हैदराबाद में गरजे अमित शाह, राहुल गांधी को दी संसद में एसआईआर पर खुली बहस की चुनौती हैदराबाद में पदयात्रा के दौरान अमित शाह ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और ईवीएम पर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया। दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की रैली के बाद भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में अपना जवाबी अभियान तेज कर दिया है। भाजपा ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और हैदराबाद में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के तहत सघन पदयात्राएं शुरू की हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पहुंचे। वहां जनसभा और पदयात्रा के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और उन पर नाच ना जाने, आंगन टेढ़ा वाली कहावत चरितार्थ करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मसले पर संसद के भीतर खुली बहस करने की चुनौती भी दी। भाग्य लक्ष्मी मंदिर में दर्शन और पदयात्रा का आगाज हैदराबाद पहुंचने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे पहले ऐतिहासिक भाग्य लक्ष्मी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने निज़ाम कॉलेज से पदयात्रा की शुरुआत की। भाजपा की यह पदयात्रा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे तमाम आरोपों का सीधा जवाब देने के मकसद से निकाली गई है। रैली में भारी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने उस दौर में निज़ाम को झुकने पर मजबूर न किया होता, तो आज हैदराबाद भारतीय संघ का अभिन्न अंग नहीं बना होता। विपक्ष की रैली पर हमला और एसआईआर का गणित दिल्ली में हुई विपक्ष की सभा का हवाला देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल इसे वोट बचाओ रैली का नाम दे रहे हैं, जबकि असलियत में यह केवल घुसपैठियों को बचाने का एक आयोजन था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर की प्रक्रिया में अड़चन डालकर देश की मतदाता सूची में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नामों को सुरक्षित रखना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई चाहे जितना भी विरोध कर ले, भाजपा मतदाता सूची से प्रत्येक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के संकल्प पर पूरी तरह कायम रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में केवल इस देश के वैध नागरिकों को ही मताधिकार का उपयोग करने का अधिकार होगा। कांग्रेस द्वारा एसआईआर के जरिए 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने के दावे को अमित शाह ने सिरे से झूठा करार दिया। उन्होंने पूरे आंकड़े का विस्तृत ब्योरा रखते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरी संख्या के पीछे ठोस प्रशासनिक कारण मौजूद हैं। उनके अनुसार, हटाए गए नामों में से लगभग सवा छह करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो अपने पुराने पते छोड़कर दूसरी जगहों पर रहने चले गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी भी व्यक्ति को दो अलग-अलग स्थानों पर मतदान करने का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए। इसके अलावा सूची में 2.8 करोड़ लोग ऐसे पाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी है, और स्वाभाविक रूप से मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाना अनिवार्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। बाकी बचे नामों में से एक करोड़ प्रविष्टियां डुप्लिकेट पाई गईं, जिन्हें नियमों के तहत रद्द किया गया। वहीं करीब तीन करोड़ नाम ऐसे थे जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था और वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी वोट थे। चुनावी जीतों और मॉक पार्लियामेंट पर तंज अमित शाह ने कांग्रेस के इस आरोप का भी खंडन किया कि भाजपा केवल मतदाता सूची पुनरीक्षण के सहारे ही चुनाव जीतती है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तब देश में एसआईआर नहीं हुआ था। इसी तरह 2019 के आम चुनाव में मिली प्रचंड जीत के समय भी कोई एसआईआर नहीं कराया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि भारत के मतदाताओं के अटूट विश्वास से संभव हुई है और इसी जनसमर्थन के दम पर पार्टी लगातार राज्यों में एक के बाद एक चुनाव जीत रही है। राहुल गांधी द्वारा हाल ही में आयोजित की गई मॉक पार्लियामेंट पर कटाक्ष करते हुए अमित शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी उनसे सलाह लेते, तो वह उन्हें सुझाव देते कि उस काल्पनिक संसद में विपक्ष का नेता बनने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री ही बन जाते। उन्होंने टिप्पणी की कि वास्तविक संसद में राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना कभी संभव नहीं होगा, इसलिए उन्हें प्रतीकात्मक संसद में ही यह पद संभाल लेना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी हाथ में संविधान की प्रति लेकर तो घूमते हैं, लेकिन संवैधानिक मर्यादाओं का आदर नहीं करते। संसद संविधान के दायित्वों को पूरा करने का मुख्य मंच