# धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व: होमस्टे और विलेज टूरिज्म से गांवों में खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

> धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन प्रस्ताव को राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब वह एनटीसीए के पास भेजा गया है, जिसके बाद बफर क्षेत्र के गांवों में होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन की शुरुआत होगी.

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-06-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/dhaulapura-karauli-taigara-rijarva-homaste-aura-vileja-turijma-se-ganvon-men-khu-733 · **Language:** Hindi
**Tags:** धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व, ईको सेंसिटिव जोन, होमस्टे, विलेज टूरिज्म, राजस्थान पर्यटन, ग्रामीण रोजगार, बाघ संरक्षण, चंबल अंचल

धौलपुर जिले के उन ग्रामीण परिवारों के लिए, जो लंबे समय से रोजगार और पर्यटन से जुड़ने का इंतजार कर रहे थे, अब उम्मीद की एक नई किरण सामने आई है. धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (डीकेटीआर) के लिए तैयार किए गए ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के प्रस्ताव को राज्य सरकार पहले ही हरी झंडी दे चुकी है और अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) तक पहुंच गया है. जैसे ही एनटीसीए की स्वीकृति मिलेगी, इस पूरे इलाके में विलेज टूरिज्म और होमस्टे जैसी गतिविधियों का एक बिल्कुल नया अध्याय शुरू हो जाएगा.

## घर ही बन जाएगा कमाई का जरिया
ईएसजेड लागू होते ही बफर क्षेत्र के चिन्हित गांवों में रहने वाले लोग अपने घरों को होमस्टे की शक्ल दे सकेंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि बाहर से आने वाले पर्यटक अब किसी होटल के बजाय असली ग्रामीण माहौल में ठहर पाएंगे, यहां की संस्कृति को नजदीक से देख-समझ सकेंगे और चंबल अंचल के पारंपरिक खानपान का स्वाद भी ले सकेंगे. इस व्यवस्था से जहां पर्यटकों को एक अलग तरह का अनुभव मिलेगा, वहीं ग्रामीण परिवारों के सामने घर बैठे आमदनी के नए दरवाजे खुल जाएंगे.

## राजस्थान का पांचवां टाइगर रिजर्व
गौरतलब है कि धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व राजस्थान का पांचवां टाइगर रिजर्व है. फिलहाल यहां पांच बाघ-बाघिन और एक युवा शावक विचरण कर रहे हैं, जो वन्यजीव प्रेमियों और सैलानियों के बीच खास आकर्षण बने हुए हैं. योजना यह है कि आने वाले दिनों में पर्यटक केवल जंगल सफारी तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों की संस्कृति, यहां के लोकजीवन और प्राकृतिक खूबसूरती को भी करीब से महसूस कर सकें.

## टाइगर कंजर्वेशन प्लान भी तैयार
सिर्फ ईएसजेड ही नहीं, डीकेटीआर का टाइगर कंजर्वेशन प्लान (टीसीपी) भी बनकर तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा. टीसीपी के लागू होने के बाद रिजर्व क्षेत्र के प्रवेश द्वार, पर्यटन मार्ग, जैव विविधता से जुड़ा डेटा और बाकी पर्यटन गतिविधियों को एक व्यवस्थित ढांचे में विकसित किया जाएगा. इसके साथ-साथ बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंधन तय किया जाएगा, ताकि पर्यटन और वन्यजीव दोनों का संतुलन बना रहे.

## उपयुक्त गांवों की सूची बन रही
जिला कलेक्टर श्री निधि बीटी ने बताया कि जंगल से सटे गांवों का सर्वे किया जा रहा है और होमस्टे के लिहाज से उपयुक्त गांवों की एक सूची तैयार की जा रही है. प्रशासन का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और धौलपुर पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा. कुल मिलाकर पर्यटन, रोजगार और वन्यजीव संरक्षण—तीनों को साथ लेकर चलने वाली यह कोशिश धौलपुर जिले के लिए एक बड़ा और अहम कदम साबित हो सकती है.

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