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  "type": "article",
  "title": "दीवाली पर चेन्नई से बाहर जाने का महाभियान, तीन दिन में 15 लाख लोगों ने छोड़ा शहर",
  "summary": "दीवाली का पर्व मनाने के लिए चेन्नई से तीन दिनों में 15 लाख से अधिक लोग अपने गृह नगरों को रवाना हुए। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भारी भीड़ के बीच परिवहन विभाग ने हजारों विशेष बसों और ट्रेनों का संचालन किया।",
  "content": "दीवाली के उल्लास को अपनों के बीच साझा करने की चाहत ने चेन्नई से बाहर जाने वाले यात्रियों का तांता लगा दिया। पांच से सात नवंबर के बीच के तीन दिनों के भीतर पंद्रह लाख से ज्यादा लोग रेल और सड़क मार्ग के जरिए अपने पैतृक स्थानों की ओर निकल पड़े। इस अवधि में महानगर के प्रमुख बस अड्डों और रेलवे परिसरों में जनसमूह उमड़ पड़ा। सरकारी और निजी बसों के माध्यम से लगभग सात लाख मुसाफिरों ने सफर तय किया, जबकि अन्य ने रेलगाड़ियों और निजी साधनों का उपयोग किया।\n\nपरिवहन व्यवस्था पर बढ़ा भारी दबाव\nछुट्टियों की शुरुआत के साथ ही शुक्रवार को यात्रियों की आवाजाही में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई और शनिवार को भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। दक्षिण तमिलनाडु और केरल समेत विभिन्न गंतव्यों की यात्रा करने वाले परिवारों की भारी तादाद के चलते संपूर्ण परिवहन नेटवर्क पर अभूतपूर्व दबाव आ गया। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इन तीन दिनों में सरकारी बसों से कुल पांच लाख पंद्रह हजार लोगों ने गंतव्य की दूरी तय की। गुरुवार को सरकारी बसों के जरिए एक लाख चालीस हजार और शुक्रवार को दो लाख उनतालीस हजार लोगों ने सफर पूरा किया। शनिवार को रात आठ बजे तक तीन हजार तीन सौ उन्नीस बसों का संचालन किया गया, जिनसे करीब एक लाख पैंतीस हजार यात्री अपने ठिकानों तक पहुंचे। त्योहारी भीड़ को सुचारू रूप से संभालने के लिए विभाग ने कुल पंद्रह हजार छह सौ उन्सठ बस सेवाओं का प्रबंध किया था, जिसमें पांच हजार सात सौ त सैंतालीस नियमित बसें, चार हजार चार सौ पांच विशेष सरकारी बसें और एक हजार तेरह निजी अनुबंधित बसें शामिल थीं।\n\nटर्मिनल पर व्यवस्थाओं और देरी की चुनौती\nविशाल स्तर पर अतिरिक्त बसों के संचालन के बावजूद किलांबक्कम बस टर्मिनल पर यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई बसें अपने तय वक्त से लगभग दो घंटे की देरी से पहुंचीं, जिससे लंबी दूरी के सफर पर निकलने वाले लोगों की मुश्किलें खासी बढ़ गईं। यात्रियों ने टर्मिनल पर उपलब्ध बैठने की सुविधाओं की तो सराहना की, लेकिन बसों की लेट-लतीफी के चलते गंतव्य तक पहुंचने के समय को लेकर अनिश्चितता बनी रही। दूसरी ओर, निजी बस ऑपरेटरों ने भी भारी मांग का लाभ उठाते हुए तीन दिनों में चार हजार सात सौ सत्रह से अधिक फेरे लगाए और एक लाख अस्सी हजार से अधिक यात्रियों को उनके घर पहुंचाया। गुरुवार को लगभग छप्पन हजार आठ सौ, शुक्रवार को पचहत्तर हजार नौ सौ और शनिवार को करीब छप्पन हजार लोगों ने निजी बसों का सहारा लिया।