बागेश्वर के छिपे हुए स्वर्ग: लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू बुग्यालों को पर्यटन के नक्शे पर लाने की उठी मांग बागेश्वर जिले के कपकोट स्थित तीन बेहद खूबसूरत घास के मैदानों को सरकारी पर्यटन मानचित्र में शामिल करने के लिए स्थानीय लोगों ने आवाज बुलंद की है। बुनियादी सुविधाओं के विकास से इको टूरिज्म बढ़ने और युवाओं का पलायन रुकने की उम्मीद है। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बीच कई ऐसे प्राकृतिक खजाने छिपे हैं, जो आज भी आम पर्यटकों की पहुंच से बहुत दूर हैं। कपकोट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले दूरस्थ लीती इलाके में लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू नाम के तीन बेहद शानदार बुग्याल (मखमली घास के मैदान) मौजूद हैं। बेशुमार प्राकृतिक सुंदरता समेटे होने के बावजूद इन स्थानों को अब तक राज्य के आधिकारिक पर्यटन नक्शे पर जगह नहीं मिल पाई है। अब स्थानीय निवासियों, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और एडवेंचर प्रेमियों ने एकजुट होकर सरकार से इन्हें पहचान दिलाने की पुरजोर वकालत की है। उनका स्पष्ट मानना है कि सही तरीके से ढांचागत विकास होने पर यह पूरा इलाका इको टूरिज्म का एक बहुत बड़ा और आकर्षक केंद्र बन सकता है। अनदेखी का शिकार अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर मौजूद ये बुग्याल अपनी अथाह शांति और मनमोहक दृश्यों के लिए जाने जाते हैं। गर्मी का मौसम आते ही इन विशाल मैदानों में हर तरफ रंग-बिरंगे जंगली फूल खिल उठते हैं, जो किसी जन्नत से कम नहीं लगते। आसमान पूरी तरह साफ रहने पर यहां खड़े होकर हिमालय की कई दिग्गज चोटियों के मनमोहक दर्शन होते हैं। इनमें नंदा देवी पूर्व, नंदा कोट और पंचाचूली पर्वत श्रृंखलाओं का शानदार नजारा प्रमुख है। लीती गांव के पूर्व प्रधान आनंद प्रकाश ने जानकारी दी है कि ये बुग्याल अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित विशाल घास के मैदान हैं, जो गर्मियों में फूलों से सज जाते हैं। यह खूबसूरत जगह नेचर फोटोग्राफी, हाई-एल्टीट्यूड कैंपिंग और रोमांचक ट्रेकिंग के लिए एकदम मुफीद है। लेकिन विडंबना यह है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी और मार्केटिंग न होने के कारण बहुत ही कम लोग यहां घूमने आ पाते हैं, जिससे इस प्राकृतिक धरोहर की असली क्षमता का उपयोग बिल्कुल नहीं हो पा रहा है। बुनियादी सुविधाओं के निर्माण की सख्त जरूरत इन मनमोहक घास के मैदानों के एक बड़े टूरिस्ट हब न बन पाने के पीछे सबसे बड़ी वजह रास्ते और सुविधाओं का न होना ही है। अगर उत्तराखंड सरकार लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू को आधिकारिक रूप से अपने टूरिज्म पोर्टल और पर्यटन नक्शे पर शामिल कर ले, तो यहां विकास कार्यों के लिए नए रास्ते खुल जाएंगे। फिलहाल इन जगहों तक पहुंचने वाले कच्चे रास्ते काफी कठिन और दुर्गम हैं। सरकारी मान्यता मिलने के बाद इन ट्रेक रूट्स को व्यवस्थित किया जा सकेगा। पहाड़ों पर चढ़ने वाले रास्तों के किनारे सही दिशा बताने वाले साइनबोर्ड, खतरनाक जगहों पर सुरक्षा के लिए रेलिंग, पर्यटकों के लिए विश्राम शेल्टर, पीने के साफ पानी का माकूल इंतजाम और जगह-जगह पब्लिक टॉयलेट बनाए जा सकेंगे। इसके साथ ही रुकने के लिए सुरक्षित ठिकाने बनने से देश और दुनिया भर के पर्यटकों को इस रोमांचक सफर पर आने में कोई झिझक या परेशानी नहीं होगी। स्थानीय आर्थिकी को मिलेगा पंख, रुकेगा पलायन पर्यटन को बढ़ावा देने की यह पूरी कवायद सिर्फ सैर-सपाटे या मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को एक नई संजीवनी देने का एक बहुत बड़ा और प्रभावी जरिया है। अगर इस दिशा में काम होता है, तो पर्यटकों की आमद बढ़ने से इस पूरे सीमांत क्षेत्र के दूरदराज गांवों की किस्मत पूरी तरह से बदल सकती है। स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए गांव में ही रोजगार के ढेरों नए दरवाजे खुलेंगे। गांव वाले अपने पुराने और पारंपरिक घरों को खूबसूरत होमस्टे में बदलकर अच्छी खासी कमाई कर सकेंगे। बाहर से आने वाले अनजान लोगों को सही रास्ता दिखाने