# विंबलडन में इनामी राशि को लेकर खिलाड़ियों में दरार, मीडिया बहिष्कार के विरोध प्रदर्शन पर बंटे दिग्गज टेनिस स्टार

> विंबलडन में खिलाड़ियों के एक गुट ने ग्रैंड स्लैम आयोजकों से राजस्व में अधिक हिस्सेदारी और कल्याणकारी लाभों की मांग को लेकर मीडिया वार्ता का समय 15 मिनट तक सीमित कर दिया है। हालांकि, नोवाक जोकोविच और एलेक्जेंडर ज्वेरेव जैसे शीर्ष सितारों के इस प्रदर्शन से अलग होने से खिलाड़ियों की एकजुटता में बड़ी दरार आ गई है।

**Type:** article · **Category:** टेनिस · **Published:** 2026-06-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/tennis/wimbledon-men-inami-rashi-ko-lekara-khilariyon-men-darara-midiya-bahishkara-ke-virodha-pradarshana-para-bnte-diggaja-tenisa-stara-3372 · **Language:** Hindi
**Tags:** विंबलडन, टेनिस समाचार, अर्यना सबालेंका, नोवाक जोकोविच, इनामी राशि विवाद, ग्रैंड स्लैम

ऑल इंग्लैंड क्लब के मैदानों पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो रहा है, जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के वित्तीय ढांचे को चुनौती देने के तरीके पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरे विवाद के केंद्र में एक सुनियोजित विरोध प्रदर्शन है, जिसके तहत खिलाड़ी उन पारंपरिक मीडिया दायित्वों को पूरा करने से बच रहे हैं जो लंबे समय से इन बड़े टूर्नामेंटों का एक अहम हिस्सा रहे हैं। पिछले महीने फ्रेंच ओपन में जिस एकजुटता के साथ इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, वह अब विंबलडन तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब इस आंदोलन में आपसी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। जहां कुछ बड़े सितारे टूर्नामेंट के राजस्व में अपनी उचित हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कम समय दे रहे हैं, वहीं कुछ अन्य खिलाड़ियों ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग कर लिया है। इससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या खिलाड़ी इस वित्तीय सुधार की लड़ाई में अपनी एकजुटता बरकरार रख पाएंगे।

## निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के हक की लड़ाई
चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन अर्यना सबालेंका इस विरोध प्रदर्शन की सबसे मुखर आवाजों में से एक बनकर उभरी हैं। उन्होंने निजी लाभ के बजाय खिलाड़ियों के सामूहिक कल्याण का मुद्दा उठाया है। मीडिया से बातचीत के दौरान सबालेंका ने उम्मीद जताई कि भविष्य में खिलाड़ियों को विंबलडन के बाद अपने ग्रैंड स्लैम मीडिया दायित्वों का दोबारा बहिष्कार नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इनामी राशि में बढ़ोतरी और बेहतर सुविधाओं की यह मांग केवल उन खिलाड़ियों के लिए नहीं है जो पहले से ही खेल के शीर्ष स्तर पर हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। इसके विपरीत, इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य टेनिस बिरादरी के उन खिलाड़ियों की मदद करना है जो पेशेवर स्तर पर बने रहने के लिए बुनियादी खर्च उठाने में भी संघर्ष कर रहे हैं, जैसे कि एक पूर्णकालिक कोच रखना।

विश्व रैंकिंग में नीचे रहने वाले खिलाड़ियों के लिए पेशेवर टेनिस का सफर बेहद आर्थिक चुनौतियों से भरा होता है। यात्रा का खर्च, कोच की फीस और फिजियोथेरेपी का खर्च अक्सर उनकी पूरी कमाई को खत्म कर देता है, जिससे उनके पास कोई वित्तीय सुरक्षा नहीं बचती। सबालेंका ने रेखांकित किया कि निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ियों का जीवन बिल्कुल भी आसान नहीं होता और यह विरोध प्रदर्शन उनके भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रयास है। प्रमुख टूर्नामेंटों के विशाल राजस्व का एक बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों के मुआवजे और कल्याणकारी योजनाओं में लगाने की मांग की जा रही है, जिसमें पेंशन योजना और मातृत्व अवकाश भी शामिल हैं, ताकि खेल में हर किसी के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाया जा सके।

## 15 मिनट के समय का प्रतीकात्मक महत्व
खिलाड़ियों द्वारा किए जा रहे इस विरोध प्रदर्शन का तरीका बेहद सुनियोजित है। शनिवार को टूर्नामेंट से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शन में शामिल खिलाड़ियों ने पत्रकारों के साथ बातचीत के समय को सख्ती से केवल 15 मिनट तक सीमित रखा। यह समयसीमा बिना किसी ठोस कारण के तय नहीं की गई थी, बल्कि यह कुल राजस्व के उस 15 प्रतिशत हिस्से का प्रतीक है जो वर्तमान में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों द्वारा खिलाड़ियों की इनामी राशि के रूप में आवंटित किया जाता है। खिलाड़ियों के प्रतिनिधियों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह रणनीतिक फैसला पुरुषों और महिलाओं दोनों के पेशेवर दौरों के खिलाड़ियों के साथ गहन और विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया गया है।

