आगरा किले की बाहरी दीवारों पर उग आए पौधे, दरार और बड़े नुकसान का बढ़ता खतरा मुगलों की राजधानी रहे आगरा के ऐतिहासिक किले की बाहरी दीवारों पर जगह-जगह पौधे उग आए हैं, जो समय रहते न हटाए गए तो दीवारों में गहरी दरार और भारी नुकसान का कारण बन सकते हैं। उत्तर प्रदेश का आगरा कभी मुगल हुकूमत का केंद्र हुआ करता था और यहीं का किला सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक था। आज वही किला अपनी बाहरी दीवारों पर उग आए पौधों की वजह से धीरे-धीरे खतरे की ओर बढ़ रहा है। कई जगहों पर ये पौधे इतने बड़े हो चुके हैं कि अगर समय रहते इन्हें नहीं हटाया गया, तो किले की मजबूत दीवारों में दरार पड़ सकती है और इससे भारी नुकसान होने की आशंका है। तीन विश्व धरोहरों में से एक, फिर भी अनदेखी का शिकार आगरा को मुगलों की राजधानी कहा जाता था और कई वर्षों तक मुगल बादशाहों ने इसी किले में रहकर शासन चलाया। आगरा में मौजूद तीन यूनेस्को विश्व धरोहरों में से एक यह किला भी है, जिसकी खूबसूरती देखने के लिए रोजाना हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। फिलहाल यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित है और इसकी देखरेख पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद बाहरी दीवारों पर कई तरह के पौधे उग आए हैं और कई स्थानों पर इन्होंने बड़ा आकार ले लिया है। दीवान-ए-खास और दीवान-ए-आम का वैभव लाल बलुआ पत्थरों से बना यह किला अपनी बेहतरीन नक्काशी की वजह से दुनिया भर में मशहूर है और इसे ‘मिनी लाल किला’ भी कहा जाता है। कभी यह मुगलों का मुख्य निवास स्थान था और यहीं से शाही फरमान तथा आदेश जारी हुआ करते थे। किले के भीतर बने ‘दीवान-ए-खास’ में बादशाह खास और शाही लोगों के साथ बैठकर रणनीति और व्यापार से जुड़े फैसले लिया करते थे। इस हिस्से में हर किसी को आने-जाने की इजाजत नहीं थी। दूसरी ओर ‘दीवान-ए-आम’ वह जगह थी जहां बादशाह आम जनता की शिकायतें और समस्याएं सुनते थे। इस दरबार में बादशाह के मंत्री और सभी दरबारी भी मौजूद रहते थे और लोगों की मुश्किलों का त्वरित समाधान किया जाता था। आज किले के कई हिस्से आम पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं, जबकि बाहरी दीवारें लगातार मरम्मत की मांग कर रही हैं। अब सवाल यही है कि एएसआई आखिर कब इस ओर ध्यान देकर इन पौधों को हटाने का काम शुरू करता है। बादलगढ़ से आगरा किले तक का सफर इस किले का इतिहास मुगलकाल से भी पुराना है। इतिहास के मुताबिक, यह मूल रूप से ईंटों का एक छोटा किला था, जिसे ‘बादलगढ़’ कहा जाता था और इस पर राजपूत राजा बादल सिंह का अधिकार था। सन 1080 ई. में महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वर्ष 1504 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान सिकंदर लोदी ने आगरा की यात्रा की, इस पुराने किले की मरम्मत करवाई और यहां कुछ समय बिताया। 16वीं सदी में पानीपत की दूसरी लड़ाई के बाद मुगल सम्राट अकबर ने इस किले पर अपना अधिकार जमा लिया। वर्ष 1565 में अकबर ने पुराने ढांचे को गिराकर लाल बलुआ पत्थर से एक विशाल किला बनवाने का काम शुरू कराया। इतिहासकारों के अनुसार करीब 4 हजार कारीगरों की कड़ी मेहनत के बाद सन 1573 में यह भव्य किला बनकर तैयार हुआ। इसके बाद कई मुगल बादशाहों ने इसी किले में रहकर हुकूमत चलाई। आज देशी-विदेशी पर्यटक इसकी अनुपम सुंदरता निहारने आते हैं, लेकिन बाहरी दीवारों पर उगे पौधे इसी खूबसूरती पर दाग लगा रहे हैं। अगर इन्हें जल्द नहीं हटाया गया, तो दीवारों पर गहरी दरार आने का खतरा बना रहेगा। इसका आप पर असर • भारत में: देश की एक प्रमुख यूनेस्को विश्व धरोहर की उपेक्षा सीधे उन लाखों पर्यटकों और इतिहास-प्रेमियों से जुड़ी है, जिनके लिए यह किला राष्ट्रीय गौरव और घूमने का बड़ा ठिकाना है। • आगरा में: किले की हालत बिगड़ने से आगरा आने वाले पर्यटकों की संख्या और स्थानीय गाइड, दुकानदार व पर्यटन से जुड़े लोगों की कमाई पर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. आगरा किले की दीवारों को क्या खतरा है? किले की बाहरी दीवारों पर जगह-जगह पौधे उग आए हैं और कई जगह बड़े आकार ले चुके हैं, जिन्हें समय रहते न हटाया गया तो दीवारों में दरार आ सकती है। 2. आगरा किला अभी किसके अधीन है? यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन संरक्षित है और इसकी देखरेख पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। 3. अकबर का बनवाया किला कब तैयार हुआ था? वर्ष 1565 में अकबर ने इसका निर्माण शुरू कराया और करीब 4 हजार कारीगरों की मेहनत से सन 1573 में यह भव्य किला बनकर तैयार हुआ। 4. किले को पहले किस नाम से जाना जाता था? मूल रूप से यह ईंटों का छोटा किला था जिसे ‘बादलगढ़’ कहा जाता था और इस पर राजपूत राजा बादल सिंह का अधिकार था। https://trendkia.com/travel/agara-kile-ki-bahari-divaron-para-uga-ae-paudhe-darara-aura-bare-nukasana-ka-bar-1023 TrendKia — Har trend, sabse pehle.