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  "title": "बहराइच में कतर्नियाघाट सफारी की तैयारी? जानिए जंगल में घुसने से पहले कहां मिलेगा पारंपरिक भट्टी का नाश्ता",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में मानसून के बाद नवंबर से पर्यटन सत्र शुरू होने जा रहा है। सेंचुरी के मुख्य क्षेत्र से 34 किलोमीटर पहले ककराहा रेलवे स्टेशन के पास एक ऐतिहासिक पुश्तैनी जलपान गृह है, जहां का पारंपरिक भट्टी वाला समोसा बेहद लोकप्रिय है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी प्राकृतिक सौंदर्य और दुर्लभ वन्यजीवों का अद्भुत केंद्र है। मानसून का सीजन समाप्त होने के बाद हर साल नवंबर महीने में इस अभ्यारण्य के कपाट सैलानियों के लिए दोबारा खोल दिए जाते हैं। यदि आप भी इस खूबसूरत जंगल की सफारी पर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो रास्ते के महत्वपूर्ण पड़ावों और खान-पान की सुविधाओं की जानकारी रखना अत्यंत आवश्यक है। घने जंगल के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक ऐसा स्थान है, जहां रुककर जलपान करना हर यात्री के लिए जरूरी साबित होता है।\n\n \n\nककराहा रेलवे स्टेशन के पास का एकमात्र जलपान गृह\n\nकतर्नियाघाट सेंचुरी के मुख्य कोर क्षेत्र में दाखिले से ठीक 34 किलोमीटर पहले ककराहा रेलवे स्टेशन पड़ता है। इसी रेलवे स्टेशन के समीप मुख्य मार्ग के किनारे एक देसी जलपान गृह स्थित है। इस पूरे रास्ते पर ककराहा के पास बना यह इकलौता ढाबा या दुकान है, जहां भोजन और नाश्ते की व्यवस्था मिलती है। जो यात्री अपने घर से खाने-पीने की सामग्री या पानी लाना भूल जाते हैं, वे यहां से अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकते हैं।\n\nइस पड़ाव पर मिनरल वाटर, गरमा-गरम ताजी चाय, स्थानीय मिठाइयां, पकौड़ियां और समोसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। यदि यात्री ककराहा के इस केंद्र पर जलपान करना भूल जाते हैं, तो आगे घने जंगल के रास्ते में किसी भी तरह के भोजन या पानी की सुविधा नहीं मिलेगी। इसलिए सेंचुरी की ओर बढ़ने वाले सैलानी यहां रुककर अपनी जरूरत का सामान साथ रख लेते हैं।\n\n \n\nपूर्वजों के जमाने से चल रही पुश्तैनी दुकान और भट्टी का स्वाद\n\nइस साधारण से दिखने वाले जलपान गृह की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऐतिहासिक और पारिवारिक जुड़ाव है। ककराहा रेंज का ही एक स्थानीय परिवार अपने पूर्वजों के समय से पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस दुकान को चलाता आ रहा है। कई दशकों से यह दुकान इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों की सेवा में लगी हुई है और आज भी अपनी पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है।\n\nयहां नाश्ता तैयार करने की प्रक्रिया बेहद अनोखी है। दुकान में खाद्य सामग्री पकाने के लिए आधुनिक एलपीजी गैस सिलेंडर का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। इसके बजाय, पारंपरिक मिट्टी की भट्टी पर लकड़ी और कोयले की आंच में मिठाइयां और समोसे तैयार किए जाते हैं। भट्टी पर धीमी आंच में तले गए इन समोसों का स्वाद इतना बेजोड़ और सुस्वादु होता है कि इस मार्ग से गुजरने वाला लगभग हर पर्यटक और स्थानीय यात्री यहां रुककर स्वाद जरूर चखता है।