चेन्नई ओपन में हार के बाद ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी जोडी बरेज को मिली जान से मारने की धमकियां, डब्लूटीए ने शुरू की सुरक्षा जांच भारत के चेन्नई ओपन में पहले दौर की हार के बाद ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी जोडी बरेज को ऑनलाइन जान से मारने की धमकियां मिलीं, जिसके बाद डब्लूटीए ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर जांच शुरू की है। महिला पेशेवर टेनिस टूर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा और मानसिक शांति से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ब्रिटेन की 27 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी जोडी बरेज को भारत में आयोजित चेन्नई ओपन के दौरान सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां दी गई हैं। सोलह महीनों के लंबे अंतराल के बाद डब्ल्यूटीए टूर के सिंगल्स मुख्य ड्रॉ में वापसी करने वाली जोडी बरेज को अपने शुरुआती मैच में हार का सामना करना पड़ा था। इस मुकाबले के समाप्त होते ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अभद्र और हिंसक संदेशों की बाढ़ आ गई, जिसके बाद महिला टेनिस संघ यानी डब्ल्यूटीए के ऑन-ग्राउंड कर्मचारियों और सुरक्षा टीम को तुरंत सक्रिय होना पड़ा। कोर्ट पर वापसी और मुकाबले के बाद ऑनलाइन नफरत का सामना विश्व रैंकिंग में 85वें स्थान तक पहुंच चुकीं और बिली जीन किंग कप में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करने वाली जोडी बरेज के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण था। मंगलवार को चेन्नई ओपन के सिंगल्स मुख्य ड्रॉ के मैच में उनका मुकाबला भारत की वैष्णवी अडकर से हुआ। तीन सेटों तक चले इस कड़े संघर्ष में वैष्णवी अडकर ने जोडी बरेज को 3-6, 6-3, 7-5 से पराजित कर दिया। करीब 16 महीनों बाद मुख्य ड्रॉ में लौटीं बरेज के लिए यह हार खेल के लिहाज से निराशाजनक थी, लेकिन इसके तुरंत बाद जो कुछ हुआ उसने खेल जगत को स्तब्ध कर दिया। मुकाबले के ठीक बाद बरेज के इंस्टाग्राम डायरेक्ट मैसेज इनबॉक्स में गालियां और जान से मारने की सीधी धमकियां भेजी जाने लगीं। बरेज ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी साझा करते हुए इन आपत्तिजनक और हिंसक संदेशों के स्क्रीनशॉट्स सार्वजनिक किए। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि टूर पर वापस लौटने का यह शानदार स्वागत है और उन्हें अब याद आ रहा है कि उन्होंने खेल से दूरी क्यों बनाई थी। अपनी इस पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर डब्ल्यूटीए को टैग किया और सवाल उठाया कि ऐसे दुर्व्यवहार और धमकियों से खिलाड़ियों को बचाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। इस घटना के सामने आने के बाद जर्मनी की इवा लिस समेत कई अन्य साथी टेनिस खिलाड़ियों ने खुलकर जोडी बरेज का समर्थन किया और खेल में बढ़ती इस विषाक्तता के खिलाफ एकजुटता दिखाई। डबल्स मुकाबले में जीत और डब्ल्यूटीए का सुरक्षा घेरा सोशल मीडिया पर भयानक धमकियां मिलने के बावजूद ब्रिटिश खिलाड़ी ने कोर्ट पर अपना संयम बनाए रखा। बुधवार को चेन्नई ओपन के डबल्स वर्ग में जोडी बरेज ने संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी जोड़ीदार रॉबिन मोंटगोमरी के साथ मिलकर अंतिम 16 का मुकाबला खेला और शानदार जीत दर्ज की। खेल के प्रति उनकी इस प्रतिबद्धता के बीच टेनिस की वैश्विक नियामक संस्था ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपनी सुरक्षा मशीनरी तैनात कर दी। खिलाड़ियों और व्यापक टेनिस परिवार को ऑनलाइन धमकियों व दुर्व्यवहार से सुरक्षित रखना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए डब्ल्यूटीए ने स्पष्ट किया कि चेन्नई में मौजूद उनके ऑन-ग्राउंड स्टाफ के साथ-साथ प्लेयर वेलफेयर और थ्रेट मैट्रिक्स टीम लगातार जोडी बरेज को आवश्यक सुरक्षा व मानसिक सहयोग दे रही है। डब्ल्यूटीए ने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की बात दोहराई है। इस व्यवस्था के तहत बरेज को विशेष निजी चैनल उपलब्ध कराए गए हैं ताकि वे किसी भी आपत्तिजनक डायरेक्ट मैसेज की तुरंत रिपोर्ट कर सकें। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर ऐसे ऑटोमेटेड मॉडरेशन टूल्स सक्रिय किए गए हैं जो किसी भी अभद्र टिप्पणी को बरेज के देखने से पहले ही छिपा देते हैं। थ्रेट मैट्रिक्स तकनीक और सट्टेबाजी सिंडिकेट का कड़वा सच खिलाड़ियों को मिलने वाली धमकियों से निपटने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। वर्ष 2023 में स्थापित 'थ्रेट मैट्रिक्स' प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित पहचान तकनीक पर काम करती है। इसे सिग्निफाई ग्रुप द्वारा वर्ल्ड टेनिस के सहयोग से संचालित किया जाता है। यह उन्नत निगरानी प्रणाली उन अज्ञात सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और उनके पीछे बैठे असली लोगों की पहचान करने में सक्षम है जो एथलीटों को निशाना बनाते हैं। पहचान होने के बाद आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से हटाने की रिपोर्ट दी जाती है, गंभीर मामलों को सीधे कानून प्रवर्तन एजेंसियों और पुलिस को सौंपा जाता है तथा जमीनी स्तर पर किसी भी संभावित वास्तविक नुकसान को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई की जाती है। खेलों में ऑनलाइन दुर्व्यवहार के पीछे का एक बड़ा कारण अवैध और अनियंत्रित खेल सट्टेबाजी है। सिग्निफाई की 2024 की एक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि खिलाड़ियों के खिलाफ की जाने वाली अपमानजनक पोस्ट्स में से 48 प्रतिशत के पीछे ऐसे सट्टेबाज थे जो अपनी बाजी हारने से नाराज थे। यह समस्या समय के साथ और विकराल हुई है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में सत्यापित दुर्व्यवहार के कुल मामलों में 42 प्रतिशत हिस्सेदारी सट्टेबाजों की थी, जबकि जान से मारने या गंभीर हिंसा जैसी अति-गंभीर धमकियों के 59 प्रतिशत मामलों के लिए यही नाराज सट्टेबाज जिम्मेदार पाए गए। इस संकट से निपटने के लिए अब टेनिस संस्थाएं कई सट्टेबाजी कंपनियों के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम पर काम कर रही हैं। यह प्रोग्राम रियल टाइम में ऐसे सट्टेबाजों की पहचान करता है जो मैचों के परिणामों के बाद एथलीटों को गालियां या धमकियां भेजते हैं। इसके आधार पर सट्टेबाजी कंपनियां संबंधित व्यक्ति के बेटिंग अकाउंट को तुरंत चिह्नित कर सकती हैं, उस पर वित्तीय प्रतिबंध लगा सकती हैं या उसे हमेशा के लिए निलंबित कर सकती हैं। महिला एथलीटों की सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर उठते सवाल तकनीकी प्रयासों के बावजूद महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर काम करने वाले संगठनों का मानना है कि वर्तमान कदम नाकाफी हैं। महिला एथलीटों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए समर्पित संगठन काइनिस्का एडवोकेसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी म्हैरी मैक्लेनन ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि खेल जगत में महिला एथलीटों की व्यापक सुरक्षा के लिए अभी भी पर्याप्त काम नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक पहचान रखने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए इस तरह के अपमानजनक संदेशों का सामना करना अब एक कड़वी और आम दिनचर्या बन चुका है। म्हैरी मैक्लेनन के अनुसार, वे जिन महिला एथलीटों से बात करती हैं, उनमें से अधिकांश यह बताती हैं कि मैच जीतने या हारने से परे केवल उनकी सार्वजनिक प्रोफ़ाइल और टेनिस जैसे खेलों का सट्टेबाजी से गहरा जुड़ाव होने के कारण उन्हें लगातार दुष्कर्म और जान से मारने की धमकियां मिलती हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पेशेवर खेलों को सट्टेबाजी एजेंसियों के साथ अपने वित्तीय रिश्तों पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि आधुनिक खेल संचालन को पैसों और प्रायोजकों की जरूरत होती है, लेकिन इसके बदले में व्यक्तिगत खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति, मानवाधिकार और शारीरिक सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती। एथलीटों के कल्याण को हर हाल में वित्तीय लाभ से ऊपर रखना होगा। इसका आप पर असर यह घटना आधुनिक खेल जगत में सोशल मीडिया दुर्व्यवहार, सट्टेबाजी के दुष्प्रभावों और डिजिटल सुरक्षा उपायों के प्रति बढ़ते वैश्विक विमर्श को सीधे प्रभावित करती है। • भारत में: चेन्नई जैसे प्रमुख भारतीय शहरों में आयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों की डिजिटल और ऑन-ग्राउंड सुरक्षा प्रोटोकॉल अब और अधिक कड़े किए जाएंगे। इससे देश में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की मेजबानी करने वाले खेल संघों को एआई आधारित निगरानी व्यवस्था अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा। • खेल प्रेमियों और दर्शकों के लिए: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खिलाड़ियों के खिलाफ अभद्र भाषा या धमकियों का इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स