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  "type": "article",
  "title": "सैन्य हथियारों की ओर सिलिकॉन वैली का नया झुकाव और तकनीक के असली आदर्शवाद की लड़ाई",
  "summary": "सिलिकॉन वैली के डिफेंस तकनीक की ओर दोबारा मुड़ने को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ विश्लेषक इसे हमेशा से लालच से प्रेरित बताते हैं, जबकि इतिहासकार इसे उपभोक्ता क्रांति के शुरुआती आदर्शवादी मूल्यों की उपेक्षा मानते हैं।",
  "content": "सैन्य साजो-सामान और रक्षा अनुबंधों की तरफ टेक उद्योग की मौजूदा दौड़ ने सिलिकॉन वैली के असली इतिहास और उसके मूल चरित्र पर एक गंभीर वैचारिक बहस छेड़ दी है। सितंबर 2015 में ब्रिटिश कोलंबिया के एक पर्यावरण अनुकूल रिजॉर्ट में फाउंडर्स फंड द्वारा आयोजित एक बैठक में तकनीक के दो बिल्कुल अलग युग आमने-सामने आ गए थे। उस सुबह नाश्ते की मेज पर कंप्यूटर उद्योग के शुरुआती दौर के अग्रदूत एलन के मौजूद थे, जिन्होंने डायनाबुक की अवधारणा पेश की थी जिसे आज के आधुनिक कंप्यूटर का पूर्वज माना जाता है। वह जब कंप्यूटर माउस के विकास और स्टीव जॉब्स को दी गई शुरुआती सलाहों के संस्मरण सुना रहे थे, तभी फाउंडर्स फंड के कर्ता-धर्ता पीटर थील वहां आकर बैठ गए। पीटर थील ने अविश्वास भरे अंदाज में सुनते हुए अचानक उनसे पूछ लिया कि वे असल में कौन हैं। एलन के इस सवाल से हैरान रह गए और अपनी उपलब्धियां गिनाने के बजाय केवल इतना कहकर चुप हो गए कि वे गुजरे जमाने के एक साधारण व्यक्ति हैं। यह घटना केवल दो व्यक्तियों का संवाद नहीं थी, बल्कि सिलिकॉन वैली के दो बिल्कुल अलग युगों और सोच का बेमेल टकराव थी।\n\nहाल ही में रक्षा मामलों की विश्लेषक शैरोन वेनबर्गर के एक लेख और उनकी किताब 'वैली ऑफ डेथ: हाउ बिग टेक इज फ्यूलिंग द फ्यूचर ऑफ वॉर' ने इस बहस को दोबारा गर्मा दिया है। शैरोन वेनबर्गर का तर्क है कि सिलिकॉन वैली को काउंटरकल्चर यानी 1960 और 70 के दशक के व्यवस्था-विरोधी आंदोलन तथा दुनिया को बेहतर बनाने के आदर्शों से प्रेरित बताना एक छलावा है। उनका मानना है कि टेक कंपनियों द्वारा अकूत दौलत जुटाने की अंधी होड़, सत्तावादी नेतृत्व के आगे झुकना और घातक सैन्य हथियारों का निर्माण करना कोई नया भटकाव नहीं है, बल्कि उद्योग का हमेशा से यही असली चेहरा रहा है। उनके विश्लेषण के अनुसार, 1980 के दशक की पर्सनल कंप्यूटर क्रांति और 1990 के दशक के इंटरनेट उछाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीक के लोकतंत्रीकरण की जो बातें कही गईं, वे बाजार पर कब्जा करने और भारी मुनाफा कमाने के अवसरवादी हथकंडे मात्र थीं। उनके मुताबिक सिलिकॉन वैली के मूल्य नहीं बदले हैं, केवल उसके ग्राहक बदल गए हैं।