# महेश्वर के पास बुनकरों की बस्ती में बनेगा नया टूरिज्म सर्किट, 5 करोड़ 11 लाख से बदलेगी सूरत

> मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में केरियाखेड़ी गांव को टेक्सटाइल विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक माहेश्वरी साड़ी बुनते बुनकरों को देख सकेंगे और मिट्टी के घरों में ठहर सकेंगे।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/maheshwar-ke-pasa-bunakaron-ki-basti-men-banega-naya-turijma-sarkita-5-karora-11-lakha-se-badalegi-surata-9494 · **Language:** Hindi
**Tags:** केरियाखेड़ी, माहेश्वरी साड़ी, टेक्सटाइल विलेज, महेश्वर पर्यटन, मध्य प्रदेश पर्यटन, बुनकर योजना, होम स्टे

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा किनारे बसा एक छोटा सा बुनकर गांव अब राज्य के पर्यटन नक्शे पर बड़ी जगह बनाने जा रहा है। महेश्वर क्षेत्र के केरियाखेड़ी गांव को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की साझा पहल से टेक्सटाइल यानी हैंडीक्राफ्ट विलेज के तौर पर संवारा जा रहा है, ताकि माहेश्वरी साड़ी बुनने वाले परिवारों को नई पहचान मिले और गांव में पर्यटन को रफ्तार मिले। इस पूरी परियोजना पर 5 करोड़ 11 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं।

## बुनकरों से सीधे खरीदारी का मौका मिलेगा
पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी नीरज अमझरे के मुताबिक इस योजना का सबसे बड़ा फायदा खुद बुनकर परिवारों को होगा। यहां पहुंचने वाले पर्यटक बुनकरों को करघे पर साड़ी बुनते हुए अपनी आंखों से देख सकेंगे, उनकी बारीक कारीगरी को करीब से समझेंगे और सबसे अहम बात यह कि किसी बिचौलिए के बिना सीधे बुनकर से ही साड़ी खरीद सकेंगे। इससे बुनकरों की कमाई में इजाफा होगा और उनकी कला को एक बड़ा नया बाजार मिल सकेगा, जो अभी तक सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित था।

## गांव की गलियां और बुनकरों के घर संवरेंगे
गांव तक पहुंचना आसान बनाने के लिए सड़क का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है, वहीं गांव के भीतर की गलियों को भी बेहतर बनाने का काम चल रहा है। पर्यटकों को रास्ता भटकना न पड़े, इसके लिए जगह जगह साइनेज लगाए जाएंगे। इसके अलावा गांव में एक गार्डन भी विकसित किया जाएगा और बुनकरों के घरों की दीवारों पर रंग बिरंगे भित्ति चित्र उकेरे जाएंगे। मकसद यह है कि केरियाखेड़ी की अपनी अलग पहचान बने और पर्यटक बिना किसी दिक्कत के सीधे बुनकर परिवारों तक पहुंच सकें।

## मिट्टी और केवलु से बने घरों में ठहरेंगे पर्यटक
गांव आने वाले सैलानियों के ठहरने के लिए ग्रामीण अंदाज के होम स्टे भी बनाए जा रहे हैं। मिट्टी और केवलु से तैयार इन घरों में रुककर पर्यटक गांव के परंपरागत रहन सहन, स्थानीय खानपान और यहां की संस्कृति को करीब से जी सकेंगे। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। बकरीछाप योजना के तहत केरियाखेड़ी में करीब 10 होम स्टे तैयार किए जा रहे हैं और इनमें ठहरने के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को पहले से बुकिंग करना आसान होगा।

## ढाई करोड़ से ज्यादा की लागत से बन रहा आधुनिक कैफेटेरिया
नीरज अमझरे ने बताया कि महेश्वर रोड पर स्थित गांधी नगर क्षेत्र में करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक कैफेटेरिया भी तैयार किया जा रहा है। इस कैफेटेरिया में बड़ा हॉल, किचन, पार्किंग और शौचालय जैसी कई सुविधाएं मौजूद रहेंगी। इसका निर्माण कार्य करीब 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और जल्द ही इसे पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है।

