# पाली का ऐतिहासिक सरदार समंद बांध: 119 साल पुरानी वो इंजीनियरिंग जिससे अंग्रेज भी रह गए थे हैरान

> पाली जिले में स्थित 119 साल पुराना सरदार समंद बांध पश्चिमी राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है। 1899 में महाराजा सरदार सिंह द्वारा निर्मित यह बांध आज भी खेती और हेरिटेज पर्यटन का मुख्य केंद्र है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/pali-ka-aitihasika-sardar-samand-dam-119-sala-purani-vo-injiniyaringa-jisase-angreja-bhi-raha-gae-the-hairana-57460 · **Language:** Hindi
**Tags:** सरदार समंद बांध, पाली समाचार, राजस्थान पर्यटन, महाराजा सरदार सिंह, मारवाड़ इतिहास, जल संरक्षण

पाली जिले में स्थित सरदार समंद बांध केवल जल भंडारण की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह मारवाड़ रियासत के समृद्ध इतिहास और जल प्रबंधन की दूरगामी सोच का एक अनूठा प्रतीक है। पश्चिमी राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े जलाशय के रूप में प्रसिद्ध यह बांध लगभग 119 वर्षों से अधिक पुराना है। ब्रिटिश हुकूमत के समय जब यह विशाल ढांचा तैयार हुआ था, तो विदेशी अधिकारी भी इसके आकार और जल संचयन की तकनीक को देखकर चकित रह गए थे। वर्तमान समय में यह जलाशय स्थानीय किसानों के लिए जीवनदायिनी की भूमिका निभाने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और हेरिटेज पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

## 1899 से 1906 के बीच हुआ था भव्य निर्माण
इस ऐतिहासिक जल संरचना का निर्माण कार्य मारवाड़ रियासत के दौर में वर्ष 1899 में आरंभ किया गया था। करीब सात वर्षों के लगातार प्रयासों और श्रम के पश्चात वर्ष 1906 में यह बांध पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। मारवाड़ के तत्कालीन महाराजा सरदार सिंह ने अपनी प्रजा को पानी के संकट से उबारने और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए इस विशाल जलाशय का निर्माण कराया था। महाराजा के योगदान के सम्मान में ही इस बांध का नाम 'सरदार समंद' रखा गया। अंग्रेजी शासनकाल के दौरान ब्रिटिश अफसर मारवाड़ की इस जल प्रबंधन क्षमता से इतने ज्यादा प्रभावित हुए थे कि वे इसे 'मारवाड़ का वाटर टैंक' कहकर बुलाते थे।

## 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जलाशय की क्षमता और जल स्रोत
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बांध पाली जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्राकृतिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित होने के कारण यह पूरे आसपास के क्षेत्र के लिए पानी की आपूर्ति का एक मजबूत आधार रहा है।

इस बांध की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक जल स्रोत है। इसमें किसी कृत्रिम नहर का पानी नहीं लाया जाता, बल्कि यह पूरी तरह से बारिश के मौसम में कैचमेंट एरिया से आने वाले जल पर निर्भर करता है। आंकड़ों के अनुसार, सरदार समंद बांध की कुल भराव क्षमता 3,200 एमसीएफटी (MCFT) है। इस जलाशय का अधिकतम जल स्तर 25 फीट तक रहता है। वर्षा ऋतु में बांध के पूरा भरने से आसपास के बड़े क्षेत्र में वाटर टेबल काफी ऊपर आ जाता है।

## कृषकों के लिए जीवनरेखा और समृद्ध वन्यजीव तंत्र
कृषि प्रधान मारवाड़ इलाके के किसानों के लिए यह बांध किसी वरदान से कम साबित नहीं होता है। फसलों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने के अलावा, यह मरुस्थलीय वातावरण में पशुओं के लिए पीने के पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है। बांध के कारण भूजल स्तर ऊंचा बना रहता है, जिससे स्थानीय कुओं और बोरवेल में पूरे साल पानी की कमी नहीं होती।

