तेलंगाना मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा का तीखा हमला, देवताओं और समाज को बांटने का लगाया आरोप तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा राम और शिव को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस पर समाज और देवताओं को बांटने का आरोप लगाया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दी गई एक हालिया टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेस पार्टी पर तीखे राजनीतिक प्रहार किए. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अपनी पूरी राजनीतिक ताकत हिंदू समाज को खंडित करने के प्रयासों में लगा रही है, और अब यह विभाजनकारी सोच देवताओं के स्तर तक पहुंच चुकी है. शपथ ग्रहण और धार्मिक निष्ठा पर सवाल संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने राहुल गांधी को नास्तिक बताते हुए कहा कि 2014 के आम चुनाव के बाद उन्होंने बाकायदा ईश्वर के नाम पर शपथ ग्रहण की थी, परंतु 2024 के चुनाव उपरांत उन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ नहीं ली. त्रिवेदी ने रेखांकित किया कि 2024 में राहुल गांधी ने अंग्रेजी भाषा में पद की शपथ ली थी. इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के जुबली हिल्स उपचुनाव के समय दिए गए एक पुराने भाषण का भी हवाला दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि रेड्डी ने उस दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस का अर्थ मुसलमान है और मुसलमान का अर्थ कांग्रेस है, जो पार्टी की वास्तविक सोच को दर्शाता है. उत्तर और दक्षिण के विभाजन का आक्षेप भाजपा प्रवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी हिंदू समाज को उत्तर और दक्षिण भारत के आधार पर बांटने का षड्यंत्र रच रही है. अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की पूर्व टिप्पणियों का क्रमवार उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक के नेता डीके सुरेश ने कर वितरण का मुद्दा उठाते हुए बयान दिया था कि दक्षिण भारत अधिक कर चुकाता है जबकि उत्तर भारत कम कर देता है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की उस टिप्पणी का स्मरण कराया जिसमें कहा गया था कि यदि उत्तर भारत नहीं होता तो दक्षिण भारत ने अत्यधिक प्रगति की होती. सुधांशु त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की द्रविड़ियन और आर्यन संबंधी टिप्पणी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि रेवंत रेड्डी का यह कहना कि 'हम द्रविड़ियन हैं और वो आर्यन हैं', पूरी तरह से एक मूर्खतापूर्ण और निराधार सिद्धांत है, जिसे वैश्विक स्तर पर पहले ही नकारा जा चुका है. उन्होंने सुझाव दिया कि रेवंत रेड्डी को अपनी ही पार्टी के ऐतिहासिक विचारकों जैसे संपूर्णानंद और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के साहित्यों का अध्ययन करना चाहिए. क्षेत्र, भाषा, जाति और लैंगिक राजनीति का आरोप भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के बीच खाई पैदा करने का आरोप मढ़ते हुए कहा कि रेवंत रेड्डी ने पूर्व में बिहार और तेलंगाना के डीएनए को लेकर भी अनावश्यक विभाजनकारी बयान दिया था. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय आधार के बाद कांग्रेस भाषा और जाति के स्तर पर भी सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का निरंतर प्रयास कर रही है. इसके अलावा, सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के 'स्मैश पेट्रीआर्की' यानी पितृसत्ता को ध्वस्त करने वाले विमर्श पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस स्त्री और पुरुष के बीच भी अलगाव पैदा करना चाहती है. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह विमर्श केवल हिंदू समाज पर लागू किया जाता है, जबकि केरल के ग्रैंड मुफ्ती द्वारा जब यह बयान दिया गया कि महिलाओं को तिजोरी में हार की तरह बंद रखना चाहिए, तब इन नारों को उछालने वाले कांग्रेस नेताओं ने पूरी तरह चुप्पी साध ली. राजनीतिक स्तर में गिरावट की आलोचना संवाददाता सम्मेलन के समापन पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस अब राजनीति करते हुए भगवानों को आपस में बांटने की सीमा लांघ चुकी है. उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास के सबसे निकृष्टतम उदाहरणों में से एक करार दिया. इस संदर्भ में उन्होंने अपनी बात को रेखांकित करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने देश की खातिर विभाजन किया था, परंतु वर्तमान में सत्ता की कुर्सी पाने के उद्देश्य से समाज के प्रत्येक परिवेश को बांटने का काम किया जा रहा है. इसका आप पर असर