\n\nरक्षा बजट, शांति का दौर और उपभोक्ता बाजार की नींव\nहालांकि इस धारणा से असहमत जानकारों का कहना है कि 1970 के दशक के अंत में एक नई पीढ़ी उभरी थी, जिसने पारंपरिक कॉरपोरेट ढांचे को चुनौती देकर नवाचार की ऐसी नींव रखी जिसने सिलिकॉन वैली को दुनिया का सबसे धनी तकनीकी केंद्र बना दिया। यह सच है कि कंप्यूटिंग के शुरुआती दौर को पेंटागन और रक्षा विभाग की फंडिंग से गति मिली थी। डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी यानी डारपा के अनुदान ने ही ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, इंटरनेट और यहां तक कि गूगल सर्च जैसी बुनियादी तकनीकों के शुरुआती अनुसंधानों में वित्तीय मदद दी थी। लेकिन उसके बाद उभरे इंजीनियरों और हैकरों की टोली पारंपरिक सैन्य मानसिकता से पूरी तरह अलग थी। वे नई चीजें बनाने के जुनून, व्यवस्था-विरोधी सोच और खुलेपन से प्रेरित थे। उस समय से पहले किसी बड़ी कंपनी का सीईओ सूट-बूट के बिना काम पर आने की कल्पना भी नहीं कर सकता था, जिसे एपल जैसी नई कंपनियों के बेपरवाह और अनौपचारिक पहनावे ने पूरी तरह बदल दिया।\n\nइसके विपरीत शैरोन वेनबर्गर की दलील है कि शीत युद्ध के बाद रक्षा खर्च घटने पर जो शांति का दौर आया, उसमें डिफेंस क्षेत्र की नौकरियां तेजी से खत्म होने लगीं। उनके विश्लेषण के अनुसार, जब रक्षा अनुबंधों का पैसा कम हुआ तो कंपनियों ने मुनाफे के लिए उपभोक्ता बाजार का रुख किया। उनका कहना है कि आज जब पेंटागन आधुनिक तकनीकों को खरीदने के लिए दोबारा भारी भरकम बजट लेकर तैयार खड़ा है, तो टेक उद्योग का सैन्य हथियारों की तरफ लौटना किसी दर्शन का बदलाव नहीं बल्कि उसी पुरानी वित्तीय भूख का विस्तार है। उनके शब्दों में कोई भी टेक कंपनी इसलिए काम नहीं करती कि डिफेंस अचानक लोकप्रिय हो गया है, बल्कि कंपनी का मुख्य सिद्धांत केवल व्यावसायिक सफलता हासिल करना होता है। उनके अनुसार एपल ने सेना के लिए काम इसलिए नहीं किया क्योंकि उसे इसकी आवश्यकता नहीं थी, उसके पास पहले से विशाल उपभोक्ता बाजार मौजूद था।\n\nतीन ऐतिहासिक प्रयोगशालाएं और युद्ध-विरोधी सोच\nइस दावे के जवाब में तकनीक के इतिहासकार याद दिलाते हैं कि एपल और उसके समकालीनों ने किसी तैयार उपभोक्ता बाजार में प्रवेश नहीं किया था, बल्कि उन्होंने कंप्यूटर के लिए एक बिल्कुल नया उपभोक्ता बाजार खुद गढ़ा था। स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स जैसे संस्थापकों ने लॉकहीड जैसी पारंपरिक हथियार निर्माता कंपनियों के अनुशासन में बंधे इंजीनियरों के नक्शेकदम पर चलने के बजाय युवा और लीक से हटकर सोचने वाले कंप्यूटर वैज्ञानिकों की खोजों पर अपना तंत्र खड़ा किया। 'व्हाट द डोरमाउस सेड' के लेखक जॉन मार्कॉफ के अनुसार, सिलिकॉन वैली को हथियार उद्योग से निकालकर उपभोक्ता संस्कृति में ढालने का श्रेय मुख्य रूप से तीन शोध केंद्रों को जाता है। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अग्रदूत जॉन मैकार्थी की स्टैनफोर्ड लैब, डगलस एंगेलबर्ट के ग्राफिकल इंटरफेस के लिए मशहूर स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट और एलन के का जेरॉक्स पार्क शामिल थे।