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  "title": "ब्रिटिश वाइल्डकार्ड फेरी की परीकथा जारी, पांच सेट के रोमांचक मुकाबले में डिमित्रोव को हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंचे",
  "summary": "ब्रिटिश वाइल्डकार्ड फेरी ने पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी डिमित्रोव को पांच सेट के रोमांचक मुकाबले में 7-5, 3-6, 4-6, 6-4, 7-6 (10-7) से हराकर विंबलडन क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। वे 2014 में निक क्योर्जिओस के बाद यहां तक पहुंचने वाले पहले वाइल्डकार्ड खिलाड़ी हैं।",
  "content": "ब्रिटेन के वाइल्डकार्ड खिलाड़ी फेरी ने विंबलडन में इस सीजन की सबसे चौंकाने वाली कहानी लिख दी है। उन्होंने पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी डिमित्रोव को सेंटर कोर्ट पर पांच सेट तक चले संघर्ष में 7-5, 3-6, 4-6, 6-4, 7-6 (10-7) से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। ठीक एक हफ्ते पहले तक ब्रिटिश खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर निराशा का माहौल था, लेकिन फेरी की इस जीत ने पूरा नजारा बदल दिया।\n\nसेंटर कोर्ट पर पांच सेट का संघर्ष\nपुरुष और महिला एकल दोनों वर्गों को मिलाकर ड्रॉ में मौजूद 19 ब्रिटिश खिलाड़ियों में से सिर्फ चार ही पहले दौर की बाधा पार कर पाए थे, जबकि एम्मा रादुकानू और जैक ड्रेपर चोट के चलते टूर्नामेंट से बाहर थे। ऐसे माहौल में फेरी ने चौथे सेट में दो बार ब्रेक से पिछड़ने के बावजूद वापसी की और आखिरकार निर्णायक सेट के टाईब्रेक में मुकाबला अपने नाम किया। इस जीत के साथ फेरी 2014 में निक क्योर्जिओस के बाद विंबलडन पुरुष एकल के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले वाइल्डकार्ड और टॉप 100 रैंकिंग से बाहर के पहले खिलाड़ी बन गए। रिकॉर्ड बताते हैं कि यह कारनामा कितना दुर्लभ है, अब तक सिर्फ एक बार कोई वाइल्डकार्ड खिलाड़ी विंबलडन खिताब जीत पाया है, गोरान इवानिसेविच ने साल 2001 में यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।\n\nजन्मदिन से पहले कोबोली से भिड़ंत\nइवानिसेविच जैसा कारनामा दोहराने के लिए फेरी को अभी तीन मुकाबले और जीतने होंगे। इसकी शुरुआत बुधवार को इटली के नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली के खिलाफ क्वार्टर फाइनल से होगी। कोर्ट पर नतीजा जो भी हो, रविवार का दिन फेरी के लिए वैसे भी खास रहेगा क्योंकि उस दिन उनका 24वां जन्मदिन है। जीत के बाद फेरी ने कहा, \"आज मैंने जो अनुभव किया, उसे मैं जिंदगी भर संजोकर रखूंगा। पता नहीं, शायद मुझे दोबारा ऐसा अनुभव कभी न मिले। मैं पहली बार इस मंच पर खेल रहा हूं। हो सकता है यह पहली और आखिरी बार हो, लेकिन उम्मीद है कि ऐसा न हो।\"\n\nकैनबरा में चोट से रिटायरमेंट से सेंटर कोर्ट तक\nफेरी का यह सफर कितना नाटकीय है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ महीने पहले वे कहां खड़े थे। 5 जनवरी को वे कैनबरा में एक चैलेंजर टूर्नामेंट की क्वालिफाइंग के दौरान चोट के चलते मुकाबले से हट गए थे, यह पेशेवर टेनिस टूर की सबसे निचली पायदान का टूर्नामेंट था। महज 26 हफ्तों बाद वे सेंटर कोर्ट पर ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनलिस्ट के रूप में खड़े थे और 14,000 से ज्यादा दर्शकों की तालियों के बीच हाथ उठाकर जश्न मना रहे थे। पूरे टूर्नामेंट में वापसी करना फेरी की पहचान बन गया, उन्होंने अपने पहले दो मुकाबलों में पहला सेट गंवाने के बावजूद चार सेट में जीत दर्ज की थी, वहीं तीसरे दौर में बेल्जियम के जिजू बर्ग्स के खिलाफ वे एक सेट से पिछड़ने के बाद भी मैच अपने नाम कर पाए थे।