नलगोंडा में 10वीं के दो छात्रों ने की प्रिंसिपल की हत्या, जांच में खुली खौफनाक साजिश की पूरी परतें तेलंगाना के नलगोंडा में एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल के. रूपा रेड्डी की उनके घर में 27 बार चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में स्कूल के ही 10वीं कक्षा के दो नाबालिग छात्रों की संलिप्तता सामने आई है। तेलंगाना के नलगोंडा जिले में घटी एक सनसनीखेज वारदात ने शिक्षा जगत और समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल के. रूपा रेड्डी की 11 अगस्त 2026 को उनके अपने ही घर में बेहद निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। हत्यारों ने उन पर चाकू से एक-दो नहीं बल्कि पूरे 27 वार किए। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पुलिस की जांच की सुई पेशेवर अपराधियों पर जाने के बजाय उसी स्कूल में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के दो नाबालिग छात्रों पर टिक गई। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, उस उम्र में उनके हाथों तक धारदार चाकू और अपराध की खौफनाक सोच कैसे पहुंच गई, इस सवाल ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। सुराग का सिरा: फोन पर निकला 'बाबू' शब्द और पुलिस का बढ़ता शक इस खौफनाक हत्याकांड की जांच की शुरुआत किसी सीसीटीवी फुटेज या प्रत्यक्षदर्शी के बयान से नहीं, बल्कि फोन कॉल पर बोले गए एक एकमात्र शब्द से हुई। वारदात के समय प्रिंसिपल के. रूपा रेड्डी अपने घर पर मौजूद थीं और फोन पर किसी व्यक्ति से बातचीत कर रही थीं। बातचीत के दौरान अचानक उन्होंने सामने किसी को देखा और उनके मुंह से एक शब्द निकला, बाबू। इसके तुरंत बाद कॉल अचानक कट गई और फोन बंद हो गया। कुछ ही देर बाद उनके घर से उनकी लहुलूहान लाश बरामद हुई। जब पुलिस ने शुरुआती जांच शुरू की, तो परिजनों और सहयोगियों ने बताया कि रूपा रेड्डी स्कूल के बच्चों को अक्सर स्नेह से बाबू कहकर पुकारती थीं। इसी एक शब्द ने जांच अधिकारियों का ध्यान स्कूल के विद्यार्थियों की तरफ केंद्रित किया। तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक टीम की प्राथमिक रिपोर्ट और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगालने के बाद पुलिस ने संदिग्धों की सूची तैयार की। पूछताछ के दौरान पुलिस की नजर दो ऐसे छात्रों पर पड़ी, जिनका व्यवहार घटना के तुरंत बाद असामान्य रूप से बदल गया था। वे अचानक से बाजार में भारी रकम खर्च करने लगे थे। जब पुलिस ने उनसे कड़ाई से पूछताछ की और साक्ष्यों को आमने-सामने रखा, तो पूरी साजिश की परतें एक-एक करके उधड़ती चली गईं। फीस के पैसे, महंगे शौक और पुरानी रंजिश का मिलाजुला ताना-बाना पुलिस जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे केवल लूटपाट का इरादा ही नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी रंजिश और महंगे शौक की अंधी चाहत भी शामिल थी। दोनों छात्रों को इस बात का अंदाजा था कि स्कूल में दाखिले और फीस जमा होने का समय चल रहा है, इसलिए प्रिंसिपल के घर में भारी मात्रा में नकद रकम रखी हो सकती है। इसी पैसे को हासिल करने के लिए उन्होंने डकैती की योजना बनाई थी। हालांकि, आपराधिक मानसिकता के पीछे सिर्फ पैसे की जरूरत ही एकमात्र कारण नहीं थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी छात्रों में से एक पहले स्कूल के हॉस्टल में रहता था। कुछ समय पहले स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल ने उसके पास से मोबाइल फोन और अनधिकृत नकदी बरामद की थी। उस समय प्रबंधन ने उसे कड़ी डांट लगाई थी और अनुशासनहीनता के कारण उसे हॉस्टल से बाहर निकालकर डे-स्कॉलर बना दिया था। इस पूरी घटना की जानकारी उसके माता-पिता को भी दे दी गई थी। इस अनुशासनत्मक कार्रवाई के कारण छात्र के मन में प्रिंसिपल के