मानसून के बाद हरियाली से सराबोर बागेश्वर का पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक, कुमाऊं के आखिरी गांव खाती से मिलेगी शुरुआत बारिश के मौसम के बाद बागेश्वर का पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक हरियाली, झरनों और बुग्यालों से सज जाता है। कुमाऊं के अंतिम गांव खाती से शुरू होकर करीब 45 किलोमीटर का यह सफर धाकुड़ी, द्वाली और फुरकिया होते हुए ग्लेशियर तक पहुंचता है। बारिश का मौसम बीतते ही उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में मौजूद पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक की वादियां पूरी तरह हरी-भरी हो जाती हैं और यही वह समय होता है जब देश-विदेश से ट्रेकर्स यहां का रुख करने लगते हैं। रास्ते में बहते झरने, छोटे-छोटे नाले और ऊंचाई पर मौजूद बुग्याल इस सफर को हर मोड़ पर खूबसूरत बना देते हैं। करीब 45 किलोमीटर के इस ट्रेक में हिमालय की बर्फीली चोटियों के नजारे इसे उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय ट्रेक रूटों में शामिल करते हैं। कुमाऊं के आखिरी गांव खाती से शुरू होता है सफर इस ट्रेक की नींव बागेश्वर के खाती गांव से पड़ती है, जिसे कुमाऊं का अंतिम आबाद गांव माना जाता है। यहीं पहुंचकर ट्रेकिंग का असली रोमांच शुरू होता है। इसके बाद रास्ता धाकुड़ी, द्वाली और फुरकिया से होते हुए पिंडारी ग्लेशियर तक पहुंचता है। घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए रास्ते में लकड़ी के पारंपरिक पुल, पहाड़ी नदियां और शांत वातावरण मिलते हैं, जो शहर की भीड़भाड़ से बिल्कुल अलग अनुभव देते हैं। ट्रेकर तारा रावत के मुताबिक खाती गांव के स्थानीय लोग ट्रेकर्स का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और यहां होमस्टे की सुविधा भी मौजूद है। यहां रुककर यात्री स्थानीय भोजन चख सकते हैं और पहाड़ी संस्कृति को करीब से समझ सकते हैं, यही वजह है कि हर साल बड़ी तादाद में सैलानी इस ट्रेक का हिस्सा बनते हैं। हर पड़ाव पर बदलता नजारा, धाकुड़ी टॉप से दिखता है नंदा कोट पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक का हर पड़ाव अपने आप में अलग खूबसूरती समेटे हुए है। रास्ते में रंग-बिरंगे जंगली फूल, ऊंचे देवदार और बुरांश के घने जंगल, कल-कल बहती पिंडर नदी और बादलों से घिरी पहाड़ियां हर किसी का मन मोह लेती हैं। बारिश के बाद इन नजारों की चमक और भी बढ़ जाती है। धाकुड़ी टॉप पर पहुंचकर नंदा कोट और आसपास की हिमालयी चोटियों का नजारा बेहद आकर्षक दिखता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह ट्रेक किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता, क्योंकि यहां हर मोड़ पर प्रकृति का नया रूप देखने को मिलता है, जो इस सफर को हमेशा के लिए यादगार बना देता है। होमस्टे और स्थानीय मेहमाननवाजी बनाती है सफर खास पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक के रास्ते में खाती, द्वाली और फुरकिया जैसे कई पड़ावों पर होमस्टे और विश्राम गृह की सुविधा मौजूद है, जहां रुककर यात्री थकान मिटा सकते हैं। स्थानीय परिवार अपने घरों में पर्यटकों को ठहराने के साथ साथ पारंपरिक कुमाऊंनी भोजन भी परोसते हैं, जिससे यात्रियों को पहाड़ की संस्कृति, रहन सहन और खानपान को बेहद करीब से जानने का मौका मिलता है। स्थानीय लोगों की यह मेहमाननवाजी ट्रेक को और भी खास बना देती है और यही अनुभव कई पर्यटकों को दोबारा यहां लौटने के लिए प्रेरित करता है। परिवार और दोस्तों के साथ वीकेंड ट्रिप के लिए मुफीद शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ दिन दूर रहकर प्रकृति के बीच वक्त बिताना चाहते हैं, तो पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। छुट्टी के दिनों में परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर यहां ट्रेकिंग की योजना बनाई जा सकती है। हालांकि ट्रेक शुरू करने से पहले मौसम का हाल जरूर जान लेना चाहिए, क्योंकि बारिश के दौरान कुछ हिस्सों में फिसलन की आशंका रहती है। उचित ट्रेकिंग जूते, रेनकोट और जरूरी सामान साथ रखने से यह सफर सुरक्षित और यादगार दोनों बन जाता है। शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद है यह सफर पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक सिर्फ घूमने का मौका नहीं