खिलाड़ियों के इस गठबंधन ने बड़े टूर्नामेंटों के सामने कुछ स्पष्ट वित्तीय मांगें रखी हैं। वर्तमान में, वे चारों ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों से मांग कर रहे हैं कि वे अपने कुल राजस्व का कम से कम 16 प्रतिशत हिस्सा खिलाड़ियों की इनामी राशि के लिए तुरंत आवंटित करें। इसके साथ ही, इस समूह की मांग है कि इस हिस्सेदारी को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए और साल 2030 तक इसे 22 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। खिलाड़ी इस मांग को पूरी तरह से उचित मानते हैं, क्योंकि पिछले एक दशक में इन बड़े टूर्नामेंटों की व्यावसायिक कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। खिलाड़ियों का तर्क है कि इस जबरदस्त कमाई का आनुपातिक लाभ उन एथलीटों को नहीं मिला है, जिनकी वजह से दर्शक इन मैचों को देखने आते हैं।

## मीडिया बहिष्कार को लेकर अलग-अलग रुख
विभिन्न दिग्गज खिलाड़ियों के बीच इस विरोध प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग रुख देखने को मिला है। पुरुषों के सिंगल्स वर्ग के डिफेंडिंग चैंपियन जैनिक सिनर ने मीडिया सत्र के दौरान बहुत ही नपा-तुला रुख अपनाया। सिनर ने इस प्रदर्शन से जुड़े सभी सवालों को टाल दिया और साफ किया कि वह केवल टेनिस के बारे में बात करना चाहते हैं। अंग्रेजी में पूछे गए कुछ सवालों के संक्षिप्त जवाब देने के बाद, वह तुरंत इतालवी भाषा में बात करने लगे, जिससे इस मुद्दे पर आगे चर्चा नहीं हो सकी। इसी तरह, महिला वर्ग की डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातैक और पूर्व नंबर एक खिलाड़ी दानिल मेदवेदेव ने भी अपनी मीडिया प्रतिबद्धताओं को बेहद सीमित रखा। उन्होंने खुद को केवल एक मुख्य प्रेस कॉन्फ्रेंस और कुछ संक्षिप्त ब्रॉडकास्ट इंटरव्यू तक ही सीमित रखा।

हालांकि, दानिल मेदवेदेव ने इस मुद्दे पर खिलाड़ियों की सोच को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने सुझाव दिया कि पिछले महीने पेरिस में फ्रेंच ओपन के दौरान की गई कार्रवाई ने विंबलडन आयोजकों को इनामी राशि पर विचार करने के लिए मजबूर करने में मदद की होगी। मेदवेदेव ने कहा कि भले ही वे पेशेवर अकाउंटेंट नहीं हैं, लेकिन वे उन्हें दी जाने वाली वित्तीय जानकारियों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि खिलाड़ियों को मिलने वाला राजस्व का प्रतिशत 10 साल पहले की तुलना में कम हुआ है, जिसका मतलब है कि टूर्नामेंट की कुल कमाई के मुकाबले खिलाड़ियों को कम पैसा मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई गुस्से में किया गया विद्रोह नहीं है, बल्कि निष्पक्षता हासिल करने के लिए एक शांतिपूर्ण चर्चा है।

## खिलाड़ियों की एकजुटता में दिखी बड़ी दरार
भले ही कुछ खिलाड़ियों की तरफ से कड़ा रुख अपनाया जा रहा हो, लेकिन शनिवार को आयोजित मीडिया सत्र के दौरान इस आंदोलन में बड़ी दरार साफ दिखाई दी। कई बड़े खिलाड़ियों ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए तय 15 मिनट की समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे संकेत मिला कि वे इस सामूहिक बहिष्कार से खुद को अलग कर रहे हैं। सबसे प्रमुख रूप से, सात बार के विंबलडन चैंपियन नोवाक जोकोविच इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। जोकोविच ने न केवल 15 मिनट की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की, बल्कि इसके बाद उन्होंने लगभग एक घंटे तक 18 अलग-अलग टेलीविजन चैनलों को इंटरव्यू भी दिए, जो उनके साथी खिलाड़ियों के रुख से बिल्कुल अलग था।

इसके अलावा, कुछ खिलाड़ियों ने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने विंबलडन के सकारात्मक कदमों को देखते हुए इस प्रदर्शन से दूरी बना ली है। ऑस्ट्रेलिया के छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी एलेक्स डी मिनौर, जो फ्रेंच ओपन के दौरान इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे, उन्होंने विंबलडन में मीडिया प्रतिबंधों में भाग नहीं लेने का फैसला किया। एलेक्स डी मिनौर ने कहा कि हालांकि पेरिस में किए गए सामूहिक प्रयास से वे वह वित्तीय आंकड़े हासिल नहीं कर पाए जो वे चाहते थे, लेकिन विंबलडन ने इस दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाया है। उनके लिए सामान्य रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करना विंबलडन के इस सुधरे हुए प्रस्ताव के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का एक तरीका था।

