शॉर्ट सर्किट और बिजली चोरी पर लगेगी लगाम, महराजगंज के छात्रों सनी और दिव्यांश ने बनाया पावरशील्ड प्रो डिवाइस उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में सिसवा क्षेत्र के बीजापार स्थित आरपीआईसी स्कूल के छात्र सनी और दिव्यांश ने 'पावरशील्ड प्रो' नामक स्मार्ट डिवाइस तैयार किया है, जो बिजली फॉल्ट का अलर्ट देने के साथ चोरी रोकने और रिमोट कंट्रोल की सुविधा प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्कूली छात्रों ने एक ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित की है, जो घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली से होने वाले हादसों तथा बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगा सकती है। सिसवा क्षेत्र के बीजापार में स्थित आरपीआईसी स्कूल में अध्ययनरत छात्र सनी और दिव्यांश ने मिलकर 'पावरशील्ड प्रो' नामक एक बहुउद्देशीय उपकरण का निर्माण किया है। आकार में बेहद छोटा दिखने वाला यह डिवाइस सुरक्षा के लिहाज से बेहद कारगर और आधुनिक फीचर्स से लैस है। यह उपकरण न केवल विद्युत परिपथ में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फॉल्ट आने पर तुरंत उपभोक्ता को सूचित करता है, बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में बिजली का प्रवाह बंद होने पर मालिक के मोबाइल पर सीधे कॉल और मैसेज भेजकर सतर्क भी करता है। इसके अलावा, उपयोगकर्ता दुनिया के किसी भी कोने से अपने स्थान की बिजली आपूर्ति को दूरस्थ रूप से नियंत्रित कर सकते हैं। हादसों से बचाव और सुरक्षा की जरूरत बिजली मानव जीवन की दैनिक आवश्यकताओं का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन जरा सी लापरवाही या तकनीक की अनदेखी इसमें जान-माल के भारी नुकसान का कारण बन जाती है। बीते समय में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड जैसी घटनाओं ने पूरे देश में विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी थी। लखनऊ की उस दुर्घटना में कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे और काफी क्षति हुई थी। इसी प्रकार की दुखद घटनाओं से प्रेरणा लेकर सनी और दिव्यांश ने एक ऐसे सिस्टम की परिकल्पना की जो हादसों के घटित होने से पहले ही चेतावनी जारी कर सके। इन होनहार युवाओं का यह नवाचार यह दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी सामाजिक समस्याओं और खतरों के प्रति जागरूक है तथा अपने ज्ञान का उपयोग व्यावहारिक समाधान खोजने में कर रही है। पावरशील्ड प्रो की निर्माण प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पावरशील्ड प्रो को केवल एक विचार से वास्तविक रूप में ढालने का सफर इन छात्रों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस डिवाइस को तैयार करने में कई महीनों की निरंतर मेहनत और शोध लगा है। परियोजना पर काम शुरू करने से पहले दोनों छात्रों ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पावर मॉनिटरिंग से जुड़े विभिन्न मौजूदा नवाचारों की गहन जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपने विचार को अंतिम रूप देते हुए इस स्मार्ट उपकरण का निर्माण किया। यह डिवाइस पूरी तरह आधुनिक सेंसर तकनीक पर आधारित है। जब भी किसी परिपथ में ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट या कोई अन्य तकनीकी खराबी आती है, तो डिवाइस तुरंत पंजीकृत मोबाइल नंबर पर अलर्ट कॉल और SMS भेज देता है। इसके साथ ही, यदि उपभोक्ता घर से बाहर है और वह किसी कारणवश बिजली बंद करना भूल गया है, तो वह अपने मोबाइल के माध्यम से दूर से ही बिजली का प्रवाह बंद कर सकता है। स्मार्ट मीटरिंग और चोरी रोधी सुरक्षा प्रणाली इस उपकरण की एक अन्य प्रमुख विशेषता इसमें एकीकृत किया गया स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटर है। इस मीटर के माध्यम से उपभोक्ता अपनी सुविधानुसार बिजली की खपत की सीमा यानी यूनिट्स निर्धारित कर सकता है। तय की गई यूनिट की खपत पूरी होते ही यह डिवाइस स्वतः ही बिजली की आपूर्ति को बंद कर देता है, जिससे बिजली की बर्बादी और अप्रत्याशित बिलों से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह उपकरण चोरी और सेंधमारी की घटनाओं को रोकने में भी बेहद मददगार साबित होता है। अक्सर देखा जाता है कि अपराधी चोरी की वारदात को अंजाम देने से पहले परिसरों में लगे CCTV कैमरों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से मुख्य बिजली कनेक्शन काट देते हैं। पावरशील्ड प्रो में ऐसा सुरक्षा फीचर जोड़ा गया है कि जैसे ही बिजली की आपूर्ति अचानक और असामान्य रूप से कटती है, यह तुरंत मकान मालिक या स्टोर मालिक के मोबाइल पर आपातकालीन सूचना भेज देता है, जिससे समय रहते सतर्कता बरती जा सकती है। निर्माण लागत और भविष्य की संभावनाएं छात्रों द्वारा तैयार किए गए इस कार्यात्मक मॉडल की कुल निर्माण लागत लगभग ₹5000 आई है। सनी और दिव्यांश का कहना है कि यह अभी इस प्रोजेक्ट का शुरुआती संस्करण है और भविष्य में इसमें और भी उन्नत फीचर्स जोड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। वे इस उपकरण में AI आधारित पूर्वानुमान प्रणाली और अधिक सटीक सेंसर एकीकृत करने की योजना बना रहे हैं ताकि इसकी दक्षता को और बढ़ाया जा सके। इतने कम बजट में तैयार किया गया यह उपकरण आम जनता के लिए बेहद उपयोगी और किफायती साबित हो सकता है। इसका आप पर असर भारत में: यह नवाचार कम लागत में घरों और दुकानों में शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग और बिजली हादसों को रोकने का प्रभावी मॉडल पेश करता है। महराजगंज और उत्तर प्रदेश में: स्थानीय स्कूली छात्रों की यह उपलब्धि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी और युवा प्रतिभाओं को तकनीकी नवाचार के लिए प्रेरित करेगी। सवाल-जवाब 1. पावरशील्ड प्रो डिवाइस किसने बनाया है? महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र स्थित बीजापार के आरपीआईसी स्कूल के छात्र सनी और दिव्यांश ने इसे बनाया है। 2. पावरशील्ड प्रो डिवाइस का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य बिजली फॉल्ट से होने वाले हादसों को रोकना, बिजली की खपत को रिमोट से नियंत्रित करना और चोरी की घटनाओं का अलर्ट देना है। 3. यह डिवाइस बिजली फॉल्ट होने पर उपभोक्ता को कैसे अलर्ट करता है? परिपथ में खराबी या फॉल्ट आते ही यह डिवाइस पंजीकृत मालिक के मोबाइल पर स्वचालित कॉल और मैसेज अलर्ट भेजता है। 4. बिजली चोरी या सेंधमारी रोकने में यह उपकरण कैसे सहायक है? चोरों द्वारा CCTV बंद करने के लिए बिजली काटने पर यह डिवाइस अचानक हुए पावर कट की तुरंत मोबाइल पर सूचना देता है। 5. इस डिवाइस को बनाने में कुल कितनी लागत आई है? इस कार्यात्मक मॉडल को तैयार करने में लगभग ₹5,000 का खर्च आया है। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • सामाजिक समस्याओं पर नजर: आसपास की घटनाओं और दुर्घटनाओं से सीख लेकर उनके समाधान के लिए प्रयास करना। • गहन शोध का महत्व: किसी भी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने से पहले उससे जुड़ी तकनीक और पूर्व शोध का बारीकी से अध्ययन करना। • सीमित संसाधनों में बड़ा नवाचार: मात्र ₹5,000 जैसे सीमित बजट में भी जन उपयोगी और आधुनिक तकनीक तैयार की जा सकती है। • दृढ़ संकल्प और निरंतरता: महीनों की लगातार मेहनत से एक विचार को व्यावहारिक रूप में बदला जा सकता है। https://trendkia.com/technology/shorta-sarkita-aura-bijali-chori-para-lagegi-lagama-maharajganj-ke-chhatron-sunny-aura-divyansh-ne-banaya-powershield-pro-divaisa-14160 TrendKia — Har trend, sabse pehle.