\n\nअनुभव पर भारी पड़ा हौसला\nडिमित्रोव इस मुकाबले में 61 ग्रैंड स्लैम मैचों का अनुभव लेकर उतरे थे, जबकि फेरी के नाम सिर्फ आठ ग्रैंड स्लैम मुकाबलों का अनुभव था। बावजूद इसके बड़े मौके पर ज्यादा सहज ब्रिटिश खिलाड़ी ही नजर आया। पूर्व ब्रिटिश नंबर एक रुसेडस्की ने कहा, \"अगर दोनों खिलाड़ियों के करियर पर नजर डालें तो डिमित्रोव हमेशा बड़े मौकों पर लड़खड़ाए हैं। फेरी डटे रहे, मौके का फायदा उठाया और खुद से कहा कि मुझे रास्ता निकालना है, मुझे समाधान ढूंढना है। आज उन्होंने जो हासिल किया, वे उसके पूरी तरह हकदार हैं।\"\n\nपेरिस से लंदन तक का टेनिस सफर\nफेरी का यहां तक पहुंचना एक खेल प्रेमी परिवार और एक अलग राह से जुड़ी कहानी है। उनकी मां ओलिविया फ्रांस की पूर्व फेड कप खिलाड़ी रह चुकी हैं और बाद में वे एलटीए में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी हैं, जबकि उनके पिता लॉइक एक एसेट मैनेजर हैं जो लीग 1 के फुटबॉल क्लब लोरिएंट के मालिक भी रह चुके हैं। फेरी का जन्म पेरिस में हुआ था, लेकिन कम उम्र में ही उनका परिवार लंदन आ गया और वे ऑल इंग्लैंड क्लब के करीब ही पले-बढ़े। बचपन में वे चैंपियनशिप देखने आते थे और वहां खेल रहे खिलाड़ियों से गुर सीखते थे। एलटीए की प्रणाली से निकलने के बाद फेरी ने कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप लेने का फैसला किया, यह एक प्रतिष्ठित शोध संस्थान है, जहां उन्होंने साइंस, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी विषय में पढ़ाई की। अमेरिकी कॉलेज टेनिस सर्किट, जो ब्रिटिश खिलाड़ियों के बीच एक लोकप्रिय रास्ता माना जाता है, ने फेरी के प्रतिस्पर्धी स्वभाव को निखारने में अहम भूमिका निभाई।\n\nचोटों के बीच 'शक और अंधेरे लम्हों' से लड़ाई\nइस दौरान फेरी की तरक्की कई बार चोटों की वजह से रुकी, इनमें बांह में हुई बोन ब्रूइजिंग भी शामिल थी, जिसकी वजह से उन्हें शक और अंधेरे लम्हों का सामना करना पड़ा। रुसेडस्की ने उस दौर को याद करते हुए बताया, \"मुझे याद है, मैं उनके साथ प्रैक्टिस कोर्ट पर था और वे दो घंटे की प्रैक्टिस में सिर्फ 80 सर्व ही लगा पा रहे थे। दो सेट के मैच के लिए तैयार होने के लिए कम से कम 250 सर्व लगाने जरूरी होते हैं। वे प्रैक्टिस में भी पूरा मैच नहीं खेल पाते थे, उनका शरीर और कोहनी इसकी इजाजत नहीं देते थे।\" फेरी को अपनी पहली बड़ी सफलता पिछले साल विंबलडन में मिली थी, जब उन्होंने 20वीं वरीयता प्राप्त अलेक्सी पोपिरिन को हराकर ग्रैंड स्लैम स्तर पर अपनी पहली जीत दर्ज की थी, इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन में कोबोली को भी हराया था।\n\nरैंकिंग में बड़ी छलांग और मोटी इनामी राशि\nहर खिलाड़ी अपने घरेलू ग्रैंड स्लैम में छाप छोड़ना चाहता है, और फेरी ने अब ठीक यही कर दिखाया है। पूर्व ब्रिटिश नंबर एक हेनमैन ने कहा, \"अब उनकी जिंदगी बिना शक बदलने वाली है। एक ब्रिटिश खिलाड़ी के तौर पर सेंटर कोर्ट पर इस तरह की जीत हासिल करना उनकी आगे की रैंकिंग को पूरी तरह बदल देता है।\" इसका आर्थिक फायदा तुरंत मिलेगा, क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर फेरी को कम से कम £480,000 की इनामी राशि मिलनी तय है, यह उस £628,960 के अलावा है जो वे इस विंबलडन से पहले करियर में कमा चुके थे। रैंकिंग की बात करें तो फेरी ने साल की शुरुआत दुनिया के 185वें नंबर के खिलाड़ी के तौर पर की थी। विंबलडन खत्म होने तक वे कम से कम 63वें नंबर पर पहुंच जाएंगे, इस उछाल के साथ वे जान चोइंस्की को पीछे छोड़कर नए ब्रिटिश नंबर दो भी बन जाएंगे। इतनी बड़ी छलांग का मतलब है कि अब उन्हें भविष्य के ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के मुख्य ड्रॉ में वाइल्डकार्ड या क्वालीफाइंग के सहारे नहीं, बल्कि सीधे प्रवेश मिलेगा, जबकि अब तक उनकी सभी पांच ग्रैंड स्लैम भागीदारी इसी रास्ते से हुई थी।\n\n'अब चैलेंजर टूर्नामेंट पुरानी बात हो जाएंगे'\nडबल्स में पूर्व नंबर एक रह चुके मरे ने कहा, \"उन्होंने अपने करियर को जबरदस्त रफ्तार दे दी है। अब वे दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंटों में खेलेंगे और उनके लिए अपना शेड्यूल तय करना कहीं आसान हो जाएगा। मुझे लगता है कि चैलेंजर टूर्नामेंट अब उनके लिए बीते दिनों की बात हो जाएंगे।