# नंदा देवी के विहंगम दृश्य और कीवी के बागान, बागेश्वर के लीती गांव में महक रहा ग्रामीण पर्यटन

> उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित लीती गांव कीवी उत्पादन और होमस्टे के बल पर ग्रामीण पर्यटन का उभरता केंद्र बन रहा है, जहां से नंदा देवी का शानदार नजारा दिखता है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/nnda-devi-ke-vihngama-drishya-aura-kivi-ke-bagana-bageshwar-ke-leeti-ganva-men-mahaka-raha-gramina-paryatana-34171 · **Language:** Hindi
**Tags:** लीती गांव, बागेश्वर पर्यटन, उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन, नामिक ग्लेशियर, कीवी की खेती, पहाड़ी होमस्टे, नंदा देवी

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का सुदूरवर्ती लीती गांव अब अपनी शांत आबोहवा, पारंपरिक जीवनशैली और अनूठे प्राकृतिक सम्मोहन की बदौलत पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनकर उभर रहा है। कपकोट विकासखंड के अंतर्गत आने वाला यह खूबसूरत इलाका समुद्र तल से लगभग 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। महानगरों के शोरगुल और व्यस्त दिनचर्या से दूर शुद्ध पर्वतीय हवा और कुदरती शांति की तलाश में आने वाले मुसाफिरों को यह पहाड़ी बस्ती एक बेहद सुकूनभरा अनुभव प्रदान कर रही है।

## हिमालय की बर्फीली चोटियों और नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार
भौगोलिक दृष्टिकोण से समृद्ध इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां से दिखने वाली हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखलाएं हैं। स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह कोरंगा के अनुसार, गांव से नंदा देवी और नंदा घुंघटी जैसी विश्व प्रसिद्ध बर्फीली चोटियों का भव्य और विहंगम नजारा साफ नजर आता है। भोर के समय जब सूर्य की पहली स्वर्णिम किरणें हिमाच्छादित शिखरों पर पड़ती हैं, तो समूची घाटी का सौंदर्य अत्यंत मनोहारी रूप धारण कर लेता है।

बागेश्वर के जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद लीती गांव को नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। साहसिक पर्यटन और ट्रैकिंग के शौकीन यात्रियों के लिए यह गांव एक रणनीतिक और अहम पड़ाव की भूमिका निभा सकता है। नामिक ग्लेशियर के अभियान पर निकलने वाले ट्रैकर्स यहां विश्राम करने के साथ-साथ आसपास के सुरम्य पर्वतीय परिदृश्यों और शांत वादियों का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।

## कीवी की बागवानी से बदली किसानों की तकदीर
प्राकृतिक परिदृश्य के अलावा लीती गांव की एक और मजबूत पहचान यहां तेजी से पनप रही कीवी की खेती है। इस पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु और विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियां कीवी के उत्पादन के लिए बेहद मुफीद मानी जाती हैं। अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक खेती के साथ-साथ यहां के मेहनती किसान अब व्यावसायिक बागवानी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। नकदी फसल के रूप में कीवी की सफल पैदावार ने स्थानीय किसानों को अतिरिक्त आमदनी के नए और टिकाऊ साधन दिए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

## महिला सशक्तिकरण और 30 होमस्टे की अनूठी पहल
पहाड़ों में पलायन को मात देने और ग्रामीण पर्यटन को व्यावहारिक धरातल पर उतारने के लिए गांव की करीब 30 महिलाओं ने मिलकर होमस्टे संचालन की एक शानदार मिसाल कायम की है। इन होमस्टे के जरिए बाहरी पर्यटकों को किसी भीड़भाड़ वाले व्यवसायिक होटल के बजाय सीधे स्थानीय परिवारों के साथ रहने, पहाड़ी खान-पान का असली स्वाद चखने और लोक-संस्कृति को करीब से महसूस करने का मौका मिलता है।

होमस्टे का प्रबंधन संभाल रहीं संचालक महिलाएं मेहमानों को ठेठ पहाड़ी जीवनशैली, स्थानीय परंपराओं और आत्मीय आतिथ्य सत्कार से रूबरू करा रही हैं। इस सामूहिक प्रयास ने न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के स्वतंत्र अवसर पैदा किए हैं, बल्कि कई परिवारों की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती दी है। बुनियादी सुविधाओं के आधुनिकीकरण, बेहतर सड़क संपर्क और व्यवस्थित प्रचार-प्रसार के जरिए इस गांव को ग्रामीण पर्यटन, कीवी बागवानी और हिमालयी ट्रैकिंग के एक आदर्श मॉडल के रूप में और आगे बढ़ाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन और बागवानी का यह नया मॉडल स्थानीय आर्थिकी और यात्रियों दोनों के लिए बेहद व्यावहारिक अवसर खोल रहा है।

