उत्तराखंड में कॉर्बेट जैसी भीड़ से दूर, इस शांत अभयारण्य में लें जंगल सफारी का असली मजा अगर आप उत्तराखंड में कॉर्बेट या राजाजी नेशनल पार्क की भीड़ से ऊब चुके हैं, तो हल्द्वानी के पास स्थित नंधौर वन्यजीव अभयारण्य आपके लिए एक बेहतरीन और शांत विकल्प है। यदि आप उत्तराखंड के मशहूर उद्यानों की भागदौड़ भरी सफारी से अलग किसी एकांत जगह की तलाश में हैं, तो नैनीताल जिले के हल्द्वानी और चोरगलिया क्षेत्र में फैला नंधौर वन्यजीव अभयारण्य एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह संरक्षित क्षेत्र पर्यटकों को शहरी कोलाहल से दूर प्रकृति की गोद में समय बिताने का शानदार अवसर प्रदान करता है, जहां हर तरफ फैली हरियाली और वन्यजीवों की मौजूदगी दिल को मोह लेती है। भौगोलिक स्थिति और स्थापना का इतिहास लगभग 269.96 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत भूभाग पर फैला यह अभयारण्य वर्ष 2012 में स्थापित किया गया था। यह खूबसूरत जंगल गोला, नंधौर, लाध्या और शारदा नदियों से घिरा हुआ है, जो इसके सौंदर्य में चार चांद लगाती हैं। हल्द्वानी और चंपावत के बीच स्थित होने के कारण यहां की भौगोलिक बनावट बेहद अनूठी है, जहां नदियां और घने जंगल मिलकर एक अद्भुत प्राकृतिक दृश्य रचते हैं। समृद्ध वन्यजीव और शिकार प्रजातियां यह आरक्षित वन क्षेत्र बाघ और तेंदुओं जैसे बड़े और खतरनाक मांसाहारी जीवों का एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित प्राकृतिक आशियाना माना जाता है। इसके अलावा, इस अभयारण्य में एशियाई हाथियों, सांभर, चीतल, गोरल, भौंकने वाले हिरण, सेरो और भालू की विभिन्न प्रजातियां भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं। इन जंगलों में शाकाहारी जीवों की अच्छी खासी तादाद बड़े शिकारियों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करती है, और सफारी के दौरान जमीन पर मिलने वाले वन्यजीवों के पदचिह्न पर्यटकों के भीतर रोमांच को और बढ़ा देते हैं. शांत रास्ते और प्राकृतिक वातावरण नंधौर की संकरी और कच्ची जंगल सड़कों पर सफर करने का अनुभव अन्य बड़े पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग होता है। रास्तों के दोनों किनारों पर खड़े ऊंचे साल के पेड़, हवा में गूंजती परिंदों की चहचहाहट और अचानक सामने आ जाने वाले सांभर या चीतल इस पूरी यात्रा को अविस्मरणीय बना देते हैं। यहां कृत्रिमता का अहसास नहीं होता, बल्कि पर्यटकों को पूरी तरह से शुद्ध और नैसर्गिक जंगल का अनुभव मिलता है, जो इस जगह की सबसे बड़ी विशेषता है. बाघ और तेंदुओं के अलावा यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। हिमालयी आंचल में पाई जाने वाली तमाम पक्षी प्रजातियों के साथ-साथ सर्दियों और अन्य मौसमों में आने वाले प्रवासी पक्षी भी यहां आसानी से देखे जा सकते हैं। सुबह के वक्त पेड़ों की डालियों पर चहकते पक्षी सफारी के सफर को बेहद सुहावना बना देते हैं, और यहां का शांत वातावरण इसे बर्ड वॉचिंग के लिए एक आदर्श स्थान के रूप में स्थापित करता है. संरक्षण की दृष्टि से महत्व पारिस्थितिकी और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से भी इस अभयारण्य का अपना एक विशेष महत्व है। यह क्षेत्र नेपाल के ब्रह्मदेव और सुखलाफांटा वन्यजीव क्षेत्रों के साथ-साथ भारत के तराई और रामनगर के जंगलों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करता है। गोला, नंधौर, लाध्या और शारदा नदियों के बेसिन में फैला यह विशाल वन क्षेत्र बड़े आकार के स्तनधारी जीवों के आवागमन और उनके संरक्षण के लिए बेहतरीन प्राकृतिक परिस्थितियां मुहैया कराता है. सफारी का रोमांच और देखने लायक नजारे इस अभयारण्य में सफारी करने वाले पर्यटकों को काफी शांतिपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ता है। जंगल के रास्तों पर घूमते समय सांभर, चीतल, मॉनिटर लिजर्ड और तमाम रंग-बिरंगे पक्षियों की