\n\n \n\nगेरुआ और कौड़ियाला नदियां तथा समृद्ध वन्यजीव\n\nकतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी कुदरत का एक अनमोल खजाना है, जहां हरे-भरे घने जंगलों के बीच कई दुर्लभ वन्यजीव स्वच्छंद रूप से विचरण करते हैं। इस अभ्यारण्य के बीच से होकर गेरुआ और कौड़ियाला नदियां बहती हैं, जो इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा देती हैं। ये नदियां न केवल विहंगम दृश्य प्रस्तुत करती हैं, बल्कि दुर्लभ प्रजाति के कछुओं, मगरमच्छों और घड़ियालों का स्वाभाविक प्राकृतिक आवास भी हैं।\n\nहर साल देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में प्रकृति प्रेमी और सैलानी कतर्नियाघाट की सैर करने पहुंचते हैं। नवंबर में सेंचुरी खुलने के बाद पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के शांत वातावरण और वन्यजीवों की अठखेलियों को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सफर की शुरुआत में ककराहा के इस पारंपरिक जलपान गृह का स्वाद यात्रियों की इस यादगार यात्रा को और भी सुहावना बना देता है।\n\nइसका आप पर असर\nकतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों के लिए रास्ते का सही नियोजन और खान-पान की जानकारी होना बेहद जरूरी है।\n\n• भारत भर के पर्यटकों के लिए: नवंबर में मानसून खत्म होने के बाद कतर्नियाघाट जाने की योजना बना रहे लोग ककराहा के पास अपना जलपान पड़ाव तय कर सकते हैं। इससे मुख्य जंगल क्षेत्र में बिना किसी परेशानी के सफारी का आनंद लिया जा सकेगा।\n\n• बहराइच और कतर्नियाघाट क्षेत्र में: मुख्य मार्ग से गुजरने वाले दैनिक यात्रियों को ककराहा रेलवे स्टेशन के पास पारंपरिक भट्टी से बनी ताजी चाय और समोसों की सुविधा मिलती है। जंगल के आगे के 34 किलोमीटर के हिस्से में कोई दुकान न होने के कारण यह जगह अंतिम पड़ाव का काम करती है।\n\n• वन्यजीव प्रेमियों के लिए: गेरुआ और कौड़ियाला नदियों के तटीय इलाकों में दुर्लभ कछुओं, मगरमच्छों और घड़ियालों को प्राकृतिक माहौल में देखने का मौका मिलता है। इसके लिए पर्यटकों को अपनी यात्रा की तैयारी समय पर पूरी करनी चाहिए।\n\n• कैमरा और फोटोग्राफी के लिए: जंगल में प्रवेश से पहले भोजन और पानी की आपूर्ति पूरी कर लेने से सैलानी घने जंगल के दृश्यों को कैमरे में बेफिक्र होकर कैद कर सकते हैं। इससे सफारी के दौरान बुनियादी जरूरतों की चिंता नहीं रहती।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी मानसून के बाद कब खुलती है?\nयह सेंचुरी हर साल मानसून का मौसम बीतने के बाद नवंबर महीने में पर्यटकों के लिए दोबारा खोली जाती है।\n\n2. ककराहा रेलवे स्टेशन के पास स्थित जलपान गृह कतर्नियाघाट से कितनी दूरी पर है?\nयह ऐतिहासिक जलपान गृह कतर्नियाघाट सेंचुरी के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने से लगभग 34 किलोमीटर पहले स्थित है।\n\n3. ककराहा के इस देसी होटल के समोसों की क्या खासियत है?\nयहाँ नाश्ता पकाने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर की जगह पारंपरिक मिट्टी की भट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे समोसों का स्वाद अनोखा और बेहद लाजवाब होता है।\n\n4. कतर्नियाघाट सेंचुरी में कौन सी नदियां बहती हैं और वहां कौन से जीव पाए जाते हैं?\nसेंचरी से होकर गेरुआ और कौड़ियाला नदियां बहती हैं, जो दुर्लभ प्रजाति के कछुओं, मगरमच्छों और घड़ियालों का प्राकृतिक आवास हैं।\n\n5. क्या कतर्नियाघाट के मुख्य जंगल के अंदर खाने-पीने का सामान मिलता है?\nनहीं, मुख्य जंगल क्षेत्र के भीतर खाने-पीने की कोई दुकान या सुविधा नहीं है, इसलिए ककराहा के पास ही जलपान और जरूरी सामान लेना आवश्यक है।",
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  "category": "यात्रा",
  "publishedAt": "2026-08-27",
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