# मानसून में नाणेघाट का झरना नीचे नहीं ऊपर बहता है, तेज हवा से बनता है यह अनोखा नजारा

> महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित नाणेघाट में मानसून के दौरान झरने का पानी ऊपर की तरफ उड़ता दिखाई देता है, जिसे रिवर्स वॉटरफॉल कहा जाता है, इसकी वजह 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवा है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-07-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/manasuna-men-naneghat-ka-jharana-niche-nahin-upara-bahata-hai-teja-hava-se-banata-hai-yaha-anokha-najara-5217 · **Language:** Hindi
**Tags:** नाणेघाट, रिवर्स वॉटरफॉल, महाराष्ट्र ट्रैकिंग, पश्चिमी घाट, मानसून टूरिज्म, पुणे ठाणे

महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित नाणेघाट दर्रा हर मानसून में एक हैरान करने वाले नजारे की वजह से सुर्खियों में आ जाता है। यहां झरने का पानी नीचे गिरने की बजाय हवा में ऊपर की तरफ उड़ता हुआ दिखाई देता है, जिसे लोग रिवर्स वॉटरफॉल कहते हैं। पहली बार यह दृश्य देखने वाले लोग अक्सर इसे कोई चमत्कार समझ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक वजह है। हर मानसून में इसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं और लोग हैरानी जताते हुए इसे शेयर करते रहते हैं।

## पुणे और ठाणे के बीच बसा 2,000 साल पुराना दर्रा
नाणेघाट पुणे और ठाणे जिलों के बीच स्थित एक प्राचीन पहाड़ी दर्रा है। इसका इतिहास करीब 2,000 साल पुराना बताया जाता है और सातवाहन काल में इसे व्यापारिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। आज यही दर्रा ट्रैकिंग, घनी हरियाली और मानसून के मौसम में मिलने वाले खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर है। बारिश के दिनों में यहां बनने वाला रिवर्स वॉटरफॉल पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बन जाता है। दूर से देखने पर लगता है जैसे झरने का पानी नीचे बहने के बजाय सीधे आसमान की तरफ उड़ रहा हो, और यही दृश्य कैमरे में कैद होते ही सोशल मीडिया पर छा जाता है।

## गुरुत्वाकर्षण नहीं, तेज हवा है इसकी असली वजह
पानी के ऊपर उड़ने का यह नजारा गुरुत्वाकर्षण में किसी बदलाव से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसकी वजह तेज हवा का दबाव है। मानसून के दौरान नाणेघाट की ऊंची पहाड़ियों पर हवा की रफ्तार कई बार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे भी ज्यादा पहुंच जाती है। जब झरने का पानी ऊंचाई से नीचे गिरना शुरू करता है, तो वह छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाता है। इतनी तेज हवा इन हल्की बूंदों को जमीन पर गिरने से पहले ही ऊपर और पीछे की तरफ धकेल देती है। इससे देखने वालों को ऐसा भ्रम होता है कि पूरा झरना उल्टी दिशा में बह रहा है। असल में पानी नीचे ही गिरता है, लेकिन उसकी बारीक बूंदें हवा के दबाव में ऊपर उड़ती हुई नजर आती हैं। ठीक वैसे ही जैसे तेज आंधी में बारिश की बूंदें सीधी गिरने के बजाय तिरछी और उलटी दिशा में उड़ने लगती हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां यह असर पूरे झरने पर एक साथ दिखता है।

## यह नजारा सिर्फ मानसून में ही क्यों दिखता है
रिवर्स वॉटरफॉल का यह नजारा साल भर नहीं दिखाई देता। यह मुख्य रूप से जून से सितंबर के बीच, यानी मानसून के महीनों में ही देखने को मिलता है। इस दौरान झरनों में पानी की मात्रा भी पर्याप्त रहती है और पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर तेज हवाएं भी लगातार चलती रहती हैं। ये दोनों स्थितियां एक साथ होने पर ही यह नजारा बनता है। अगर हवा की रफ्तार कम हो जाए या बारिश थम जाए, तो झरना अपने सामान्य तरीके से ही नीचे गिरता हुआ नजर आता है। इसलिए इस अनोखी प्राकृतिक घटना को देखने के लिए सही मौसम और सही समय पर वहां पहुंचना जरूरी है, वरना खाली हाथ लौटना पड़ सकता है।

## हर साल हजारों पर्यटक और ट्रैकर्स पहुंचते हैं यहां
मानसून के मौसम में हर साल हजारों पर्यटक और ट्रैकिंग के शौकीन नाणेघाट का रुख करते हैं। यहां से दिखने वाली हरी-भरी घाटियां, बादलों में लिपटी पहाड़ियां और उल्टा बहता झरना, ये सारे नजारे मिलकर इस जगह को फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिहाज से बेहद खास बना देते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर हर मानसून में नाणेघाट के रिवर्स वॉटरफॉल के वीडियो वायरल होते रहते हैं और लोग इसकी वैज्ञानिक वजह जाने बिना इसे किसी अजूबे की तरह देखते हैं। असल में यह पूरा नजारा हवा की रफ्तार और झरने की बूंदों के बीच का सीधा भौतिक खेल है, जो हर मानसून में लोगों को दोबारा हैरान कर जाता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** मानसून में नई और अनोखी जगह घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए यह जानकारी काम की है कि रिवर्स वॉटरफॉल जैसा नजारा जून से सितंबर के बीच ही दिखता है, इसलिए ट्रिप उसी दौरान रखना बेहतर होगा।
- **महाराष्ट्र में:** पुणे और ठाणे के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नाणेघाट एक आसानी से पहुंचा जा सकने वाला वीकेंड ट्रैकिंग स्पॉट है, लेकिन जिस तेज हवा से यह नजारा बनता है वही ट्रैकिंग के दौरान खतरा भी बन सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।

## सवाल-जवाब

### 1. नाणेघाट कहां स्थित है?
यह महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में पुणे और ठाणे जिलों के बीच स्थित एक पहाड़ी दर्रा है।

### 2. रिवर्स वॉटरफॉल किसे कहा जाता है?
नाणेघाट में मानसून के दौरान झरने का पानी नीचे गिरने के बजाय ऊपर की तरफ उड़ता हुआ दिखाई देता है, इसी नजारे को रिवर्स वॉटरफॉल कहा जाता है।

### 3. पानी ऊपर की तरफ क्यों उड़ता दिखाई देता है?
इसकी वजह गुरुत्वाकर्षण में बदलाव नहीं है, बल्कि 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे ज्यादा रफ्तार की तेज हवा है, जो झरने की बूंदों को नीचे गिरने से पहले ऊपर धकेल देती है।

### 4. यह नजारा साल में कब देखा जा सकता है?
यह मुख्य रूप से जून से सितंबर के बीच, यानी मानसून के महीनों में ही दिखाई देता है।

### 5. नाणेघाट का इतिहास क्या है?
इसका इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है और सातवाहन काल में इसे व्यापारिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।

### 6. क्या रिवर्स वॉटरफॉल हर मौसम में दिखता है?
नहीं, अगर हवा की रफ्तार कम हो जाए या बारिश न हो, तो झरना अपने सामान्य तरीके से ही नीचे गिरता हुआ दिखाई देता है।

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