विदेशी VPN कंपनियों पर सरकार की नई सख्ती, ऑफिस न खोलने पर अधिकारियों को हो सकती है जेल केंद्र सरकार विदेशी VPN कंपनियों के लिए सख्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है, जिसके तहत भारत में स्थायी दफ्तर और कंप्लायंस ऑफिसर अनिवार्य होंगे, वरना कंपनी के अधिकारियों को जेल तक जाना पड़ सकता है. देश में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क, यानी VPN सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं. केंद्र सरकार एक सख्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है, जिसके तहत हर विदेशी VPN कंपनी को भारत में अपना स्थायी दफ्तर खोलना होगा और स्थानीय अनुपालन अधिकारी, यानी कंप्लायंस ऑफिसर नियुक्त करने होंगे. अगर किसी कंपनी ने सरकार के नियमों और निर्देशों को मानने से इनकार किया, तो भारत में मौजूद उसके अधिकारियों को जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है. आखिर क्यों कसी जा रही है नकेल यह सख्ती अचानक सामने नहीं आई है. इसके पीछे वीपीएन कंपनियों का सरकारी आदेशों को न मानना बड़ी वजह है. साल 2022 में भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम, यानी CERT-In ने वीपीएन कंपनियों के लिए एक निर्देश जारी किया था. इस निर्देश के तहत कंपनियों के लिए अपने यूजर्स का नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और IP एड्रेस जैसा संवेदनशील डेटा पांच साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य कर दिया गया था. लेकिन एक्सप्रेस वीपीएन (ExpressVPN), नॉर्ड वीपीएन (NordVPN), प्रोटॉन वीपीएन (Proton VPN) और सर्फशार्क (Surfshark) जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस निर्देश को मानने से साफ इनकार कर दिया और भारत से अपने फिजिकल सर्वर ही हटा लिए. कंपनियों के इसी रवैये के चलते अब सरकार कड़ा कानून लाने की तैयारी में जुट गई है. कैसे काम करता है VPN और सरकार को क्यों है परेशानी VPN असल में यूजर के असली IP एड्रेस को छिपा देता है और उसके इंटरनेट ट्रैफिक को किसी दूसरे देश के सर्वर के जरिए रूट कर देता है. इससे ऐसा दिखता है जैसे यूजर भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश में बैठकर इंटरनेट चला रहा है. इसी बाईपास तकनीक की वजह से सरकार द्वारा भारत में ब्लॉक की गई वेबसाइट्स, ऐप्स और दूसरा ऑनलाइन कंटेंट भी आसानी से खुल जाता है, जिस पर सरकार की नजर लंबे समय से टेढ़ी रही है. ब्लॉक कंटेंट देखने का शॉर्टकट बना VPN पिछले कुछ समय से यह लगातार देखा जा रहा है कि लोग VPN का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर उन वेबसाइट्स, ऐप्स और ऑनलाइन कंटेंट तक पहुंच रहे हैं, जिन्हें सरकार ने भारत में ब्लॉक कर रखा है. इसी साल NEET-UG की री-टेस्ट से पहले सरकार ने टेलीग्राम (Telegram) को कुछ समय के लिए ब्लॉक कर दिया था. ठीक उसी दौरान प्रोटॉन वीपीएन के महाप्रबंधक डेविड पीटरसन ने बताया था कि भारत से उनके VPN ऐप के रजिस्ट्रेशन में अचानक 120% से ज्यादा का जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ. दिलचस्प बात यह रही कि बाद में सरकार ने उनकी वही पोस्ट और उनका X अकाउंट, दोनों को ही भारत में ब्लॉक कर दिया. अब कंपनियों के पास बचेंगे सिर्फ दो रास्ते इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, यानी MeitY की तरफ से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन नया कानून लागू होते ही विदेशी VPN कंपनियों के सामने अब केवल दो ही विकल्प बचेंगे. या तो वे भारत में अपना कानूनी दफ्तर खोलकर सरकारी जांच में पूरा सहयोग करें और अपने यूजर्स का डेटा सरकार के साथ साझा करें, या फिर भारत के करोड़ों यूजर्स वाले बड़े बाजार को हमेशा के लिए अलविदा कह दें. इसका आप पर असर यह नया कानून सीधे उन करोड़ों भारतीयों को प्रभावित करेगा जो प्राइवेसी या ब्लॉक कंटेंट देखने के लिए VPN इस्तेमाल करते हैं. • यूजर्स के लिए: अगर विदेशी VPN कंपनियां भारत में दफ्तर खोलकर सरकार से डेटा साझा करती हैं, तो यूजर्स की प्राइवेसी पहले जैसी नहीं रहेगी. • सेवाओं पर असर: जो कंपनियां नई शर्तें नहीं मानेंगी, वे भारत छोड़ सकती हैं, जिससे मौजूदा VPN ऐप्स और सेवाएं बंद हो सकती हैं. • ब्लॉक कंटेंट पर पकड़: सरकार द्वारा ब्लॉक की गई वेबसाइट्स और ऐप्स को VPN के जरिए एक्सेस करना पहले से मुश्किल हो सकता है. सवाल-जवाब 1. सरकार विदेशी VPN कंपनियों पर सख्ती क्यों कर रही है? क्योंकि 2022 में CERT-In के डेटा रिटेंशन निर्देश को एक्सप्रेस वीपीएन, नॉर्ड वीपीएन, प्रोटॉन वीपीएन और सर्फशार्क जैसी कंपनियों ने नहीं माना और भारत से अपने सर्वर हटा लिए. 2. नए कानून के तहत विदेशी VPN कंपनियों को क्या करना होगा? उन्हें भारत में स्थायी दफ्तर खोलना होगा और स्थानीय अनुपालन अधिकारी नियुक्त करने होंगे. 3. अगर कंपनियां सरकार के नियम नहीं मानतीं तो क्या होगा? भारत में मौजूद उस कंपनी के अधिकारियों को जेल तक जाना पड़ सकता है. 4. CERT-In के 2022 के निर्देश में क्या कहा गया था? वीपीएन कंपनियों को यूजर्स का नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और IP एड्रेस जैसा डेटा पांच साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया था. 5. टेलीग्राम को कब और क्यों ब्लॉक किया गया था? इसी साल NEET-UG री-टेस्ट से पहले सरकार ने टेलीग्राम को कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से ब्लॉक किया था. 6. डेविड पीटरसन ने क्या खुलासा किया था? प्रोटॉन वीपीएन के महाप्रबंधक डेविड पीटरसन ने बताया था कि टेलीग्राम बैन के दौरान भारत से उनके VPN ऐप के रजिस्ट्रेशन में 120% से ज्यादा का उछाल आया था. 7. MeitY ने इस मामले पर क्या कहा है? इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 8. नए कानून के बाद विदेशी VPN कंपनियों के पास क्या विकल्प बचेंगे? या तो वे भारत में दफ्तर खोलकर सरकारी जांच में सहयोग करें और डेटा साझा करें, या फिर भारत के बाजार को हमेशा के लिए छोड़ दें. https://trendkia.com/technology/videshi-vpn-knpaniyon-para-sarakara-ki-nai-sakhti-phisa-na-kholane-para-adhikariyon-ko-ho-sakati-hai-jela-4283 TrendKia — Har trend, sabse pehle.