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  "type": "article",
  "title": "जोडी बररेज ने कहा कि ऑनलाइन गालियों से उन्हें डर नहीं लगता क्योंकि यह आम बात हो गई है",
  "summary": "टेनिस खिलाड़ी जोडी बररेज ने हार के बाद मिलने वाली जान से मारने की धमकियों पर खुलकर बात की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सख्त कदम उठाने की मांग की।",
  "content": "टेनिस कोर्ट पर हार के बाद मिलने वाली धमकियों और ऑनलाइन गालियों का सामना करने वाली ब्रिटिश खिलाड़ी जोडी बररेज ने इस स्थिति को लेकर अपनी बात रखी है। हाल ही में चेन्नई में खेले गए मुकाबले के दौरान उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसके तुरंत बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अभद्र संदेशों और जान से मारने की धमकियों की बाढ़ आ गई थी। इन गंभीर मामलों के बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस तरह के ट्रोलिंग से व्यक्तिगत रूप से भयभीत नहीं होती हैं, हालांकि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है कि इस प्रकार का व्यवहार अब सामान्य माना जाने लगा है।\n\n \n\nमैच के बाद फोन पर मिलती हैं धमकियां\n चेन्नई में जारी प्रतियोगिताओं के बीच जोडी बररेज ने बताया कि जब उन्होंने अपना पहला डब्ल्यूटीए टूर सिंगल्स मैच 16 महीनों के अंतराल के बाद गंवाया, तो उनका शारीरिक रक्तचाप भी काफी बिगड़ गया था। मैच हारने के बाद जब उन्होंने डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह ली और अपना फोन चेक किया, तो वहां पहले से ही भारतीय वाइल्डकार्ड खिलाड़ी वैष्णवी आड़कर के खिलाफ 3-6, 6-3, 7-5 से मिली हार के कारण आलोचनाओं और धमकियों का अंबार लगा हुआ था। उन्होंने स्वीकार किया कि इन संदेशों में बहुत ही क्रूर और आक्रामक बातें लिखी होती हैं, लेकिन वे इन चीजों को बहुत ज्यादा दिल पर नहीं लेती हैं और कोशिश करती हैं कि उन्हें न ही पढ़ें।\n\n \n\nसट्टेबाजों की भूमिका और मानसिक दबाव\n खिलाड़ियों को मिलने वाली इस नफरत के पीछे मुख्य रूप से निराश और गुस्से में रहने वाले जुआरी और सट्टेबाज होते हैं, जो मैचों के परिणामों पर पैसे लगाते हैं। इस साल के डब्ल्यूटीए और वर्ल्ड टेनिस के ऑनलाइन दुर्व्यवहार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, सिग्निफाइ ग्रुप के थ्रेट मैट्रिक्स सर्विस की रिपोर्ट बताती है कि 2025 के सीजन के दौरान सामने आए कुल सत्यापित मामलों में से 42 प्रतिशत के लिए ये नाराज सट्टेबाज ही जिम्मेदार थे। यही कारण है कि कई टेनिस टूर्नामेंट्स द्वारा सट्टेबाजी कंपनियों के साथ स्पॉन्सरशिप समझौते करने पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और खेल जगत में इसको लेकर काफी नाराजगी भी देखने को मिलती है।\n\n \n\nसोशल मीडिया कंपनियों से जवाबदेही की मांग\n जोडी बररेज का मानना है कि इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी ओर से और अधिक ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर इंस्टाग्राम अकाउंट पर यूजर की आईडी अनिवार्य कर दी जानी चाहिए, जिससे लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जवाबदेही तय की जा सके और इस तरह की अभद्र भाषा के प्रयोग पर लगाम लगाई जा सके। उनका कहना है कि जब लोग अपनी पहचान के साथ जुड़ेंगे, तो वे सोच-समझकर बोलेंगे और इस स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा क्योंकि यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।\n\n \n\nसुरक्षा व्यवस्था और आगे की तैयारियां\n सभी डब्ल्यूटीए और वर्ल्ड टेनिस खिलाड़ियों के पास थ्रेट मैट्रिक्स की सेवाओं तक सीधी पहुंच होती है, जो सोशल मीडिया पर एथलीटों को मिलने वाले हर संदेश और पोस्ट की बारीकी से निगरानी करती है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना होता है कि क्या किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत सुरक्षा को कोई वास्तविक खतरा है या नहीं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों या संबंधित प्लेटफॉर्म्स को सतर्क किया जा सके। अपनी व्यक्तिगत रैंकिंग को सुधारने के लिए संघर्ष कर रही इस खिलाड़ी ने स्पष्ट किया कि वे इन नकारात्मकताओं को अपने करियर के रास्ते में नहीं आने देंगी और पूरी तरह से साल 2027 के सत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nऑनलाइन गालियों और धमकियों के इस मामले का असर खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और खेल जगत की नीतियों पर सीधा पड़ता है।\n\n• वैश्विक स्तर पर: खेल संघों और सोशल मीडिया कंपनियों पर खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम और आईडी सत्यापन लागू करने का दबाव बढ़ रहा है।\n• टेनिस जगत में: टूर्नामेंट आयोजकों और सट्टेबाजी कंपनियों के बीच हो रहे प्रायोजन समझौतों पर पुनर्विचार करने की मांग तेज हो गई है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nटेनिस खिलाड़ियों को मिलने वाली ऑनलाइन गालियों और धमकियों के पीछे मुख्य रूप से सट्टेबाजी संस्कृति और मैचों पर लगने वाले भारी पैसों की हार-जीत जुड़ी हुई है।\n\n• सट्टेबाजी का प्रभाव: रिपोर्टों से यह स्पष्ट हुआ है कि मैचों के परिणाम से निराश जुआरी खिलाड़ियों को निशाना बनाते हैं और कुल सत्यापित दुर्व्यवहार का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं से आता है।\n• सोशल मीडिया की कमजोरी: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गुमनामी की सुविधा होने के कारण लोग बिना किसी डर के अभद्र भाषा और धमकियां आसानी से भेज पाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोडी बररेज को किन खिलाड़ियों के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा?\nउन्हें भारतीय वाइल्डकार्ड खिलाड़ी वैष्णवी आड़कर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।\n\n2. खिलाड़ियों को मिलने वाले ऑनलाइन दुर्व्यवहार में सबसे बड़ा हिस्सा किसका होता है?\nरिपोर्ट के अनुसार, कुल सत्यापित दुर्व्यवहार का 42 प्रतिशत हिस्सा निराश और गुस्से में रहने वाले सट्टेबाजों से जुड़ा होता है।\n\n3. जोडी बररेज ने सोशल मीडिया दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या सुझाव दिया है?\nउन्होंने सुझाव दिया है कि हर इंस्टाग्राम अकाउंट के लिए आईडी अनिवार्य की जानी चाहिए ताकि उपयोगकर्ताओं की जवाबदेही तय हो सके।\n\n4. खिलाड़ियों की ऑनलाइन सुरक्षा की निगरानी कौन सी सर्विस करती है?\nथ्रेट मैट्रिक्स सर्विस सभी सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों की निगरानी करके खिलाड़ियों की सुरक्षा का आकलन करती है।",
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