## नर्मदा घाट से जुड़ेगा महेश्वर ओंकारेश्वर का नया सर्किट
कैफेटेरिया से केरियाखेड़ी गांव तक जाने के लिए एक ट्रैकिंग मार्ग भी तैयार किया गया है। इसके साथ ही नर्मदा किनारे तत्कालेश्वर महादेव मंदिर के पास एक घाट का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक नर्मदा स्नान, पूजन और दर्शन का लाभ भी उठा सकें। इससे महेश्वर आने वाले पर्यटकों और ओंकारेश्वर जाने वाले श्रद्धालुओं दोनों को एक बिल्कुल नया पर्यटन सर्किट मिल जाएगा, जो अभी तक इन दोनों स्थानों को इस तरह नहीं जोड़ता था।

## सिंहस्थ को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा पूरा रूट
नीरज अमझरे के अनुसार पूरी परियोजना को आने वाले सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए ओंकार सर्किट की तर्ज पर डिजाइन किया जा रहा है। इस रूट के मुताबिक महेश्वर आने वाले पर्यटक जेल रोड से प्रवेश करेंगे और सबसे पहले केरियाखेड़ी पहुंचेंगे, जहां वे माहेश्वरी साड़ी बनने की पूरी प्रक्रिया देख सकेंगे। इसके बाद वे होम स्टे में ग्रामीण जीवन का अनुभव लेंगे और फिर ट्रैकिंग या वाहन से हाइवे पर स्थित निमाड़ स्पाइस के पास लाड़वी यानी गांधी नगर के कैफेटेरिया पहुंचेंगे। वहां से नर्मदा दर्शन और मंदिर दर्शन करने के बाद वे आगे ओंकारेश्वर की यात्रा पर निकल सकेंगे। पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि साल 2026 के अंत तक इस पूरी परियोजना के सभी विकास कार्य पूरे कर लिए जाएं, जिससे यह इलाका पूरी तरह पर्यटकों के लिए तैयार हो सके।

## इसका आप पर असर
यह योजना सीधे तौर पर स्थानीय बुनकर परिवारों और पर्यटकों दोनों को प्रभावित करेगी।

- **भारत में:** देशभर के पर्यटकों को महेश्वर घूमने के साथ ही अब बुनकरी शिल्प देखने और सीधे बुनकरों से माहेश्वरी साड़ी खरीदने का एक नया विकल्प मिलेगा।
- **खरगोन में:** केरियाखेड़ी के बुनकर परिवारों की आमदनी बढ़ेगी, गांव में होम स्टे और कैफेटेरिया से रोजगार के नए मौके बनेंगे, और महेश्वर ओंकारेश्वर आने जाने वाले श्रद्धालुओं को एक नया, सुविधाजनक पर्यटन रास्ता मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. केरियाखेड़ी गांव कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर क्षेत्र में नर्मदा किनारे स्थित एक गांव है।

### 2. इस परियोजना पर कितनी लागत आ रही है?
पूरी परियोजना पर 5 करोड़ 11 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

### 3. कैफेटेरिया की क्या लागत है और वह कहां बन रहा है?
करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से महेश्वर रोड स्थित गांधी नगर क्षेत्र में कैफेटेरिया बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

### 4. पर्यटकों को गांव में ठहरने की सुविधा कैसे मिलेगी?
बकरीछाप योजना के तहत मिट्टी और केवलु से बने करीब 10 होम स्टे तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है।

### 5. इस योजना से बुनकरों को क्या फायदा होगा?
पर्यटक उन्हें साड़ी बुनते देख सकेंगे और बिना बिचौलिए के सीधे उनसे साड़ी खरीद सकेंगे, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

### 6. यह परियोजना कब तक पूरी होने की उम्मीद है?
पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक सभी विकास कार्य पूरे कर लिए जाएं।

### 7. यह सर्किट महेश्वर और ओंकारेश्वर को कैसे जोड़ेगा?
केरियाखेड़ी से कैफेटेरिया, फिर नर्मदा किनारे तत्कालेश्वर महादेव मंदिर के पास बन रहे घाट से होते हुए यह रास्ता आगे ओंकारेश्वर की यात्रा से जुड़ जाएगा।

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