# मेघालय के दावकी में पेड़ों की जड़ों से खुद-ब-खुद तैयार होता है यह अनोखा पुल, बनने में लग जाते हैं दशकों

> मेघालय के दावकी में स्थित लिविंग रूट ब्रिज लोहे या सीमेंट से नहीं, बल्कि पेड़ों की जीवित जड़ों को दशकों तक दिशा देकर तैयार किया गया है, और आज भी यह मजबूत होता जा रहा है.

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/meghalaya-ke-dawki-men-peron-ki-jaron-se-khuda-ba-khuda-taiyara-hota-hai-yaha-anokha-pula-banane-men-laga-jate-hain-dashakon-28604 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय, लिविंग रूट ब्रिज, दावकी, उमंगोट नदी, खासी समुदाय, ट्रैवल डेस्टिनेशन

मेघालय की पहाड़ियों में एक ऐसा पुल मौजूद है जिसे बनाने में न तो कोई ईंट लगी, न सीमेंट और न ही लोहे की एक छड़. दावकी में स्थित यह पुल असल में पेड़ों की जीवित जड़ों को बरसों तक एक तय दिशा में बढ़ाकर तैयार किया गया है, और यही वजह है कि यह हर साल देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के बीच खिंचाव का बड़ा कारण बनता है.

हरे-भरे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसा यह पुल देखने में जितना असाधारण लगता है, इसके तैयार होने की प्रक्रिया उतनी ही धीमी और मेहनत भरी है.

> 

## जड़ों को पुल में बदलने का तरीका
इस तरह के पुल बनाने के लिए स्थानीय लोग रबर फिग यानी फ़िकस इलास्टिका के पेड़ चुनते हैं, क्योंकि इनकी जड़ें बेहद मजबूत और लचीली होती हैं. शुरुआत में इन जड़ों को नदी या नाले के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाने के लिए बांस या लकड़ी के ढांचे का सहारा लिया जाता है. इसी ढांचे के सहारे जड़ें धीरे-धीरे तय दिशा में आगे बढ़ती रहती हैं.

समय बीतने के साथ ये जड़ें मोटी होती जाती हैं और आपस में गुंथकर एक ठोस ढांचा बना लेती हैं, जो आगे चलकर लोगों के चलने लायक मजबूत पुल का रूप ले लेता है. इस पूरी प्रक्रिया में कई-कई दशक लग जाते हैं, इसलिए इसे किसी सामान्य इंजीनियरिंग वाले पुल की तरह नहीं, बल्कि एक 'जीवित पुल' के तौर पर देखा जाता है. स्थानीय लोग इसकी देखरेख भी लगातार करते रहते हैं, ताकि जड़ें सही दिशा में बढ़ती रहें, और वक्त के साथ इनकी मजबूती और भी बढ़ती जाती है.

## खासी और जैंतिया समुदायों की विरासत
इस तकनीक की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें प्रकृति को बदला नहीं गया, बल्कि उसी के साथ तालमेल बिठाकर काम लिया गया. मेघालय के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में नदियां और धाराएं पार करना हमेशा से एक चुनौती रही है, और इसी जरूरत ने खासी और जैंतिया समुदायों को यह पारंपरिक तरीका विकसित करने के लिए प्रेरित किया. यह तकनीक पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही और आज भी इसे उसी सावधानी से निभाया जाता है.

कई पुराने लिविंग रूट ब्रिज आज भी सक्रिय इस्तेमाल में हैं. कुछ पुलों की उम्र तो 100 साल से भी ज्यादा बताई जाती है. हालांकि हर पुल की मजबूती और उम्र उसकी जगह, वहां की जलवायु और उसकी देखभाल पर निर्भर करती है, इसलिए हर पुल की कहानी थोड़ी अलग होती है.

## उमंगोट नदी और दावकी की खूबसूरती
दावकी सिर्फ अपने लिविंग रूट ब्रिज के लिए ही नहीं, बल्कि उमंगोट नदी के साफ पानी के लिए भी जाना जाता है. चारों तरफ फैले हरे पहाड़, घने जंगल और नदी का पारदर्शी पानी इस जगह को बेहद खूबसूरत बनाते हैं. यहां आने वाले पर्यटकों को सिर्फ प्रकृति ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की परंपरा और उनके पीढ़ियों पुराने ज्ञान को भी करीब से देखने का मौका मिलता है.

