पीएम नरेंद्र मोदी के ताशकंद दौरे से चर्चा में आया उज्बेकिस्तान का यह शहर, जानिए क्यों है खास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचने के बाद यह ऐतिहासिक शहर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। ताशकंद अपनी खूबसूरत वास्तुकला, प्राचीन संस्कृति और भारत के साथ गहरे ऐतिहासिक रिश्तों के लिए दुनियाभर में पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताशकंद दौरे ने उज्बेकिस्तान की इस ऐतिहासिक राजधानी को एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मध्य एशिया के इस खूबसूरत देश की राजधानी ताशकंद अपनी समृद्ध संस्कृति, शानदार वास्तुकला, रंगीन बाजारों और हरियाली के लिए पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। भारत के साथ इस शहर का एक बेहद गहरा और भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि यहीं पर भारत के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था। आधुनिकता और इतिहास का अद्भुत मेल पेश करने वाला यह शहर चौड़ी सड़कों और प्राचीन स्मारकों का अनूठा संगम है। भारतीय इतिहास के पन्नों में ताशकंद का नाम ताशकंद समझौते के कारण बहुत प्रमुखता से दर्ज है। वर्ष 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के समाप्त होने के बाद, 10 जनवरी 1966 को उस समय के भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस शहर में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके ठीक अगले दिन यानी 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में ही निधन हो गया था। आज भी इस शहर में उनसे जुड़ी कई ऐसी जगहें मौजूद हैं जो देश से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं। ताशकंद में पर्यटकों को सोवियत काल की वास्तुकला और इस्लामी स्थापत्य कला का एक अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है। शहर की रूपरेखा में मध्य एशियाई संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। यहां की विशाल चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित और हरे-भरे पार्क तथा बेहद खूबसूरत मेट्रो स्टेशन किसी भी मुसाफिर का मन मोह लेते हैं। शहर को करीब से जानने के लिए यहां कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं जो पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। अगर कोई पर्यटक ताशकंद की असल स्थानीय संस्कृति और जनजीवन को नजदीक से अनुभव करना चाहता है, तो उसे चोरसू बाजार की सैर जरूर करनी चाहिए। इस पारंपरिक बाजार में रंग-बिरंगे मसालों, सूखे मेवे, ताजे फल, सब्जियां, पारंपरिक मिठाइयां और स्थानीय दस्तकारी का सामान आसानी से मिल जाता है। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल गुंबदनुमा इमारत है जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है। यहां चहलकदमी करते हुए उज्बेकिस्तान के खान-पान और वहां के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की सजीव झलक साफ दिखाई देती है। इतिहास और वास्तुकला के प्रेमियों के लिए हजरती इमाम कॉम्प्लेक्स घूमना एक अनिवार्य अनुभव है। यह परिसर भव्य मस्जिदों, प्राचीन मदरसों और अन्य धार्मिक इमारतों का एक बेहद सुंदर समूह है। यह पवित्र और ऐतिहासिक स्थान ताशकंद की समृद्ध इस्लामी विरासत को गहराई से समझने का शानदार अवसर प्रदान करता है। इस परिसर में रखी गई प्राचीन कुरान की पांडुलिपि इस जगह के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है। ताशकंद की भूमिगत मेट्रो प्रणाली केवल एक साधारण परिवहन का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह शहर की नायाब वास्तुकला का एक जीवंत हिस्सा है। इस मेट्रो नेटवर्क के कई स्टेशन अपनी अनूठी थीम और शानदार डिजाइन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। स्टेशनों के भीतर लगे शानदार झूमर, दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी और सजावटी छतें इन्हें सामान्य परिवहन स्टेशनों से बिल्कुल अलग और दर्शनीय बनाती हैं। शहर के मुख्य पर्यटन स्थलों की सूची में अमीर तैमूर स्क्वायर का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। इस लोकप्रिय चौराहे के चारों ओर फैली हरियाली, ऐतिहासिक स्मारक और शहर की महत्वपूर्ण इमारतें इसकी खूबसूरती को बढ़ाती हैं। शाम ढलने के बाद इस इलाके में टहलना और ताशकंद की आधुनिक जीवनशैली को करीब से देखना अपने आप में एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है। जो लोग इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला में गहरी रुचि रखते हैं, उनके लिए ताशकंद की यात्रा बेहद खास साबित हो सकती है। लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ी अमिट यादें इस शहर को भारतीय पर्यटकों की नजरों में एक विशेष भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व देती हैं। इसके अलावा यहां के जीवंत बाजार, मनमोहक पार्क, समृद्ध संग्रहालय और शानदार इमारतें किसी भी मुसाफिर की यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना सकती हैं। यदि आप मध्य एशिया के किसी खूबसूरत देश की सैर की योजना बना रहे हैं, तो ताशकंद को अपनी ट्रैवल सूची में रखना एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इसका आप पर असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताशकंद दौरे और इस ऐतिहासिक शहर की यात्रा से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होते हैं, जिसका असर पर्यटन और व्यापारिक साझेदारी पर भी पड़ सकता है। • भारत में: इतिहास और विदेश यात्रा में रुचि रखने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए उज्बेकिस्तान वीजा और यात्रा से जुड़े नियमों में अनुकूल बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ताशकंद और अन्य मध्य एशियाई गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानों और पर्यटन पैकेजों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है। • ताशकंद में: उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के स्थानीय पर्यटन बाजार, होटल व्यवसाय और हस्तशिल्प उद्योग को भारतीय पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से आर्थिक लाभ मिल सकता है। शहर के ऐतिहासिक स्मारकों और बाजारों के आसपास बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में सुधार की गति तेज हो सकती है। सवाल-जवाब 1. ताशकंद किस देश की राजधानी है? ताशकंद मध्य एशिया के देश उज्बेकिस्तान की राजधानी है। 2. लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद से क्या संबंध है? भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जनवरी 1966 में ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और 11 जनवरी 1966 को उनका यहीं निधन हुआ था। 3. चोरसू बाजार की क्या विशेषता है? चोरसू बाजार अपनी विशाल गुंबदनुमा इमारत और रंग-बिरंगे मसालों, सूखे मेवे तथा पारंपरिक उत्पादों के लिए जाना जाता है। 4. हजरती इमाम कॉम्प्लेक्स में क्या खास है? इस परिसर में मस्जिदों और मदरसों का सुंदर समूह है तथा यहाँ प्राचीन कुरान की पांडुलिपि सुरक्षित रखी गई है। 5. ताशकंद मेट्रो की क्या खासियत है? ताशकंद मेट्रो के कई स्टेशन अपनी अलग थीम, झूमर, सजावटी छतों और बारीक नक्काशीदार डिजाइन के लिए प्रसिद्ध हैं। https://trendkia.com/travel/piema-narendra-modi-ke-tashkent-daure-se-charcha-men-aya-uzbekistan-ka-yaha-shahara-janie-kyon-hai-khasa-25282 TrendKia — Har trend, sabse pehle.