\n\nये तीनों संस्थान पारंपरिक रक्षा ठेकेदारों के ठिकानों जैसे बिल्कुल नहीं थे, बल्कि वे व्यवस्था-विरोधी आंदोलन के केंद्र बन चुके थे। वियतनाम युद्ध के दौरान अनिवार्य सैन्य सेवा से बचने के लिए कई प्रतिभाशाली शोधकर्ता इन प्रयोगशालाओं में काम करने पहुंचे थे ताकि उन्हें सेना में जाने से छूट मिल सके। इन शोधकर्ताओं के लिए प्राथमिक उद्देश्य पैसा कमाना नहीं था। सिलिकॉन वैली की उद्यमशीलता संस्कृति दरअसल उन हैकरों और इंजीनियरों के मेल से जन्मी थी जो मानते थे कि तकनीक दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकती है। यह सोच पारंपरिक सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ मिली और उसने तेजी से अपनी सैन्य पहचान को पीछे छोड़ दिया। इसी दौर में राजनीतिक रूप से विद्रोही ली फेलसेनस्टाइन द्वारा आयोजित होमब्रू कंप्यूटर क्लब में जुटे स्वतंत्र इंजीनियरों ने पर्सनल कंप्यूटर उद्योग को जन्म दिया, जिससे आगे चलकर एपल जैसी कंपनी अस्तित्व में आई।\n\nखिलौने जैसा रूप-रंग और तकनीकी आदर्शवाद की पहचान\nसिलिकॉन वैली ने हथियारों से मुंह मोड़कर आम नागरिकों के गैजेट्स की ओर रुख सिर्फ इसलिए नहीं किया था कि वहां पैसा बह रहा था। 1980 और 1990 के दशकों में एपल जैसी कंपनियों को लंबे समय तक यह साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा कि उनके उत्पाद केवल बच्चों के खिलौने नहीं हैं। उन्होंने तत्कालीन भारी-भरकम, मर्दाना और औद्योगिक मशीनों के ढर्रे को नकारते हुए ऐसे कंप्यूटर बनाए जो आम इंसानों के लिए सरल, आकर्षक और सहज लगें। पारंपरिक कॉरपोरेट जगत में स्वीकार्यता पाने के लिए इन कंपनियों को दशकों की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यह विडंबना ही है कि आज आधुनिक हथियारों की वकालत करने वाले टेक उद्यमी उसी आक्रामकता और पौरुष से ग्रस्त नजर आते हैं, जिसे शुरुआती दौर के तकनीकी आदर्शवादियों ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसी तरह जब गूगल की स्थापना हुई, तो उसके संस्थापकों ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते समय भी वॉल स्ट्रीट के तय नियमों को ठेंगा दिखाने का साहस दिखाया था।\n\n'द कोड: सिलिकॉन वैली एंड द रीमेकिंग ऑफ अमेरिका' की लेखिका और इतिहासकार मार्गरेट ओ'मारा का अध्ययन भी स्पष्ट करता है कि तकनीक की दुनिया का यह बदलाव केवल मुनाफे का खेल नहीं बल्कि पीढ़ीगत राजनीतिक चेतना का परिणाम था। वर्ष 1980 और 1984 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में सिलिकॉन वैली ने रोनाल्ड रीगन के पक्ष में जोरदार मतदान किया था। लेकिन जैसे-जैसे इस इलाके में उदारवादी और गैर-पारंपरिक संस्कृति की जड़ें गहरी हुईं, वहां की राजनीति बदल गई और दशकों तक यह इलाका डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत गढ़ बन गया। मार्गरेट ओ'मारा के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप और सत्तावादी राजनीति से जुड़े जो कुछ अरबपति आज सैन्य अनुबंधों को बढ़ावा दे रहे हैं, वे दरअसल एक छोटा सा स्वार्थी तबका हैं जिन्होंने पूरी वैली के मूल्यों का अपहरण कर लिया है। भारी संपत्ति और सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण ने पूरे माहौल को विकृत कर दिया है, जिससे अरबपति अपने बंद दायरे में रहकर यह समझ ही नहीं पाते कि बाकी दुनिया उन्हें किस नजर से देख रही है।