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  "title": "बुंदेलखंड की इस विरासत नगरी में कम बजट में घूमने को मिलेगा शाही इतिहास, जानें मऊ सहानिया के 5 खास ठिकाने",
  "summary": "छतरपुर से महज 16 किमी दूर मऊ सहानिया गांव में महाराजा छत्रसाल के दौर के धुबेला महल, शीतल गढ़ी, हृदय शाह महल और रानी कमलापति स्मारक जैसी ऐतिहासिक धरोहरें बेहद कम खर्च में देखी जा सकती हैं।",
  "content": "बारिश के मौसम में परिवार के साथ घूमने की योजना बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से महज 16 किलोमीटर दूर बसा मऊ सहानिया गांव आपकी लिस्ट में होना चाहिए। यहां महाराजा छत्रसाल के दौर के महल, किले और स्मारक आज भी अपनी पुरानी वास्तुकला और शौर्य गाथाओं के साथ खड़े हैं, और इन्हें देखने में जेब पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता।\n\nकैसे पहुंचें मऊ सहानिया\nअगर आप खजुराहो एयरपोर्ट या खजुराहो रेलवे स्टेशन से मऊ सहानिया जाना चाहते हैं तो सड़क मार्ग से करीब 1 घंटे में पहुंच जाएंगे। वहीं छतरपुर रेलवे स्टेशन से आने वालों के लिए यह दूरी और भी कम है, महज 20 किलोमीटर। जो लोग गांव की सभी ऐतिहासिक जगहों को एक साथ घूमना चाहते हैं, वे अपने खर्च पर निजी कार बुक करके आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। खास बात यह है कि ये सभी ऐतिहासिक इमारतें गांव के आसपास के जंगल और पहाड़ों के बीच बसी हैं, जिससे यहां का माहौल और भी खास लगता है।\n\nमऊ सहानिया में घूमने लायक धरोहरों की लिस्ट लंबी है। इनमें महाराजा छत्रसाल की स्मारक, रानी कमलापति स्मारक, धुबेला महल, धुबेला संग्रहालय, मस्तानी महल, हृदय शाह महल और शीतल गढ़ी शामिल हैं। ये सभी इमारतें सैकड़ों साल पुराने इतिहास को आज भी जिंदा रखे हुए हैं।\n\nधुबेला महल और उसका संग्रहालय\nमऊ सहानिया गांव में बना धुबेला महल महाराजा छत्रसाल ने 18वीं शताब्दी ई. में बनवाया था। महल का प्रवेश द्वार भव्य और मेहराबदार है, जो उस दौर की शिल्पकारी की झलक देता है। इस महल की बनावट उत्तर मध्यकालीन क्षेत्रीय बुंदेली शैली में की गई है। इसी परिसर में धुबेला संग्रहालय भी मौजूद है, जहां महाराजा छत्रसाल के जमाने के अस्त्र-शस्त्र के साथ-साथ कई तरह की दुर्लभ ऐतिहासिक चीजें रखी गई हैं, जो इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।\n\nशीतल गढ़ी, जो आज के एयर कंडीशनर को भी देती है मात\nमऊ सहानिया में मौजूद शीतल गढ़ी का निर्माण महाराजा छत्रसाल के नाती ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। यह स्मारक समृद्ध बुंदेली कला का बेहतरीन नमूना माना जाता है। कहा जाता है कि इसकी बनावट ऐसी है कि यह आज के एयर कंडीशनर को भी फेल कर देती है। इस किले का निर्माण मुख्य रूप से आवासीय उद्देश्य से और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करवाया गया था।\n\nहृदय शाह महल, खंडहर होकर भी खींचता है पर्यटकों को\nमऊ सहानिया में ही महाराजा छत्रसाल के बड़े पुत्र हृदय शाह का महल भी मौजूद है। समय के साथ यह महल आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आना नहीं छोड़ते। इसकी टूटी-फूटी दीवारें भी उस दौर की भव्यता की कहानी बयां करती हैं।\n\nरानी कमलापति की याद में बना महल\nरानी कमलापति महाराजा छत्रसाल की प्रथम रानी थीं। जब बड़ी रानी का निधन हुआ तो महाराजा छत्रसाल ने उनकी याद में यह महल बनवाया था। यह महल 2 मंजिला है, इसका प्रवेश द्वार मेहराबयुक्त है और इसमें कुल 7 गुंबद बने हैं, जो इसे बाकी इमारतों से अलग पहचान देते हैं।\n\nमहाराजा छत्रसाल स्मारक और उनके घोड़े की समाधि\nमऊ सहानिया में महाराजा छत्रसाल का स्मारक भी बना हुआ है, और इसी परिसर में उनके घोड़े की समाधि भी मौजूद है। इस स्मारक का निर्माण बाजीराव पेशवा प्रथम ने करवाया था, और आज भी यह महाराजा की शौर्य गाथा को बयां करता है। यही वजह है कि यहां बने स्मारक और महल देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: कम बजट में इतिहास और पुरानी वास्तुकला देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए मऊ सहानिया एक सस्ता और कम भीड़भाड़ वाला विकल्प बन सकता है।\n• छतरपुर में: मऊ सहानिया आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय टैक्सी चालकों, गाइड और छोटे कारोबारियों को आमदनी का जरिया मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मऊ सहानिया छतरपुर से कितनी दूर है?\nमऊ सहानिया छतरपुर जिले से करीब 16 किलोमीटर दूर है।\n\n2. खजुराहो से मऊ सहानिया कैसे पहुंचें?\nखजुराहो एयरपोर्ट या खजुराहो रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग से करीब 1 घंटे में मऊ सहानिया पहुंचा जा सकता है।\n\n3. छतरपुर रेलवे स्टेशन से मऊ सहानिया की दूरी कितनी है?\nछतरपुर रेलवे स्टेशन से मऊ सहानिया की दूरी महज 20 किलोमीटर है।\n\n4. धुबेला महल किसने और कब बनवाया था?\nधुबेला महल महाराजा छत्रसाल ने 18वीं शताब्दी ई. में बनवाया था।\n\n5. शीतल गढ़ी की खासियत क्या है?\nशीतल गढ़ी समृद्ध बुंदेली कला का नमूना है और कहा जाता है कि यह आज के एयर कंडीशनर को भी फेल कर देती है।\n\n6. रानी कमलापति स्मारक किसने और क्यों बनवाया?\nमहाराजा छत्रसाल ने अपनी प्रथम रानी कमलापति के निधन पर उनकी याद में यह महल बनवाया था।\n\n7. महाराजा छत्रसाल स्मारक किसने बनवाया था?\nमहाराजा छत्रसाल स्मारक बाजीराव पेशवा प्रथम ने बनवाया था, और इसी परिसर में उनके घोड़े की समाधि भी है।",
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  "publishedAt": "2026-07-16",
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