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  "type": "article",
  "title": "संसदीय समिति 2026-27 में सोशल मीडिया नियमन, सेफ AI और साइबर सुरक्षा की करेगी व्यापक समीक्षा",
  "summary": "संसदीय स्थायी समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए 17 प्रमुख विषयों का चयन किया है, जिसमें सोशल मीडिया नियंत्रण, डीपफेक, सेफ AI और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम शामिल हैं।",
  "content": "संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने वर्ष 2026-27 के दौरान विस्तृत जांच और समीक्षा के लिए 17 अहम विषयों का चयन किया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, संसदीय समिति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमन, सुरक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI, डीपफेक से जुड़े खतरों, साइबर सुरक्षा व्यवस्था और देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की बारीकी से पड़ताल करेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब इंटरनेट पर ऑनलाइन नुकसान, भ्रामक सूचनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विवादित कामकाज को लेकर जनहित से जुड़ी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।\n\nडिजिटल मंचों और सुरक्षा मानकों पर बढ़ती चिंताएं\nसंसदीय समिति का यह विस्तृत कार्ययोजना कार्यक्रम सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री यानी CSAM के प्रसार, नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त पोस्ट्स और मनमाने ढंग से की जाने वाली कथित सेंसरशिप के मामलों के सामने आने के बाद तय हुआ है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा निगरानी प्रणाली और कानूनी प्रवर्तन में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संसदीय पैनल ने 2026-27 के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और AI तकनीक से जुड़े संभावित खतरों को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है।\n\nसमिति की तरफ से जारी बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि आगामी वर्ष के दौरान साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, डिजिटल ट्रस्ट, और AI तथा डीपफेक के जरिए होने वाले स्वचालित पहचान फर्जीवाड़े यानी आइडेंटिटी फ्रॉड के नियमन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बुलेटिन के अनुसार, \"सुरक्षा नियंत्रण, नैतिक मानक और AI के विकास और तैनाती के इर्द-गिर्द आवश्यक सुरक्षात्मक घेरा तैयार करना समिति का मुख्य लक्ष्य है।\" दुनिया भर की सरकारें भी इस बात पर मंथन कर रही हैं कि तेजी से फैलती कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आम लोगों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और जवाबदेह कैसे बनाया जाए।\n\nAI एजेंट्स और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमजोरियां\nभारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने अक्टूबर के मध्य में एक बेहद गंभीर परामर्श जारी किया था। इस एडवाइजरी में आगाह किया गया था कि ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी स्वतंत्र रूप से काम करने वाले AI एजेंट्स भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम्स और गोपनीय डेटा तक अनधिकृत पहुंच बना रहे हैं। इसके साथ ही साइबर हमलावर ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स का हथियार की तरह इस्तेमाल करके बहुत तेज गति से साइबर हमले कर रहे हैं।\n\nCERT-In ने विभिन्न हितधारकों के लिए जारी एक अन्य नोट में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संपत्तियों यानी क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में हुई तकनीकी सेंधमारी को भी उजागर किया था। साथ ही व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली प्रोग्रामिंग भाषा PHP से जुड़ी तकनीकी कमजोरियों की ओर भी इशारा किया गया था। इन सभी तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों ने संसदीय समिति द्वारा डेटा संरक्षण और डिजिटल सुरक्षा ढांचे की तत्काल जांच करने की जरूरत को और अधिक बढ़ा दिया है।\n\nसरकारी तंत्र, बैंकिंग और अगली पीढ़ी की तकनीक\nवर्ष 2026-27 के दौरान संसदीय समिति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के समूचे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक मूल्यांकन करने की तैयारी में है। इस समीक्षा के दायरे में सरकारी और निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU और अन्य प्रमुख संगठन शामिल होंगे। संसदीय पड़ताल का मुख्य केंद्र यह समझना होगा कि विभिन्न प्रणालियां डिजिटल रूप से कितनी सुरक्षित हैं, डेटा का प्रबंधन किस तरह किया जा रहा है और साइबर खतरों के नए स्वरूपों से निपटने के लिए इन संस्थाओं की तैयारी कैसी है।\n\nइसके अलावा समिति देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास, अवसरों और चुनौतियों की भी समीक्षा करेगी। भारत में क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की स्थिति को भी परखा जाएगा। तकनीकी क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को जांचने के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग यानी HPC और क्वांटम कंप्यूटिंग यानी QC के लक्ष्यों, स्वदेशी AI और मशीन लर्निंग मॉडल्स तथा उनसे जुड़े विनियामक मानकों का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।