\n\nरेलवे के विशेष प्रबंध और सुरक्षा सख्ती\nयात्रियों के भारी हुजूम को संभालने के लिए रेलवे ने भी कमर कसते हुए विशेष व्यवस्थाएं कीं। दक्षिण रेलवे ने दीवाली के इस पावन अवसर पर एक सौ बत्तीस विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया। चेन्नई सेंट्रल, एग्मोर और तांबरम के मुख्य स्टेशनों से प्रतिदिन लगभग तीन लाख यात्रियों ने आवागमन किया। इसके अतिरिक्त, बाईस मेल और एक्सप्रेस गाड़ियों में अतिरिक्त डिब्बे जोड़े गए, जबकि मुसाफिरों की सुविधा के वास्ते आठ अनारक्षित मेमू सेवाएं भी चलाई गईं। सुरक्षा के मोर्चे पर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। छह नवंबर को रेलवे सुरक्षा बल ने चेन्नई सेंट्रल और एग्मोर स्टेशनों पर प्रतिबंधित आतिशबाजी ले जाने के जुर्म में पांच लोगों को हिरासत में लिया। पर्व के दौरान चेन्नई से हुई इस विशाल पलायन जैसी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि त्योहारों के समय सार्वजनिक परिवहन की मांग चरम पर होती है, हालांकि बसों के विलंब और भारी भीड़ जैसी चुनौतियां इस दौरान बनी रहीं।\n\nइसका आप पर असर\nदीवाली के दौरान चेन्नई से बड़े पैमाने पर लोगों के बाहर जाने का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन और यात्रा योजनाओं पर पड़ा है।\n\n• सार्वजनिक परिवहन: रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर अत्यधिक भीड़ के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। सामान्य दिनों की तुलना में टिकटों की उपलब्धता और सीटों के प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव देखा गया।\n• चेन्नई में: किलांबक्कम बस टर्मिनल पर बसें दो घंटे की देरी से रवाना हुईं, जिससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के समय को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों को लंबी दूरी की यात्रा के दौरान बस और ट्रेन सेवाओं में विलंब का सामना करना पड़ा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nत्योहारी सीजन के दौरान चेन्नई से भारी संख्या में लोगों के पलायन के पीछे पारिवारिक मेल-मिलाप और दीवाली मनाने की पारंपरिक प्राथमिकताएं मुख्य कारण रहीं।\n\n• पारिवारिक आयोजन: लोग अपने पैतृक घरों में परिवार के साथ दीवाली का त्योहार मनाने के लिए दक्षिण तमिलनाडु और केरल जैसे क्षेत्रों की ओर रवाना हुए।\n• परिवहन प्रबंधन: बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए परिवहन विभाग और दक्षिण रेलवे ने हजारों विशेष बसों और अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया।\n• सुरक्षा कदम: रेलवे स्टेशनों पर अनधिकृत सामग्री जैसे पटाखे ले जाने वाले यात्रियों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल द्वारा सख्त जांच की गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चेन्नई से कितने लोगों ने दीवाली पर यात्रा की?\nपाँच से सात नवंबर के बीच तीन दिनों में 15 लाख से अधिक यात्रियों ने चेन्नई से बाहर यात्रा की।\n\n2. सरकारी बसों से कितने यात्रियों ने सफर किया?\nसरकारी बसों के माध्यम से तीन दिनों में कुल 5.15 लाख यात्रियों ने सफर किया।\n\n3. दक्षिण रेलवे ने कितनी विशेष ट्रेनें चलाईं?\nदक्षिण रेलवे ने दीवाली के अवसर पर 132 विशेष ट्रेनें चलाईं।\n\n4. किलांबक्कम बस टर्मिनल पर यात्रियों को क्या परेशानी हुई?\nकई बसें अपने निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से पहुंचीं, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई।\n\n5. आरपीएफ ने कार्रवाई के दौरान कितने लोगों को पकड़ा?\nछह नवंबर को रेलवे सुरक्षा बल ने पटाखे ले जाने के आरोप में पांच लोगों को पकड़ा।",
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  "publishedAt": "2026-11-08",
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    "किलांबक्कम बस टर्मिनल"
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