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  "title": "मानसून में निखर उठता है माउंट आबू: गोल्डन हॉर्न से टॉड रॉक तक, राजस्थान के इस हिल स्टेशन की वो जगहें जो बारिश में देखनी ही चाहिए",
  "summary": "एक मशहूर ट्रैवल वेबसाइट की टॉप मानसून डेस्टिनेशन सूची में जगह बनाने के बाद माउंट आबू पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है। गोल्डन हॉर्न व्यू पॉइंट, गोमुख मंदिर, टॉड रॉक और गुरु शिखर ट्रैक यहाँ बारिश के मौसम के सबसे खूबसूरत ठिकाने हैं।",
  "content": "राजस्थान को अक्सर रेगिस्तान और तपती गर्मी के लिए याद किया जाता है, लेकिन मानसून आते ही इसी राज्य का इकलौता हिल स्टेशन माउंट आबू किसी हरे-भरे स्वर्ग में बदल जाता है। हाल ही में एक मशहूर ट्रैवल वेबसाइट ने इसे देश के टॉप मानसून डेस्टिनेशन की सूची में शामिल किया है, और इसके बाद से बारिश के मौसम में यहाँ घूमने का प्लान बनाने वालों की भीड़ बढ़ गई है। अगर आप भी इस मौसम में यहाँ की हरियाली, बादलों और झरनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो ये कुछ ऐसी जगहें हैं जिन्हें छोड़ना नहीं चाहिए।\n\nगोल्डन हॉर्न व्यू पॉइंट\nमाउंट आबू पहुँचने वाले पर्यटकों के लिए सबसे पहला और सबसे बड़ा आकर्षण गोल्डन हॉर्न व्यू पॉइंट है। यह एक अनोखी पहाड़ी है, जिसे यह नाम दो वजहों से मिला है। पहली, सुबह के समय इस पर पड़ती धूप इसे सोने जैसी सुनहरी चमक देती है, और दूसरी, इसकी बनावट किसी सींग जैसी दिखती है। इसी कारण इसे सबसे बड़ी प्राकृतिक चिमनी भी कहा जाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को करीब 5 किलोमीटर लंबा खूबसूरत पैदल ट्रैकिंग मार्ग तय करना होता है, और इसी ट्रैक पर चलते हुए मानसून के मनमोहक नजारे आँखों के सामने खुलते चले जाते हैं।\n\nगोमुख मंदिर और 750 सीढ़ियों का सफर\nवन क्षेत्र में पहाड़ियों के बीच बसा गोमुख मंदिर मानसून में घूमने के लिहाज से माउंट आबू की सबसे सुकून भरी जगहों में से एक है। यहाँ पहुँचने के लिए करीब 750 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, और रास्ते भर चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ों के नजारे इस उतराई को थकान के बजाय एक खूबसूरत अनुभव बना देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह स्थान भगवान राम के गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली रहा है। यहाँ बने सुंदर गोमुख कुंड में गाय के मुख की आकृति लगी है, जिससे पूरे साल लगातार प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है। इसी निरंतर बहते जल के कारण इस प्रसिद्ध स्थान को गोमुख मंदिर का नाम मिला।\n\nटॉड रॉक, जहाँ से दिखती है पूरी नक्की झील\nमाउंट आबू की मशहूर नक्की झील के परिक्रमा पथ से करीब 100 मीटर की ऊंचाई पर एक ऐसी पहाड़ी है, जो हूबहू मेंढक की आकृति जैसी नजर आती है। इसी अनोखी बनावट के कारण इसे टॉड रॉक कहा जाता है। इसकी चोटी तक पहुँचने के लिए करीब 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन ऊपर पहुँचते ही नक्की झील और पूरे शहर का एक साथ शानदार नजारा देखकर सारी मेहनत वसूल हो जाती है। मानसून में जब आसपास का पूरा इलाका हरियाली से भर जाता है, तो इस पॉइंट की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।