हरिद्वार के बड़ा बाजार में पूजा सामग्री से लेकर लजीज खानपान तक हर चीज उपलब्ध हर की पौड़ी के निकट ब्रिटिश काल से आबाद बड़ा बाजार धार्मिक खरीदारी, प्रसाद और प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजनों के लिए श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। तीर्थनगरी हरिद्वार में पूरे वर्ष देशभर के विभिन्न कोनों से भक्तों और पर्यटकों का तांता लगा रहता है। श्रद्धालु यहाँ जीवनदायिनी गंगा में आस्था की पवित्र डुबकी लगाने, विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने और अपने पूर्वजों के पिंडदान व अस्थि विसर्जन जैसे पारंपरिक कर्मकांड पूरा करने पहुँचते हैं। अपनी धार्मिक यात्रा को यादगार बनाने और पूजा सामग्री के साथ स्थानीय स्मृति चिह्न खरीदने के लिए यात्री अक्सर हर की पौड़ी के समीप बसे ऐतिहासिक बाजारों का रुख करते हैं। ब्रिटिश काल से ही अपनी एक विशिष्ट पहचान रखने वाली यह मार्केट आज भी पूजा से जुड़ी सामग्रियों, पारंपरिक प्रसाद और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मुख्य केंद्र के तौर पर जानी जाती है। पूजा सामग्री और धार्मिक वस्तुओं का बड़ा केंद्र हर की पौड़ी के बेहद करीब स्थित बड़ा बाजार हर तरह की खरीदारी के लिए एक मुकम्मल ठिकाना माना जाता है। इस बाजार की गलियों में पूजा-पाठ के सामान, खिलौने, रुद्राक्ष मालाएं, आर्टिफिशियल आभूषण और खानपान की अनगिनत दुकानें कतारबद्ध हैं। बाजार में दुकान चलाने वाले व्यापारी अनिल कुमार अग्रवाल बताते हैं कि यहाँ पहुँचने वाले यात्री अपनी आवश्यकता के अनुसार खरीदारी करते हैं और धार्मिक यादों के रूप में कई सामान साथ ले जाते हैं। उनकी दुकान पर पूजा-पाठ का सामान, बच्चों के मनपसंद खिलौने और रुद्राक्ष की मालाएं थोक दरों पर ग्राहकों को मुहैया कराई जाती हैं। पारंपरिक बर्तन, धातु की मूर्तियां और आभूषण बाजार के एक अन्य व्यापारी गिरीश गुप्ता बताते हैं कि उनकी दुकान में पूजा-अर्चना के विशेष बर्तन, तांबे-पीतल के लोटे, कलश, अष्टधातु की सुंदर मूर्तियां, कांच की चूड़ियां, कंगन, तुलसी मालाएं और रुद्राक्ष उपलब्ध रहते हैं। उनका कहना है कि दूर-दराज से आने वाले ग्राहक सामान की बनावट, गुणवत्ता और किफायती कीमतों को देखकर खासे संतुष्ट होते हैं। थोक और खुदरा दोनों तरह की खरीदारी की सुविधा कंबल के कारोबारी अंकित अरोड़ा के अनुसार, बड़ा बाजार की खासियत यह है कि यहाँ थोक और खुदरा दोनों श्रेणियों में खरीदारी की पूरी सुविधा मिलती है। ग्राहक अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से विभिन्न प्रकार के नग-नगीने, मालाएं, अष्टधातु निर्मित प्रतिमाएं, विशेष धार्मिक प्रसाद और पारंपरिक मिठाइयों की खरीदारी कर सकते हैं। विविधता अधिक होने के कारण यात्रियों को एक ही बाजार में अपनी हर जरूरत का सटीक विकल्प मिल जाता है। खरीदारी के साथ मशहूर स्थानीय जायके का संगम धार्मिक खरीदारी के अतिरिक्त यह बाजार लजीज व्यंजनों के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र है। बाजार में मोहन जी पूरी वाले, जैन चाट भंडार और प्रकाश लोक की लस्सी जैसे प्रसिद्ध प्रतिष्ठान स्थित हैं, जहाँ श्रद्धालु खरीदारी के साथ-साथ हरिद्वार के पारंपरिक और मशहूर खानपान का आनंद लेते हैं। गंगा स्नान और देव दर्शन के बाद इस बाजार में घूमना और स्थानीय स्वाद का लुत्फ उठाना हर तीर्थयात्री के अनुभव का अहम हिस्सा बन चुका है। इसका आप पर असर हरिद्वार की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ा बाजार खरीदारी