\n\nहथियारों के महिमामंडन के बीच भुलाए जा रहे सबक\nसैन्य साजो-सामान बनाने वाले आज के कुछ टेक उद्यमी शायद खुद को देशभक्त मानते हों, लेकिन उनमें से कई लोग युद्ध फिल्मों और हिंसक कंप्यूटर वीडियो गेम्स के आकर्षण में इस हद तक उलझ चुके हैं कि उन्हें घातक हथियार बनाने में एक रोमांच महसूस होता है। हालांकि पिछले लगभग चार दशकों तक सिलिकॉन वैली का बड़ा हिस्सा किसी भी तरह की जानलेवा तकनीक से दूर रहने की कोशिश करता रहा, जबकि उस पूरे दौर में भी पेंटागन का रक्षा बजट खरबों डॉलर का था और वहां हमेशा पैसा उपलब्ध था। इस लंबे इतिहास और उसके सांस्कृतिक संघर्ष को यह कहकर नकार देना कि सिलिकॉन वैली हमेशा से केवल मुनाफे की भूखी थी, आज के हथियार समर्थक अरबपतियों को उनकी नैतिक जवाबदेही से आसानी से बरी कर देता है।\n\nपीटर थील जैसे आधुनिक निवेशक शायद यह नहीं समझ सके कि एलन के जैसे वैज्ञानिकों की सोच क्या थी या उनका तकनीक में क्या योगदान था। लेकिन सच्चाई यही है कि आज का अरबों डॉलर का टेक साम्राज्य उसी एलन के, होमब्रू कंप्यूटर क्लब के हैकरों और उन संस्थापकों के आदर्शवाद की नींव पर खड़ा है, जिन्होंने हथियार बनाने के बजाय आम इंसान के हाथ में ज्ञान की ताकत सौंपने का सपना देखा था। इस शानदार विरासत को मिटाकर इसे केवल युद्ध और मुनाफे की भूमि बताना इतिहास के साथ नाइंसाफी है।\n\nइसका आप पर असर\nसिलिकॉन वैली के सैन्य अनुबंधों की ओर लौटने से आम उपभोक्ताओं के सॉफ्टवेयर और रोजमर्रा के तकनीकी उत्पादों की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं।\n\n• उपभोक्ता उत्पादों पर असर: टेक कंपनियों का ध्यान आम लोगों के टूल्स से हटकर सैन्य अनुप्रयोगों की ओर जाने की आशंका है। इससे उपभोक्ता सॉफ्टवेयर नवाचार की रफ्तार धीमी हो सकती है और बड़े रिसर्च बजट रक्षा परियोजनाओं में लग सकते हैं।\n• गोपनीयता और डेटा सुरक्षा: निजी टेक कंपनियों और रक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ता गठजोड़ आम डेटा निगरानी के जोखिम को बढ़ा सकता है। उपभोक्ताओं को अपनी डिजिटल प्राइवेसी और क्लाउड डेटा शेयरिंग को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी।\n• इंजीनियरिंग नौकरियों की दिशा: टेक इंडस्ट्री में सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए अब रक्षा और सरकारी सुरक्षा प्रोजेक्ट्स में नए अवसर खुल रहे हैं। नई प्रतिभाओं को अब यह नैतिक और पेशेवर निर्णय लेना होगा कि वे उपभोक्ता उत्पादों पर काम करना चाहते हैं या रक्षा अनुबंधों पर।