\n\nगुरु शिखर से शुरू होता रोमांचक 7 किलोमीटर का ट्रैक\nजो पर्यटक थोड़े लंबे और रोमांचक सफर के शौकीन हैं, उनके लिए माउंट आबू की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से शुरू होने वाला करीब 7 किलोमीटर का ट्रैक बारिश के मौसम में सबसे बेहतरीन विकल्प है। इस रास्ते पर चलते हुए खूबसूरत झरने, घनी हरियाली और बादलों से घिरे पहाड़ कदम-कदम पर दिखाई देते हैं। रास्ते में केदारनाथ और बद्रीनाथ के पवित्र मंदिर भी पड़ते हैं, जबकि शेरगांव की प्रसिद्ध ईशान भेरू गुफा यहाँ का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। आगे बढ़ने पर बड़े उतरज और शेरगांव जैसे दुर्गम गाँव मिलते हैं, जहाँ इंटरनेट और आधुनिक सुविधाओं से दूर स्थानीय परिवार आज भी अपने पारंपरिक मकानों में सादगी भरा जीवन जीते दिखते हैं।\n\nराजस्थान का सबसे ऊंचा गाँव शेरगांव\nशेरगांव राजस्थान का सबसे अधिक ऊंचाई पर बसा हुआ गाँव है। बारिश के मौसम में प्रकृति प्रेमी और पर्यटक खासतौर पर यहाँ ट्रैकिंग और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने पहुँचते हैं। इसकी ऊंचाई और दूरदराज का माहौल इसे उन लोगों के लिए खास बनाता है जो भीड़ से दूर शांति की तलाश में रहते हैं।\n\nट्रैकिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान\nमानसून में माउंट आबू घूमना जितना सुंदर है, उतनी ही सावधानी की भी जरूरत है। पहाड़ी रास्तों पर बारिश के कारण फिसलन का खतरा बहुत बढ़ जाता है, इसलिए पैरों में अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनना बेहद जरूरी है। इसके अलावा घने जंगलों के बीच ट्रैकिंग करते समय अपने साथ एक प्रशिक्षित गाइड रखना भी आवश्यक है। गाइड के साथ होने से न तो जंगल में रास्ता भटकने का डर रहता है और न ही किसी अनहोनी की आशंका, जिससे पूरी यात्रा सुरक्षित बनी रहती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: मानसून में सस्ती और हरियाली भरी छुट्टी की तलाश कर रहे पर्यटकों के लिए माउंट आबू एक बेहतरीन और नजदीकी विकल्प बन सकता है।\n• राजस्थान में: राज्य के पर्यटकों को रेगिस्तानी गर्मी से दूर अपने ही राज्य में नक्की झील, गुरु शिखर और शेरगांव जैसे ठंडे, हरे-भरे ट्रैकिंग ठिकाने पास में ही मिल जाते हैं।\n• सुरक्षा: ट्रैकिंग पर जाने से पहले अच्छी ग्रिप वाले जूते और प्रशिक्षित गाइड साथ रखना फिसलन और रास्ता भटकने के खतरे से बचा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. माउंट आबू को टॉप मानसून डेस्टिनेशन में किसने शामिल किया?\nएक मशहूर ट्रैवल वेबसाइट ने माउंट आबू को देश के टॉप मानसून डेस्टिनेशन की सूची में शामिल किया है, जिसके बाद पर्यटकों की दिलचस्पी बढ़ी है।\n\n2. गोमुख मंदिर तक पहुँचने के लिए कितनी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं?\nगोमुख मंदिर तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को करीब 750 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। यह स्थान वशिष्ठ ऋषि की तपोस्थली माना जाता है।\n\n3. गुरु शिखर से शुरू होने वाला ट्रैक कितना लंबा है?\nगुरु शिखर से शुरू होने वाला यह ट्रैक करीब 7 किलोमीटर लंबा है, जिसमें झरने, हरियाली, केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर और ईशान भेरू गुफा देखने को मिलते हैं।\n\n4. मानसून में ट्रैकिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?\nअच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें क्योंकि बारिश से रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, और घने जंगल में हमेशा एक प्रशिक्षित गाइड साथ रखें।",
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  "category": "यात्रा",
  "publishedAt": "2026-06-18",
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