है, लेकिन विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा में भाग लेने के बजाय अराजकता फैलाने के इरादे से सामने नहीं आएगा। ईवीएम के मुद्दे पर विपक्षी दोहरे रवैये पर सवाल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर उठने वाले सवालों पर भी गृह मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जब भी भाजपा किसी चुनाव में जीत दर्ज करती है, विपक्षी दल तुरंत ईवीएम में गड़बड़ी का रोना रोने लगते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईवीएम में कोई खराबी थी, तो तेलंगाना में रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री कैसे बने, और केरल, तमिलनाडु तथा हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दलों की सरकारें कैसे चुनी गईं। अमित शाह ने कहा कि यदि ईवीएम वाकई खराब और अविश्वसनीय थी, तो विपक्षी नेताओं को उन राज्यों में सरकार बनाने और पद की शपथ लेने से मना कर देना चाहिए था। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो जनता का फैसला बताता है, और हारने पर अपनी नाकामी छुपाने के लिए मशीनों पर दोष मढ़ देता है। इसका आप पर असर इस राजनीतिक खींचतान का सीधा असर मतदाता पहचान पत्र और चुनावी प्रक्रियाओं की शुचिता पर पड़ता है। • भारत में: देश भर के नागरिकों के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण नियमों का पालन करना और दोहरी प्रविष्टियों से बचना जरूरी है। यदि कोई नागरिक स्थायी रूप से स्थान बदल चुका है, तो उसे पुरानी जगह से नाम कटवाकर नए निवास स्थान पर पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा। • हैदराबाद में: स्थानीय मतदाताओं को आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग के विशेष अभियानों के दौरान अपने पहचान पत्र और पते के सत्यापन पर नजर रखनी चाहिए। राजनीतिक रैलियों और पदयात्राओं के चलते शहर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। • नागरिकों के लिए: परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर सूची से नाम हटवाने और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को ठीक कराने की प्रक्रिया समय पर पूरी करनी चाहिए। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या बीएलओ के जरिए नागरिक अपनी प्रविष्टियों की नियमित जांच कर सकते हैं। • राजनीतिक परिदृश्य: संसद और चुनावी मंचों पर मतदाता सूची और वोटिंग मशीनों को लेकर बढ़ते टकराव से आम मतदाताओं के बीच चुनाव सुधारों पर चर्चा और पैनी होगी। इससे प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सत्यापन प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ेगा। ऐसा क्यों हुआ विपक्षी गठबंधन की दिल्ली रैली और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों के जवाब में यह राजनीतिक अभियान शुरू हुआ। • राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके जवाब में भाजपा ने देश के विभिन्न राज्यों में पदयात्राएं निकाल कर अपने प्रशासनिक तर्कों को जनता के सामने रखने का फैसला किया। • मतदाता सूची का सत्यापन: गृह मंत्री के अनुसार नामों का कटना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसमें स्थानांतरित निवासी, मृतक, दोहरी प्रविष्टियां और अवैध नागरिक शामिल थे। विपक्ष इसे चुनावी हेरफेर बता रहा था, जिससे दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक टकराव तेज हो गया। • आगामी चुनावी रणनीति: विपक्षी गठबंधन की संयुक्त रैलियों के बाद भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विपक्ष के नैरेटिव की काट पेश करने के लिए मैदान में उतरी है। हैदराबाद में पदयात्रा का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पार्टी के राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करना भी है। सवाल-जवाब 1. हैदराबाद में अमित शाह की पदयात्रा किस अभियान के तहत आयोजित की गई थी? यह पदयात्रा भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत आयोजित की गई थी। 2. गृह मंत्री ने हैदराबाद में पदयात्रा शुरू करने से पहले किस मंदिर में पूजा की? उन्होंने पदयात्रा शुरू करने से पहले हैदराबाद के भाग्य लक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना की। 3. मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम कटने के आरोप पर क्या स्पष्टीकरण दिया गया? स्पष्टीकरण दिया गया कि इनमें 6.25 करोड़ स्थानांतरित लोग, 2.8 करोड़ मृतक, 1 करोड़ डुप्लिकेट और 3 करोड़ फर्जी प्रविष्टियां शामिल थीं। 4. ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों के जवाब में किन राज्यों का उदाहरण दिया गया? जवाब में तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दलों की जीत और सरकारों का उदाहरण दिया गया। 5. अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में किस मुद्दे पर बहस की चुनौती दी? उन्होंने राहुल गांधी को संसद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बहस करने की चुनौती दी। https://trendkia.com/telangana/hyderabad-men-garaje-amit-shah-rahul-gandhi-ko-di-snsada-men-sir-para-khuli-bahasa-ki-chunauti-55198 TrendKia — Har trend, sabse pehle.