के लिए प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, और भारी सामान ढोने के लिए खच्चर संचालकों व पोर्टर्स की भारी डिमांड होगी। इसके अलावा, पर्यटकों को टेंट और कैंपिंग की सुविधा देने से लेकर पहाड़ों का शुद्ध स्थानीय भोजन परोसने का व्यवसाय भी खूब फलेगा-फूलेगा। साथ ही, महिलाओं द्वारा तैयार की गई स्थानीय हस्तकला और किसानों के जैविक खेती के उत्पाद बेचने का एक नया और बड़ा बाजार तैयार होगा। जानकारों का साफ कहना है कि जब गांव में ही सम्मानजनक तरीके से पैसे कमाने के इतने अच्छे और स्थायी विकल्प मौजूद होंगे, तो युवाओं को काम की तलाश में मजबूरी में शहरों की तरफ पलायन नहीं करना पड़ेगा। पहाड़ों से हो रहे पलायन पर लगाम लगाने का यह सबसे बेहतरीन तरीका साबित हो सकता है। अन्य प्रसिद्ध बुग्यालों की तर्ज पर हो विकास पूरी दुनिया में उत्तराखंड की असली पहचान उसके खूबसूरत बुग्यालों और शांत वादियों से ही होती है। वर्तमान में राज्य के बेदनी, दयारा, आली और औली बुग्याल हर साल देश और दुनिया भर के हजारों सैलानियों को अपनी तरफ खींचते हैं, जिससे वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत हुई है। बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक के निवासियों का दृढ़ विश्वास है कि उनके इलाके के इन अनदेखे बुग्यालों में भी उतनी ही कशिश और संभावनाएं छिपी हैं। इसी वजह से उन्होंने राज्य सरकार और पर्यटन विभाग से जल्द से जल्द लीती क्षेत्र का एक विस्तृत और तकनीकी सर्वे कराने की जोरदार मांग रखी है। ग्रामीणों और पर्यावरणविदों की योजना है कि विकास का जो भी नया मॉडल अपनाया जाए, वह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए, ताकि कुदरत के इस अनमोल और नाजुक इकोसिस्टम को इंसानी दखलंदाजी से कोई नुकसान न पहुंचे। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मानकर लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू बुग्यालों को राज्य के प्रमुख पर्यटन सर्किट से जोड़ देती है, तो बागेश्वर का नाम पर्यटन के विश्व पटल पर और ज्यादा मजबूती से चमकेगा, साथ ही पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकेगी। इसका आप पर असर • पूरे उत्तराखंड के लिए: पर्यटन के नए और अनछुए स्थलों के विकास से राज्य के खजाने में वृद्धि होगी और समग्र इको टूरिज्म उद्योग को एक नई दिशा मिलेगी। • बागेश्वर जिले के लिए: बुग्यालों तक सड़क, पीने का पानी और विश्राम स्थल जैसी बुनियादी सुविधाएं बनने से स्थानीय युवाओं को होमस्टे, गाइड और खच्चर संचालन जैसे व्यवसायों के जरिए सीधे अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा। सवाल-जवाब 1. बागेश्वर जिले के कौन से तीन बुग्यालों को पर्यटन नक्शे में शामिल करने की मांग हो रही है? स्थानीय निवासी कपकोट ब्लॉक के दूरस्थ लीती क्षेत्र में स्थित लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू बुग्याल को पर्यटन नक्शे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। 2. इन बुग्यालों की मुख्य खासियत क्या है? ये अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित विशाल मखमली घास के मैदान हैं, जहां गर्मियों में रंग-बिरंगे जंगली फूल खिलते हैं। यहां से हिमालय की पंचाचूली और नंदा देवी पूर्व जैसी चोटियां बिल्कुल साफ दिखाई देती हैं। 3. स्थानीय लोग सरकार से किस तरह के विकास की उम्मीद कर रहे हैं? वे चाहते हैं कि सरकार यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर और सुरक्षित ट्रेक रूट, दिशा बताने वाले साइनबोर्ड, पीने का पानी, विश्राम स्थल और पब्लिक टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करे। 4. पर्यटन बढ़ने से इस दुर्गम इलाके को क्या आर्थिक फायदा होगा? पर्यटकों के आने से होमस्टे, टूरिस्ट गाइड, कैंपिंग और खच्चर संचालन जैसे नए रोजगार पैदा होंगे, जिससे युवाओं का शहरों की तरफ होने वाला पलायन रुकेगा और गांव की आर्थिकी मजबूत होगी। https://trendkia.com/travel/bageshwar-ke-chhipe-hue-svarga-lodhura-kuruguya-aura-danggu-bugyalon-ko-paryatana-ke-nakshe-para-lane-ki-uthi-manga-9138 TrendKia — Har trend, sabse pehle.