फर्जी विज्ञापनों से मेटा की 66,555 करोड़ रुपये की कमाई पर खड़े हुए गंभीर सवाल फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा पर स्कैम विज्ञापनों के जरिए अरबों डॉलर कमाने और उपभोक्ता शिकायतों को बड़े पैमाने पर नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करने वाली टेक कंपनी मेटा एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। सामने आई गोपनीय रिपोर्टों और आंतरिक दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कंपनी ने फर्जी और प्रतिबंधित विज्ञापनों के जरिए सालाना लगभग 7 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 66,555 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया था। यह वित्तीय डेटा यह स्पष्ट संकेत देता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की सत्यता को लेकर सुरक्षा के जो दावे किए जा रहे थे, वे हकीकत से काफी दूर हैं। इस खुलासे के बाद से प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, यूजर्स की ऑनलाइन सुरक्षा और विज्ञापन आय के बीच संतुलन को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है। अरबों डॉलर का स्कैम नेटवर्क और वित्तीय आकलन आंतरिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के कुल वार्षिक राजस्व का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा ऐसे विज्ञापनों से प्राप्त हो सकता है, जो या तो धोखाधड़ी पर आधारित हैं या फिर प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं। इन विज्ञापनों में फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, नकली निवेश योजनाएं, अवैध ऑनलाइन कैसीनो और गैरकानूनी रूप से बेचे जा रहे उत्पाद मुख्य रूप से शामिल हैं। कंपनी के भीतर तैयार किए गए एक गोपनीय दस्तावेज में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि मेटा के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर हर दिन लगभग 15 अरब हायर रिस्क यानी अत्यधिक जोखिम वाले स्कैम विज्ञापन यूजर्स की स्क्रीन पर दिखाए जा रहे थे। इसके अलावा, मई 2025 में तैयार की गई मेटा के सेफ्टी स्टाफ की एक प्रेजेंटेशन में इस बात का भी आकलन किया गया था कि अमेरिका में होने वाले कुल फ्रॉड और स्कैम के मामलों में से लगभग एक-तिहाई मामलों में कंपनी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का ही इस्तेमाल किया गया था। कंटेंट फिल्टर और ऑटोमेटेड डिटेक्शन सिस्टम की विफलता रिपोर्ट में धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों को रोकने वाली कंपनी की ऑटोमेटेड व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि मेटा का ऑटोमेटेड फिल्टर सिस्टम किसी विज्ञापनदाता अथवा उसके खाते पर कार्रवाई तभी करता था, जब सिस्टम को धोखाधड़ी होने की कम से कम 95 प्रतिशत संभावना पर पूरा भरोसा होता था। इस अत्यंत उच्च सीमा के कारण, धोखाधड़ी के संदिग्ध मामलों में भी विज्ञापनों को प्लेटफॉर्म पर बिना किसी रुकावट के चलते रहने दिया जाता था। वर्ष 2022 के एक आंतरिक दस्तावेज से यह भी खुलासा हुआ है कि मेटा की स्वचालित स्कैम पहचान प्रणाली और कंटेंट मॉडरेशन की तकनीक में पर्याप्त निवेश की कमी थी, जिसके कारण जालसाजों ने इस खामी का जमकर फायदा उठाया। यूजर्स की शिकायतों की उपेक्षा और 96 प्रतिशत रिपोर्ट खारिज यूजर्स द्वारा दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों से जुड़ा आंकड़ा सबसे अधिक चौंकाने वाला है। वर्ष 2023 के एक आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय यूजर्स हर हफ्ते धोखेबाजों और फर्जी विज्ञापनों के खिलाफ करीब 1 लाख प्रामाणिक शिकायतें दर्ज कराते थे। हालांकि, इन प्राथमिक शिकायतों पर सख्त कदम उठाने के बजाय, कंपनी ने कथित तौर पर इनमें से 96 प्रतिशत रिपोर्टों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया या फिर उन्हें खारिज कर दिया। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि जब यूजर स्वयं फ्रॉड गतिविधियों को चिह्नित कर रहे थे, तब भी सुरक्षा प्रणालियों ने उन्हें रोकने के लिए जरूरी प्रशासनिक या तकनीकी कदम क्यों नहीं उठाए। मेटा का पक्ष और आधिकारिक बयान इन गंभीर आरोपों और खुलासों के बीच मेटा ने अपना रुख साफ करने का प्रयास किया है। कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज कंपनी के कामकाज का एकतरफा और चुनिंदा चित्र पेश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंतरिक आकलन वास्तव में कंपनी के इंटीग्रिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा निवेशों की समीक्षा करने के लिए किए गए थे। एंडी स्टोन ने बयान दिया, "हम फ्रॉड और स्कैम के खिलाफ आक्रामक तरीके से लड़ते हैं, क्योंकि हमारे प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोग यह कंटेंट नहीं चाहते।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैध विज्ञापनदाता और खुद मेटा भी अपने प्लेटफॉर्म पर इस तरह के अवैध कंटेंट को बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की कार्रवाई और गंभीर कंटेंट पर विवाद मेटा का विवाद केवल वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी विज्ञापनों तक ही सीमित नहीं है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट (CSAM) की मौजूदगी को लेकर भी कंपनी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। कुछ मामलों में यह बात सामने आई कि इस प्रकार के बेहद संवेदनशील और गैरकानूनी वीडियो के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर केवल 50 रुपये जैसी मामूली कीमत में उपलब्ध कराए जा रहे थे। इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के ग्लोबल पॉलिसी लीडरशिप अधिकारियों को तलब किया था। मंत्रालय ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की थी कि कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन करने वाले और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले इस प्रकार के आपत्तिजनक विज्ञापनों को लंबे समय तक ऑनलाइन बने रहने क्यों दिया गया। डिजिटल इकोसिस्टम पर प्रभाव और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी हालिया खुलासे यह स्पष्ट करते हैं कि टेक दिग्गजों के लिए मुनाफा कमाने और यूजर सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना अब एक अनिवार्य चुनौती बन चुका है। जब करोड़ों लोगों के भरोसे वाले प्लेटफॉर्म पर फर्जी निवेश, ऑनलाइन कैसीनो, धोखाधड़ी और आपत्तिजनक कंटेंट को जगह मिलती है, तो इसका नकारात्मक असर न केवल व्यक्तिगत यूजर्स पर पड़ता है, बल्कि पूरे डिजिटल विज्ञापन उद्योग का विश्वास डगमगा जाता है। यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया कंपनियों को केवल ऑटोमेटेड सिस्टम्स के भरोसे रहने के बजाय अपनी कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और जवाबदेही को कहीं अधिक कड़ा करना होगा। इसका आप पर असर • भारत में: सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनजान निवेश दावों, लॉटरी योजनाओं और अत्यधिक सस्ते ऑनलाइन ऑफर्स पर बिना जांच-पड़ताल के वित्तीय भरोसा न करें। • डिजिटल सुरक्षा: संदिग्ध या भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत केवल ऐप रिपोर्टिंग तक सीमित न रखें, बल्कि तुरंत आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं। सवाल-जवाब 1. मेटा पर क्या गंभीर आरोप लगे हैं? मेटा पर फर्जी विज्ञापनों, अवैध कैसीनो और प्रतिबंधित उत्पादों के जरिए अरबों डॉलर कमाने तथा यूजर शिकायतों की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं। 2. स्कैम विज्ञापनों से मेटा की सालाना कमाई कितनी आंकी गई थी? आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार मेटा ने स्कैम विज्ञापनों से करीब 7 अरब डॉलर यानी लगभग 66,555 करोड़ रुपये की वार्षिक कमाई का अनुमान लगाया था। 3. यूजर्स की शिकायतों पर मेटा का क्या रुख रहा? दस्तावेजों के मुताबिक यूजर्स द्वारा हर हफ्ते दर्ज कराई जाने वाली करीब 1 लाख वैध शिकायतों में से लगभग 96 प्रतिशत को नजरअंदाज या खारिज कर दिया गया। 4. भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने क्या कदम उठाया? मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक विज्ञापनों और कम्युनिटी नियमों के उल्लंघन को लेकर मेटा के ग्लोबल पॉलिसी अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा था। https://trendkia.com/technology/pharji-vijnapanon-se-meta-ki-66-555-karora-rupaye-ki-kamai-para-khare-hue-gnbhira-savala-14193 TrendKia — Har trend, sabse pehle.