# अलवर की सैर: कम पैसों में राजसी एहसास देने वाली 6 ऐतिहासिक और प्राकृतिक जगहें

> अरावली की गोद में बसा अलवर झीलों, किलों और रहस्यमयी इमारतों का खजाना है। यहां सिलीसेढ़ झील से लेकर भानगढ़ किले तक ऐसी जगहें हैं जो जेब पर भारी पड़े बिना यादगार छुट्टियों का अनुभव देती हैं।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-06-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/alavara-ki-saira-kama-paison-men-rajasi-ehasasa-dene-vali-6-aitihasika-aura-prak-719 · **Language:** Hindi
**Tags:** अलवर पर्यटन, सरिस्का टाइगर रिजर्व, भानगढ़ किला, सिलीसेढ़ झील, बाला किला, राजस्थान यात्रा, मूसी महारानी की छतरी, बजट ट्रिप

राजस्थान का अलवर उन यात्रियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं जो बड़े बजट के बिना भी राजसी ठाठ का अनुभव लेना चाहते हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे इस जिले में झीलें, सदियों पुराने किले, राजघरानों की निशानियां और रहस्य की चादर ओढ़े खंडहर — सब एक साथ मौजूद हैं। अगर आप अगली छुट्टी की योजना बना रहे हैं, तो यहां की ये जगहें आपकी सूची में जरूर होनी चाहिए।

## सिलीसेढ़ झील: बोटिंग और हरियाली का संगम
अलवर पहुंचने पर सबसे पहले रुख किया जा सकता है सिलीसेढ़ झील का। अलवर शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसी यह झील पानी से लबालब रहती है। मानसून के मौसम में अरावली की पहाड़ियों पर फैली हरियाली इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है। पर्यटक यहां बोटिंग का लुत्फ उठा सकते हैं और झील के किनारे बने ऐतिहासिक लेक पैलेस होटल से प्रकृति के नजारे निहार सकते हैं। शांत वातावरण और मनमोहक दृश्य इसे पिकनिक के लिए एक खास ठिकाना बना देते हैं।

## सरिस्का टाइगर रिजर्व: बाघों की दहाड़, पर समय की पाबंदी
बाघों को करीब से देखने का शौक रखने वालों के लिए सरिस्का टाइगर रिजर्व किसी सपने जैसा है। यहां बाघ-बाघिन और उनके शावकों की लगातार साइटिंग होती रहती है, और किस्मत अच्छी हो तो बाघों की दहाड़ भी सुनने को मिल जाती है। फिलहाल सरिस्का में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो चुकी है, जिनमें 26 शावक शामिल हैं।

लेकिन यहां जाने से पहले एक जरूरी बात ध्यान रखें — मानसून आते ही सरिस्का टाइगर रिजर्व को आगामी 1 जुलाई से अगले तीन महीनों यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। इसलिए अगर सरिस्का घूमने का इरादा है तो 1 जुलाई से पहले-पहले पहुंच जाना ही समझदारी है।

## भानगढ़ का किला: देश का सबसे चर्चित भूतिया ठिकाना
अरावली की पहाड़ियों के बीच बना भानगढ़ का किला देश के सबसे चर्चित भूतिया स्थलों में गिना जाता है। यह किला अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के लिए मशहूर है। मान्यता है कि एक तांत्रिक के श्राप के चलते यह पूरा नगर उजड़ गया। दिन में पर्यटक इसकी खूबसूरती देखने आते हैं, जबकि रात के अंधेरे में यहां सुनाई देने वाली अजीब आवाजों और रहस्यमयी घटनाओं की चर्चाएं लोगों को रोमांच से भर देती हैं।

यहां जाने का सबसे अहम पहलू है समय का ध्यान रखना। भानगढ़ किला अलवर शहर से करीब 80–90 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से वहां पहुंचने में लगभग 1.5 से 2 घंटे लग जाते हैं। पर्यटकों को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति है। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किले में जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

## मूसी महारानी की छतरी: पत्थर में ढली एक प्रेम कथा
अलवर के सिटी पैलेस के बाहर सागर जलाशय के पास खड़ी मूसी महारानी की छतरी स्थापत्य कला का बेहद सुंदर उदाहरण है। इसका निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1815 ई. में महाराजा बख्तावर सिंह और रानी मूसी की स्मृति में करवाया था। कहा जाता है कि रानी मूसी अपने पति की चिता पर सती हो गई थीं।

दो मंजिला इस स्मारक की बनावट भी खास है — इसका निचला हिस्सा लाल पत्थर से और ऊपरी हिस्सा सफेद संगमरमर से तैयार किया गया है। इसकी छतों पर उकेरे गए पौराणिक चित्र और बारीक नक्काशी देखते ही बनती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इसका सौंदर्य और भी निखर उठता है। साल भर देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं, और कई फिल्मों की शूटिंग के साथ-साथ ढेरों प्री-वेडिंग शूट भी यहां हो चुके हैं।

## बाला किला: कभी न जीता जाने वाला 'कुंवारा किला'
राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए जाना जाता है, और अलवर की अरावली पहाड़ियों पर खड़ा बाला किला इसकी बेहतरीन मिसाल है। करीब 700 साल पुराना यह किला अपनी शानदार वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे अलवर का 'कुंवारा किला' भी कहा जाता है, क्योंकि इतिहास में इसे कभी कोई जीत नहीं पाया।

करीब 8 किलोमीटर के दायरे में फैले इस किले का निर्माण हसन खान मेवाती ने 1551 ईस्वी में कायमखानी शैली में करवाया था। दुश्मनों पर हमला करने के लिए इसकी दीवारों में 500 से अधिक बड़े छेद बनाए गए थे। किले की ऊंचाई से पूरे अलवर शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है, यही वजह है कि पर्यटक यहां जमकर तस्वीरें खींचते हैं।

## सिटी पैलेस: मुगल और राजस्थानी कला का मेल
अलवर शहर के बीचोंबीच स्थित सिटी पैलेस फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए शानदार जगह है। करीब 250 साल पुराना यह महल राजा बख्तावर सिंह ने बनवाया था और अलवर में इसे विनय विलास पैलेस के नाम से भी पहचाना जाता है। इसकी दीवारें, छत पर बनी भित्तिचित्र और दर्पण का बारीक काम महल की शोभा को दोगुना कर देते हैं। यह महल मुगल और राजस्थानी डिजाइन की झलक एक साथ पेश करता है।

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