\" फ्रेंच ओपन के हाल के फाइनलिस्ट और नौवीं वरीयता प्राप्त कोबोली बुधवार के क्वार्टर फाइनल में फेरी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होंगे, लेकिन फेरी ने पूरे टूर्नामेंट में जो कभी हार न मानने वाला जज्बा दिखाया है, उसे मात देना आसान नहीं होगा। रुसेडस्की ने आगे कहा, \"यह एक परीकथा जैसी कहानी है। फेरी असली चैंपियन मटीरियल हैं। यह मत भूलिए कि उन्होंने इसी साल कोबोली को हराया था। यह परीकथा आगे भी जारी रह सकती है।\"\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर किसी की जेब या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करती, लेकिन टेनिस फैंस और ब्रिटिश खेल जगत के लिए इसके मायने बड़े हैं।\n\n• टेनिस प्रेमियों के लिए: फेरी की यह जीत विंबलडन को एक नई अंडरडॉग कहानी देती है, जिससे आने वाले क्वार्टर फाइनल मुकाबलों का रोमांच और बढ़ जाएगा।\n• युवा और उभरते खिलाड़ियों के लिए: चोट और निचली रैंकिंग से जूझने के बाद मिली यह सफलता दिखाती है कि सही मौके पर हौसला बनाए रखने से करियर में बड़ा मोड़ आ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेरी ने विंबलडन क्वार्टर फाइनल में डिमित्रोव को किस स्कोर से हराया?\nफेरी ने डिमित्रोव को 7-5, 3-6, 4-6, 6-4, 7-6 (10-7) से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।\n\n2. फेरी अगला मुकाबला किसके खिलाफ खेलेंगे?\nफेरी बुधवार को इटली के नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली के खिलाफ क्वार्टर फाइनल खेलेंगे।\n\n3. विंबलडन इतिहास में फेरी की इस उपलब्धि की खासियत क्या है?\nफेरी 2014 में निक क्योर्जिओस के बाद विंबलडन पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले वाइल्डकार्ड और टॉप 100 रैंकिंग से बाहर के पहले खिलाड़ी हैं।\n\n4. क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर फेरी को कितनी इनामी राशि मिलेगी?\nफेरी को कम से कम £480,000 की इनामी राशि मिलेगी, जो उनकी पहले की £628,960 की करियर कमाई के अतिरिक्त होगी।\n\n5. इस जीत का फेरी की रैंकिंग पर क्या असर होगा?\nसाल की शुरुआत में 185वें नंबर पर रहे फेरी अब कम से कम 63वें नंबर पर पहुंच जाएंगे और जान चोइंस्की को पीछे छोड़कर नए ब्रिटिश नंबर दो बन जाएंगे।\n\n6. फेरी का जन्मदिन कब है?\nफेरी का 24वां जन्मदिन रविवार को है।\n\n7. क्या पहले किसी वाइल्डकार्ड ने विंबलडन खिताब जीता है?\nहां, गोरान इवानिसेविच ने 2001 में वाइल्डकार्ड के तौर पर विंबलडन खिताब जीता था।\n\n8. फेरी को टेनिस करियर में शुरुआत में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?\nबांह में बोन ब्रूइजिंग जैसी चोटों ने फेरी की शुरुआती प्रगति रोकी, जिसकी वजह से वे प्रैक्टिस में भी पूरा मैच नहीं खेल पाते थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nफेरी का यह सफर सिर्फ एक टेनिस मैच की जीत नहीं, बल्कि हिम्मत और मेहनत की मिसाल है।\n\n• चोट के चलते जनवरी में एक छोटे चैलेंजर टूर्नामेंट से बाहर होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सिर्फ 26 हफ्तों में सेंटर कोर्ट तक का सफर तय किया।\n• बांह की चोट से आए 'शक और अंधेरे लम्हों' के दौर में भी प्रैक्टिस जारी रखी, भले ही शरीर पूरा अभ्यास करने की इजाजत न दे रहा हो।\n• अनुभव की कमी (सिर्फ आठ ग्रैंड स्लैम मुकाबले) को हौसले और खुद पर भरोसे से पाटा, जबकि सामने अनुभवी डिमित्रोव जैसा खिलाड़ी था।\n• हर मुश्किल मुकाबले में वापसी करने की आदत डाली, चाहे पहला सेट गंवाना हो या एक सेट से पिछड़ना, हार मानने के बजाय लड़ते रहे।\n• स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और अमेरिकी कॉलेज टेनिस के अनुभव को अपने खेल को निखारने का जरिया बनाया।",
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  "category": "टेनिस",
  "publishedAt": "2026-07-06",
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