अरावली की वादियों में मानसून की बहार, पाली का ऐतिहासिक पुनागर माता धाम बना सैलानियों की पहली पसंद पाली-सोजत मार्ग पर स्थित प्राचीन पुनागर माता मंदिर मानसून के मौसम में बादलों, झरनों और हरियाली से घिरकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को माउंट आबू जैसा अनुभव करा रहा है. राजस्थान के पाली जिले में बारिश का दौर शुरू होते ही अरावली पर्वतमाला की वादियां निखर उठी हैं. यदि आप इस सुहावने मौसम में किसी पर्वतीय स्थल की यात्रा का अनुभव लेना चाहते हैं, तो दूर जाने की बजाय सोजत मार्ग पर स्थित प्राचीन तीर्थस्थल का रुख कर सकते हैं. पाली-सोजत राजमार्ग पर शहर से महज 22 किलोमीटर दूर इंद्रानगर में स्थित पुनागर माता जी का मंदिर इन दिनों बादलों की ओट में छिपकर अद्भुत छटा बिखेर रहा है. पहाड़ियों से बहते पानी के स्रोत, चारों तरफ फैली हरियाली और सामने स्थित विशाल जलाशय को देखकर यहां आने वाले भक्तों और पर्यटकों को सिरोही के प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल का अहसास होने लगता है. अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर प्राकृतिक सुंदरता का विहंगम दृश्य मानसून के आगमन के साथ ही इस सिद्ध पीठ का परिवेश पूरी तरह बदल चुका है. अरावली की बुलंद चोटियों पर बसे इस पावन स्थल पर रिमझिम फुहारों के बीच सफ़ेद बादलों के टुकड़े पहाड़ियों से टकराते हुए गुजरते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर की ऊंचाई से देखने पर लगता है जैसे धुंध की चादर ने पूरे क्षेत्र को लपेट लिया हो. पहाड़ियों की ढलान से तेजी से बहते हुए पानी की धाराएं सीढ़ियों के किनारे से होकर गुजरती हैं, जिससे पानी के बहने के सुंदर प्राकृतिक दृश्य निर्मित होते हैं. नीचे की ओर नजर दौड़ाने पर एक बेहद मनमोहक झील दिखाई देती है, जिसमें पहाड़ियों का प्रतिबिंब हर किसी का मन मोह लेता है. 3 हजार साल पुराना इतिहास और 522 सीढ़ियों की चढ़ाई अरावली श्रृंखला के शिखर पर स्थित पुनागर धाम का इतिहास अत्यधिक प्राचीन माना जाता है. स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान की स्थापना लगभग तीन सहस्राब्दी यानी 3 हजार वर्ष पूर्व हुई थी. मुख्य गर्भगृह तक पहुंचने के मार्ग में कुल 522 सीढ़ियों का निर्माण किया गया है. हालांकि इतनी सीढ़ियां चढ़ना पहली नज़र में चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन रास्ते भर फैले पेड़-पौधे, ठंडी हवा के झोंके और मनभावन नजारे श्रद्धालुओं की शारीरिक थकान को पूरी तरह मिटा देते हैं. मार्ग में रुक-रुक कर आसपास की वादियों को निहारना यात्रा के अनुभव को और भी सुखद बना देता है. अलौकिक चमत्कार, 12 समाधियां और मोरों के पुनर्जीवन की लोककथा पुनागर देवी के इस धाम से अनेक धार्मिक मान्यताएं और अलौकिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं. क्षेत्रीय निवासियों तथा आने वाले श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास के अनुसार, प्रात काल में सूर्य निकलने से पहले जो भक्त मां के दर्शन कर लेता है, उसके जीवन से कई शारीरिक बाधाएं दूर होने लगती हैं. ऐसी जनश्रुति है कि इस पावन घड़ी में दर्शन करने से मूक व्यक्तियों की वाणी लौट आती है और बधिर लोगों को सुनने की शक्ति प्राप्त होती है. इसके अलावा, सच्चे मन से की गई प्रार्थना से कई तरह की मानसिक व शारीरिक व्याधियों में आराम मिलने का विश्वास किया जाता है. आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है. प्राचीन कहानियों और स्थानीय अभिलेखों के अनुसार, अतीत में यहां के महान तपस्वियों ने एक साथ 12 अलग-अलग स्थानों पर जीवित समाधि ग्रहण की थी, जिसकी वजह से इस पूरे पर्वत क्षेत्र में अलौकिक ऊर्जा का संचार माना जाता है. एक अन्य प्राचीन आख्यान के अनुसार, एक सिद्ध संत ने अपनी भक्ति और अलौकिक सामर्थ्य के बल पर उन मोरों को पुनः जीवित कर दिया था जिन्हें मारकर पकाया जा चुका था. इन गाथाओं ने इस धाम की आस्था को सदियों से जीवंत बनाए रखा है. मानसून के दिनों में पाली का प्रमुख पिकनिक स्पॉट बारिश के दिनों में जब गुरु शिखर जैसी ऊंचाई और ठंडक का अहसास पाली के समीप ही मिल जाता है, तो स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के पर्यटक भी भारी संख्या में यहां पहुंचने लगते हैं. 522 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचने के बाद चारों ओर फैली धुंध और पर्वतमालाओं का विहंगम दृश्य किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकता है. यही कारण है कि भक्ति भाव से आने वाले दर्शनार्थियों के अलावा प्रकृति प्रेमी और पिकनिक मनाने वाले लोग भी इस सुहावने मौसम में पुनागर माता जी के दर्शन करने और छुट्टियों का लुत्फ उठाने बड़ी संख्या में आ रहे हैं. इसका आप पर असर • भारत में: मानसून सीजन के दौरान राजस्थान के अरावली क्षेत्र में धार्मिक और इको-टूरिज्म के विकल्प तलाश रहे यात्रियों के लिए यह एक सुलभ पर्वतीय स्थल है. • पाली और राजस्थान में: स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं को बिना माउंट आबू गए अपने ही जिले में प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का अनुभव मिल रहा है. सवाल-जवाब 1. पुनागर माता जी मंदिर पाली से कितनी दूरी पर स्थित है? यह प्रसिद्ध मंदिर पाली-सोजत राजमार्ग पर पाली शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर इंद्रानगर में स्थित है. 2. पुनागर धाम के मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं? श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अरावली पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए कुल 522 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. 3. पुनागर माता मंदिर का इतिहास कितना पुराना माना जाता है? अरावली की चोटी पर स्थित यह सिद्ध पीठ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगभग 3 हजार साल पुराना माना जाता है. 4. सूर्योदय से पूर्व माताजी के दर्शन को लेकर क्या जनश्रुति प्रचलित है? स्थानीय मान्यता के अनुसार सूर्योदय से पहले सच्चे मन से दर्शन करने पर गूंगे बोलने लगते हैं और बहरे सुनने लगते हैं. 5. मानसून के दौरान पुनागर धाम का वातावरण किस पर्वतीय स्थल जैसा प्रतीत होता है? बारिश के मौसम में ऊंची पहाड़ियों, धुंध, बादलों और झरनों के कारण यहां का नजारा माउंट आबू के गुरु शिखर जैसा प्रतीत होता है. https://trendkia.com/travel/aravalli-ki-vadiyon-men-manasuna-ki-bahara-pali-ka-aitihasika-punagar-mata-dhama-bana-sailaniyon-ki-pahali-pasnda-19795 TrendKia — Har trend, sabse pehle.