देता, बल्कि खुद को शारीरिक रूप से परखने का भी शानदार जरिया है। लगातार पैदल चलने से शरीर की अच्छी खासी एक्सरसाइज हो जाती है, वहीं पहाड़ों की ताजी हवा मानसिक तनाव कम करने में मदद करती है। इस ट्रेक को मध्यम कठिनाई स्तर का माना जाता है, इसलिए सामान्य फिटनेस रखने वाले लोग भी इसे आसानी से पूरा कर सकते हैं। रास्ते में धीरे धीरे बढ़ती ऊंचाई की वजह से यात्रियों को हिमालयी वातावरण का अलग ही एहसास होता है, और प्रकृति के बीच बिताया गया यह समय शरीर व मन दोनों को तरोताजा कर देता है। ट्रेकिंग पर निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान बारिश के मौसम में ट्रेक पर निकलने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहद जरूरी है। मौसम की सही जानकारी लिए बिना सफर शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि बारिश के दौरान कुछ रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। मजबूत ट्रेकिंग जूते, गर्म कपड़े, रेनकोट, प्राथमिक उपचार किट, पानी और हल्का भोजन साथ रखना जरूरी माना जाता है। अगर मौसम खराब दिखे तो यात्रा टाल देना बेहतर विकल्प है। समूह में ट्रेक करना ज्यादा सुरक्षित रहता है और स्थानीय प्रशासन या गाइड की सलाह जरूर माननी चाहिए। सही तैयारी के साथ यह सफर रोमांच और खूबसूरत यादों से भर देता है। जिम्मेदार पर्यटन से बनी रहेगी ट्रेक की खूबसूरती पर्यटकों से यह अपील की जाती है कि रास्ते में प्लास्टिक या कचरा न फैलाएं और प्राकृतिक वातावरण को साफ सुथरा बनाए रखें। जिम्मेदार पर्यटन अपनाने से ही इस खूबसूरत ट्रेक की चमक आने वाले सालों तक बनी रह सकती है। ट्रेक के आखिरी पड़ाव पर पहुंचते ही विशाल ग्लेशियर और बर्फ से ढकी चोटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है, जो सालों से देश विदेश के ट्रेकर्स को अपनी ओर खींचता आया है। बारिश के बाद जब मौसम साफ होता है तो यहां की प्राकृतिक खूबसूरती और भी निखर उठती है। अगर इस वीकेंड कुछ अलग और यादगार अनुभव करने का मन हो, तो बागेश्वर का पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इसका आप पर असर यह खबर घूमने-फिरने के शौकीनों और स्थानीय पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए अहम है। • भारत में: बारिश के मौसम के बाद हिमालयी ट्रेकिंग की योजना बना रहे यात्रियों के लिए पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक एक भरोसेमंद और खूबसूरत विकल्प बनकर सामने आता है। • बागेश्वर में: बड़ी संख्या में ट्रेकर्स के पहुंचने से खाती, द्वाली और फुरकिया जैसे गांवों में होमस्टे चलाने वाले स्थानीय परिवारों की आमदनी बढ़ती है। सवाल-जवाब 1. पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक बागेश्वर के किस गांव से शुरू होता है? यह ट्रेक बागेश्वर के खाती गांव से शुरू होता है, जिसे कुमाऊं का अंतिम आबाद गांव माना जाता है। 2. पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक कुल कितने किलोमीटर लंबा है? यह ट्रेक करीब 45 किलोमीटर लंबा है। 3. ट्रेक के दौरान कौन कौन से पड़ाव आते हैं? खाती गांव के बाद यह ट्रेक धाकुड़ी, द्वाली और फुरकिया से होते हुए पिंडारी ग्लेशियर तक पहुंचता है। 4. ट्रेक पर ठहरने की क्या व्यवस्था है? खाती, द्वाली और फुरकिया जैसे पड़ावों पर होमस्टे और विश्राम गृह उपलब्ध हैं, जहां स्थानीय परिवार पारंपरिक कुमाऊंनी भोजन भी परोसते हैं। 5. धाकुड़ी टॉप से कौन सी चोटी दिखाई देती है? धाकुड़ी टॉप से नंदा कोट और आसपास की हिमालयी चोटियों का शानदार नजारा दिखता है। 6. यह ट्रेक कठिनाई के हिसाब से कैसा है? इसे मध्यम कठिनाई वाला ट्रेक माना जाता है, इसलिए सामान्य फिटनेस वाले लोग भी इसे पूरा कर सकते हैं। 7. ट्रेकिंग के लिए साथ क्या क्या सामान रखना चाहिए? मजबूत ट्रेकिंग जूते, गर्म कपड़े, रेनकोट, प्राथमिक उपचार किट, पानी और हल्का भोजन साथ रखना चाहिए। 8. बारिश के बाद इस ट्रेक पर जाना क्यों खास माना जाता है? बारिश के बाद वादियां हरियाली से भर जाती हैं और झरने, नाले व बुग्याल इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं। https://trendkia.com/travel/manasuna-ke-bada-hariyali-se-sarabora-bageshwar-ka-pindari-glacier-treka-kumaon-ke-akhiri-ganva-khati-se-milegi-shuruata-8839 TrendKia — Har trend, sabse pehle.