यह राजनीतिक विवाद राष्ट्रीय स्तर पर धर्म और क्षेत्रीय राजनीति के संवाद को प्रभावित कर सकता है. • राष्ट्रीय स्तर पर: राजनीतिक दलों के बीच धार्मिक प्रतीकों और आस्था पर बहस तेज होने से सार्वजनिक विमर्श में विभाजनकारी बयानबाजी पर जनता का ध्यान केंद्रित होगा. इससे मतदाताओं को आगामी चुनावों में विभिन्न दलों के वैचारिक रुख को परखने का मौका मिलता है. • तेलंगाना में: राज्य सरकार के प्रमुख के बयानों को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख से स्थानीय राजनीति में गर्माहट बढ़ेगी. स्थानीय नागरिक प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक विवादों के बीच संतुलन पर नजर रख सकते हैं. • राजनीतिक विमर्श पर: सार्वजनिक जीवन में देवताओं और आस्था के आधार पर वर्गीकरण करने वाले नेताओं के बयानों की कड़ी जांच हो सकती है. आम नागरिक नेताओं से संवेदनशील सामाजिक मामलों में अधिक जवाबदेह भाषा की अपेक्षा कर सकते हैं. • सामाजिक एकता पर: क्षेत्रीय और भाषाई आधार पर मतभेदों को हवा देने वाले बयानों पर चर्चा बढ़ने से अंतर-राज्यीय संबंधों पर बात होगी. इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्तर पर समावेशी संवाद बनाए रखना क्यों आवश्यक है. ऐसा क्यों हुआ यह विवाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की उस टिप्पणी के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने भगवान राम को अमीरों का और भगवान शिव को गरीबों का देवता बताया था. इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने राष्ट्रीय मंच से कांग्रेस की पूरी वैचारिक कार्यशैली पर सवाल उठाए. • मुख्य कारण: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा भगवान राम और शिव को आर्थिक आधार पर अलग-अलग वर्गों से जोड़ने वाली टिप्पणी की गई थी. भाजपा प्रवक्ता ने इसे धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग और समाज को बांटने का प्रयास मानते हुए कड़ा विरोध जताया. • क्षेत्रीय और वैचारिक पृष्ठभूमि: कांग्रेस नेताओं द्वारा समय-समय पर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच कर विभाजन और सांस्कृतिक पहचान को लेकर दिए गए बयानों ने इस विवाद को और हवा दी. भाजपा ने इन बयानों को एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया. • ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ: राहुल गांधी के संसद में शपथ लेने के तरीके और जाति, डीएनए तथा पितृसत्ता पर दिए गए पूर्व बयानों को भाजपा ने इस बहस का हिस्सा बनाया. इसका उद्देश्य कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप सिद्ध करना था. • आगामी राजनीतिक प्रभाव: इस तरह की बयानबाजी से राष्ट्रीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच ध्रुवीकरण और बढ़ने की संभावना है. आने वाले दिनों में दोनों पक्ष इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे की नीयत पर लगातार सवाल उठा सकते हैं. सवाल-जवाब 1. भाजपा ने रेवंत रेड्डी के किस बयान पर आपत्ति जताई है? भाजपा ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने राम को अमीरों और शिव को गरीबों का भगवान कहा था. 2. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की शपथ के बारे में क्या कहा? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 2014 में ईश्वर के नाम पर शपथ ली थी, लेकिन 2024 में उन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ न लेकर अंग्रेजी में शपथ ली. 3. भाजपा प्रवक्ता ने उत्तर और दक्षिण के संदर्भ में किन कांग्रेसी नेताओं का उल्लेख किया? उन्होंने कर्नाटक के डीके सुरेश के कर वाले बयान और पी. चिदंबरम की उत्तर भारत संबंधी टिप्पणी का हवाला दिया. 4. रेवंत रेड्डी के द्रविड़ियन और आर्यन वाले बयान पर भाजपा ने क्या कहा? सुधांशु त्रिवेदी ने इसे मूर्खतापूर्ण और निराधार सिद्धांत बताते हुए कहा कि इसे पूरे विश्व में नकारा जा चुका है. 5. सुधांशु त्रिवेदी ने रेवंत रेड्डी को किन ऐतिहासिक विचारकों को पढ़ने की सलाह दी? उन्होंने रेवंत रेड्डी को कांग्रेस के ही नेता रहे संपूर्णानंद और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को पढ़ने का सुझाव दिया. 6. लैंगिक समानता के मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता ने क्या तर्क रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पितृसत्ता विरोध केवल हिंदू समाज तक सीमित रहता है, जबकि अन्य धर्मगुरुओं के बयानों पर वे मौन रहते हैं. https://trendkia.com/telangana/telangana-chief-minister-ke-bayana-para-bjp-ka-tikha-hamala-devataon-aura-samaja-ko-bantane-ka-lagaya-aropa-40320 TrendKia — Har trend, sabse pehle.