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  "title": "सऊदी अरब में सड़क हादसे का शिकार हुईं तेलंगाना की नर्स सुनीता, कर्ज के फेर में फंसा वतन लौटना",
  "summary": "तेलंगाना की नर्स गुगुलोत सुनीता सऊदी अरब में एक गंभीर सड़क हादसे के बाद बिस्तर पर हैं और बैंक कर्ज के कारण उन पर ट्रैवल बैन लगा हुआ है। परिवार ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से मदद की गुहार लगाई है।",
  "content": "दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अस्पतालों में दिन-रात सेवा देने वाली तेलंगाना की एक नर्स आज खुद जिंदगी और मौत के बीच कड़ा संघर्ष कर रही है। सऊदी अरब की धरती पर घटे एक भयानक सड़क हादसे के बाद वह पिछले कई महीनों से अस्पताल के बिस्तर पर बेबस पड़ी हैं। उनकी शारीरिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि वह अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे काम भी खुद करने में असमर्थ हैं। इस मुसीबत में सबसे बड़ा रोड़ा यह बना हुआ है कि वह अपना इलाज कराने के लिए अपने वतन भारत भी नहीं लौट पा रही हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में उनके बेबस परिवार ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से गुहार लगाई है कि वे किसी तरह उनकी बेटी को सुरक्षित स्वदेश वापस ले आएं।\n\nयह पूरा मामला तेलंगाना के सूर्यापेट जिले की रहने वाली 36 वर्षीय गुगुलोत सुनीता और उनके पीड़ित परिवार से जुड़ा हुआ है। परिवार ने मीडिया को जानकारी दी है कि सुनीता पर सऊदी अरब के एक स्थानीय बैंक का भारी कर्ज बकाया है। इसी वित्तीय विवाद के चलते वहां की सरकार और प्रशासन ने उनके ऊपर कड़ा ट्रैवल बैन लगा रखा है। जब तक यह बैंक लोन और कानूनी उलझन पूरी तरह से नहीं सुलझ जाती, तब तक वह सऊदी अरब की सीमा छोड़कर भारत नहीं आ सकती हैं।\n\nपरिवार का सहारा बनने के लिए गईं थीं विदेश\nसुनीता ने अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार की गुजर-बसर संभालने का कठिन फैसला लिया था। इसी मकसद के तहत वह सितंबर 2024 में बेहतर भविष्य और नौकरी की तलाश में सऊदी अरब चली गई थीं। वहां पहुंचने के बाद उन्हें किंग अब्दुल्ला अस्पताल में आईसीयू स्पेशलिस्ट नर्स के पद पर नियुक्ति मिल गई थी, जिससे परिवार को एक बड़ी उम्मीद बंधी थी।\n\nभीषण हादसे ने छीनी नौकरी और सेहत\nलेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और 23 अप्रैल 2025 को हुए एक सड़क हादसे ने उनकी पूरी दुनिया ही उलट-पुलट कर रख दी। इस दुर्भाग्यपूर्ण दिन वह एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं, जिसमें उनके दोनों हाथों, रीढ़ की हड्डी और सिर में बहुत गंभीर चोटें आईं। उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को कई जटिल ऑपरेशन करने पड़े और उनके शरीर में धातु की कई प्लेटें तक लगानी पड़ीं। इसके बाद सऊदी के आधिकारिक मेडिकल बोर्ड ने उनकी जांच के बाद उन्हें 87 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग घोषित कर दिया और उन्हें किसी भी प्रकार के काम के लिए पूरी तरह अयोग्य करार दे दिया। इस स्थिति के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनकी नौकरी भी समाप्त कर दी।\n\nलाखों के कर्ज और बैन ने बढ़ाई मुश्किलें\nपरिवार के सदस्यों के अनुसार, हादसे से ठीक पहले सुनीता ने अपने परिवार की विभिन्न आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सऊदी अरब के एक बैंक से 1.48 लाख सऊदी रियाल का कर्ज लिया था, भारतीय मुद्रा में जिसकी कुल राशि लगभग 38 लाख रुपये बनती है। दुर्घटना से जुड़े तमाम चिकित्सीय दस्तावेज बैंक अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं, इसके बावजूद लोन का यह मामला अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। इसी बकाया कर्ज की वजह से उनके खिलाफ ट्रैवल बैन का शिकंजा कसा हुआ है। सुनीता की मां ने दुख जताते हुए कहा कि उनकी बेटी को भारत लाकर बेहतर चिकित्सा देखभाल की सख्त जरूरत है, लेकिन वह वहां फंसी हुई हैं। इसके अलावा, नवंबर 2025 से उनकी सैलरी भी पूरी तरह बंद कर दी गई है, जिससे परिवार के पास इलाज का खर्च उठाने या कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एक भी रुपया नहीं बचा है।\n\nपूरे परिवार की मजबूत ढाल थीं सुनीता\nसुनीता का पूरा परिवार पूरी तरह से उन्हीं की कमाई पर निर्भर था। उन्होंने अपनी मां की दिल की गंभीर सर्जरी, पिता के ब्रेन ऑपरेशन, अपनी तीनों बहनों की पढ़ाई और उनकी शादियों का पूरा खर्च उठाया था। इतना ही नहीं, अपने भाई के असामयिक निधन के बाद उनके दो छोटे बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी भी सुनीता ने ही अपने कंधों पर उठाई थी। उनकी मां ने अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी ने अपना पूरा जीवन दूसरों की जान बचाने में खपा दिया, लेकिन आज वही बेटी मदद की आस में अस्पताल के बिस्तर पर लाचार पड़ी है। उन्होंने राज्य सरकार से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि उनकी बेटी को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ-साथ स्थानीय विधायकों और सांसदों से भी अपील की है कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें ताकि सुनीता वतन लौटकर अपना इलाज करवा सकें।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह घटना विदेशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों और नर्सों के सामने आने वाली कानूनी और वित्तीय परेशानियों को उजागर करती है।\n• सूर्यापेट में: स्थानीय पीड़ित परिवार के लिए यह आर्थिक संकट और उनकी बेटी की सुरक्षित घर वापसी एक गंभीर स्थानीय मुद्दा बन गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुगुलोत सुनीता कौन हैं और वह कहां की रहने वाली हैं?\nगुगुलोत सुनीता एक 36 वर्षीय नर्स हैं जो तेलंगाना के सूर्यापेट जिले की रहने वाली हैं।\n\n2. सुनीता सऊदी अरब कब और क्यों गईं थीं?\nसुनीता अपने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की मदद के लिए सितंबर 2024 में सऊदी अरब गई थीं जहां उन्हें किंग अब्दुल्ला अस्पताल में नौकरी मिली थी।\n\n3. सुनीता के साथ क्या दुर्घटना हुई थी?\n23 अप्रैल 2025 को एक भीषण सड़क हादसे में उनके दोनों हाथ, रीढ़ और सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें 87 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग घोषित कर दिया गया।\n\n4. सुनीता भारत क्यों नहीं लौट पा रही हैं?\nसऊदी अरब के एक बैंक का 38 लाख रुपये का कर्ज न चुका पाने के कारण वहां की सरकार ने उन पर ट्रैवल बैन लगा रखा है।\n\n5. परिवार ने किससे मदद की गुहार लगाई है?\nपरिवार ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के साथ-साथ स्थानीय विधायकों और सांसदों से सुनीता को भारत वापस लाने की अपील की है।",
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  "category": "तेलंगाना",
  "publishedAt": "2026-08-04",
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    "तेलंगाना नर्स",
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