और खानपान का एक बेहद सुविधाजनक केंद्र प्रस्तुत करता है। • भारत भर के यात्रियों के लिए: तीर्थयात्री एक ही स्थान से प्रामाणिक धार्मिक सामग्री, रुद्राक्ष, मूर्तियां और प्रसाद थोक एवं खुदरा दामों पर खरीद सकते हैं। इससे अलग-अलग दुकानों पर भटकने का समय बचता है और वाजिब कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सामान मिलता है। • हरिद्वार में स्थानीय स्तर पर: हर की पौड़ी के निकट होने के कारण श्रद्धालु गंगा आरती और धार्मिक कर्मकांडों के तुरंत बाद आसानी से बाजार पहुँच सकते हैं। इसके साथ ही मोहन जी पूरी वाले और प्रकाश लोक लस्सी जैसे प्रसिद्ध ठिकानों पर प्रामाणिक स्थानीय स्वाद का आनंद लिया जा सकता है। • बजट प्रबंधन: थोक और खुदरा दोनों विकल्प उपलब्ध होने से परिवार और बड़े समूह एक साथ किफायती दामों में खरीदारी कर सकते हैं। यह शादी-विवाह या धार्मिक आयोजनों के लिए थोक में पूजन सामग्री खरीदने वालों के लिए भी सुविधाजनक है। • उपहार और स्मृति चिह्न: बच्चों के खिलौनों से लेकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी और तुलसी की मालाएं उपलब्ध होने से घर ले जाने के लिए उपहार चुनना आसान हो जाता है। यात्री बिना अतिरिक्त भागदौड़ के यादगार वस्तुएं खरीद सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ हर की पौड़ी के समीप स्थित बड़ा बाजार का विकास हरिद्वार के धार्मिक महत्व और तीर्थयात्रियों की निरंतर आवश्यकताओं के कारण हुआ है। • धार्मिक केंद्र से निकटता: हर की पौड़ी पर प्रतिदिन हजारों लोग गंगा स्नान और अस्थि विसर्जन या पिंडदान के लिए आते हैं, जिससे पूजा सामग्री की मांग हमेशा बनी रहती है। मुख्य घाट के करीब होने से इस बाजार का स्वाभाविक विस्तार हुआ। • ब्रिटिश कालीन विरासत: यह बाजार ब्रिटिश काल से ही व्यापारिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। पीढ़ियों से चली आ रही दुकानों ने यहाँ गुणवत्ता और भरोसे का मजबूत नेटवर्क तैयार किया। • थोक और खुदरा व्यापार का संगम: व्यापारियों ने विभिन्न राज्यों से आने वाले ग्राहकों की मांग को देखते हुए होलसेल और रिटेल दोनों सुविधाएं शुरू कीं। इससे स्थानीय लोगों के साथ बाहरी पर्यटकों को भी आकर्षित करने में मदद मिली। • खानपान की लोकप्रियता: खरीदारी के साथ पारंपरिक खाद्य प्रतिष्ठानों की मौजूदगी ने इसे खरीदारी और जलपान का एक संपूर्ण पड़ाव बना दिया। इस संयोजन ने बाजार को दशकों से लोकप्रिय बनाए रखा है। सवाल-जवाब 1. बड़ा बाजार हरिद्वार में कहाँ स्थित है? यह ऐतिहासिक बाजार हरिद्वार में प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट के बेहद नजदीक स्थित है। 2. बड़ा बाजार में किस प्रकार का सामान मिलता है? यहाँ पूजा सामग्री, तांबे-पीतल के बर्तन, अष्टधातु की मूर्तियां, रुद्राक्ष एवं तुलसी की मालाएं, खिलौने, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, कंबल और मिठाइयां मिलती हैं। 3. क्या इस बाजार में थोक मूल्य पर सामान उपलब्ध है? हाँ, बाजार में कई व्यापारी पूजा का सामान, मालाएं और खिलौने थोक और खुदरा दोनों दरों पर उपलब्ध कराते हैं। 4. बड़ा बाजार में खानपान के कौन से प्रतिष्ठान प्रसिद्ध हैं? इस बाजार में मोहन जी पूरी वाले, जैन चाट भंडार और प्रकाश लोक की लस्सी जैसे पारंपरिक और लोकप्रिय खानपान केंद्र स्थित हैं। https://trendkia.com/travel/haridwar-ke-bara-bazar-men-puja-samagri-se-lekara-lajija-khanapana-taka-hara-chija-upalabdha-45851 TrendKia — Har trend, sabse pehle.