प्रति गहरी नाराजगी और गुस्सा पनप रहा था। इसके अलावा, एक छात्र को तेज रफ्तार कारों और महंगी बाइकों का बेहद शौक था और वह रातों-रात अमीर बनना चाहता था। पुलिस ने अपनी जांच में यह भी पाया कि दोनों नाबालिगों को शराब पीने की लत लग चुकी थी। पैसों की किल्लत, महंगे शौक, शराब की लत और पुरानी खुन्नस ने मिलकर उन्हें एक खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए उकसाया। रेकी, दस्ताने और 27 वार: खौफनाक साजिश की पूरी टाइमलाइन पुलिस के अनुसार, यह वारदात किसी आवेश में आकर अचानक की गई घटना नहीं थी, बल्कि इसे अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना तरीके से पहले से तैयारी की गई थी। वारदात को अंजाम देने से कुछ दिन पहले आरोपी छात्रों ने स्थानीय बाजार से धारदार चाकू, हाथ के दस्ताने और मास्क खरीदे थे। उन्होंने कई दिनों तक प्रिंसिपल के घर और आसपास के इलाके की पूरी रेकी की थी ताकि आने-जाने के रास्तों और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का सटीक पता लगाया जा सके। 11 अगस्त 2026 की शाम को तय योजना के तहत दोनों छात्र रूपा रेड्डी के घर पहुंचे। एक छात्र बाहर सड़क पर खड़े होकर निगरानी कर रहा था, जबकि दूसरा छात्र लूट के इरादे से चुपके से घर के भीतर दाखिल हुआ। लेकिन घर के अंदर पहुंचते ही पासा पलट गया। रूपा रेड्डी ने उस छात्र को देख लिया और पहचान लिया। पकड़े जाने और पहचान उजागर होने के डर से छात्र ने तुरंत अपने पास रखे चाकू से उन पर हमला कर दिया। उसने प्रिंसिपल पर एक के बाद एक 27 बार चाकू से वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। एक शिक्षक जिसने कभी उन्हें बेहतर भविष्य का पाठ पढ़ाया होगा, वह अपनी ही डांट और अनुशासन का शिकार बन गई। 1.51 लाख नकद, आईफोन और नोटों पर मिले खून के धब्बे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से नकदी और कीमती सामान लेकर फरार हो गए। पुलिस ने जब आरोपियों को पकड़ा, तो उनके पास से भारी मात्रा में सामग्री और नकदी बरामद हुई। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 1.51 लाख रुपये नकद, एक आईफोन, मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू, दस्ताने और मास्क जब्त किए। शुरुआती पूछताछ के दौरान एक आरोपी छात्र ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और दावा किया कि बरामद रकम उसके माता-पिता ने उसे दी थी। लेकिन फॉरेंसिक जांच ने उसके इस झूठे दावे की पोल खोल दी। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने जब जब्त की गई नकद राशि का गहन निरीक्षण किया, तो 500 रुपये के तीन नोटों पर खून के सूक्ष्म धब्बे पाए गए। फॉरेंसिक जांच में यह साबित हो गया कि वे खून के धब्बे मृतका के ही थे। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने पुलिस के केस को पूरी तरह मजबूत कर दिया और आरोपियों का बचा-खुचा झूठ भी बेनकाब हो गया। हिसार कांड की यादें और स्कूलों में अनुशासन बनाम हिंसक टकराव नलगोंडा की यह घटना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। अगर हम अतीत के पन्नों को पलटें, तो 10 जुलाई 2025 को हरियाणा के हिसार जिले से भी ऐसी ही एक भयावह खबर सामने आई थी। हिसार के एक स्कूल में तत्कालीन प्रिंसिपल जगबीर पन्नू की स्कूल परिसर के भीतर ही चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। उस मामले की पुलिस जांच में भी स्कूल के ही नाबालिग छात्रों की संलिप्तता पाई गई थी। हिसार मामले में शुरुआती जांच से पता चला था कि स्कूल प्रशासन द्वारा सख्त अनुशासन लागू करने और नियमों का पालन करवाने को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच गहरा विवाद चल रहा था। हिसार और नलगोंडा की घटनाएं भले ही अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग परिस्थितियों में हुई हों, लेकिन दोनों ही मामलों में