# हैदराबाद की 1908 की बाढ़: 118 साल पुराना वह पेड़ जिसने बचाई थी डेढ़ सौ लोगों की जान

> तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में उस्मानिया जनरल अस्पताल परिसर में खड़ा एक सदी से भी पुराना इमली का पेड़ 1908 की मूसी नदी की तबाही के दौरान 150 लोगों के लिए जीवनरक्षक बना था।

**Type:** article · **Category:** तेलंगाना · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/telangana/hyderabad-1908-flood-the-118-year-old-tamarind-tree-that-saved-150-lives-39473 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैदराबाद बाढ़, उस्मानिया अस्पताल, मूसी नदी, इमली का पेड़, इतिहास, तेलंगाना

हैदराबाद के अफ़ज़लगंज इलाके में स्थित उस्मानिया जनरल अस्पताल के परिसर में एक ऐसा विशालकाय इमली का पेड़ मौजूद है, जो आज भी अपने अंदर इतिहास के एक बड़े हादसे की यादें समेटे हुए है। देखने में यह भले ही एक आम पुराना दरख़्त लगे, लेकिन इसका वजूद एक भयंकर त्रासदी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। आज से ठीक 118 साल पहले जब शहर में प्राकृतिक आपदा ने तबाही मचाई थी, तब इसी पेड़ ने लगभग 150 इंसानी जिंदगियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला था।

## 28 सितंबर 1908 की वह खौफनाक रात
उस्मानिया जनरल अस्पताल से जुड़े शमीम खान पाशा के अनुसार, वह तारीख 28 सितंबर 1908 की थी जब शहर में आसमान से आफत बरस रही थी। लगातार और भारी बारिश की वजह से हैदराबाद के मध्य से गुजरने वाली मूसी नदी अपने सभी किनारों को तोड़ते हुए विकराल रूप ले चुकी थी। पानी का बहाव इतना तेज था कि बस्तियों के मकान ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे और लोगों को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला। शहर के हर हिस्से में केवल पानी का सैलाब और लोगों की चीख-पुकार ही सुनाई दे रही थी।

## पेड़ की डालियों ने संभाला था जिंदगी का भार
जब बाढ़ के उस भयानक सैलाब में लोगों के सामने बचने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा, तब यही विशाल इमली का पेड़ संकट में घिरे लोगों के लिए तारणहार साबित हुआ। जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे कई लोग तैरकर या बहते हुए इस पेड़ की मजबूत शाखाओं तक पहुंचने में कामयाब रहे। इसके बाद ऊपर पहुंचे लोगों ने नीचे पानी में संघर्ष कर रहे अन्य लोगों को भी खींचकर अपनी तरह सुरक्षित डालियों पर बैठा लिया। कुल मिलाकर करीब 150 महिलाएं, पुरुष और बच्चे उस रात इस पेड़ के सहारे जिंदा बचने में सफल रहे।

## रातभर मौत के साए में डटे रहे लोग
वह पूरी रात बेहद संघर्ष और खौफ के साए में गुजरी जब मूसलाधार बारिश लगातार बरस रही थी और तापमान गिरने से लोग ठंड से कांप रहे थे। नीचे उफनती मूसी नदी का सैलाब सब कुछ तबाह कर देने पर उतारू था, लेकिन उस इमली के पेड़ की जड़ें और शाखाएं जरा भी नहीं डिगीं। जिन लोगों ने उसकी डालियों को थाम रखा था, उन्होंने पूरी रात उसी अवस्था में गुजार दी। अगली सुबह जब मौसम खुला और बाढ़ का पानी उतरना शुरू हुआ, तब जाकर सभी लोग सकुशल नीचे उतर पाए।

## आज भी एक मूक गवाह के रूप में खड़ा है दरख़्त
बीते दशकों में हैदराबाद का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और यह शहर एक आधुनिक महानगर में तब्दील हो चुका है, जहां चारों तरफ ऊंची इमारतें खड़ी हैं। इसके बावजूद उस्मानिया अस्पताल के प्रांगण में खड़ा यह पुराना पेड़ आज भी उसी ऐतिहासिक त्रासदी और डेढ़ सौ लोगों के पुनर्जन्म की कहानी कहता है। यह पेड़ केवल वनस्पति का हिस्सा नहीं, बल्कि उस दौर की उस आपदा का एक जीवंत प्रतीक है जिसे स्थानीय लोग आज भी पूरे आदर के साथ याद करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह ऐतिहासिक घटना मुख्य रूप से अतीत के एक बड़े हादसे से जुड़ी है और इसका वर्तमान में नागरिकों पर सीधा कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

- **ऐतिहासिक धरोहर:** **यह पेड़ शहर के पुराने संघर्षों की याद दिलाता है।** स्थानीय प्रशासन और नागरिक इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित रखने के प्रति जागरूक रहते हैं।
- **आपदा प्रबंधन:** **यह घटना हमें प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की सीख देती है।** आधुनिक शहरी योजनाकारों के लिए यह नदी के किनारे निर्माण और जल निकासी प्रबंधन के महत्व को समझाती है।
- **पर्यटन महत्व:** **यह स्थल इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।** अस्पताल परिसर में आने वाले लोग इस ऐतिहासिक पेड़ को देखने और इसके बारे में जानने में रुचि रखते हैं।
- **पर्यावरण संरक्षण:** **पुराने पेड़ों का संवर्धन शहरी पारिस्थितिकी के लिए जरूरी है।** यह पेड़ इस बात का उदाहरण है कि कैसे सदियों पुराने पौधे हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा बने रह सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
1908 की इस भीषण तबाही का मुख्य कारण क्षेत्र में लगातार होने वाली भारी मानसूनी बारिश थी, जिसके चलते मूसी नदी का जलस्तर अपनी क्षमता से अधिक बढ़ गया था।

- **अत्यधिक मानसूनी वर्षा:** **लगातार बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया था।** शहर में पानी की निकासी के आधुनिक साधन न होने के कारण जलसैलाब बस्तियों में फैल गया।
- **नदी का किनारा टूटना:** **प्रचंड वेग के दबाव को तटबंध सहन नहीं कर सके।** पानी के भारी दबाव के कारण नदी ने अपने प्राकृतिक मार्ग के किनारों को तोड़ दिया और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया।
- **प्राकृतिक बचाव साधन:** **उस समय पक्के निर्माण और आधुनिक चेतावनी तंत्र का अभाव था।** ऐसे में अस्पताल परिसर में मौजूद मजबूत और विशाल इमली का पेड़ ही लोगों के लिए एकमात्र प्राकृतिक शरणस्थली साबित हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. हैदराबाद की मूसी नदी में ऐतिहासिक बाढ़ कब आई थी?
मूसी नदी में यह भीषण बाढ़ 28 सितंबर 1908 को आई थी।

### 2. यह ऐतिहासिक इमली का पेड़ कहां स्थित है?
यह पेड़ हैदराबाद के अफ़ज़लगंज इलाके में स्थित उस्मानिया जनरल अस्पताल के परिसर में खड़ा है।

### 3. बाढ़ के दौरान इस पेड़ ने कितने लोगों की जान बचाई थी?
इस मजबूत पेड़ की डालियों ने लगभग 150 लोगों की जान बचाई थी जो बाढ़ के पानी से घिर गए थे।

### 4. इस घटना की जानकारी किसने साझा की है?
उस्मानिया जनरल अस्पताल से जुड़े शमीम खान पाशा ने इस ऐतिहासिक घटना और पेड़ की कहानी बताई है।

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