सर्दियों में धूप कम होने पर सोलर पैनल से कितनी बनती है बिजली, क्या 24 घंटे चल सकता है घर का खर्च? सर्दियों के मौसम में धूप कमजोर होने और दिन छोटे होने से सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन 20 से 40 प्रतिशत तक घट जाता है। जानिए ठंड के दिनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम कैसे काम करते हैं और बिना ग्रिड के 24 घंटे आपूर्ति कैसे बनाए रखी जा सकती है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली के भारी भरकम बिलों से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार हर घर सूर्य बिजली योजना जैसी पहलों के जरिए रूफटॉप सोलर लगाने के लिए प्रेरित कर रही है। गर्मियों के महीनों में जब सुबह से शाम तक तेज धूप खिली रहती है, तब सोलर पैनल भरपूर बिजली पैदा करते हैं। कई बार गर्मियों में उत्पादन घर की दैनिक खपत से भी अधिक हो जाता है। इसके विपरीत, सर्दियों का मौसम आते ही स्थिति बदल जाती है। जब आसमान में कोहरा, धुंध और बादल छाए रहते हैं, तब यह सवाल खड़ा होता है कि रूफटॉप सोलर पैनल किस तरह काम करते हैं और क्या केवल सौर ऊर्जा के सहारे पूरे घर को चौबीसों घंटे रोशन रखा जा सकता है। सौर पैनल और सर्दियों की कार्यप्रणाली का विज्ञान काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी के अनुसार, सोलर पैनल सर्दियों के दिनों में भी लगातार बिजली का उत्पादन करते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि सौर पैनल बिजली बनाने के लिए सूर्य की गर्मी या तापमान का उपयोग नहीं करते, बल्कि वे सूर्य के प्रकाश यानी किरणों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सर्दियों के मौसम में दिन की अवधि छोटी हो जाती है और पृथ्वी तक पहुंचने वाली धूप की तीव्रता भी काफी कमजोर पड़ जाती है। इस कारण से पैनलों द्वारा बनाई जाने वाली कुल बिजली की मात्रा में कमी दर्ज की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि ठंडा मौसम सौर पैनलों की आंतरिक कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है। अत्यधिक गर्मी की तुलना में कम तापमान में सोलर सेल अधिक कुशलता से काम करते हैं और इससे उनकी उम्र भी बढ़ती है। लेकिन सर्दियों में सूरज की रोशनी के सीमित घंटों और कम तीव्रता के कारण यह दक्षता बढ़त कुल उत्पादन में बदल नहीं पाती और समग्र बिजली उत्पादन कम ही रहता है। सर्दियों में 20 से 40 प्रतिशत तक घट जाता है उत्पादन भारत के अधिकांश राज्यों में सर्दियों के दौरान सोलर पावर प्लांट का उत्पादन गर्मियों के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में दिसंबर और जनवरी के महीनों में कई-कई दिनों तक घना कोहरा और बादल छाए रहते हैं, जिससे सूरज की सीधी किरणें पैनलों तक नहीं पहुंच पातीं। केवल सर्दियों ही नहीं, बल्कि मानसून के मौसम में भी लगातार बारिश और बादलों के कारण सौर बिजली के उत्पादन में इसी तरह की गिरावट देखी जाती है। इसे एक व्यावहारिक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगा हुआ है, तो वह गर्मियों के साफ धूप वाले दिन में रोजाना लगभग 20 से 25 यूनिट बिजली बना सकता है। वही 5 किलोवाट का सिस्टम सर्दियों के महीनों में घटकर प्रतिदिन केवल 12 से 18 यूनिट