एक समान और चिंताजनक सवाल उभरकर सामने आता है। क्या आज के शैक्षणिक माहौल में शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद का स्थान हिंसक टकराव लेता जा रहा है? नलगोंडा में जहां पैसे के लालच और पुरानी डांट की खुन्नस ने हत्या का रूप लिया, वहीं हिसार में स्कूल अनुशासन का विरोध हिंसक अपराध में बदल गया। शिक्षक की डांट और संवाद की कमी: समाज के सामने गंभीर चुनौती विद्यालय में एक शिक्षक की भूमिका केवल किताबों के पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। शिक्षक का दायित्व बच्चे को गलत राह पर जाने से रोकना, उसे अनुशासित करना और नैतिक मूल्य सिखाना भी होता है। इस प्रक्रिया में कई बार शिक्षक को छात्र को डांटना पड़ता है, नियम तोड़ने पर माता-पिता को बुलाना पड़ता है या मोबाइल फोन जैसी वस्तुएं जब्त करनी पड़ती हैं। यह सभी कदम बच्चे के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं। लेकिन यदि किशोरावस्था के दौरान बच्चे के मन में यह भावना घर कर जाए कि शिक्षक का हर अनुशासनत्मक कदम उसका व्यक्तिगत अपमान है और उसकी आजादी पर हमला है, तो यह स्थिति बेहद खतरनाक रूप ले सकती है। आज के दौर में जब किशोरों में सहनशीलता की कमी, महंगे गैजेट्स का आकर्षण, नशे की लत और तुरंत पैसा कमाने की चाहत बढ़ रही है, तब स्कूलों और परिवारों दोनों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ यह भी उतना ही आवश्यक है कि छात्रों को अपनी भावनाओं, गुस्से और असहमति को व्यक्त करने का स्वस्थ माध्यम प्रदान किया जाए। नलगोंडा और हिसार जैसी घटनाएं केवल पुलिस जांच या कानूनी सजा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हमारे पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं कि यदि समय रहते बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक आचरण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना देश भर के स्कूलों में शिक्षकों की सुरक्षा, छात्रों के व्यवहारिक बदलावों की निगरानी और मानसिक परामर्श की सख्त जरूरत को रेखांकित करती है। • तेलंगाना में: नलगोंडा जिले के शैक्षणिक संस्थानों में हॉस्टल सुरक्षा नियमों, परिसर अनुशासन और छात्र शिकायत निवारण तंत्र की समीक्षा की जाएगी। सवाल-जवाब 1. नलगोंडा में प्रिंसिपल के. रूपा रेड्डी के साथ क्या हुआ था? 11 अगस्त 2026 को नलगोंडा में एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल के. रूपा रेड्डी की उनके घर में 27 बार चाकू घोंपकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 2. पुलिस 'बाबू' शब्द के जरिए आरोपी छात्रों तक कैसे पहुंची? हत्या से ठीक पहले रूपा रेड्डी फोन पर बात करते समय 'बाबू' बोली थीं। चूंकि वे स्कूल के बच्चों को 'बाबू' कहती थीं, इसलिए पुलिस का ध्यान छात्रों पर गया। 3. आरोपियों के पास से कौन सी चीजें बरामद हुईं? पुलिस ने आरोपियों के पास से 1.51 लाख रुपये नकद, एक आईफोन, मोबाइल फोन, चाकू, दस्ताने और मास्क बरामद किए। 4. हत्या के पीछे क्या मुख्य वजह सामने आई? हत्या के पीछे स्कूल फीस का पैसा लूटने का इरादा, महंगे शौक, शराब की लत और पूर्व में हॉस्टल से निकाले जाने की रंजिश शामिल थी। 5. फॉरेंसिक जांच ने छात्र के दावे को कैसे खारिज किया? छात्र ने दावा किया था कि नकदी माता-पिता की है, लेकिन फॉरेंसिक जांच में 500 रुपये के 3 नोटों पर मृतका के खून के धब्बे मिले। 6. हरियाणा के हिसार में कौन सी मिलती-जुलती घटना हुई थी? 10 जुलाई 2025 को हिसार के एक स्कूल परिसर में प्रिंसिपल जगबीर पन्नू की अनुशासन विवाद को लेकर छात्रों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। https://trendkia.com/telangana/nalgonda-men-10vin-ke-do-chhatron-ne-ki-prinsipala-ki-hatya-jancha-men-khuli-khauphanaka-sajisha-ki-puri-paraten-19087 TrendKia — Har trend, sabse pehle.