झलक आसानी से मिल जाती है। हालांकि बाघ या तेंदुए का दिखना पूरी तरह से किस्मत पर निर्भर करता है, लेकिन इनकी मौजूदगी का अहसास हर पल रोमांच बनाए रखता है। गर्मियों के दिनों में पानी के प्राकृतिक स्रोतों के आसपास वन्यजीवों के दिखने की संभावना थोड़ी अधिक हो जाती है. दूरी और मुख्य प्रवेश द्वार नैनीताल से नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की अनुमानित दूरी लगभग 85 किलोमीटर है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को नैनीताल से हल्द्वानी होते हुए चोरगलिया पहुंचना होता है, जहां इस अभयारण्य का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। सड़क मार्ग के जरिए इस सफर को तय करने में सामान्यतः ढाई से तीन घंटे का वक्त लगता है। इसके अलावा टनकपुर की तरफ से आने वाले पर्यटकों के लिए काकराली गेट भी प्रवेश का एक अन्य विकल्प उपलब्ध है। यात्रा पर निकलने से पहले वन विभाग के नियमों और प्रवेश परमिट से जुड़ी तमाम जानकारियां जुटा लेना बेहद जरूरी होता है. प्रवेश शुल्क और समय सारणी नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में प्रवेश के लिए प्रति वयस्क ₹100 का शुल्क तय किया गया है, जबकि 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यह प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है। इसके अतिरिक्त वाहनों के प्रवेश के लिए ₹500 का शुल्क देना होता है, हालांकि सफारी के लिए इस्तेमाल होने वाली जिप्सी का किराया अलग से देय होता है। यहां सफारी का समय सुबह 6:30 से 10:30 बजे तक और दोपहर तथा शाम की पाली में 1:30 से 5:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। चूंकि नियमों और शुल्कों में बदलाव संभव है, इसलिए विजिट करने से पहले स्थानीय वन कार्यालय से संपर्क करना समझदारी होगी. यात्रा का सबसे सही समय पर्यटकों के दृष्टिकोण से इस अभयारण्य को घूमने के लिए अक्टूबर से जून के बीच का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण पर्यटन गतिविधियों पर रोक लग सकती है या बाधा आ सकती है। कॉर्बेट और राजाजी नेशनल पार्कों की तुलना में कम भीड़भाड़, शांत और एकांत माहौल तथा असली जंगल का अहसास इस जगह को खास बनाता है। यदि आप नैनीताल के आसपास किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां रोमांच के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिले, तो इस खूबसूरत डेस्टिनेशन को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें. इसका आप पर असर भारत में: यह अभयारण्य देश भर के प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों को कॉर्बेट जैसी अधिक भीड़भाड़ वाली जगहों के अलावा एक शांत और वैकल्पिक डेस्टिनेशन प्रदान करता है। उत्तराखंड में: नैनीताल और हल्द्वानी के आसपास रहने वाले या वहां यात्रा करने वाले पर्यटकों को बिना भारी भीड़ के कम खर्च में जंगल सफारी का बेहतर अनुभव मिलता है। सवाल-जवाब 1. नंधौर वन्यजीव अभयारण्य कहां स्थित है? यह अभयारण्य उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी-चोरगलिया क्षेत्र में स्थित है। 2. नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना कब हुई थी? इस अभयारण्य की स्थापना वर्ष 2012 में की गई थी और यह लगभग 269.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। 3. इस अभयारण्य में प्रवेश शुल्क कितना है? वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क ₹100 है, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क है और वाहन प्रवेश शुल्क ₹500 है। 4. सफारी के लिए कौन सा समय सबसे अच्छा माना जाता है? नंधौर अभयारण्य की यात्रा के लिए अक्टूबर से जून के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। https://trendkia.com/travel/exploring-nandhaur-wildlife-sanctuary-a-quiet-uttarakhand-alternative-to-corbett-21199 TrendKia — Har trend, sabse pehle.