\n\nऊर्जा सुरक्षा, बायोमेट्रिक्स और ग्रीन कंप्यूटिंग\nसमिति की प्राथमिकताओं में आईटी क्रांति 2.0 और तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटरों की विशाल बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली क्षेत्र की मजबूती की पड़ताल भी शामिल है। आधिकारिक बुलेटिन में उन्नत अनुसंधान एवं विकास यानी R&amp;D, उभरती प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को भी समीक्षा सूची में रखा गया है। यह जांच बुनियादी ढांचे की क्षमता, वैश्विक सप्लाई चेन और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बीच मजबूत संतुलन बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।\n\nसंसदीय पैनल बायोमेट्रिक डेटा और तकनीकों के वर्तमान और भविष्य के उपयोग की भी समीक्षा करेगा। इसके साथ ही एल्गोरिदम के पूर्वाग्रह यानी एल्गोरिद्मिक बायस को रोकने और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचे की पड़ताल की जाएगी। तकनीक के विकास को पर्यावरण और जनसुरक्षा से जोड़ते हुए भारत में ग्रीन कंप्यूटिंग के तहत ई-कचरा यानी ई-वेस्ट प्रबंधन को भी समीक्षा के 17 महत्वपूर्ण विषयों में स्थान दिया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nसंसदीय समिति की यह गहन समीक्षा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकती है।\n\n• भारत में: देश भर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को डीपफेक, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और सोशल मीडिया पर अनुचित सामग्री के खिलाफ कड़े कानूनी सुरक्षा कवच मिल सकते हैं। इससे डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करने वाले आम नागरिकों का डेटा अधिक सुरक्षित होगा।\n• तकनीकी कंपनियों के लिए: सोशल मीडिया मंचों और AI डेवलपर्स को अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट, एल्गोरिदम में पारदर्शिता और सख्त सत्यापन मानकों का पालन करना होगा। गैर-अनुपालन पर कंपनियों को भारी विनियामक जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।\n• सरकारी और बैंकिंग सेवाओं पर: बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और मजबूत किए जाएंगे। इससे आम उपभोक्ताओं के खाते और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे तथा सेवाओं में होने वाले साइबर व्यवधान घटेंगे।\n• पर्यावरण और ई-कचरे पर: ग्रीन कंप्यूटिंग और ई-कचरा प्रबंधन के सख्त नियमों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे शहरों में बढ़ते खतरनाक ई-वेस्ट प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसंसदीय समिति द्वारा इन विषयों को जांच के लिए चुनने का मुख्य कारण इंटरनेट पर लगातार बढ़ते अपराध, बेकाबू AI एजेंट्स के खतरे और संवेदनशील डिजिटल बुनियादी ढांचे में पाई गई तकनीकी कमजोरियां हैं।\n\n• ऑनलाइन अपराध और सामग्री विवाद: सोशल मीडिया पर बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री यानी CSAM के फैलाव और मनमानी सेंसरशिप के मामलों ने मौजूदा कानूनों की नाकामी उजागर की। इसके चलते नीति निर्माताओं को सोशल प्लेटफॉर्म्स पर नए सिरे से अंकुश लगाने की जरूरत महसूस हुई।\n• एजेंटिक AI से साइबर हमलों की चेतावनी: भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने अक्टूबर में चेतावनी दी थी कि स्वायत्त AI एजेंट्स ने बिना अनुमति के भारतीय संस्थानों के गोपनीय डेटा में सेंध लगाई है। हैकर्स द्वारा ओपन-सोर्स AI टूल्स का दुरुपयोग करने से साइबर सुरक्षा का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।\n• क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुरक्षा खामियां: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में सेंधमारी और लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा PHP से जुड़ी कमजोरियों ने यह साबित किया कि सरकारी और वित्तीय प्रणालियों को तत्काल मजबूत निगरानी और ऑडिट की जरूरत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संसदीय समिति 2026-27 के दौरान किन प्रमुख मुद्दों की जांच करेगी?\nसमिति सोशल मीडिया नियमन, सेफ AI, डीपफेक, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और ई-कचरा प्रबंधन सहित कुल 17 विषयों की समीक्षा करेगी।\n\n2. CERT-In ने AI को लेकर क्या गंभीर चेतावनी दी थी?\nCERT-In ने बताया था कि ऑटोनॉमस AI एजेंट्स ने भारतीय संगठनों के गोपनीय डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई है और हैकर्स ओपन-सोर्स AI टूल्स से तेजी से हमले कर रहे हैं।\n\n3. संसदीय समीक्षा के दायरे में कौन-कौन से संस्थान शामिल होंगे?\nइस समीक्षा के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के डिजिटल ढांचे, विभिन्न बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य प्रमुख संगठनों की साइबर तैयारियों की पड़ताल की जाएगी।\n\n4. हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में किन विषयों पर ध्यान दिया जाएगा?\nसमिति देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा सेंटरों को बिजली देने के लिए पावर ग्रिड की मजबूती की समीक्षा करेगी।",
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  "category": "तकनीक",
  "publishedAt": "2026-10-29",
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