इसी तरह, जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव, जिन्होंने हाल ही में पेरिस में अपना पहला बड़ा खिताब जीता था और जो पिछले साल खिलाड़ियों की तरफ से बातचीत में शामिल रहे थे, उन्होंने भी मौजूदा मीडिया हड़ताल से दूरी बना ली है। ज्वेरेव ने कहा कि वे खिलाड़ियों के इस अधिकार आंदोलन का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी अहसास हुआ कि मीडिया को निशाना बनाने से कुछ हासिल नहीं होगा। उनका मानना है कि पत्रकारों के पास टूर्नामेंट की वित्तीय नीतियों को बदलने की कोई शक्ति नहीं होती है, इसलिए प्रशासनिक फैसलों के लिए उन्हें परेशान करना ठीक नहीं है। इसी सोच के तहत ज्वेरेव ने पूरे आधे घंटे तक मीडिया से बात की, हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में टेनिस में वित्तीय सुधार जरूर देखने को मिलेंगे।

## विंबलडन का बचाव और भारी-भरकम इनामी राशि
इस पूरे विवाद पर ऑल इंग्लैंड क्लब के प्रशासन ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। क्लब की मुख्य कार्यकारी सैली बोल्टन ने खिलाड़ियों के इस समन्वित विरोध प्रदर्शन पर हैरानी और निराशा जताई है। टूर्नामेंट के आयोजकों का दृढ़ विश्वास है कि खिलाड़ियों को दी जाने वाली वित्तीय राशि पूरी तरह से उचित है। सीधे तौर पर दी जाने वाली इनामी राशि के अलावा, क्लब ने हाल के वर्षों में खिलाड़ियों की सुविधाओं को आधुनिक बनाने और बेहतर बनाने के लिए किए गए भारी निवेश का भी हवाला दिया है। उनका तर्क है कि खिलाड़ियों के कल्याण का ध्यान केवल इनामी राशि से ही नहीं, बल्कि कई अन्य माध्यमों से भी रखा जा रहा है।

इसके बावजूद, इस साल विंबलडन में दांव पर लगी वित्तीय राशि अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर है। इस साल पुरुष और महिला दोनों वर्गों के सिंगल्स विजेताओं को रिकॉर्ड 36 लाख पाउंड (लगभग 3.6 मिलियन पाउंड) की इनामी राशि मिलेगी, जो पिछले साल के 30 लाख पाउंड से काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त, टूर्नामेंट ने पहले दौर में बाहर होने वाले खिलाड़ियों को भी मजबूत वित्तीय सहायता देने का प्रयास किया है, जिसके तहत पहले दौर में हारने वाले खिलाड़ी को भी 80,000 पाउंड मिलेंगे। हालांकि ये आंकड़े काफी बड़े दिखते हैं, लेकिन प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों का कहना है कि यह कुल राजस्व के प्रतिशत के रूप में गिरावट को दर्शाता है, जिससे आने वाले समय में पेशेवर टेनिस के वित्तीय भविष्य को लेकर यह बहस और तेज होने की संभावना है।

## इसका आप पर असर
- **खेल प्रेमियों के लिए:** इस विवाद के कारण खिलाड़ियों के प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू काफी सीमित हो सकते हैं, जिससे प्रशंसकों को अपने पसंदीदा स्टार्स की प्रतिक्रियाएं कम सुनने को मिलेंगी।
- **पेशेवर टेनिस खिलाड़ियों के लिए:** यदि यह आंदोलन सफल होता है, तो भविष्य में निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को अधिक वित्तीय सुरक्षा और बेहतर पेंशन व मातृत्व लाभ मिल सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. विंबलडन में टेनिस खिलाड़ी विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
खिलाड़ी चाहते हैं कि ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट अपनी कुल कमाई (राजस्व) का अधिक हिस्सा इनामी राशि, पेंशन और मातृत्व अवकाश जैसे कल्याणकारी लाभों के लिए आवंटित करें।

### 2. खिलाड़ी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को 15 मिनट तक क्यों सीमित रख रहे हैं?
यह 15 मिनट की समयसीमा कुल राजस्व के उस 15 प्रतिशत हिस्से का प्रतीक है जो वर्तमान में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट खिलाड़ियों की इनामी राशि के रूप में देते हैं।

### 3. कौन से बड़े खिलाड़ियों ने इस विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया है?
सात बार के विंबलडन चैंपियन नोवाक जोकोविच, जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव और ऑस्ट्रेलिया के एलेक्स डी मिनौर ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं लिया।

### 4. इस साल विंबलडन के सिंगल्स विजेताओं को कितनी इनामी राशि मिलेगी?
इस साल विंबलडन के पुरुष और महिला सिंगल्स विजेताओं को रिकॉर्ड 36 लाख पाउंड (लगभग £3.6m) की इनामी राशि दी जाएगी, जो पिछले साल के 30 लाख पाउंड से अधिक है।

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