को सरकार कैसे पूरा करेगी?\nसरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत 41 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से 530 मिलियन लीटर उपचारित वेस्टवाटर रोजाना औद्योगिक क्षेत्रों को उपलब्ध कराएगी।\n\n4. वर्तमान में हैदराबाद में कितनी डेटा सेंटर क्षमता सक्रिय है?\nहैदराबाद में वर्तमान में 150 से 200 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर पूरी तरह से सक्रिय हैं।",
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  "category": "तकनीक",
  "publishedAt": "2026-06-27",
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