# कल्याणकारी योजनाओं के बेतहाशा विस्तार पर तेलंगाना उच्च न्यायालय सख्त, कहा अनियंत्रित खर्चे से रिक्त हो रहा राज्य का खजाना

> तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की मुफ़्त योजनाओं के भारी वित्तीय बोझ और अपात्र लाभार्थियों को मिल रहे लाभ पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि बिना समीक्षा के यह सिलसिला जारी रहा तो राज्य का खजाना पूरी तरह खाली हो जाएगा।

**Type:** article · **Category:** तेलंगाना · **Published:** 2026-08-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/telangana/kalyanakari-yojanaon-ke-betahasha-vistara-para-telangana-uchcha-nyayalaya-sakhta-kaha-aniyntrita-kharche-se-rikta-ho-raha-rajya-ka-14870 · **Language:** Hindi
**Tags:** तेलंगाना उच्च न्यायालय, कल्याणकारी योजनाएं, रायतू बंधु, जस्टिस नागेश भीमपाका, संदीप कुमार सुल्तानिया, सरकारी खजाना, पीडीएस राशन कार्ड

राज्य की कल्याणकारी नीतियों और मुफ़्त सुविधाओं के वितरण पर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकारी खजाने पर लगातार बढ़ रहे वित्तीय दबाव को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया और प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद खामियों पर स्पष्ट विचार रखे। उच्च न्यायालय के जज जस्टिस नागेश भीमपाका ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस पात्रता जांच के सुविधाएं बांटे जाने से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान और पूर्व में लिए गए कर्जों की अदायगी के बाद सरकार के पास विकास कार्यों के लिए फंड की भारी कमी हो जाती है। यह पूरी गंभीर चर्चा वित्त सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया से जुड़ी एक कानूनी कार्यवाही के दौरान सामने आई, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 19 अगस्त निर्धारित की है।

## सरकारी खजाने पर बढ़ता वित्तीय दबाव और वितरण की खामियां
अदालत की कार्यवाही के दौरान जज ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य सरकार की राजनीतिक आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की उन व्यवहारिक कमियों पर एक आवश्यक मंथन है जो राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। जस्टिस नागेश भीमपाका ने सुनवाई के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य में कई ऐसी योजनाएं संचालित हो रही हैं जिनका लाभ ऐसे वर्ग भी उठा रहे हैं जो उनके वास्तविक हकदार नहीं हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि जब किसी योजना का दायरा बिना किसी वित्तीय सीमा के बढ़ा दिया जाता है, तो उससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वेतन और कर्ज की किस्तों के भुगतान के बाद बजटीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए बेहद कठिन हो जाता है, जिससे बुनियादी ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती।

## रायतू बंधु और पीडीएस राशन कार्डों में अनियंत्रित लाभ
कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का उदाहरण देते हुए उच्च न्यायालय ने 'रायतू बंधु' योजना का विशेष रूप से उल्लेख किया। किसानों के लिए निवेश सहायता के रूप में शुरू की गई इस योजना पर बात करते हुए जस्टिस भीमपाका ने सवाल किया कि क्या इस सुविधा का लाभ राज्य के संपन्न और करोड़पति लोग भी नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्षित समूहों तक सहायता पहुंचाने के बजाय जब बिना जांच-परख के धनराशि वितरित की जाती है, तो इससे पूरी व्यवस्था कमजोर होती है। इसी प्रकार पीडीएस राशन कार्ड और अन्य मुफ़्त सुविधाओं के नाम पर होने वाले भारी खर्च पर भी अदालत ने चिंता व्यक्त की। उच्च न्यायालय ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अपात्र लोगों को अनुचित लाभ देने और मुफ़्त सौगातें बांटने की यही प्रक्रिया जारी रही, तो एक समय ऐसा आएगा जब भगवान कुबेर का धन भी समाप्त हो जाएगा।

## सामाजिक मानसिकता में बदलाव और ग्रामीण कृषि पर प्रभाव
अदालत ने अपने संबोधन में नागरिक कर्तव्यों और सामाजिक मानसिकता में आए बदलाव पर भी गहराई से प्रकाश डाला। जस्टिस भीमपाका ने कहा कि पुरानी पीढ़ियों में देश और समाज के प्रति योगदान देने की भावना प्राथमिकता पर रहती थी, जबकि वर्तमान समय में जनमानसिकता केवल इस बात पर केंद्रित हो गई है कि सरकार से व्यक्तिगत रूप से क्या लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यदि सरकार किसी अपात्र व्यक्ति का पीडीएस राशन कार्ड रद्द करने का प्रयास करती है, तो तुरंत राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया जाता है। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि श्रमिकों के गंभीर संकट पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर मजदूरों की कमी के कारण तेलंगाना के किसानों को खेती के कार्यों में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, और इस कमी को पूरा करने के लिए अब बिहार, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश से आने वाले प्रवासी मजदूर यहां के खेतों में काम कर रहे हैं।

## वित्त सचिव की व्यक्तिगत पेशी और अदालती कार्यवाही
उच्च न्यायालय की यह सख्त टिप्पणी उस समय आई जब वित्त सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। उनके विरुद्ध एक अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसके सिलसिले में अदालत को सख्त कदम उठाने पड़े थे। इससे पूर्व 10 जुलाई को अदालत ने संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ एक जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए गए थे कि वह संबंधित अधिकारी को गिरफ्तार कर शुक्रवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें, हालांकि साथ ही 5000 रुपये के निजी बांड पर जमानत का विकल्प भी प्रदान किया गया था। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह अदालत में तलब करना अत्यंत दुखद है, परंतु प्रशासनिक अड़चनों और व्यवहारिक समस्याओं के कारण न्यायालय को यह कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर होना पड़ा। इस पूरे मामले पर विस्तृत विचार के बाद उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** राज्यों द्वारा दी जाने वाली असीमित मुफ़्त योजनाओं से सरकारी खजाने और टैक्सपेयर्स के पैसे का प्रबंधन प्रभावित होता है, जिससे बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के बजट पर असर पड़ता है।
- **तेलंगाना में:** कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्मूल्यांकन और पीडीएस राशन कार्ड की समीक्षा से वास्तविक पात्र परिवारों को लाभ मिलने की राह आसान होगी, जबकि अपात्र लाभार्थियों की छंटनी हो सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य की मुफ़्त योजनाओं पर क्या टिप्पणी की?
उच्च न्यायालय ने चिंता व्यक्त की कि अपात्र लोगों को मुफ़्त योजनाएं देने से राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है और विकास कार्यों के लिए फंड कम पड़ रहा है।

### 2. अदालत ने 'रायतू बंधु' योजना के संबंध में क्या सवाल उठाया?
जस्टिस नागेश भीमपाका ने पूछा कि क्या कृषि निवेश सहायता देने वाली 'रायतू बंधु' जैसी योजनाओं का लाभ संपन्न और करोड़पति लोग भी तो नहीं उठा रहे हैं।

### 3. वित्त सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया को अदालत में क्यों पेश होना पड़ा?
वित्त सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसके तहत 10 जुलाई को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था।

### 4. तेलंगाना के कृषि क्षेत्र में किस समस्या का उल्लेख किया गया?
अदालत ने बताया कि राज्य के गांवों में कृषि मजदूरों का भारी संकट है, जिसके कारण बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आए प्रवासी मजदूर खेतों में काम कर रहे हैं।

### 5. हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई किस तारीख को तय की गई है?
मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई की तिथि 19 अगस्त निर्धारित की है।

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