दावकी के आसपास श्नोंगपडेंग और मॉलिन्नॉन्ग जैसी जगहें भी हैं, जो अपनी अलग खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं. जो लोग दावकी घूमने आते हैं, वे अक्सर अपनी यात्रा में इन जगहों को भी शामिल कर लेते हैं.

## यात्रा की योजना बनाते वक्त क्या ध्यान रखें
मेघालय में बारिश काफी ज्यादा होती है, इसलिए यहां की यात्रा की तारीख तय करते वक्त मौसम का खास ख्याल रखना जरूरी है. आमतौर पर अक्टूबर से मार्च के बीच का समय इस इलाके में घूमने के लिहाज से सबसे सुविधाजनक माना जाता है. दावकी तक पहुंचने के लिए शिलॉन्ग से सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है. यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय पर्यटन विभाग से ताजा जानकारी और मौसम की स्थिति जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि रास्ते में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

## इसका आप पर असर
अगर आप पहाड़ों और अनोखी जगहों की यात्रा के शौकीन हैं, तो दावकी का यह जीवित पुल आपकी अगली ट्रिप लिस्ट में शामिल हो सकता है.

- **भारत में:** देश भर के यात्री ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जो आम पर्यटन स्थलों से अलग हों. दावकी जैसी जगह प्रकृति और परंपरा दोनों को एक साथ देखने का मौका देती है, जिससे यह ऑफबीट ट्रैवल पसंद करने वालों के लिए एक अच्छा विकल्प बनती है.
- **मेघालय में:** दावकी, शिलॉन्ग, श्नोंगपडेंग और मॉलिन्नॉन्ग जैसी जगहों का पर्यटन बढ़ने से स्थानीय समुदायों को सीधा फायदा मिलता है. होमस्टे, गाइड और छोटे व्यवसायों की मांग बढ़ती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है.
- **यात्रा का समय:** अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए बेहतर माना जाता है, इसलिए इस दौरान बुकिंग और मौसम की जानकारी पहले से जुटा लेना फायदेमंद रहेगा.
- **तैयारी:** मेघालय में बारिश ज्यादा होती है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय पर्यटन विभाग से मौसम और रास्तों की ताजा जानकारी लेना जरूरी है ताकि यात्रा के दौरान परेशानी न हो.

## सवाल-जवाब

### 1. दावकी का लिविंग रूट ब्रिज किस पेड़ की जड़ों से बना है?
यह पुल रबर फिग यानी फ़िकस इलास्टिका के पेड़ों की मजबूत जड़ों से तैयार किया गया है.

### 2. इस तरह का पुल बनकर तैयार होने में कितना समय लगता है?
जड़ों को मजबूत पुल में बदलने में कई दशक लग जाते हैं.

### 3. दावकी लिविंग रूट ब्रिज किस नदी के पास स्थित है?
यह उमंगोट नदी के पास स्थित है, जो अपने साफ पानी के लिए जानी जाती है.

### 4. इस तकनीक को किन समुदायों ने विकसित किया?
मेघालय के खासी और जैंतिया समुदायों ने इस पारंपरिक तकनीक को विकसित किया.

### 5. कुछ लिविंग रूट ब्रिज कितने पुराने बताए जाते हैं?
कुछ पुलों की उम्र 100 साल से भी ज्यादा बताई जाती है.

### 6. दावकी घूमने का सबसे सही समय कौन सा है?
आमतौर पर अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सुविधाजनक माना जाता है.

### 7. दावकी तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
शिलॉन्ग से सड़क मार्ग के जरिए दावकी पहुंचा जा सकता है.

### 8. दावकी के आसपास घूमने की और कौन-कौन सी जगहें हैं?
श्नोंगपडेंग और मॉलिन्नॉन्ग जैसी जगहें दावकी के पास स्थित हैं.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._