- **भारत भर के पर्यटकों के लिए:** महानगरों के शोर से दूर शांत वातावरण और हिमालयी दृश्यों के बीच ठहरने के लिए एक नया और किफायती गंतव्य उपलब्ध हो गया है। यात्री पारंपरिक होटलों के बजाय सीधे स्थानीय परिवारों के साथ रहकर असली पहाड़ी जीवन और खान-पान का अनुभव कर सकते हैं।
- **उत्तराखंड और बागेश्वर क्षेत्र में:** कीवी की सफल बागवानी और 30 होमस्टे से स्थानीय महिलाओं और किसानों के लिए नियमित आय के नए द्वार खुल गए हैं। यह मॉडल पर्वतीय अंचलों में रोजगार पैदा कर पलायन रोकने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
- **ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए:** नामिक ग्लेशियर की ओर जाने वाले ट्रैकर्स को अब बागेश्वर से 60 किलोमीटर दूर लीती गांव में रुकने और खान-पान की बेहतर ग्रामीण सुविधाएं मिल रही हैं। इससे ग्लेशियर अभियानों के लिए सुरक्षित और सुगम बेस कैंप तैयार करने में मदद मिलेगी।
- **खेती और बागवानी से जुड़े लोगों के लिए:** पारंपरिक खेती के पूरक के तौर पर कीवी जैसी नकदी फसल उगाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। पहाड़ी जलवायु वाले अन्य गांवों के किसान भी इस सफल बागवानी मॉडल को अपना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
लीती गांव में ग्रामीण पर्यटन और कीवी की खेती का तेजी से उभरना प्राकृतिक भौगोलिक अनुकूलता और स्थानीय सामाजिक पहलों का सीधा परिणाम है।

- **अनुकूल भौगोलिक स्थिति:** समुद्र तल से 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसे होने के कारण यहां की ठंडी जलवायु कीवी उत्पादन के लिए प्राकृतिक रूप से पूरी तरह उपयुक्त है। साथ ही यहां से नंदा देवी और नंदा घुंघटी की चोटियों का अबाध दृश्य पर्यटकों को स्वतः आकर्षित करता है।
- **नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार:** बागेश्वर जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव ग्लेशियर रूट का स्वाभाविक पड़ाव बनता है। इसी भौगोलिक अवस्थिति ने इसे ट्रैकिंग के नक्शे पर एक अनिवार्य केंद्र बना दिया।
- **महिला समूहों की संगठित पहल:** गांव की लगभग 30 महिलाओं ने संगठित होकर होमस्टे शुरू करने का सामूहिक फैसला किया। पारंपरिक आतिथ्य और स्थानीय व्यंजनों को व्यावसायिक रूप देने की इसी सोच ने गांव की आर्थिकी को नई गति दी।

## सवाल-जवाब

### 1. लीती गांव उत्तराखंड के किस जिले और ब्लॉक में स्थित है?
लीती गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड में समुद्र तल से लगभग 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

### 2. लीती गांव से कौन-सी प्रमुख हिमालयी चोटियां दिखाई देती हैं?
इस गांव से नंदा देवी और नंदा घुंघटी जैसी प्रसिद्ध बर्फीली पर्वत चोटियों के सुंदर नजारे साफ दिखाई देते हैं।

### 3. बागेश्वर जिला मुख्यालय से लीती गांव की दूरी कितनी है?
बागेश्वर के मुख्य जिला मुख्यालय से लीती गांव की सड़क दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।

### 4. लीती गांव किस प्रसिद्ध ग्लेशियर का प्रवेश द्वार माना जाता है?
लीती गांव को प्रसिद्ध नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार माना जाता है, जो ट्रैकर्स के लिए एक मुख्य पड़ाव है।

### 5. गांव में किस विशेष फल की व्यावसायिक बागवानी हो रही है?
अनुकूल पर्वतीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते गांव में कीवी की सफल व्यावसायिक खेती की जा रही है।

### 6. गांव में होमस्टे की शुरुआत किसने और कितनी संख्या में की है?
ग्रामीण पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए गांव की करीब 30 महिलाओं ने मिलकर होमस्टे शुरू किए हैं।

## प्रेरणा और सबक
लीती गांव की महिलाओं और किसानों की यह पहल साबित करती है कि स्थानीय संसाधनों और सामूहिक इच्छाशक्ति से पहाड़ी क्षेत्रों में भी समृद्धि लाई जा सकती है।

- **सामूहिक प्रयास की शक्ति:** गांव की 30 महिलाओं ने मिलकर साबित किया कि संगठित होकर काम करने से साधारण घरों को भी सफल पर्यटन उद्यम में बदला जा सकता है।
- **पारंपरिक संसाधनों का नवाचार:** पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय कीवी जैसी आधुनिक नकदी फसल को अपनाकर किसानों ने अपनी आजीविका को नई दिशा दी।
- **पलायन के खिलाफ आत्मनिर्भरता:** महानगरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने गांव की संस्कृति, आतिथ्य और सौंदर्य को रोजगार का जरिया बनाना सबसे बड़ा सबक है।

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