पर तुरंत कानूनी व तकनीकी कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है। सट्टेबाजी कंपनियों और खेल संस्थाओं के साझा नेटवर्क के चलते ऐसे उपयोगकर्ताओं के वित्तीय बेटिंग अकाउंट्स हमेशा के लिए ब्लॉक या प्रतिबंधित हो सकते हैं। • महिला एथलीटों के लिए: वैश्विक संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे निजी रिपोर्टिंग टूल्स और ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन से खिलाड़ियों को मानसिक उत्पीड़न से बचने में सीधी मदद मिलेगी। खिलाड़ी अब टूर्नामेंट आयोजकों से डिजिटल सुरक्षा को अपने अनुबंध का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग कर सकती हैं। • खेल सट्टेबाजी बाजार के लिए: खेलों और सट्टेबाजी एजेंसियों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को लेकर कड़े नियामक नियम तय किए जा सकते हैं। सट्टेबाजों द्वारा हारने के बाद एथलीटों पर हमला करने की बढ़ती घटनाओं से कई मंचों पर यूजर वेरिफिकेशन के नियम अधिक सख्त होंगे। ऐसा क्यों हुआ यह घटना कोर्ट पर हार के बाद वित्तीय नुकसान झेलने वाले सट्टेबाजों की आक्रामकता और सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों तक अनियंत्रित सीधी पहुंच की वजह से सामने आई है। • मैच का अप्रत्याशित परिणाम: 16 महीने बाद सिंगल्स मुख्य ड्रॉ में लौटीं अनुभवी ब्रिटिश खिलाड़ी जोडी बरेज को स्थानीय भारतीय खिलाड़ी वैष्णवी अडकर के हाथों 3-6, 6-3, 7-5 से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इस उलटफेर के चलते मुकाबले पर दांव लगाने वाले कई सट्टेबाजों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। • सट्टेबाजी का बढ़ता दबाव: आधुनिक पेशेवर टेनिस सट्टेबाजी बाजारों से गहराई से जुड़ा हुआ है, जहां हर अंक और सेट पर बाजी लगाई जाती है। डेटा के अनुसार 2025 में खिलाड़ियों के खिलाफ सत्यापित गंभीर दुर्व्यवहार के 59 प्रतिशत मामलों में नाराज सट्टेबाज ही सीधे तौर पर शामिल पाए गए हैं। • सोशल मीडिया पर खुली पहुंच: इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डायरेक्ट मैसेजिंग की सुविधा के चलते कोई भी अज्ञात उपयोगकर्ता आसानी से खिलाड़ियों के निजी इनबॉक्स तक नफरत भरे संदेश भेज पाता है। मजबूत प्रारंभिक फिल्टर न होने से खिलाड़ी सीधे तौर पर हिंसक भाषा के संपर्क में आ जाते हैं। • संस्थागत सुरक्षा में देरी: खिलाड़ी लंबे समय से मैचों के बाद होने वाली ट्रोलिंग और धमकियों की शिकायत करते रहे हैं, लेकिन सट्टेबाजी एजेंसियों पर कड़े प्रतिबंध और वास्तविक समय में कानूनी कार्रवाई की गति अब भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है। सवाल-जवाब 1. चेन्नई ओपन में जोडी बरेज के साथ क्या घटना घटी? ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी जोडी बरेज को चेन्नई ओपन के पहले दौर में हारने के बाद सोशल मीडिया पर सीधे जान से मारने की धमकियां और गालियां भेजी गईं। 2. जोडी बरेज का सिंगल्स मुकाबला किसके खिलाफ था और नतीजा क्या रहा? बरेज का मुकाबला भारत की वैष्णवी अडकर से था, जिसमें वैष्णवी ने उन्हें 3-6, 6-3, 7-5 से हरा दिया। 3. डब्लूटीए खिलाड़ियों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने के लिए किस तकनीक का उपयोग करता है? डब्लूटीए 2023 से 'थ्रेट मैट्रिक्स' नामक एआई आधारित प्रणाली का उपयोग कर रहा है, जो धमकी देने वाले अज्ञात खातों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई में मदद करती है। 4. टेनिस खिलाड़ियों को मिलने वाली धमकियों में सट्टेबाजों की कितनी भूमिका है? आंकड़ों के अनुसार 2025 में खिलाड़ियों के साथ सत्यापित दुर्व्यवहार के 42 प्रतिशत और गंभीर हिंसा व धमकियों के 59 प्रतिशत मामलों के पीछे नाराज सट्टेबाज थे। 5. धमकियों के बाद डबल्स मुकाबले में जोडी बरेज का प्रदर्शन कैसा रहा? बरेज ने अमेरिका की रॉबिन मोंटगोमरी के साथ मिलकर चेन्नई ओपन डबल्स के अंतिम 16 मुकाबले में जीत हासिल की। 6. काइनिस्का एडवोकेसी ने इस मामले पर क्या चिंता व्यक्त की है? संस्था की प्रमुख म्हैरी मैक्लेनन ने कहा कि महिला एथलीटों की सुरक्षा के लिए खेल संस्थाओं को सट्टेबाजी कंपनियों के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करनी चाहिए और खिलाड़ियों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए। https://trendkia.com/tennis/chennai-open-men-hara-ke-bada-britisha-tenisa-khilari-jodie-burrage-ko-mili-jana-se-marane-ki-dhamakiyan-wta-ne-shuru-ki-suraksha--56710 TrendKia — Har trend, sabse pehle.