\n• एआई तकनीकों का सैन्यीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोनॉमस सिस्टम्स का मुख्य उपयोग नागरिक सुविधाओं से अधिक सामरिक रक्षा में होने लगा है। इसके चलते भविष्य के तकनीकी मानक रक्षा नियमों और सरकारी प्रतिबंधों से अधिक नियंत्रित हो सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसिलिकॉन वैली में रक्षा अनुबंधों की तरफ यह नया झुकाव शीत युद्ध के बाद के आर्थिक बदलावों, पेंटागन के बढ़ते बजट और निजी कंपनियों में बदलती नेतृत्व प्राथमिकताओं के कारण पैदा हुआ है।\n\n• शीत युद्ध की समाप्ति और बाजार बदलाव: शीत युद्ध के खात्मे के बाद रक्षा बजट में भारी कटौती हुई थी जिसे शांति का लाभांश कहा गया। इसके चलते पूर्व रक्षा इंजीनियरों और उभरते तकनीकी शोधकर्ताओं ने अस्तित्व बचाने के लिए पर्सनल कंप्यूटर और व्यापक उपभोक्ता बाजार खड़ा किया।\n• पेंटागन की वाणिज्यिक तकनीक पर निर्भरता: पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक युद्धक्षेत्र में एआई, रोबोटिक्स और सॉफ्टवेयर की महत्ता अचानक बढ़ गई है। पारंपरिक रक्षा ठेकेदारों की सुस्ती को देखते हुए रक्षा विभाग ने सिलिकॉन वैली की तेज वाणिज्यिक कंपनियों के दरवाजे खटखटाए हैं।\n• उद्यमियों का सत्ता और सुरक्षा की ओर झुकाव: अत्यधिक पूंजी जुटाने के बाद टेक अरबपतियों के एक खास वर्ग ने राजनीतिक सत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सीधी भागीदारी शुरू की है। इस नए राजनीतिक गठजोड़ ने सैन्य अनुबंधों को सिलिकॉन वैली में फिर से मुख्यधारा का व्यवसाय बना दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एलन के कौन हैं और उनका कंप्यूटर इतिहास में क्या योगदान है?\nएलन के कंप्यूटर विज्ञान के एक अग्रणी वैज्ञानिक हैं जिन्होंने डायनाबुक की अवधारणा पेश की थी। उनके जेरॉक्स पार्क के काम ने आधुनिक ग्राफिकल यूजर इंटरफेस और लैपटॉप जैसे पर्सनल कंप्यूटरों की तकनीकी नींव रखी।\n\n2. शैरोन वेनबर्गर का सिलिकॉन वैली के इतिहास के बारे में क्या तर्क है?\nशैरोन वेनबर्गर का तर्क है कि सिलिकॉन वैली हमेशा से मुनाफे और रक्षा अनुबंधों से संचालित रही है और उसका काउंटरकल्चर वाला आदर्शवादी चेहरा केवल बाजार पर पकड़ बनाने का एक अवसरवादी तरीका था।\n\n3. जॉन मार्कॉफ के अनुसार तकनीक की दुनिया में काउंटरकल्चर का क्या प्रभाव था?\nजॉन मार्कॉफ के अनुसार स्टैनफोर्ड और जेरॉक्स पार्क जैसी प्रयोगशालाओं के शोधकर्ता वियतनाम युद्ध से बचने और दुनिया बदलने के आदर्श से प्रेरित थे, न कि केवल वित्तीय लाभ के लिए काम कर रहे थे।\n\n4. मार्गरेट ओ'मारा ने सिलिकॉन वैली के राजनीतिक बदलाव के बारे में क्या बताया है?\nमार्गरेट ओ'मारा के अनुसार 1980 के दशक में रोनाल्ड रीगन को वोट देने वाली सिलिकॉन वैली काउंटरकल्चर मूल्यों के प्रभाव से बाद में उदारवादी बनी, और आज के हथियार समर्थक अरबपति पूरी वैली का नहीं बल्कि एक छोटे तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं।",
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  "publishedAt": "2026-09-25",
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