हैदराबाद का ऐतिहासिक मुश्क महल उपेक्षा का शिकार, कभी नींव में डाली जाती थी कस्तूरी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित 17वीं सदी का ऐतिहासिक मुश्क महल आज बदहाली की मार झेल रहा है। कुतुब शाही काल की इस अनूठी इमारत का नाम कभी इसकी नींव में डाली जाने वाली कस्तूरी की खुशबू से जुड़ा था। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद अपनी प्राचीन विरासतों और कुतुब शाही वास्तुकला के लिए दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखती है। इसी ऐतिहासिक धरोहरों की फेहरिस्त में शामिल मुश्क महल आज प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा के चलते अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। किशनबाग-अत्तापुर मार्ग पर खड़ी यह दो मंजिला ऐतिहासिक इमारत देखरेख न मिलने के कारण अब खंडहर में तब्दील होती जा रही है। 17वीं शताब्दी और मियां मुश्क से जुड़ा इतिहास इस शानदार महल का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में हुआ था, जिसका सीधा संबंध कुतुब शाही सल्तनत के आखिरी शासक अबुल हसन कुतुब शाह के कार्यकाल से माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस भव्य इमारत को उनके एक मुख्य सैन्य कमांडर और दरबारी मियां मुश्क ने तैयार करवाया था। मियां मुश्क शाही दरबार में एक प्रभावशाली अधिकारी और महल के संरक्षक के रूप में जाने जाते थे। स्थानीय जनश्रुतियों और लोककथाओं के अनुसार, इस इमारत की नींव रखते समय इसमें भारी मात्रा में मुश्क यानी कस्तूरी का इस्तेमाल किया गया था, ताकि इस पूरे परिसर से एक भीनी-भीनी प्राकृतिक खुशबू आती रहे। इसी अनोखी खूबी के कारण इस ऐतिहासिक इमारत का नाम मुश्क महल पड़ गया था। दक्कनी वास्तुकला की बेमिसाल कारीगरी मुश्क महल प्राचीन दक्कनी वास्तुकला का एक बेहद उत्कृष्ट और अनोखा नमूना पेश करता है। इस दो मंजिला इमारत की बनावट में बड़ी-बड़ी मेहराबें, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी, कलात्मक छज्जे और सुंदर बालकनियां इसकी भव्यता को दर्शाती हैं। इसके अंदरूनी कमरों की डिजाइनिंग इस तरह की गई थी कि वहां हवा और रोशनी का प्राकृतिक संतुलन हमेशा बना रहे। सदियों पुरानी यह संरचना उस दौर की इंजीनियरिंग और कला कौशल की गवाही देती है, लेकिन वक्त बीतने के साथ और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज इसकी हालत बहुत दयनीय हो गई है। संरक्षण के अभाव में ढहने की कगार पर इमारत वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक इमारत की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। इसके चारों तरफ जंगली झाड़ियां उग आई हैं और इसके बेसकीमती पत्थर अब धीरे-धीरे गिरने लगे हैं। शहर के इतिहास प्रेमियों और जानकारों का मानना है कि यदि पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही इसके जीर्णोद्धार के लिए कोई कड़े कदम नहीं उठाए, तो कुतुब शाही सल्तनत का यह अमूल्य अध्याय हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में ही दफन होकर रह जाएगा। जानकारों का कहना है कि अगर इस महल का सही तरीके से पुनरुद्धार कर दिया जाए, तो यह न केवल हैदराबाद की गौरवशाली संस्कृति को बचाएगा, बल्कि भविष्य में एक बड़ा पर्यटन स्थल भी बन सकता है. इसका आप पर असर भारत में: देश भर में फैली ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं। हैदराबाद में: स्थानीय निवासियों और पर्यटन प्रेमियों के लिए एक अहम सांस्कृतिक धरोहर के नष्ट होने का खतरा है, जिसके जीर्णोद्धार से क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता था। सवाल-जवाब 1. मुश्क महल कहां स्थित है? मुश्क महल तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में किशनबाग-अत्तापुर मार्ग पर स्थित है। 2. मुश्क महल का निर्माण किसने करवाया था? इस महल का निर्माण 17वीं शताब्दी में कुतुब शाही सल्तनत के अंतिम शासक के सैन्य कमांडर मियां मुश्क ने करवाया था। 3. इस महल का नाम मुश्क महल क्यों पड़ा? मान्यताओं के अनुसार, इसके निर्माण के समय इसकी नींव में बड़ी मात्रा में मुश्क यानी कस्तूरी रखी गई थी जिससे इसका नाम मुश्क महल पड़ा। 4. वर्तमान में मुश्क महल की क्या स्थिति है? देखरेख के अभाव में यह दो मंजिला ऐतिहासिक इमारत खंडहर में तब्दील हो रही है और इसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं। https://trendkia.com/telangana/hyderabad-ka-itihasik-mushk-mahal-upeksha-ka-shikaar-21019 TrendKia — Har trend, sabse pehle.