बावनगजा: मानसून में जन्नत जैसा दिखता है 900 साल पुराना यह जैन तीर्थ मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित बावनगजा मानसून के दौरान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहाँ 84 फीट ऊंची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के साथ ही कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। मध्य प्रदेश के बड़वानी में सतपुड़ा पर्वतमाला की गोद में बसा बावनगजा जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में गिना जाता है। बड़वानी शहर से करीब 6 से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान न केवल अपनी धार्मिक पवित्रता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी प्राकृतिक भव्यता के लिए भी जाना जाता है। विशेष रूप से मानसून के दिनों में जब यह पूरा पहाड़ी क्षेत्र घनी हरियाली की चादर ओढ़ लेता है, तब यहाँ का वातावरण बेहद सुकून देने वाला और मनमोहक हो जाता है। भगवान आदिनाथ की 84 फीट ऊंची प्रतिमा बावनगजा के मुख्य आकर्षण का केंद्र यहां की पहाड़ी पर स्थित भगवान आदिनाथ, जिन्हें ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है, की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा लगभग 84 फीट ऊंची है, जिसे 52 गज भी कहा जाता है। यही मुख्य कारण है कि इस पूरे तीर्थक्षेत्र को बावनगजा के नाम से जाना जाता है। इस मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक ही चट्टान को तराशकर तैयार किया गया है, जो उस दौर की स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भगवान आदिनाथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर के रूप में पूजे जाते हैं। बावनगजा में उनकी यह मूर्ति खड़े आसन में स्थित है, जो दूर से ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे 'चूलगिरि' के नाम से भी पुकारा जाता है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह प्रतिमा लगभग 900 साल पुरानी है, जिसे 12वीं शताब्दी का माना जाता है। दुनिया भर में पत्थर को तराशकर बनाई गई प्रतिमाओं में इसे एक प्रमुख स्थान प्राप्त है। इस पहाड़ी परिसर में केवल एक प्रतिमा ही नहीं है, बल्कि यहां 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच निर्मित लगभग 11 प्राचीन जैन मंदिर भी मौजूद हैं। ये मंदिर इस पूरे क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को और पुख्ता करते हैं। इनमें अन्य जैन तीर्थंकरों की बहुत ही सुंदर और कलात्मक मूर्तियां स्थापित हैं। पौराणिक कथाओं से जुड़ाव इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, बावनगजा जैन समाज के लिए एक अत्यंत पवित्र सिद्धक्षेत्र है, जिसका उल्लेख रामायण काल से भी मिलता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां इंद्रजीत के साथ-साथ कुंभकर्ण और मंदोदरी ने मोक्ष प्राप्त किया था। यही कारण है कि जैन समाज के अनुयायी इसे एक सिद्धभूमि के रूप में सम्मान देते हैं। मानसून में पर्यटन का अनुभव बरसात के मौसम में बावनगजा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के कारण पहाड़ियों पर बिछी हरियाली, बादलों का नीचे उतरना और मंदिरों के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे किसी हिल स्टेशन जैसा एहसास देता है। जो लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं, वे पहाड़ी रास्तों, ठंडी हवाओं और नैसर्गिक खूबसूरती का भी भरपूर आनंद लेते हैं। बावनगजा अब केवल एक धार्मिक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। इसका आप पर असर भारत में: बावनगजा जैसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थानों की यात्रा करने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होता है। बड़वानी में: स्थानीय निवासियों के लिए मानसून के दौरान पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं, लेकिन भारी बारिश में पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। सवाल-जवाब 1. बावनगजा कहां स्थित है? बावनगजा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित है। 2. भगवान आदिनाथ की प्रतिमा कितनी पुरानी है? यह प्रतिमा लगभग 900 साल पुरानी मानी जाती है और इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। 3. बावनगजा का नाम बावनगजा क्यों पड़ा? भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की ऊंचाई करीब 84 फीट है, जो लगभग 52 गज के बराबर है, इसी कारण इस स्थान का नाम बावनगजा पड़ा। 4. बावनगजा जाने का सबसे अच्छा समय क्या है? बरसात के मौसम में यहां का नजारा बेहद मनमोहक और हिल स्टेशन जैसा हो जाता है, इसलिए मानसून का समय यहां घूमने के लिए उपयुक्त माना जाता है। https://trendkia.com/travel/bawangaja-monsoon-mein-jannat-jaisa-dikhta-hai-900-saal-purana-yeh-jain-teerth-6059 TrendKia — Har trend, sabse pehle.