मानसून के दौरान जब जलाशय में पानी का भराव होता है, तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। शांत माहौल और चारों ओर फैली हरियाली के बीच कई प्रजातियों के देशी और प्रवासी पक्षी यहां अपना ठिकाना बनाते हैं। पक्षी प्रेमियों और बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए यह स्थान बेहद आकर्षक बन जाता है।

## रॉयल हेरिटेज स्टे और सनसेट का मनमोहक दृश्य
सिंचाई और जल संचयन की अपनी उपयोगिता के अलावा, सरदार समंद बांध एक बेहद लोकप्रिय वीकेंड टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है। बांध के समीप पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक पैलेस को एक प्रीमियम हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया गया है। इस हेरिटेज संपत्ति का प्रबंधन और रखरखाव आज भी जोधपुर एवं मारवाड़ के राजघराने के सदस्यों द्वारा कुशलतापूर्वक किया जाता है।

अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित होने के कारण शाम के समय झील का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। ढलते हुए सूरज की किरणें जब पानी की सतह पर पड़ती हैं, तो वह दृश्य पर्यटकों और फोटोग्राफरों का मन मोह लेता है। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग इस शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए यहां आते हैं।

## इसका आप पर असर
पाली का सरदार समंद बांध ऐतिहासिक जल संरक्षण तकनीक और ग्रामीण आजीविका के बेहतर संतुलन को प्रदर्शित करता है।

- **राजस्थान में:** मारवाड़ क्षेत्र के कृषक भूजल स्तर में सुधार और सिंचाई के बेहतर साधनों का लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा बांध का जल भराव आसपास के गांवों में पशुपालन और पेयजल जरूरतों को पूरा करता है।
- **भारत भर में:** देश भर से हेरिटेज और नेचर टूरिज्म में रुचि रखने वाले लोग इस 119 साल पुरानी संरचना को देखने आ सकते हैं। मानसून के बाद का समय यहां प्रवासी पक्षियों को देखने और शांत वातावरण का अनुभव करने के लिए सबसे उपयुक्त रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सरदार समंद बांध का निर्माण मारवाड़ रियासत में पानी के बार-बार उत्पन्न होने वाले संकट और अकाल की परिस्थितियों से निपटने के लिए कराया गया था। 19वीं सदी के अंत में पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय तक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना रियासत की मुख्य प्राथमिकता थी।

- **अकाल से राहत की सोच:** मारवाड़ के मरुस्थलीय इलाके में पानी की भारी किल्लत को समाप्त करने के लिए 1899 में महाराजा सरदार सिंह ने इस बांध की आधारशिला रखी थी।
- **सात वर्षों का लगातार निर्माण:** बांध की 3,200 एमसीएफटी क्षमता और मजबूत पाल बनाने के लिए 1899 से 1906 तक निर्माण कार्य चला। इस लंबी अवधि में प्राकृतिक पहाड़ियों के जल प्रवाह को कुशलतापूर्वक मोड़ा गया।
- **ब्रिटिश काल में सराहना:** बांध की शानदार भराव तकनीक को देखते हुए उस समय के ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे 'मारवाड़ का वाटर टैंक' नाम दिया था।

## सवाल-जवाब

### 1. सरदार समंद बांध किस जिले में स्थित है?
सरदार समंद बांध राजस्थान के पाली जिले में जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

### 2. इस बांध का निर्माण कब और किसने करवाया था?
इस बांध का निर्माण मारवाड़ के महाराजा सरदार सिंह ने 1899 में शुरू कराया था, जो 1906 में पूरा हुआ।

### 3. सरदार समंद बांध की जल भराव क्षमता कितनी है?
इस बांध की कुल भराव क्षमता 3,200 एमसीएफटी (MCFT) है और इसका अधिकतम जल स्तर 25 फीट है।

### 4. अंग्रेजों ने इस बांध को क्या नाम दिया था?
ब्रिटिश अधिकारियों ने इसके विशाल आकार और उपयोगिता को देखकर इसे 'मारवाड़ का वाटर टैंक' कहा था।

### 5. पर्यटकों के लिए इस बांध के पास क्या खास आकर्षण है?
यहां पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक पैलेस अब एक प्रीमियम हेरिटेज होटल है, जहां खूबसूरत सनसेट और पक्षियों की कई प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

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