बिजली ही दे पाता है। जिन क्षेत्रों में सर्दियों में भी आसमान साफ रहता है और अच्छी धूप खिलती है, वहां यह अंतर थोड़ा कम हो सकता है। क्या केवल सौर ऊर्जा से 24 घंटे चल सकता है घर? भावना त्यागी स्पष्ट करती हैं कि कोई भी सामान्य घर चौबीसों घंटे अपनी पूरी बिजली की जरूरतों के लिए केवल सोलर पैनल पर निर्भर नहीं रह सकता। इसका कारण यह है कि सोलर पैनल केवल दिन के समय, यानी जब तक धूप उपलब्ध रहती है, तब तक ही सीधे बिजली बना सकते हैं। रात के समय या बहुत खराब मौसम में पैनल से बिजली का उत्पादन पूरी तरह बंद या नगण्य हो जाता है। यदि किसी घर को पूरी तरह से ऑफ-ग्रिड रहकर केवल सौर ऊर्जा से ही 24 घंटे बिजली प्राप्त करनी है, तो उसे अपनी सामान्य जरूरत से काफी बड़ा सोलर प्लांट स्थापित करना होगा। इसके साथ ही एक उच्च क्षमता का बैटरी बैंक लगाना अनिवार्य होता है। दिन में बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग रात के समय या कोहरे वाले दिनों में किया जा सकता है। यह प्रणाली पारंपरिक इन्वर्टर और बैटरी की तरह ही काम करती है, जहां दिन में ऊर्जा संग्रहित होती है और जरूरत पड़ने पर घर के उपकरणों को सप्लाई की जाती है। सर्दियों में निर्बाध बिजली सप्लाई बनाए रखने के चार तरीके पूरे साल और खास तौर पर सर्दियों में सोलर सिस्टम से निर्बाध बिजली प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता आमतौर पर चार प्रमुख रणनीतियों को अपनाते हैं। • ओवरसाइज़्ड सिस्टम का निर्माण: घर की औसत दैनिक खपत से अधिक क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि घर में रोजाना 10 यूनिट बिजली की आवश्यकता है, तो प्लांट का डिज़ाइन इस तरह रखा जाता है कि वह सर्दियों के कम उत्पादन वाले दिनों में भी कम से कम 10 यूनिट दे सके। • बैटरी स्टोरेज की व्यवस्था: दिन के समय पैनलों से बनने वाली सरप्लस बिजली को बैटरियों में स्टोर कर लिया जाता है। यह stored ऊर्जा रात के समय या जब धूप न निकली हो, तब घर के टीवी, पंखे और लाइट चलाने के काम आती है। • ग्रिड कनेक्टेड या नेट मीटरिंग सिस्टम: अधिकतर शहरी घर अपने सोलर सिस्टम को सरकारी बिजली ग्रिड से जोड़कर रखते हैं। गर्मियों में जब ज्यादा बिजली बनती है, तो वह ग्रिड में एक्सपोर्ट हो जाती है। सर्दियों में जब सोलर उत्पादन कम पड़ता है, तो घर ग्रिड से बिजली ले लेता है और नेट मीटरिंग के तहत केवल इस्तेमाल की गई शेष यूनिटों का भुगतान करना होता है। • बैकअप जनरेटर या अतिरिक्त बैटरी: जिन दूरदराज के इलाकों में ग्रिड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां लोग आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए डीजल या पेट्रोल जनरेटर अथवा अतिरिक्त बैटरी बैकअप का इंतजाम रखते हैं। इसका आप पर असर सर्दियों में सौर ऊर्जा से कम बिजली बनने के कारण उपभोक्ताओं को अपने पावर बैकअप और ग्रिड उपयोग का सही नियोजन करना होता है। • भारत भर में: देश में रूफटॉप सोलर लगाने वाले परिवारों को सर्दियों में 20% से 40% तक कम बिजली उत्पादन के लिए तैयार रहना होगा। इससे रात और बादलों वाले दिनों में ग्रिड निर्भरता या बैटरी बैकअप का सही इस्तेमाल जरूरी हो जाता है। • उत्तर भारत में: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी में दिसंबर-जनवरी के दौरान घने कोहरे के कारण 5 किलोवाट का सिस्टम दैनिक उत्पादन घटकर 12 से 18 यूनिट पर ला सकता है। स्थानीय निवासियों को हीटर और गीजर जैसे भारी उपकरणों का प्रबंधन ग्रिड बिजली या नेट मीटरिंग क्रेडिट के जरिए करना पड़ेगा। • वित्तीय प्रभाव: नेट मीटरिंग का उपयोग करने वाले परिवार गर्मियों में ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त यूनिट्स के बदले सर्दियों में बिजली की कमी को समायोजित कर सकते हैं। इससे सर्दियों में भी बिजली के मासिक बिल को नियंत्रित रखना संभव होता है। • सिस्टम साइजिंग: नया सोलर प्लांट लगवाने की योजना बना रहे लोगों को केवल गर्मियों की धूप के हिसाब से नहीं, बल्कि सर्दियों की न्यूनतम खपत को ध्यान में रखकर क्षमता तय करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों में सोलर पैनल का उत्पादन घटने के पीछे सूर्य की किरणों का कोण, दिन की छोटी अवधि और मौसम संबंधी कारक मुख्य वजह हैं। • प्रकाश बनाम गर्मी का सिद्धांत: सोलर पैनल सूर्य की गर्मी से नहीं बल्कि प्रकाश (फोटॉन्स) से बिजली बनाते हैं। ठंडा मौसम पैनलों की कार्यक्षमता बढ़ाता है, लेकिन कम धूप के कारण कुल उत्पादन घट जाता है। • छोटे दिन और किरणों की कम तीव्रता: सर्दियों में सूरज पृथ्वी से एक विशेष कोण पर होता है जिससे धूप की तीव्रता कमजोर होती है और दिन के रोशनी वाले घंटे कम हो जाते हैं। • कोहरा और मौसमी रुकावटें: उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी में छाने वाला घना कोहरा और बादल सूर्य की किरणों को पैनलों तक पहुंचने से रोकते हैं, जिससे दैनिक उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत की गिरावट आती है। सवाल-जवाब 1. क्या सोलर पैनल सर्दियों के मौसम में भी बिजली बनाते हैं? हां, सोलर पैनल सर्दियों में भी काम करते हैं क्योंकि वे बिजली बनाने के लिए सूर्य के प्रकाश का इस्तेमाल करते हैं, न कि उसकी गर्मी का। 2. सर्दियों में सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन कितना कम हो जाता है? भारत के अधिकांश हिस्सों में सर्दियों में धूप कमजोर होने और दिन छोटे होने के कारण सौर उत्पादन 20% से 40% तक घट जाता है। 3. सर्दियों में 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम कितनी यूनिट बिजली देता है? सर्दियों में 5 किलोवाट का सोलर प्लांट रोजाना लगभग 12 से 18 यूनिट बिजली देता है, जबकि गर्मियों में यह 20 से 25 यूनिट बना सकता है। 4. क्या बिना ग्रिड के केवल सोलर ऊर्जा से घर को 24 घंटे चलाया जा सकता है? केवल सोलर पैनल से 24 घंटे बिजली नहीं मिल सकती। इसके लिए एक बड़े सोलर प्लांट के साथ हाई-कैपेसिटी बैटरी स्टोरेज या ग्रिड कनेक्शन की जरूरत होती है। 5. सर्दियों में घने कोहरे का सोलर पैनल पर क्या असर पड़ता है? घने कोहरे और बादलों के कारण सूर्य की सीधी किरणें पैनल तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे उस दिन बिजली का उत्पादन काफी कम हो जाता है। https://trendkia.com/technology/sardiyon-men-dhupa-kama-hone-para-solar-panel-se-kitani-banati-hai-bijali-kya-24-ghnte-chala-sakata-hai-ghara-ka-kharcha-51638 TrendKia — Har trend, sabse pehle.